section 5
गन्ना विकास परिषद्
The Madhya Pradesh Praday avam Kray Niyaman Ganna Adhiniyam 1958५. गन्ना विकास परिषद् — (१) कारखाने के रक्षित क्षेत्र के लिये, अधिसूचना द्वारा, एक गन्ना विकास परिषद् स्थापित की जायगी, जो ऐसे क्षेत्र के नाम से या ऐसे अन्य नाम से जो कि राज्य शासन इस संबंध में अधिसूचित करे, निगम निकाय होगी, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार होगा और जो ऐसे आबंधनों अथवा अर्हताओं के अधीन रहते हुए जो कि इस अधिनियम अथवा किसी भी अन्य अधिनियमिति के अधीन आरोपित की जायं, अपने निगमित नाम से वाद प्रस्तुत करने या उसके विरुद्ध वाद प्रस्तुत किये जाने की, चल तथा अचल दोनों प्रकार की संपत्तियों को प्राप्त करने, धारण करने, उनका प्रबन्ध करने एवं उन्हें अन्तरित करने तथा अनुबन्ध करने की सामर्थ्य से वेष्टित होगी: किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि जहां गन्ना आयुक्त इस प्रकार निर्देशित करे, परिषद् की स्थापना, कारखाने के रक्षित क्षेत्र से भी बड़े या छोटे क्षेत्र के लिये की जा सकेगी। (२) क्षेत्र, जिसके लिये परिषद् की स्थापना की जायगी, परिक्षेत्र (जोन), कहलायेगा। (३) परिषद् में निम्नलिखित होंगे: — (अ) अध्यक्ष, जो कि राज्य शासन की स्वीकृति से गन्ना आयुक्त द्वारा नामांकित किया जायगा; (आ) शक्कर कारखानों का प्रतिनिधित्व करने वाले दो सदस्य, जो गन्ना आयुक्त द्वारा नामांकित किये जायेंगे; (इ) परिक्षेत्र के गन्ना उत्पादकों तथा गन्ना उत्पादक सहकारी समितियों का प्रतिनिधित्व करने वाले दो सदस्य जो गन्ना आयुक्त द्वारा नामांकित किये जायेंगे; (ई) परिक्षेत्र में समाविष्ट किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला या उसका प्रतिनिधित्व करने वाला विधान सभा का एक सदस्य जो राज्य शासन द्वारा नामांकित किया जायगा; तथा (उ) जिला कृषि पदाधिकारी या गन्ना आयुक्त द्वारा नामांकित एक पदाधिकारी जो सदस्य के साथ-साथ सचिव भी होगा। (४) उप-धारा (३) के अधीन नामांकित प्रत्येक व्यक्ति अपना पद उस दिनांक को ग्रहण करेगा जिसको कि उसकी नामांकित करने वाली अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित की जाय और ऐसे व्यक्ति की पदावधि ऐसी अधिसूचना के दिनांक से तीन वर्ष होगी। (५) गन्ना आयुक्त, यदि उसको यह सन्तोष हो जाय कि ऐसा करना आवश्यक है, राज्य शासन के अनुमोदन से परिषद् को उसकी अवधि समाप्त होने के पूर्व भंग कर सकेगा या उसके किसी भी सदस्य को हटा सकेगा, जिसके कि कारण लेखबद्ध किये जायेंगे : किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि इस उप-धारा के अधीन कोई भी कार्यवाही तब तक नहीं की जायगी जब तक कि परिषद् या सदस्य को, जैसी भी कि दशा हो, उस विषय में सुने जाने का समुचित अवसर प्रदान न कर दिया गया हो। (६) जब कि परिषद् भंग कर दी जाय, तो निम्नलिखित परिणाम होंगे : (अ) अध्यक्ष सहित समस्त सदस्य आज्ञा में निर्दिष्ट किये जाने वाले दिनांक को अपने-अपने पद रिक्त कर देंगे परन्तु इससे पुनर्नामांकन के लिये उनकी पात्रता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा; (आ) उप-धारा (२) के उपबन्धों के अनुसार गन्ना आयुक्त द्वारा परिषद् की पुनर्रचना की जायगी; और (इ) परिषद् के कर्तव्य, शक्तियां तथा कार्य, उसकी पुनर्रचना होने तक, गन्ना आयुक्त द्वारा या ऐसे अन्य पदाधिकारी द्वारा जिसे कि वह निर्देशित करे, किये जायेंगे, प्रयोग में लाई जायेंगी तथा संपादित किये जायेंगे।
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