Bare Act
The Madhya Pradesh Praday avam Kray Niyaman Ganna Adhiniyam 1958
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ
(१) यह अधिनियम मध्यप्रदेश गन्ना (प्रदाय एवं क्रय नियमन) अधिनियम, १९५८ कहलायेगा । (२) इसका विस्तार-क्षेत्र संपूर्ण मध्यप्रदेश होगा । (३) यह ऐसे दिनांक से प्रभावशील होगा, जिसे राज्य शासन, अधिसूचना द्वारा नियत करे ।
2. परिभाषाएं
इस अधिनियम में, जब तक कि कोई बात विषय या प्रसंग के विपरीत न हो-- (अ) "नियत किया गया क्षेत्र" से तात्पर्य ऐसे क्षेत्र से है जो धारा १६ के अधीन किसी कारखाने के लिये नियत किया गया हो; (आ) "बोर्ड" से तात्पर्य धारा ३ के अधीन स्थापित गन्ना बोर्ड (शुगरकेन बोर्ड) से है; (इ) "गन्ना" से तात्पर्य कारखाने में उपयोग के लिये अभिप्रेत गन्ने से है; (ई) "गन्ना आयुक्त" से तात्पर्य ऐसे पदाधिकारी से है, जो धारा ९ के अधीन गन्ना आयुक्त नियुक्त किया गया हो; और उसमें धारा १० के अधीन नियुक्त अतिरिक्त गन्ना आयुक्त सम्मिलित है; (उ) "गन्ना उत्पादक" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो या तो स्वयं या अपने परिवार के सदस्यों द्वारा या मजदूरों द्वारा गन्ने की खेती करता हो और जो गन्ना उत्पादक सहकारी समिति का सदस्य न हो; (ऊ) "गन्ना उत्पादक सहकारी समिति" से तात्पर्य मध्यप्रदेश के किसी भाग में प्रभावशील सहकारी समितियों से संबंधित किसी भी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत ऐसी समिति से है, जिसके उद्देश्यों में से एक उद्देश्य उसके सदस्यों द्वारा उपजाये गये गन्ने का विक्रय करना हो और उसमें ऐसी विधि के अधीन रजिस्ट्रीकृत, ऐसी समितियों का संघ (फेडरेशन) सम्मिलित है; (ए) "कलेक्टर" में कोई भी ऐसा व्यक्ति सम्मिलित है, जिसे राज्य शासन, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के अधीन कलेक्टर की शक्तियों तथा कर्तव्यों का प्रयोग एवं संपादन करने के लिये नियुक्त करे; (ऐ) "परिषद्" से तात्पर्य धारा ५ के अधीन स्थापित गन्ना विकास परिषद् से है; (ओ) "गन्ना पेरने के मौसम" से तात्पर्य किसी भी वर्ष में एक अक्टूबर को प्रारम्भ होने वाले तथा आगामी ३० जून को समाप्त होने वाले काल से है;
3. गन्ना परिषद्
दूसरा अध्याय प्रशासन-तन्त्र
३. गन्ना परिषद् — (१) राज्य शासन, अधिसूचना द्वारा मध्यप्रदेश के लिये गन्ना परिषद् स्थापित करेगा। (२) परिषद् में निम्नलिखित होंगे : — (अ) कृषि मंत्री; (आ) उद्योग मंत्री; (इ) राज्य शासन द्वारा नियुक्त नौ सदस्य, जिनमें से तीन शक्कर कारखानों के प्रतिनिधि और तीन गन्ना उत्पादकों तथा गन्ना उत्पादक सहकारी समितियों के प्रतिनिधि होंगे और शेष ऐसे व्यक्ति होंगे, जिन्हें गन्ने के संबंध में प्रयोगिक (टेकनिकल) ज्ञान हो या गन्ना तथा उससे निर्मित वस्तुओं के विकास में अन्यथा रुचि रखते हों; . (ई) गन्ना आयुक्त; तथा (उ) राज्य शासन के कृषि सचिव या ऐसे अन्य पदाधिकारी, जो कि राज्य शासन द्वारा नामांकित किये जायें। (३) कृषि मंत्री परिषद् का अध्यक्ष होगा और उप-धारा (२) के चरण (उ) के अधीन नामांकित पदाधिकारी परिषद् का सचिव होगा। (४) उप-धारा (२) के चरण (इ) के अधीन नियुक्त सदस्य की पदावधि राजपत्र में ऐसे सदस्य के नाम के प्रकाशन के दिनांक से तीन वर्ष होगी। (५) अध्यक्ष, यदि उपस्थित हो, परिषद् के समस्त सम्मेलनों की अध्यक्षता करेगा और उसकी अनुपस्थिति में उद्योग मंत्री अध्यक्षता करेगा। यदि अध्यक्ष और उद्योग मंत्री दोनों ही परिषद् के किसी सम्मेलन में अनुपस्थित हों तो उपस्थित सदस्य सम्मेलन के लिये अध्यक्ष का निर्वाचन करेंगे।
4. परिषद् के कार्य
४. परिषद् के कार्य — परिषद् राज्य शासन को निम्नलिखित विषयों पर परामर्श देगा, अर्थात् — (अ) शक्कर कारखानों के लिये गन्ने के प्रदाय तथा क्रय के नियमन से संबंधित विषय; (आ) गन्ने की किस्में, जो शक्कर कारखानों में उपयोग के लिये उपयुक्त या अनुपयुक्त हों; (इ) कारखानों के अभिधारकों अथवा प्रबंधकों, गन्ना उत्पादकों, गन्ना उत्पादक सहकारी समितियों, गन्ना विकास परिषद् तथा क्रय-अभिकर्ताओं के बीच स्वस्थ संबंध बनाये रखना; और (ई) ऐसे अन्य विषय जो नियत किये जायें।
5. गन्ना विकास परिषद्
५. गन्ना विकास परिषद् — (१) कारखाने के रक्षित क्षेत्र के लिये, अधिसूचना द्वारा, एक गन्ना विकास परिषद् स्थापित की जायगी, जो ऐसे क्षेत्र के नाम से या ऐसे अन्य नाम से जो कि राज्य शासन इस संबंध में अधिसूचित करे, निगम निकाय होगी, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार होगा और जो ऐसे आबंधनों अथवा अर्हताओं के अधीन रहते हुए जो कि इस अधिनियम अथवा किसी भी अन्य अधिनियमिति के अधीन आरोपित की जायं, अपने निगमित नाम से वाद प्रस्तुत करने या उसके विरुद्ध वाद प्रस्तुत किये जाने की, चल तथा अचल दोनों प्रकार की संपत्तियों को प्राप्त करने, धारण करने, उनका प्रबन्ध करने एवं उन्हें अन्तरित करने तथा अनुबन्ध करने की सामर्थ्य से वेष्टित होगी: किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि जहां गन्ना आयुक्त इस प्रकार निर्देशित करे, परिषद् की स्थापना, कारखाने के रक्षित क्षेत्र से भी बड़े या छोटे क्षेत्र के लिये की जा सकेगी। (२) क्षेत्र, जिसके लिये परिषद् की स्थापना की जायगी, परिक्षेत्र (जोन), कहलायेगा। (३) परिषद् में निम्नलिखित होंगे: — (अ) अध्यक्ष, जो कि राज्य शासन की स्वीकृति से गन्ना आयुक्त द्वारा नामांकित किया जायगा; (आ) शक्कर कारखानों का प्रतिनिधित्व करने वाले दो सदस्य, जो गन्ना आयुक्त द्वारा नामांकित किये जायेंगे; (इ) परिक्षेत्र के गन्ना उत्पादकों तथा गन्ना उत्पादक सहकारी समितियों का प्रतिनिधित्व करने वाले दो सदस्य जो गन्ना आयुक्त द्वारा नामांकित किये जायेंगे; (ई) परिक्षेत्र में समाविष्ट किसी भी क्षेत्र में निवास करने वाला या उसका प्रतिनिधित्व करने वाला विधान सभा का एक सदस्य जो राज्य शासन द्वारा नामांकित किया जायगा; तथा (उ) जिला कृषि पदाधिकारी या गन्ना आयुक्त द्वारा नामांकित एक पदाधिकारी जो सदस्य के साथ-साथ सचिव भी होगा। (४) उप-धारा (३) के अधीन नामांकित प्रत्येक व्यक्ति अपना पद उस दिनांक को ग्रहण करेगा जिसको कि उसकी नामांकित करने वाली अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित की जाय और ऐसे व्यक्ति की पदावधि ऐसी अधिसूचना के दिनांक से तीन वर्ष होगी। (५) गन्ना आयुक्त, यदि उसको यह सन्तोष हो जाय कि ऐसा करना आवश्यक है, राज्य शासन के अनुमोदन से परिषद् को उसकी अवधि समाप्त होने के पूर्व भंग कर सकेगा या उसके किसी भी सदस्य को हटा सकेगा, जिसके कि कारण लेखबद्ध किये जायेंगे : किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि इस उप-धारा के अधीन कोई भी कार्यवाही तब तक नहीं की जायगी जब तक कि परिषद् या सदस्य को, जैसी भी कि दशा हो, उस विषय में सुने जाने का समुचित अवसर प्रदान न कर दिया गया हो। (६) जब कि परिषद् भंग कर दी जाय, तो निम्नलिखित परिणाम होंगे : (अ) अध्यक्ष सहित समस्त सदस्य आज्ञा में निर्दिष्ट किये जाने वाले दिनांक को अपने-अपने पद रिक्त कर देंगे परन्तु इससे पुनर्नामांकन के लिये उनकी पात्रता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा; (आ) उप-धारा (२) के उपबन्धों के अनुसार गन्ना आयुक्त द्वारा परिषद् की पुनर्रचना की जायगी; और (इ) परिषद् के कर्तव्य, शक्तियां तथा कार्य, उसकी पुनर्रचना होने तक, गन्ना आयुक्त द्वारा या ऐसे अन्य पदाधिकारी द्वारा जिसे कि वह निर्देशित करे, किये जायेंगे, प्रयोग में लाई जायेंगी तथा संपादित किये जायेंगे।
6. परिषद् के कार्य
६. परिषद् के कार्य — (१) परिषद् के कार्य निम्नलिखित होंगे : — (अ) परिक्षेत्र के लिये विकास कार्यक्रम पर विचार करना तथा उसे अनुमोदित करना; (आ) विकास योजना के समस्त आवश्यक अंगों जैसे गन्ने की किस्में, गन्ने का बीज, बोआई कार्यक्रम, उर्वरक तथा खाद सहित विकास योजना के निष्पादन के लिये उपाय तथा साधन निकालना; (इ) परिक्षेत्र में सिंचाई तथा अन्य कृषि संबंधी सुविधाओं के विकास का कार्य हाथ में लेना; (ई) रोगों तथा विनाशी कीटों की रोक तथा नियंत्रण के लिये आवश्यक उपाय ग्रहण करना और भूमि विस्तार (साइल एक्सटेंशन) संबंधी कार्य में समस्त संभव सहायता प्रदान करना; (उ) गन्ने के उत्पादन से संबंधित विषयों में खेतीहरों को प्रौद्योगिक (टेकनिकल) प्रशिक्षण देना; (ऊ) ऐसे प्रतिबन्धों के अधीन रहते हुए, जैसे कि नियत किये जायें, विकास योजना के निष्पादन के लिये उसके अधिकार में रखी गई निधियों का प्रबन्ध करना; और (ए) परिक्षेत्र के सामान्य विकास से संबंधित तथा उसके लिये सहायक अन्य नियत कार्यों का संपादन करना। (२) राज्य शासन किसी भी समय गन्ना आयुक्त को दो या अधिक परिषदों का संयुक्त सम्मेलन बुलाने के लिये निर्देश कर सकेगा। प्रत्येक ऐसे सम्मेलन की अध्यक्षता ऐसे व्यक्ति द्वारा की जायगी जो कि राज्य शासन द्वारा उस संबंध में नामांकित किया जाय।
7. आकस्मिक रिक्ति
७. आकस्मिक रिक्ति — परिषद् में आकस्मिक रिक्त स्थान की पूर्ति धारा ५ की उप-धारा (३) में वर्णित रीति में की जायगी और कोई व्यक्ति जो आकस्मिक रिक्त स्थान की पूर्ति के लिये नामांकित किया गया हो अपने पूर्ववर्ती की असमाप्त अवधि तक पद धारण करेगा।
8. परिषद् निधि
८. परिषद् निधि — (१) इस अधिनियम के अधीन अपने कर्तव्यों के पालन तथा अपने कार्यों के संपादन के सम्बन्ध में व्ययों की पूर्ति करने के लिये परिषद् के अधिकार में एक निधि होगी। (२) परिषद् की निधि में निम्नलिखित सम्मिलित होंगे: -- (अ) भारतीय केन्द्रीय गन्ना समिति (इंडियन सेन्ट्रल शुगरकेन कमेटी) द्वारा दिये गये अनुदान, यदि कोई हों; (आ) राज्य शासन द्वारा दिये गये अनुदान, यदि कोई हों; (इ) धारा २१ के अधीन कमीशन के रूप में परिषद् द्वारा प्राप्त धनराशियां; और (ई) कोई भी अन्य धनराशियां जो राज्य शासन की व्यापक या विशेष आज्ञाओं के अधीन उसमें जमा की जाय।
9. गन्ना आयुक्त
९. गन्ना आयुक्त — राज्य शासन, इस अधिनियम के आशयों के लिये, गन्ना आयुक्त नियुक्त कर सकेगा, जो ऐसे कर्तव्यों का संपादन करेगा तथा ऐसी शक्तियों को प्रयोग में लावेगा जो कि इस अधिनियम के द्वारा या उसके अधीन उस पर आरोपित किये जायें, या उसको प्रदान की जायं।
10. अतिरिक्त गन्ना आयुक्त
१०. अतिरिक्त गन्ना आयुक्त — (१) राज्य शासन, ऐसे शासकीय पदाधिकारी को, जिसे वह उचित समझे, अतिरिक्त गन्ना आयुक्त नियुक्त या पदांकित कर सकेगा। (२) अतिरिक्त गन्ना आयुक्त, गन्ना आयुक्त की ऐसी शक्तियों को प्रयोग में लावेगा तथा उसके ऐसे कर्तव्यों का निष्पादन करेगा, जो कि राज्य शासन निर्देशित करे।
11. निरीक्षक
११. निरीक्षक — (१) राज्य शासन इस अधिनियम के आशयों के लिये, ऐसे स्थानीय सीमाओं के भीतर, जो कि उसके लिये नियत की जायं, किसी भी व्यक्ति को निरीक्षक नियुक्त कर सकेगा या शासन के ऐसे पदाधिकारी को, जिसे वह उचित समझे निरीक्षक होने के लिये पदांकित कर सकेगा। (२) निरीक्षक ऐसे कर्तव्यों का संपादन करेगा तथा ऐसी शक्तियों को प्रयोग में लावेगा, जो कि इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसे प्रदान की जायं या उस पर आरोपित किये जायं।
12. आवश्यकताओं का अनुमान-पत्र
तीसरा अध्याय गन्ने-का प्रदाय तथा क्रय
१२. आवश्यकताओं का अनुमान-पत्र — (१) गन्ना आयुक्त धारा १५, १६ या १७ के आशयों के लिये, आज्ञा द्वारा, अभिधारक को यह आदेशित कर सकेगा कि वह आज्ञा में निर्दिष्ट रीति में तथा दिनांक तक गन्ना आयुक्त को, गन्ने के उस परिमाण का अनुमान-पत्र प्रस्तुत करें, जिसकी कि गन्ना पेरने के ऐसे मौसम में, जो कि आज्ञा में निर्दिष्ट किया जाय, कारखाने के लिये आवश्यकता होगी। (२) गन्ना आयुक्त, ऐसे प्रत्येक अनुमान-पत्र का परीक्षण करेगा और उसे ऐसे परिवर्तनों सहित यदि कोई हों, प्रकाशित करेगा, जिन्हें कि वह करे। (३) उप-धारा (२) के अधीन अनुमान-पत्र ऐसे प्राधिकारी द्वारा पुनरीक्षित किया जा सकेगा, जो कि नियत किया जाय।
13. गन्ना उत्पादकों तथा गन्ना उत्पादक सहकारी समिति या समितियों का रजिस्टर
१३. गन्ना उत्पादकों तथा गन्ना उत्पादक सहकारी समिति या समितियों का रजिस्टर — (१) कारखाने का अभिधारक ऐसे समस्त गन्ना उत्पादकों तथा गन्ना उत्पादक सहकारी समितियों का, जो उस कारखाने को गन्ने का विक्रय करेंगे, एक रजिस्टर नियत रूप में रखेगा। (२) राज्य शासन, ऐसे रजिस्टर के निरीक्षण के लिये तथा उसमें की गई किसी भी प्रविष्टि को शुद्ध करने की प्रक्रिया के लिये एवं ऐसे रजिस्टर से किसी भी प्रविष्टि की प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिये नियम बना सकेगा और ऐसे नियम बनाते समय राज्य शासन शुद्धियों तथा प्रतिलिपियों के प्रदाय के लिये शुल्क के भुगतान के हेतु उपबन्ध भी कर सकेगा।
14. सर्वेक्षण आदि की शक्ति
१४. सर्वेक्षण आदि की शक्ति— (१) राज्य शासन, धारा १५, १६ या १७ के आशयों के लिये आज्ञा द्वारा निम्नलिखित के लिये उपबन्ध कर सकेगा :--
(अ) किसी कारखाने को गन्ने के प्रदाय के लिये रक्षित किये जाने या नियत किये जाने के लिये प्रस्तावित क्षेत्र का किया जाने वाला सर्वेक्षण तथा ऐसे सर्वेक्षण के परिव्यय की कारखाने के अधिधारक से वसूली ;
(आ) ऐसे सर्वेक्षण के आशयों के लिये पदाधिकारी की नियुक्ति उसके कर्तव्य तथा शक्तियां ;
(इ) प्रक्रिया, जिसके अनुसार सर्वेक्षण किया जायगा ;
(ई) उस क्षेत्र में भूमि का स्वामित्व या अधिवास रखने वाले व्यक्तियों द्वारा चरण (आ) के अनुसार में नियुक्त पदाधिकारी को दी जाने वाली सहायता तथा सुविधाएं ; और
(उ) ऐसे आनुषंगिक तथा परिणामानुवर्ती विषय, जो इस आशय के लिये आवश्यक या वांछनीय प्रतीत हों ।
(२) उप-धारा (१) के चरण (अ) के अनुसरण में कारखाने के अधिधारक से प्राप्य कोई भी धनराशि, ऐसे अधिधारक से भूमि-राजस्व के अवशेष के रूप में वसूली योग्य होगी ।
15. रक्षित क्षेत्र की घोषणा
१५. रक्षित क्षेत्र की घोषणा—धारा १९ की उप-धारा (२) के चरण (ई) के अधीन किसी आज्ञा पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, गन्ना आयुक्त, कारखाने के लिये रक्षित किये जाने वाले किसी क्षेत्र के, कारखाने के अधिधारक तथा गन्ना उत्पादक सहकारी समिति से, यदि कोई हो, नियत रीति में परामर्श करने के पश्चात्, ऐसे कारखाने के लिये ऐसा क्षेत्र रक्षित कर सकेगा और तदुपरान्त उस कारखाने का अधिधारक धारा २२ के उपबन्धों के विरुद्ध न जाते हुए ऐसे क्षेत्र में उपजाये गये समस्त गन्ने का क्रय करने के लिये दायी होगा जो कारखाने को बेचने के लिये प्रस्तुत किया जाय ।
16. नियत किये गये क्षेत्र की घोषणा
१६. नियत किये गये क्षेत्र की घोषणा धारा १९ की उप-धारा (२) के चरण (ई) के अधीन किसी आज्ञा पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, गन्ना आयुक्त, नियत किये जाने वाले किसी क्षेत्र के कारखाने के अधिधारक तथा गन्ना उत्पादक सहकारी समिति से, यदि कोई हो, नियत रीति में परामर्श करने के पश्चात्, गन्ना पेरने के किसी भी मौसम में धारा १९ के उपबन्धों के अनुसार कारखाने को गन्ने के प्रदाय के आशय के लिये ऐसा क्षेत्र नियत कर सकेगा; और तदुपरान्त कारखाने का अधिधारक धारा २२ के उपबन्धों के विरुद्ध न जाते हुए, उस क्षेत्र में उपजाये गये और उस कारखाने को विक्रय्यर्थ प्रस्तुत किये गये गन्ने का ऐसे परिमाण में क्रय करने के लिये दायी होगा जो कि गन्ना आयुक्त द्वारा निरूपित किया जाय ।
17. रक्षित या नियत किये गये क्षेत्र में परिवर्तन
१७. रक्षित या नियत किये गये क्षेत्र में परिवर्तन—गन्ना आयुक्त, किसी भी समय, यदि वह ऐसा करना उचित समझे तो किसी क्षेत्र को रक्षित करने या नियत करने की कोई भी आज्ञा निरस्त कर सकेगा या इस प्रकार रक्षित या नियत किये गये क्षेत्र की सीमाओं में परिवर्तन कर सकेगा ।
18. अपील
१८. अपील—धारा १५, १६ या १७ के अधीन दी गई गन्ना आयुक्त की आज्ञा के विरुद्ध अपील, आज्ञा के दिनांक से तीस दिन व्यतीत होने के पूर्व, राज्य शासन को की जा सकेगी :
किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि राज्य शासन, पर्याप्त कारणवश, ऐसे काल की समाप्ति के पश्चात् भी कोई अपील ग्रहण कर सकेगा ।
19. रक्षित तथा नियत किये गये क्षेत्रों में गन्ने के क्रय तथा प्रदाय का नियमन
१९. रक्षित तथा नियत किये गये क्षेत्रों में गन्ने के क्रय तथा प्रदाय का नियमन—(१) राज्य शासन, प्रदाय को बनाये रखने के लिये, आज्ञा द्वारा--
(अ) किसी रक्षित या नियत किये गये क्षेत्र में गन्ने के वितरण, विक्रय या क्रय का ; तथा
(आ) किसी रक्षित या नियत किये गये क्षेत्र के अतिरिक्त किसी भी अन्य क्षेत्र में गन्ने के क्रय का ;
नियमन कर सकेगा ।
(२) पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसी आज्ञा में निम्नलिखित के लिये उपबन्ध हो सकेगा :---
(अ) गन्ने का परिमाण, जो ऐसे क्षेत्र के प्रत्येक गन्ना उत्पादक या गन्ना उत्पादक सहकारी समिति द्वारा उस कारखाने को प्रदाय किया जाना हो जिसके लिये क्षेत्र इस प्रकार रक्षित या नियत किया गया हो;
(आ) वह रीति जिसमें रक्षित क्षेत्र या नियत क्षेत्र में उपजाया गया गन्ना उस कारखाने द्वारा, जिसके लिये क्षेत्र इस प्रकार रक्षित या नियत किया गया हो, क्रय किया जायगा और वह परिस्थिति जिसमें गन्ना उत्पादक द्वारा उपजाया गया गन्ना, गन्ना उत्पादक सहकारी समिति के द्वारा ही क्रय किया जायगा, अन्यथा नहीं;
(इ) विक्रय्यर्थ प्रस्तुत किये गये गन्ने के क्रय के हेतु उस कारखाने के, जिसके लिये क्षेत्र रक्षित या नियत किया गया हो, अधिधारक द्वारा निष्पादित किये जाने वाले करार का रूप एवं निबंधन् तथा प्रतिबन्ध;
(ई) वे परिस्थितियां, जिनके अधीन--
(एक) किसी क्रय-अभिकर्ता द्वारा या उस कारखाने के अतिरिक्त जिसके लिये क्षेत्र रक्षित या नियत किया गया हो, अन्य किसी व्यक्ति द्वारा उस गन्ने के क्रय के लिये जो कि रक्षित या नियत किये गये क्षेत्र में उपजाया गया हो;
(दो) किसी अन्य व्यक्ति को या उस कारखाने के अतिरिक्त, जिसके लिये क्षेत्र रक्षित या नियत किया गया हो, अन्य किसी कारखाने को रक्षित या नियत किये गये क्षेत्र में उपजाये गये गन्ने के विक्रय के लिये;
अनुज्ञा दी जा सकेगी;
(उ) ऐसे आनुषंगिक तथा परिणामानुवर्ती विषय, जो कि इस आशय के लिये आवश्यक अथवा वांछनीय प्रतीत हों ।
20. गन्ने के मूल्य का भुगतान
२०. गन्ने के मूल्य का भुगतान—(१) अधिधारक गन्ने के मूल्य के भुगतान के लिये कलेक्टर के संतोष योग्य उपयुक्त व्यवस्था करेगा ।
(२) गन्ने की सुपुर्दगी पर अधिधारक, इस प्रकार प्रदाय किये गये गन्ने के मूल्य का, उससे संबंधित समस्त अन्य धनराशियों सहित, तत्काल भुगतान करने का दायी होगा और जहां कि प्रदाय क्रय-अभिकर्ता के द्वारा किया गया हो, अधिधारक के अतिरिक्त क्रय-अभिकर्ता भी उसी प्रकार दायी होगा ।
(३) जब कि उप-धारा (२) के अधीन दायी व्यक्ति, ऐसे काल तक, जो सुपुर्दगी के दिनांक से १४ दिन से अधिक हो, मूल्य का भुगतान न करे तो वह सुपुर्दगी के उक्त दिनांक से, भुगतान के दिनांक तक ७ ½ प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से ब्याज का भी भुगतान करेगा किन्तु गन्ना आयुक्त, किसी प्रकरण में, राज्य शासन के अनुमोदन से, यह निर्देशित कर सकेगा कि किसी ब्याज का भुगतान नहीं किया जाये या ऐसी कम दर से भुगतान किया जाय, जैसा कि वह निश्चित करे ।
(४) गन्ना आयुक्त, अधिधारक से प्राप्य गन्ने के मूल्य के हिसाब में अवशेषों की धन-राशि तथा ब्याज, यदि कोई हो, निर्दिष्ट करते हुए अपने हस्ताक्षरों के अधीन एक प्रमाण-पत्र कलेक्टर को प्रेषित करेगा और कलेक्टर, ऐसे प्रमाण-पत्र के प्राप्त होने पर, ऐसे अधिधारक से उसमें निर्दिष्ट धनराशि, वसूली के दिनांक तक और ब्याज सहित, इस प्रकार वसूल करने की कार्यवाही करेगा मानो कि वह भूमि-राजस्व का अवशेष हो ।
21. गन्ने के क्रय पर कमीशन
२१. गन्ने के क्रय पर कमीशन—(१) अधिधारक कारखाने द्वारा क्रय किये गये गन्ने के प्रति एक मन के लिये निम्नलिखित कमीशन देगा :---
(अ) जहां क्रय गन्ना उत्पादक सहकारी समिति के द्वारा किया जाय, कमीशन गन्ना उत्पादक सहकारी समिति तथा परिषद् को ऐसे अनुपात में देय होगा, जैसा कि राज्य शासन घोषित करे; तथा
(आ) जहां क्रय सीधे गन्ना उत्पादक से किया जाय, कमीशन परिषद् को देय होगा ।
(२) उप-धारा (१) के चरण (अ) तथा (आ) के अधीन देय कमीशन ऐसी दरों से होगा जोकि नियत की जाय; तथापि प्रतिबन्ध यह है कि चरण (आ) के अधीन निश्चित दर उस दर से अधिक नहीं होगी, जिसके अनुसार कमीशन चरण (अ) के अधीन परिषद् को देय हो ।
(३) भुगतान, ब्याज तथा वसूली जिसमें भूमि-राजस्व के अवशेषों के रूप में वसूली सम्मिलित है, से संबंधित उपबन्ध जोकि गन्ने के मूल्य से लागू होते हैं, आवश्यक परिवर्तनों सहित, उप-धारा (१) के अधीन कमीशन के भुगतान तथा वसूली से लागू होंगे ।
22. गन्ने की किस्मों को कारखानों में उपयोग के लिये अनुपयुक्त घोषित करने की शक्ति
२२. गन्ने की किस्मों को कारखानों में उपयोग के लिये अनुपयुक्त घोषित करने की शक्ति--- (१) राज्य शासन, अधिसूचना द्वारा यह घोषित कर सकेगा कि---
(अ) ऐसी अधिसूचना में निर्दिष्ट किसी भी क्षेत्र में उपजाया गया किसी भी किस्म का गन्ना, उक्त क्षेत्र में स्थित कारखाने में उपयोग के लिये अनुपयुक्त है;
(आ) ऐसी अधिसूचना में निर्दिष्ट किसी भी क्षेत्र में उपजाया गया किसी भी किस्म का मूलांकुरित (राटून) गन्ना उक्त क्षेत्र में स्थित कारखाने में उपयोग के लिये अनुपयुक्त है;
(इ) किसी भी किस्म का बीज का गन्ना ऐसी अधिसूचना में निर्दिष्ट क्षेत्र में खेतीहरों को वितरित किये जाने के लिए अनुपयुक्त है; और
(२) उप-धारा (१) के अधीन अधिसूचना ऐसे दिनांक को जारी की जायगी, जो गन्ना पेरने के ऐसे मौसम से, जिसके कि संबंध में ऐसी अधिसूचना प्रभावशील होनी हो, ठीक पूर्ववर्ती वर्ष के ३० नवम्बर के पश्चात् का न हो ।
(३) जब कि किसी भी किस्म का बीज का गन्ना उस क्षेत्र में खेतीहरों को वितरित किये जाने के लिये उप-धारा (१) के अधीन अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया हो, तो अधिधारक या उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई भी अन्य व्यक्ति अथवा गन्ना उत्पादक सहकारी समिति ऐसी किस्म या किस्मों का बीज का गन्ना किसी भी क्षेत्र में गन्ना उत्पादकों या गन्ना उत्पादक सहकारी समिति के सदस्यों द्वारा उपयोग में आये जाने के हेतु किसी भी व्यक्ति को वितरित नहीं करेगी ।
(४) जब कि किसी भी किस्म का गन्ना या मूलांकुरित (राटून) गन्ना किसी कारखाने में उपयोग के लिये उप-धारा (१) के अधीन अनुपयुक्त घोषित कर दिया गया हो तो अधिधारक या उसकी ओर से कार्य करने वाला कोई भी अन्य व्यक्ति या गन्ना उत्पादक या गन्ना उत्पादक सहकारी समिति किसी भी किस्म का गन्ना नहीं रोपेगी अथवा किसी भी ऐसी किस्म का मूलांकुरित (राटून) गन्ना नहीं रखेगी ।
23. गन्ने पर उप-कर की वसूली
२३. गन्ने पर उप-कर की वसूली—(१) राज्य शासन, अधिसूचना द्वारा, ऐसी अधिसूचना में निर्दिष्ट क्षेत्र में गन्ने के उसमें उपभोग, उपयोग या विक्रय के लिये प्रवेश पर ऐसा उप-कर (सेन्स) आरोपित कर सकेगा जो २५ पैस प्रति मन से अधिक न हो :
किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि इस उप-धारा के अधीन कोई उप-कर कारखाने में उपभोग या उपयोग के लिये या उसको विक्रय के हेतु किसी गन्ने के किसी क्षेत्र में प्रवेश पर तब तक वसूली योग्य नहीं होगा, जब तक कि ऐसे गन्ने का परिमाण गन्ना पेरने के किसी मौसम में दस लाख मन से अधिक न हो :
यह प्रतिबन्ध और है कि राज्य शासन, अधिसूचना द्वारा, ऐसी अधिसूचना में निर्दिष्ट किसी भी आशय के लिये कारखाने में उपयोग में लाये गये या लाये जाने के हेतु अभिप्रेत गन्ने के सम्बन्ध में ऐसे उप-कर की पूर्णतः या अंशतः छूट दे सकेगा ।
(२) राज्य शासन, उप-कर निर्धारित तथा संग्रह करने के लिये सशक्त अधिकारी का तथा उस रीति का, जिसमें उप-कर संगृहीत किया जायगा, निर्दिष्ट करते हुए नियम बनायेगा ।
(३) गन्ने के विक्रय के लिये किसी भी अनुबन्ध या करार के निबंधनों के होते हुए भी, चाहे वह इस धारा के अधीन उप-कर के आरोपण के पूर्व किया गया हो या पश्चात्, गन्ने का क्रेता ऐसे गन्ने के अनुबंधित मूल्य के अतिरिक्त तथा उसके भाग के रूप में उप-कर की धनराशि का भुगतान करने के लिये दायी होगा ।
(४) जब कि कोई व्यक्ति उप-कर का भुगतान करने में चूक करे तो उप-कर संग्रह करने के लिये सशक्त अधिकारी यह निर्देशित कर सकेगा कि अवशेषों की धनराशि के अतिरिक्त ऐसी धनराशि, जो उसके १० प्रतिशत से अधिक न हो, उप-कर का भुगतान करने के लिये दायी व्यक्ति से शास्ति के रूप में वसूल की जायगी ।
(५) उप-कर संग्रह करने के लिये सशक्त अधिकारी अपने हस्ताक्षर के अधीन एक प्रमाण-पत्र कलेक्टर को प्रेषित करेगा, जिसमें संबंधित व्यक्ति से प्राप्य अवशेषों की धनराशि निर्दिष्ट होगी, और कलेक्टर ऐसे प्रमाण-पत्र के प्राप्त होने पर, ऐसे व्यक्ति से उसमें निर्दिष्ट धनराशि इस प्रकार वसूल करने की कार्यवाही करेगा मानो कि वह भूमि-राजस्व का अवशेष हो ।
(६) उप-धारा (४) के अधीन शास्ति के रूप में आरोपित कोई भी धनराशि उप-कर के अवशेष की वसूली के लिये उप-धारा (५) में उपबन्धित रीति में वसूली योग्य होगी ।
24. Section 24
(आ) परिषद् तथा गन्ना उत्पादक सहकारी समिति के बीच, या परिषद् तथा कारखाने के बीच या परिषद् और गन्ना उत्पादक के बीच समिति या कारखाने द्वारा परिषद् को अंशदान के भुगतान के सम्बन्ध में; या
(इ) परिषद् के काम-काज के सम्बन्ध में कोई विवाद उत्पन्न हो;
ता यह निर्णय्यर्थ गन्ना आयुक्त को अथवा यदि वह इस प्रकार निर्देशित करे तो उसके द्वारा नामांकित पंच को प्रेषित किया जायगा और गन्ना आयुक्त या पंच का निर्णय, जैसी भी दशा हो, अंतिम होगा।
25. इस अधिनियम के आशय के लिये अभिधारक का निरूपण
२५. इस अधिनियम के आशय के लिये अभिधारक का निरूपण—(१) जब कि अभिधारक पेढ़ी (फर्म) या अन्य व्यक्ति संघ हो तो उसके किसी एक या अधिक साझेदारों या सदस्यों को, किसी भी अपराध के लिये, जिसके लिये अभिधारक दंडनीय हो, इस अधिनियम के अधीन अभियोजित तथा दंडित किया जा सकेगा :
किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि पेढ़ी (फर्म) या संघ (एसोसियेसन) कलक्टर को यह सूचना दे सकेगा कि उसने इस अधिनियम के आशय के लिये अपने एक सदस्य को अभिधारक नामांकित कर दिया है और ऐसा व्यक्ति इस अधिनियम के आशय के लिये तब तक अभिधारक समझा जायगा जब तक कि उसका नामांकन रद्द करने वाली और सूचना कलक्टर को प्राप्त न हो जाय या जब तक कि पेढ़ी (फर्म) या संघ की उसकी साझेदारी या सदस्यता समाप्त न हो जाय।
(२) जब कि अभिधारक कम्पनी हो तो उसके किसी एक या अधिक संचालकों को, या प्रायवेट कम्पनी की दशा में उसके किसी एक या अधिक अंशधारियों को किसी भी ऐसे अपराध के लिये, जिसके लिये अभिधारक दंडनीय हो, इस अधिनियम के अधीन अभियोजित तथा दंडित किया जा सकेगा :
किन्तु प्रतिबन्ध यह है कि कम्पनी कलक्टर को यह सूचना दे सकेगी कि उसने किसी एक संचालक को, या प्रायवेट कम्पनी की दशा में किसी अंशधारी को इस अधिनियम के आशय के लिये अभिधारक नामांकित कर दिया है और ऐसा संचालक या अंशधारी इस अधिनियम के आशय के लिये तब तक अभिधारक समझा जायगा जब तक कि उसका नामांकन रद्द करने वाली और सूचना कलक्टर को प्राप्त न हो जाय या जब तक कि उसका संचालक या अंशधारी रहना समाप्त न हो जाय।
26. शास्तियां
२६. शास्तियां—यदि कोई व्यक्ति इस अधिनियम के किन्हीं भी उपबन्धों का या उसके अधीन बनाये गये किसी नियम या दी गई आज्ञा का उल्लंघन करेगा तो वह छह मास तक के कारावास का या ऐसे अर्थ दंड का, जो पांच हजार रुपयों से अधिक न हो, या दोनों का, भागी होगा, और निरन्तर उल्लंघन की दशा में ऐसे और अर्थ-दंड का भागी होगा जो प्रत्येक ऐसे दिन के लिये, जिसमें उल्लंघन चालू रहे, एक हजार रुपये से अधिक नहीं होगा।
27. कार्यवाहियों का चलाया जाना
२७. कार्यवाहियों का चलाया जाना—(१) इस अधिनियम के अधीन कोई भी अभियोजन गन्ना आयुक्त या जिले के कलक्टर द्वारा या उससे प्राप्त प्राधिकार के अधीन की गई शिकायत पर ही चलाया जायगा अन्यथा नहीं।
(२) इस अधिनियम के अधीन किसी अपराध के अभियुक्त व्यक्ति के आवेदन पर गन्ना आयुक्त या गन्ना आयुक्त की पूर्व सहमति से जिले का कलक्टर किसी भी स्थिति पर ऐसे अपराध के सम्बन्ध में ऐसा समझौता शुल्क वसूल करके समझौता कर सकेगा जो उस अर्थ दंड से अधिक न हो, जो ऐसे अपराध के लिये आरोपित किया जा सकता हो।
(३) द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेट के न्यायालय से निम्न श्रेणी का कोई भी न्यायालय इस अधिनियम या इसके अधीन दी गई किसी आज्ञा या बनाये गये नियम के विरुद्ध किसी भी अपराध पर विचार नहीं करेगा।
28. मजिस्ट्रेट की विशेष शक्तियां
२८. मजिस्ट्रेट की विशेष शक्तियां—कोड आफ क्रिमिनल प्रोसीजर, १८९८ (दंड प्रक्रिया संहिता, १८९८) की धारा ३२ में चाहे कोई भी बात निहित क्यों न हो, राज्य शासन द्वारा इस सम्बन्ध में विशेष रूप से सशक्त तथा इस अधिनियम या उसके अधीन दी गई किसी आज्ञा या बनाये गये किसी नियम के अधीन किसी भी प्रकरण पर विचार करने वाले प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के लिये यह वैध होगा कि वह इस अधिनियम के अधीन किसी भी अपराध के दोष-सिद्ध किसी भी व्यक्ति को ऐसा अर्थ दंड दे, जो पांच हजार रुपये से अधिक न हो।
29. अधिनियम के अधीन की गई कार्यवाही का रक्षण
२९. अधिनियम के अधीन की गई कार्यवाही का रक्षण—(१) किसी भी ऐसी बात के लिये जो इस अधिनियम के अधीन दी गई किसी आज्ञा या बनाये गये किसी भी नियम के अनुसरण में सद्भावनापूर्वक की गई हो या जिसका सद्भावनापूर्वक किया जाना अभिप्रेत रहा हो, किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही प्रस्तुत नहीं होगी।
(२) किसी भी ऐसी बात के कारण, जो इस अधिनियम के अधीन दी गई किसी भी आज्ञा या बनाये गये किसी भी नियम के अनुसरण में सद्भावनापूर्वक की गई हो या जिसका सद्भावनापूर्वक किया जाना अभिप्रेत रहा हो, हुई या सम्भाव्य किसी भी क्षति के लिये राज्य शासन के विरुद्ध कोई भी वाद, अभियोजन, या अन्य विधिक कार्यवाही प्रस्तुत नहीं होगी।
30. नियम बनाने की शक्ति
३०. नियम बनाने की शक्ति—(१) राज्य शासन इस अधिनियम के उपबंधों को कार्यान्वित करने के आशय के लिये नियम बना सकेगा ।
(२) पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित विषयों के लिये उपबंध हो सकेंगे :—
(अ) परिषद् तथा परिषद् द्वारा काम-काज का संचालन;
(आ) धारा ६ की उप-धारा (२) के अधीन बुलाये गये सम्मेलनों में किया जाने वाला काम-काज;
(इ) वह रीति तथा रूप जिसमें धारा ८ के अधीन परिषद् के अधिकार में रखी गई निधि कायम रखी जायगी तथा ऐसी निधि में से होने वाला उपयोग तथा भुगतान;
(ई) गन्ना आयुक्त के कर्तव्य, शक्तियां तथा कार्य;
(उ) धारा ११ के अधीन नियुक्त किये जाने वाले निरीक्षकों की नियुक्ति तथा सेवा के अन्य प्रतिबन्धों से सम्बंधित विषय और उनके कर्तव्य, शक्तियां तथा कार्य;
(ऊ) इस अधिनियम के अधीन आवेदन-पत्रों तथा अपीलों के सम्बन्ध में दिये जाने वाले शुल्क;
(ए) कय-अभिकर्ताओं की तथा ऐसे अन्य व्यक्तियों की, जो गन्ने के क्रय के लिये क्रय-अभिकर्ताओं तथा शक्कर कारखानों द्वारा नौकर रखे जायं, नियुक्ति तथा उन्हें अनुमति-पत्र प्रदान किया जाना, उनके कार्य एवं कर्तव्य तथा उनके द्वारा जमा की जाने वाली प्रतिभूति और वे प्रतिबंध जिनके अधीन ये प्रतिभूतियां जप्त की जा सकेंगी;
(ऐ) इस अधिनियमों के उपबंधों द्वारा या उनके अधीन किये जाने वाले करार का रूप और करार के प्रतिबंधों के भंग के लिये भुगतान की जाने वाली शास्ति;
(ओ) गन्ना उत्पादक सहकारी समितियों तथा संघ की रचना, क्रियाकरण, प्रबंध, पर्यवेक्षण तथा अंकेक्षण और इस अधिनियम एवं नियमों के आशयों के लिये ऐसी समितियों या संघ की मान्यता से संबंधित प्रतिबंध और उनके कर्म-चारीवृन्द तथा वित्त का नियंत्रण;
(औ) वह दर जिससे एवं रीति जिसमें गन्ना उत्पादक सहकारी समिति को किये गये उनके द्वारा गन्ने के प्रदाय पर, कमीशन दिया जायगा;
(अं) गन्ने की ठीक तौल, तौल तथा तौल की जांच के लिये सुविधाओं की एवं तौल के मान्यों की व्यवस्था;
(अः) कारखानों को गन्ना लाने वाली गाड़ियों के लिये प्रवेश-मार्गों, ठहरने के स्थान की, बैलों तथा गाड़ीवानों के लिये सायबानों की, बैलों के लिये पानी की, नांदों की तथा अन्य सम्बंधित बातों की व्यवस्था;
(क) धारा २३ के अधीन उप-कर (सैंस) के निर्धारण एवं संग्रह के हेतु सशक्त प्राधिकारी तथा वह रीति जिसमें उप-कर संगृहीत किया जायगा;
(ख) धारा २४ के अधीन आने वाले विषयों के लिये प्रक्रिया;
(ग) उन वृतान्त-पत्रों, विवरण-पत्रों, रजिस्टर तथा अन्य फार्मों का रूप जिनका इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन रखा जाना आवश्यक हो और ऐसे विवरण-पत्रों, वृतान्त-पत्रों तथा रूपों का भरा जाना;
(घ) वह रूप तथा रीति, जिसमें इस अधिनियम के अधीन विभिन्न आशयों के लिये आवेदन-पत्र दिये जायेंगे;
(ङ) इस अधिनियम के अधीन क्षेत्राधिकार रखने वाले किसी भी पदाधिकारी या प्राधिकारी के कर्तव्य तथा ऐसे पदाधिकारी या प्राधिकारी द्वारा अनुसरणीय प्रक्रिया; और
(च) वे विषय, जो नियत किये जाने हों, या नियत किये जा सकें ।
(३) इस धारा के अधीन बनाये गये नियम ऐसे दिनांक से प्रभावशील होंगे, जो राज्य शासन द्वारा नियत किया जाय ।
(४) इस धारा के अधीन बनाये गये समस्त नियम, उनके बनाये जाने के पश्चात्, यथाशीघ्र विधान सभा के समक्ष रखे जायेंगे और वे ऐसे परिवर्तनों के अधीन होंगे, जैसे कि विधान सभा करे ।
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