Bare Act
The Jharkhand State Highway Authority Act, 2007
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ
- (1) यह अधिनियम झारखण्ड राज्य राजमार्ग प्राधिकार अधिनियम, 2007 कहा जायेगा ।
- (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य में होगा ।
- (3) यह ऐसी तारीख से प्रवृत्त होगा जो राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त नियत करें ।
2. परिभाषाएं
इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो- (क) "राज्य सरकार" से अभिप्रेत है झारखण्ड राज्य सरकार; (ख) "प्राधिकार" से अभिप्रेत है धारा-3 के अधीन स्थापित झारखण्ड राज्य राजमार्ग प्राधिकार; (ग) "अध्यक्ष" से अभिप्रेत है प्राधिकार के अध्यक्ष; (घ) "उपध्यक्ष" से अभिप्रेत है प्राधिकार का उपाध्यक्ष; (ङ) "परिषद्" से अभिप्रेत है धारा-4 के अधीन गठित प्राधिकार की शासी परिषद्; (च) "समिति" से अभिप्रेत है धारा-9 के अधीन गठित प्राधिकार की कार्यकारिणी समिति; (छ) "कर्मचारी" से अभिप्रेत है वह व्यक्ति जो प्राधिकार के पूर्णकालिक या प्राधिकार द्वारा यथा विनिश्चित अवधि के लिए सेवा में हो; (ज) "विहित" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अन्तर्गत निर्मित नियमावली द्वारा विहित; (झ) "मु० कार्य०अ०" से अभिप्रेत है मुख्य कार्यपालक अधिकारी; (ञ) "राज्य राजमार्ग" से अभिप्रेत है झारखण्ड राजमार्ग अधिनियम, 2005 (झारखण्ड अधिनियम 7, 2006) की धारा-3 के अन्तर्गत राज्य राजमार्ग के रूप में घोषित कोई राजमार्ग जिसके अन्तर्गत तत्समय उससे अनुलग्न कोई संरचना भी सम्मिलित है; (ट) "व्यक्ति" के अन्तर्गत शामिल है कोई कम्पनी, फर्म या संगम या निकाय चाहे निगमित हो या नहीं ।
3. प्राधिकार की स्थापना
- (1) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए ऐसी तिथि से जो राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस निमित्त नियत करे एक प्राधिकार की स्थापना की जायगी जिसे झारखण्ड राज्य राजमार्ग प्राधिकार कहा जायेगा ।
- (2) प्राधिकार एक निगमित निकाय होगा ।
4. शासी परिषद
शासी परिषद् प्राधिकार की उच्चतम नीति निर्माता निकाय होगी और उसकी अध्यक्षता राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा की जायगी । परिषद् के अन्य सदस्य निम्नलिखित होंगे:- (क) मंत्री, पथ निर्माण विभाग, झारखण्ड - उपाध्यक्ष (ख) मंत्री, वित्त, झारखण्ड - सदस्य (ग) मंत्री, योजना, झारखण्ड - सदस्य (घ) मुख्य सचिव, झारखण्ड - सदस्य (ङ) विकास आयुक्त, झारखण्ड - सदस्य (च) प्रधान सचिव/सचिव, वित्त विभाग, झारखण्ड - सदस्य (छ) प्रधान सचिव/सचिव, योजना विभाग, झारखण्ड - सदस्य (ज) प्राधिकार के मुख्य कार्यपालक अधिकारी - सदस्य (प्रधान सचिव/सचिव, पथ निर्माण विभाग, झारखण्ड) (झ) अभियंता प्रमुख पथ निर्माण विभाग, झारखण्ड - सदस्य (ञ) दो विशेषज्ञ (जो शासी परिषद् द्वारा चयनित किए जायेंगे) - विशेषज्ञ-सदस्य (ट) प्राधिकार के सदस्य (तकनीकी) - संयोजक सदस्य
5. शासी परिषद् के सदस्यों की पदावधि और सेवा शर्तें
- (1) विशेषज्ञ सदस्यों को छोड़कर शासी परिषद् के सभी सदस्य पदेन सदस्य होंगे ।
- (2) शासी परिषद् के विशेषज्ञ सदस्यों जिनमें से एक अर्थशास्त्र, वित्त, प्रशासन या बैंकिंग के क्षेत्र और दूसरा सिविल अभियंत्रण (अधिमानतः पथ निर्माण) के क्षेत्र में होगा परिषद् द्वारा तीन वर्षों के लिए चयनित किया जायेगा और उनकी सेवा की अन्य शर्तें ऐसी होगी, जैसी विहित की जाय ।
6. शासी परिषद के विशेषज्ञ सदस्यों के रूप में नियुक्ति के लिए निरर्हता
कोई व्यक्ति शासी परिषद् के विशेषज्ञ सदस्य के रूप में नियुक्त किये जाने के लिए निर्हित होगा, यदि वह- (क) ऐसे किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है और कारावास की सजा दी गई है जिसमें शासी परिषद् की राय में, नैतिक अधमता अन्तर्ग्रस्त है, या (ख) अनुन्मोचित दिवालिया है; या (ग) विकृत चित्त का है और सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित कर दिया गया है; या (घ) सरकार की या राज्य सरकार के स्वामित्वधीन या नियन्त्रणाधीन किसी निगम की सेवा से हटा दिया गया है या पदच्युत कर दिया गया है; या (ङ) शासी परिषद् की राय में, प्राधिकार में ऐसा वित्तीय या अन्य हित रखता है, शासी परिषद् के विशेषज्ञ सदस्य के रूप में उसके द्वारा कार्य सम्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है ।
7. शासी परिषद् की बैठक
- (1) शासी परिषद् की बैठक ऐसे समय और स्थान पर होगी और उन बैठकों में किये जाने वाले कार्य के बारे में, जिसके अन्तर्गत ऐसे बैठकों में गणपूर्ति भी है, प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन किया जाएगा, जो विनियमों द्वारा उपबन्धित किये जाएं ।
- (2) यदि किसी कारण से अध्यक्ष शासी परिषद् के किसी बैठक में उपस्थित होने में असमर्थ हैं तो, उपाध्यक्ष बैठक की अध्यक्षता करेंगे । दोनों की अनुपस्थिति में अध्यक्ष द्वारा प्राधिकृत मंत्री (सदस्य) पीठासीन पदाधिकारी हो सकेंगे ।
- (3) ऐसे सभी प्रश्न जो प्राधिकार के किसी बैठक के समक्ष आएं उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से विनिश्चित किए जाएँगे और मतों के बराबर होने की दशा मे अध्यक्ष का अथवा उसकी अनुपस्थिति में पीठासीन व्यक्ति द्वितीय या निर्णायक मत होगा और वह उसका प्रयोग करेगा ।
8. शासी परिषद में रिक्ति से कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होना
शासी परिषद् का कोई कार्य या कार्यवाही, केवल इस कारण अविधिमान्य नहीं होगी कि- (क) शासी परिषद् में कोई रिक्ति है या उसके गठन में कोई त्रुटि है, या (ख) शासी परिषद् के विशेषज्ञ सदस्य के रूप में कार्य करने वाले किसी व्यक्ति की नियुक्ति में कोई त्रुटि है, या (ग) शासी परिषद् द्वारा अपनायी गई प्रक्रिया में कोई ऐसी अनियमितता है, जो मामले के गुणागुण को प्रभावित नहीं करती है ।
9. कार्यकारिणी समिति
एक कार्यकारिणी समिति होगी जिसका प्रधान मुख्य कार्यपालक अधिकारी होंगे। यह समिति शासी परिषद् को प्रतिवेदन देगी और वह ऐसे कार्यों के लिए जिम्मेदार होगी और ऐसी शक्तियों का प्रयोग करेगी जो विहित किये जायें अथवा शासी परिषद् द्वारा उसे सौंपे जायें।
10. कार्यकारिणी समिति का गठन
कार्यकारिणी समिति में निम्नलिखित होंगे:- (क) मुख्य कार्यपालक अधिकारी (प्रधान सचिव/सचिव, पथ निर्माण विभाग, झारखण्ड) अध्यक्ष (ख) सदस्य (वित्त) सदस्य (ग) सदस्य (तकनीकी) सदस्य (घ) सदस्य (प्रशासन) सदस्य
11. समिति के सदस्यों की नियुक्ति हेतु शर्त एवं बंधेज
कार्यकारिणी समिति के सदस्य (वित्त), सदस्य (तकनीकी) और सदस्य (प्रशासन) प्राधिकार की नियुक्ति की रीति तथा उनकी सेवा की शर्तें एवं बंधेज ऐसे होंगे जैसा विहित किये जायें।
12. प्राधिकार के अधिकारियों, परामर्शदाताओं और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति
- (1) अपने कृत्यों का सम्पादन करने के प्रयोजनार्थ प्राधिकार उतनी संख्या में जैसा वह आवश्यक समझे, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को ऐसी शर्तें एवं बंधेज पर जैसा कि विनियमों में अधिकथित किया जाय नियुक्त करेगा।
- (2) प्राधिकार समय-समय पर, किसी ऐसे व्यक्ति को सलाहकार या परामर्शदाता के रूप में, जैसा वह आवश्यक समझे, ऐसे शर्तों एवं बंधेज पर जो विनियमों में अधिकथित किये जायें, नियुक्त कर सकेगा।
13. प्राधिकार का व्यवसाय के सिद्धान्तों के अनुसार कार्य करना
इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्य के सम्पादन में प्राधिकार, जहां तक हो सके व्यवसाय के सिद्धान्तों के अनुसार कार्य करेगा।
14. प्राधिकार में कोई भी राज्य राजमार्ग निहित करने या उसे सौंपने की राज्य सरकार की शक्ति
राज्य सरकार समय-समय पर गजट में अधिसूचना द्वारा ऐसे राज्य राजमार्ग या उसके किसी भाग को जो उस अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किया जाए, प्राधिकार में निहित कर सकेगी या उसे सौंप सकेगी।
15. राज्य सरकार की आस्तियों और दायित्वों का प्राधिकार को अन्तरण
- (1) धारा 14 के अधीन अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि से- (क) ऐसी तिथि से ठीक पहले उस धारा के अधीन प्राधिकार में निहित या सौंपे गए किसी राज्य राजमार्ग या उसके किसी भाग के प्रयोजनों के लिए या उसके संबंध में राज्य सरकार द्वारा उसके साथ या उसके लिए उपगत सभी ऋण, बाध्यताएं और दायित्व की गई सभी संविदाएं और किए जाने के लिए वचनबद्ध सभी मामले और बातें प्राधिकार के द्वारा उसके साथ या उसके लिए उपगत की गई या किए जाने के वचनबद्ध समझी जाएंगी; (ख) प्राधिकार में इस प्रकार निहित या उसे सौंपे गये किसी राज्य राजमार्ग या उसके किसी भाग के प्रयोजनों के लिए या उसके संबंध में राज्य सरकार द्वारा या उसके लिए उस तिथि तक उपगत और पूंजीगत व्यय के रूप में राज्य सरकार द्वारा घोषित सभी अनावर्ती व्यय ऐसे शर्तों एवं बंधेज के अधीन रहते हुए जो विहित किए जाएं राज्य सरकार द्वारा प्राधिकार को उपलब्ध करायी गयी पूंजी मानी जाएगी ; (ग) प्राधिकार में इस प्रकार निहित या उसे सौंपे गए किसी राज्य राजमार्ग या उसके भाग के संबंध में उस तिथि से ठीक पहले राज्य सरकार को देय सभी राशियां प्राधिकार को देय समझी जाएगी; (घ) ऐसे सभी वाद और अन्य विधिक कार्यवाहियाँ जो ऐसे राज्य राजमार्ग या उसके किसी भाग के संबंध में किसी मामले के बाबत उस तिथि से ठीक पहले राज्य सरकार के द्वारा या उसके विरुद्ध दायर हो या दायर की जा सकती थी, प्राधिकार द्वारा या उसके विरुद्ध चालू रखी या दायर की जा सकती सकेगी।
- (2) यदि कोई विवाद उत्पन्न होता है कि राज्य सरकार की आस्तियों, अधिकारों या दायित्वों में से कौन से प्राधिकार को अन्तरित कर दिए गए हैं। तो ऐसे विवाद का विनिश्चय राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा।
16. प्राधिकार के लिए भूमि का अर्जन
- (1) इस अधिनियम के अधीन प्राधिकार द्वारा अपने कृत्यों के सम्पादन के लिए अपेक्षित कोई भूमि लोक प्रयोजन के लिए आवश्यक भूमि समझी जाएगी और प्राधिकार के लिए ऐसी भूमि का अर्जन अधिनियम 1894 के उपबन्धों के अधीन किया जा सकेगा।
- (2) प्राधिकार के स्वामित्व, नियंत्रण अथवा प्रबन्धन अधीन किसी भी भूमि को लोक भूमि माना जायेगा, जिसके लिए समस्त प्रासंगिक अधिनियम, नियम, विनियम लागू होंगे।
17. प्राधिकार द्वारा संविदएं
धारा 18 के उपबंधों के अधीन रहते हुए प्राधिकार इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के सम्पादन के लिए आवश्यक कोई संविदा करने और उसे कार्यान्वित करने के लिए सक्षम होगा।
18. प्राधिकार की ओर से संविदा सम्पादित करने का तरीका
- (1) प्राधिकार की ओर से प्रत्येक संविदा प्राधिकार के मुख्य कार्यपालक अधिकारी द्वारा या उसके ऐसे अन्य सदस्य द्वारा या ऐसे अधिकारी द्वारा की जाएगी, जैसा कि सामान्य रूप से या विशेष रूप से इस संबंध में प्राधिकार द्वारा शक्ति प्रदत्त की जाय और ऐसी संविदाएं या ऐसे वर्ग की संविदाएं जैसा कि विनियमों में विनिर्दिष्ट किया जाए प्राधिकार की सामान्य मुद्रा से मुद्रांकित की जाएगी। परन्तु अचल सम्पत्ति के विक्रय के लिए कोई संविदा तब तक नहीं की जाएगी जब तक राज्य सरकार द्वारा उसका पूर्वानुमोदन न कर दिया गया हो।
- (2) उप धारा
- (1) के उपबंधों के अधीन रहते हुए, इस अधिनियम के अधीन की जाने वाली किसी संविदा का प्रारूप और रीति ऐसी होगी, जैसी विनियमों में अधिकथित की जाए।
- (3) कोई भी संविदा जो इस अधिनियम एवं इसके अन्तर्गत निर्मित नियमावली और विनियमों के उपबन्धों अनुसार नहीं है, प्राधिकार पर आबद्धकर नहीं होगी।
19. प्राधिकार के कृत्य
- (1) इस अधिनियम के अन्तर्गत बनाये गये नियमों के अधीन रहते हुए प्राधिकार का यह कर्तव्य होगा कि वह राज्य सरकार द्वारा उसमें निहित किए गए या सौंपे गए राज्य राजमार्ग और उससे अनुलग्न अन्य विस्तार या कोई संरचना को इस ढंग से विकसित अनु रक्षित एवं प्रबंधित करेगा कि अपनी स्थापना से तीन वर्षों के अन्दर राजमार्गों के अनुरक्षण हेतु सरकारी निधि पर अधिमानतः रूप से निर्भर न रह जाय।
- (2) उप धारा
- (1) में अन्तर्विष्ट उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना प्राधिकार अपने कृत्यों के सम्पादन के लिए-- (क) उसमें निहित या उसे सौंपे गए राजमार्गों का सर्वेक्षण, विकास अनुरक्षण और प्रबन्ध कर सकेगा और ऐसा करने के लिए प्राधिकार अन्य बातों के साथ-साथ:
- (i) उसे सौंपे गए राज्य राजमार्गों के अनुरक्षण और उन्नयन के लिए तात्कालिक और दीर्घकालीन योजनाएं तैयार करेगा;
- (ii) अनुरक्षण संक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए एक वैज्ञानिक पथ निर्माण प्रबंधन प्रणाली का विकास करेगा और साथ-साथ राज्य राजमार्गों का निरूपण और निर्माण के लिए मानक निर्धारित करेगा;
- (iii) निजी और संस्थागत निधिकरण को जिसके अन्तर्गत अन्र्तराष्ट्रीय निधिकरण भी है, पथ क्षेत्र में लाने के लिए प्रतिरूप विकसित करेगा;
- (iv) राज्य राजमार्गों के अनुरक्षण के लिए गुणवत्ता वाले निजी संविदाकारों द्वारा सम्पादन पर आधारित अनुरक्षण प्रणाली की पद्धति का विकास करेगा;
- (v) इन राज्य मार्गों के अनुरक्षण और उन्नयन करने के लिए संस्थागत संसाधन जुटाएगा; एवं
- (vi) इन प्रयोजनों के लिए निजी भागीदारी और संसाधन को प्रोत्साहित करते हुए अनुमोदित योजना के अनुसार राजमार्गों का अनुरक्षण और उन्नयन करेगा; (ख) उसमें निहित या उसे सौंपे गए राजमार्गों के समुचित प्रबंध के लिए उस पर वाहनों के परिचालन का विनियमन और नियंत्रण कर सकेगा; (ग) राज्य में परामर्शदात्री और निर्माण सेवाओं को विकसित और उपलब्ध करा सकेगा और राजमार्गों के विकास, अनुरक्षण और प्रबंधन के संबंध में या उन पर किन्हीं सुविधाओं के संबंध में अनुसंधान/प्रशिक्षण गतिविधियों/मानव संसाधन विकास/राज्य स्तरीय प्रयोगशाला की स्थापना कर सकेगा; (घ) उनमें निहित या उसे सौंपे गए राजमार्गों के उपयोगकर्ताओं के लिए ऐसी सुविधाओं और प्रसुविधाओं की व्यवस्था कर सकेगा, जो प्राधिकार की राय में ऐसे राजमार्गों पर यातायात की सुविधा एवं निर्बाध परिचालन के लिए आवश्यक हों; (ङ) इस अधिनियम द्वारा उस पर अधिरोपित कृत्यों का अधिक दक्षतापूर्ण सम्पादन करने के लिए कम्पनी अधिनियम, 1956 (अधिनियम संख्या 1 सन् 1956) के अधीन एक या अधिक कम्पनियां बना सकेगा; (च) अपने कृत्यों में से किसी कृत्य को ऐसी शर्तों एवं बंधेज पर जैसा विहित किया जाय किसी व्यक्ति को सौंप सकेगा या अनुबंधित कर सकेगा; (छ) राज्य राजमार्गों से संबंधित विषयों के संबंध में राज्य सरकार को सलाह दे सकेगा; (ज) राज्य सरकार की ओर से ऐसी शर्तों एवं बंधेज पर, जैसा राज्य सरकार द्वारा विनिर्दिष्ट किया जाए, शुल्क एकत्रित कर सकेगा; (झ) ऐसे सभी कार्य कर सकेगा जो इस अधिनियम द्वारा प्राधिकार को प्रदत्त किसी शक्ति के प्रयोग या उस पर अधिरोपित किसी कृत्य के सम्पादन के लिए आवश्यक या सुविदाजनक हो या उनके आनुषंगिक हों; (ञ) कार्यालय एवं कर्मशाला का निर्माण एवं अनुरक्षण एवं सौंपे गए राजमार्गों पर या उसके निकट होटल, मोटेल, रेस्तरां एवं विश्रामालय की स्थापना एवं अनुरक्षण कर सकेगा; एवं (ट) इसके कर्मचारियों के लिए भवनों एवं टाउनशिप का निर्माण एवं अनुरक्षण कर सकेगा; (ठ) उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु लोक निजी भागीदारी को प्रोत्साहित कर सकेगा।
- (3) इस धारा में अन्तर्विष्ट किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह-- (क) प्राधिकार द्वारा तत्समय प्रवृत्त किसी विधि की अवहेलना को प्राधिकृत करती है या (ख) किसी व्यक्ति को किसी ऐसे कर्तव्य या दायित्व के बाबत कोई कार्यवाही दायर करने हेतु प्राधिकृत करती है, जिसके लिए प्राधिकार या उसके अधिकारी या अन्य कर्मचारी, इस अधिनियम के अधीन अन्यथा विषय नहीं होगी।
20. राज्य सरकार द्वारा प्राधिकार को अतिरिक्त पूंजी और अनुदान
राज्य सरकार इस निमित्त, राज्य विधान-सभा द्वारा विधि के माध्यम से किये गये सम्यक् विनियोग के पश्चात-- (क) ऐसी शर्तों एवं बंधेज पर जैसा कि राज्य सरकार निर्धारित करें, पूंजी उपलब्ध करा सकती है, जिसकी प्राधिकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए या उससे सम्बन्धित किसी प्रयोजन के लिए अपेक्षा की जाय; (ख) प्राधिकार को ऋण या अनुदान स्वरूप ऐसी धनराशि, जैसा कि राज्य सरकार प्राधिकार द्वारा इस अधिनियम के अधीन उसके कृत्यों के सम्यक् निर्वहन के लिए आवश्यक समझे, का भुगतान ऐसी शर्तों एवं बंधेज पर कर सकती है जैसा कि राज्य सरकार निर्धारित करे।
21. प्राधिकार की निधि
- (1) एक निधि का गठन किया जाएगा और उसमें निम्नलिखित को जमा किया जायेगा-- (क) प्राधिकार द्वारा प्राप्त किया गया कोई अनुदान या सहायता (ख) प्राधिकार द्वारा लिया गया कोई ऋण या उसके द्वारा लिया गया कोई उधार (ग) प्राधिकार द्वारा प्राप्त की गई कोई अन्य राशि (घ) धारा-20 एवं 21 (क), (ख) एवं (ग) में विनिर्दिष्ट सभी धनराशियों को किसी राष्ट्रीयकृत बैंक अथवा अधिसूचित बैंक अथवा अन्य वित्तीय संस्थान में जमा किया जाएगा जैसा कि शासी परिषद द्वारा निर्णय लिया जाय एवं उक्त राशि का संचालन इस प्रकार होगा, जैसा विहित किया जाय।
- (2) उक्त निधि का उपयोग निम्नलिखित को पूरा करने के लिए किया जाएगा-- (क) ऐसे अनुदानों, उधारों या ऋणों के प्रयोजनों जिनके लिए वे प्राप्त हुए है, को ध्यान में रखते हुए, प्राधिकार के कृत्यों के निर्वहन और उनसे सम्बन्धित या उनके आनुषंगिक विषयों के लिए प्राधिकार के व्यय; (ख) प्राधिकार के सदस्यों, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को देय वेतन भत्ते अन्य पारिश्रमिक या सुविधाएं; (ग) इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत उद्देश्यों पर और प्रयोजनों के लिए व्यय।
- (3) प्राधिकार की निधि के विरुद्ध किसी भी बकाया को या किसी भी मांग को लोक मांग माना जायेगा, जिसकी वसूली लोक मांग वसूली अधिनियम 1914 के अन्तर्गत अनुमान्य होगी !
22. बजट
प्राधिकार प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे समय पर और ऐसे प्रपत्र में, जो विहित किया जाए, आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अपना बजट तैयार करेगा, जिसमें प्राधिकार की प्राक्कलित प्राप्तियाँ और व्यय दर्शाएं जायेंगे और इसे वह राज्य सरकार को अग्रसारित करेगा ।
23. निधियों का निवेश
प्राधिकार अपनी निधियों (जिनके अन्तर्गत कोई आरक्षित निधि भी सम्मिलित है) का निवेश, राज्य सरकार की प्रतिभूतियों में अथवा ऐसी अन्य रीति से, जैसी विहित की जाए, कर सकेगा ।
24. प्राधिकार को उधार लेने की शक्ति
- (1) प्राधिकार, इस अधिनियम के अधीन अपने सभी या किन्हीं कृत्यों के निर्वहन के लिए, राज्य सरकार की सहमति से या राज्य सरकार द्वारा उसे दिए गए किसी साधारण या विशेष प्राधिकार के बंधेजों के अनुसार बन्ध-पत्रों, डिबेंचरों या ऐसी ही अन्य लिखतों का जैसा वह ठीक समझे, निर्गमन करके, किसी भी स्रोत से धन उधार ले सकेगा ।
- (2) प्राधिकार ऐसी सीमाओं के अधीन रहते हुए, जैसी राज्य सरकार समय-समय पर अधिकथित करे, इस अधिनियम के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन के लिए अपेक्षित रकम, ओवर ड्राफ्ट के रूप या अन्यथा अस्थायी रूप से उधार ले सकेगा ।
- (3) राज्य सरकार प्राधिकार द्वारा उपधारा
- (1) के अधीन लिए गये उधारों के बाबत मूल धन के प्रतिसंदाय और उस पर ब्याज के संदाय को ऐसी रीति से, जैसी वह ठीक समझे, प्रत्याभूति कर सकेगी ।
25. वार्षिक प्रतिवेदन
प्राधिकार प्रत्येक वित्तीय वर्ष में ऐसे प्रपत्र में और ऐसे समय पर जो विहित किया जाय, अपना वार्षिक प्रतिवेदन तैयार करेगा जिसमें वह पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष के दौरान अपने क्रिया-कलाप का पूरा व्योरा देगा और ऐसी प्रतिवेदन की एक प्रति राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा ।
26. लेखा और लेखा परीक्षण
प्राधिकार का लेखा, राज्य के महालेखाकार के परामर्श से, ऐसी रीति से संधारित और लेखा परीक्षित किया जायेगा जो विहित की जाय तथा प्राधिकार ऐसी लेखाओं की एक लेखा-परीक्षित प्रति तत्संबंधी लेखा-परीक्षक के प्रतिवेदन के साथ ऐसी तिथि जैसी कि विहित की जाए, से पूर्व राज्य सरकार को भेजेगा ।
27. वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा परीक्षक के प्रतिवेदन को विधान मंडल के समक्ष रखा जाना
राज्य सरकार वार्षिक प्रतिवेदन और लेखा परीक्षक का प्रतिवेदन, उनके प्राप्त होने के पश्चात यथाशीघ्र विधान मण्डल के समक्ष उपस्थापित करेगी ।
28. शक्तियों का प्रत्यायोजन
शासी परिषद् साधारण या विशेष लिखित आदेश द्वारा प्राधिकार के अध्यक्ष या परिषद की उप समिति या कार्यकारिणी समिति या मुख्य कार्यपालक अधिकारी या प्राधिकार के किसी अधिकारी को इस अधिनियम के अधीन अपनी शक्तियों और कृत्यों का प्रत्यायोजन, जिन्हें वह आवश्यक समझे, आदेश में, यदि कोई निर्दिष्ट शर्तों एवं परिसीमाओं के अधीन कर सकेगा परन्तु निम्नलिखित कृत्यों और शक्तियों का प्रयोग केवल परिषद द्वारा किया जाएगा; (क) बाजार या वित्तीय संस्थाओं से दीर्घकालिक निधियों को उधार लेना। इसमें कार्यशील पूंजी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अल्पकालिक निधियों और ओवर ड्राफ्ट की व्यवस्था सम्मिलित नहीं होगी। (ख) ऐसे अधिकारियों या कर्मचारियों को नियुक्त करना, जिनका मूल वेतन नियमावली में यथाविहित किसी धनराशि से अधिक हो । (ग) प्राधिकार के कार्य के लिए विनियमों का बनाया जाना और यदि अपेक्षित हो तो उनमें संशोधन करना । (घ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाय ।
29. प्राधिकार के आदेशों और अन्य लिखितों का अधिप्रमाण
प्राधिकार के सभी आदेश, विनिश्चय और अन्य लिखतें अध्यक्ष या प्राधिकार के किसी ऐसे अधिकारी के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित किए जायेंगे जो प्राधिकार द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया गया हो ।
30. प्राधिकार के कर्मचारियों का लोक सेवक होना
प्राधिकार के सभी सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी, जब वे इस अधिनियम के या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या विनियम के उपबन्धों के अनुसरण में कार्य कर रहे हो, भारतीय दण्ड संहिता 1860 (अधिनियम संख्या-46 सन् 1860) की धारा 21 के अर्थ में और राज्य सरकार द्वारा बनायी गयी नियमावली या निदेशों के अधीन लोक सेवक समझे जायेंगे ।
31. सद्भावपूर्वक की गई कार्रवाई के लिए संरक्षण
- (1) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किन्ही नियमों या विनियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या करने के लिए आशायित किसी बात के लिए, कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्रवाई प्राधिकार अथवा प्राधिकार के किसी सदस्य या अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध न होगी ।
- (2) इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किन्ही नियमों या विनियमों के अधीन सद्भावपूर्वक की गई या किए जाने के लिए आशायित किसी बात से हुए या संभाव्य किसी क्षति के लिए कोई भी वाद, अभियोजन या कोई अन्य विधिक कार्रवाई प्राधिकार अथवा प्राधिकार के किसी सदस्य या किसी अधिकारी या अन्य कर्मचारी के विरुद्ध नहीं होगी ।
32. कतिपय कार्यों का भार ग्रहण करने की प्राधिकार की शक्ति
प्राधिकार, राज्य सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी की ओर से किन्हीं कार्यों या सेवाओं या कार्यों या सेवाओं के किसी वर्ग को कार्यान्वित करने का भार ऐसी शर्तों एवं बंधेजों पर ग्रहण कर सकेगा जो प्राधिकार और राज्य सरकार या सम्बन्धित स्थानीय प्राधिकारी के बीच सहमति हो ।
33. प्रवेश करने की शक्ति
इस निमित्त बनाए गए विनियमों के अधीन रहते हुए, प्राधिकार द्वारा साधारण या विशेष रूप से इस निमित्त प्राधिकृत कोई व्यक्ति, जब कभी इस अधिनियम के प्रयोजनों में से किसी के लिए ऐसा करना आवश्यक हो, सभी युक्तियुक्त समयों पर किसी भूमि या परिसर में प्रवेश कर सकेगा, और- (क) निरीक्षण, सर्वेक्षण, माप, मूल्यांकन या जांच कर सकेगा, (ख) तलमाप ले सकेगा; (ग) अमृदा को खोद सकेगा या उसके भीतर वेधन कर सकेगा; (घ) कार्य की आशायित रेखा और घेरा डाल सकेगा; (ङ) चिह्न लगाकर और खाइयां खोदकर ऐसा तल, सीमा और रेखाएं चिह्नित कर सकेगा; या (च) ऐसे अन्य कार्य या बात कर सकेगा, जो विहित की जाये; परन्तु ऐसा कोई व्यक्ति किसी सीमा के भीतर या निवास गृह से संलग्न, किसी धिरे आंगन या बाग में प्रवेश करने के अपने आशय की कम से कम चौबीस घण्टे की लिखित सूचना ऐसे दखलकार को पहले ही दिये बिना (दखलकार की सहमति को छोड़कर) प्रवेश नहीं करेगा ।
34. राज्य सरकार को प्राधिकार के प्रतिकूल निर्णय को विलोपित करने की शक्ति
यदि प्राधिकार का कोई संकल्प अथवा निदेश राज्य सरकार द्वारा व्यापक नीति मापदंडों के प्रतिकूल हो तो राज्य सरकार उसे विलोपित कर सकती है ।
35. नियम बनाने की राज्य सरकार की शक्ति
- (1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है ।
- (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित के उपबन्ध कर सकेंगे। (क) शासी परिषद् के विशेषज्ञ सदस्यों और सदस्य (तकनीकी) सदस्य (वित्त) and सदस्य (प्रशासन) की नियुक्ति पदावधि और सेवा की अन्य शर्तें; (ख) अध्यक्ष, मुख्य कार्यपालक अधिकारी और समिति के अन्य सदस्यों की शक्तियाँ और कर्तव्य; (ग) ऐसी शर्तें एवं बंधेज जिनके अधीन रहते हुए राज्य राजमार्ग के प्रयोजनों के लिए या उसके सम्बन्ध में राज्य सरकार द्वारा या उसके लिए उपगत अनावर्त व्यय, धारा-15 की उपधारा
- (1) के खण्ड (ख) के अधीन राज्य सरकार द्वारा प्राधिकार के लिए उपबन्धित पूंजी के रूप में माना जाएगा (घ) धारा 28 के खण्ड (ख) के अधीन मूल वेतन; (ङ) ऐसी शर्तें एवं बंधेज जिनके अधीन रहते हुए धारा-19 की उपधारा
- (2) के खण्ड (च) के अधीन किसी व्यक्ति को प्राधिकार के कृत्यों को सौंपा जाय; (च) प्रपत्र जिसमें और समय जिसके भीतर प्राधिकार धारा-22 के अधीन अपना बजट और धारा-25 के अधीन अपना वार्षिक प्रतिवेदन तैयार करेगा; (छ) ऐसी रीति जिससे प्राधिकार धारा-23 के अधीन अपनी निधि का निवेश कर सकेगा ; (ज) रीति जिससे प्राधिकार के लेखे संधारित किये जायेंगे और उनकी लेखा परीक्षा कराई जाएगी तथा विधि जिसके पूर्व लेखाओं की सम्परीक्षित प्रति तथा उस पर लेखा परीक्षक के प्रतिवेदन, राज्य सरकार को धारा-26 के अन्तर्गत उपलब्ध कराई जाएगी; (झ) धारा-33 के अधीन प्रवेश करने की शक्ति के प्रयोग से सम्बन्धित शर्तें (ञ) कोई अन्य विषय जो विहित किया जाना अपेक्षित है या विहित किया जाय ।
36. विनियम बनाने की प्राधिकार की शक्ति
- (1) प्राधिकार इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र में अधिसूचना के द्वारा ऐसे विनियम बना सकेगा जो इस अधिनियम और इसके अधीन बनाए गए नियमों से असंगत न हो ।
- (2) विशिष्टतया, और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी विषय के लिए उपबंध कर सकेंगे अर्थात:- (क) परिषद और समिति की बैठक के लिए समय और स्थान, और ऐसे बैठकों में किए जाने वाले कार्य के संव्यवहार में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया, (ख) प्राधिकार द्वारा नियुक्त किए जानेवाले अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों की सेवा की शर्तें एवं बंधेज, भर्ती की पद्धति और पारिश्रमिक; (ग) प्रपत्र जिसमें और रीति जिससे प्राधिकार द्वारा कोई संविदा या संविदा के वर्ग किए जा सकेंगे और ऐसी संविदाएं या संविदाओं के वे वर्ग, जिन्हें प्राधिकार की सामान्य मुद्रा से मुद्रंकित किया जाना है; (घ) राज्य राजमार्ग के सामान्य संचालन के लिए उसके ऊपर की बाधाओं को रोकने की रीति; (ङ) राज्य राजमार्ग पर प्राधिकार द्वारा विनिर्दिष्ट स्थानों से भिन्न स्थानों पर किसी वाहन या गाड़ी के ठहरने या प्रतीक्षा में रखने पर निषेध की रीति; (च) राज्य राजमार्ग के किसी भाग तक पहुँच को निषिद्ध या प्रतिबन्धित करने की रीति; (छ) राज्य राजमार्ग पर और उसके आसपास विज्ञापन को विनियमित या प्रतिबन्धित करने की रीति; (ज) प्राधिकार के कार्य, जिसके अन्तर्गत शक्तियों का प्रत्यायोजन भी है, के संव्यवहार की रीति; और (झ) सामान्यतया राज्य राजमार्गों का कुशल और उचित प्रबंध और अनुरक्षण ।
37. कठिनाइयों को दूर करने की शक्ति
- (1) यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को लागू करने में कोई कठिनाई उत्पन्न होती है तो राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा ऐसा आदेश दे सकेगी जो इस अधिनियम के उपबन्धों से असंगत न हो, और जो उस कठिनाई को दूर करने के लिए उसे आवश्यक या समीचीन प्रतीत हो;
- (2) इस धारा के अन्तर्गत दिया गया प्रत्येक आदेश इसके दिये जाने के पश्चात यथाशीघ्र विधान मण्डल के समक्ष रखा जायेगा ।
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