section 7
सदस्ट्यों की पदावधि
The Chhattisgarh Ayurvigyan Parishad Adhiniyam, 1987(1) इस अधधननयम के उपर्न्धों के अध्यधीन रर्ते र्ुये कोई ननिािधचत या नाम-ननहर्दिष्ट सर्दस्य उस तारीख से, म्िसको िर् धारा 4 की उपधारा (3) में उपर्ंधधत ककये गये अनुसार अपना पर्द ग्रर्ण करता र्ै, पांच िषि की अिधध के ललये पर्द धारण करेगा. परन्तु पर्दािरोर्ी सर्दस्य तर् तक अपने पर्द पर र्ना रर्ेगा िर् तक कक उसका उत्तरा- धधकारी अपना पर्द ग्रर्ण नर्ीं कर लेता । (2) ककसी ननिािधचत या नाम-ननहर्दिष्ट सर्दस्य के सम्र्न्ध में यर् समझा िायेगा कक उसने अपना स्थान ररक्त कर हर्दया र्ै, या िर् पररषद् की राय में, पयािप्त प्रनतर्ेतु के बर्ना, पररषद् के तीन कमिती साधारण सम्म्मलनों से अनुपम्स्थत रर्ता र्ै, अथिा यहर्द िर् रम्िस्रीकृत व्यिसायी नर्ीं रर् िाता र्ै । (3) पररषद् में की गई कोई आकम्स्मक ररक्त, यथासम्भि शीघ्र यथाम्स्थनत ननिािचन या नाम-निर्देशन द्िारा भरी िाएगी और उसी उस ररम्क्त को भरने के ललये ननिािधचत या नामननहर्दिष्ट ककया गया व्यम्क्त, अपने पूििती की अनिलसत अिधध के ललये पर्द धारण करेगा । (4) िर्ां ककसी सर्दस्य की र्ार्त् उक्त पांच िषं की अिधध का अिसान र्ोने िाला र्ो, िर्ां ककसी पर्दोन्ननत का ननिािचन या नाम-ननर्देशन उक्त अिधी का अिसान र्ोने के पूि तीन मास के भीतर ककसी भी समय ककया िा सकेगा ककन्तु िर् तर् तक पर्द ग्रर्ण नर्ीं करेगा िर् तक कक उक्त अिधध का अिसान न र्ो चुका र्ो ।
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