section 2
परििाषाएां
The Chhattisgarh Ayurvigyan Parishad Adhiniyam, 1987इस अधधननयम में, िर् तक सन्र्दभि से अन्यथा अपेक्षित न र्ो- (क) ''पररषद्'' से अलभप्रेत र्ै धारा 3 के अधीन स्थावपत मध्य प्रर्देश आयुविज्ञान पररषद्; (ख) ''भारतीय धचककत्सक रम्िस्टर'' से अलभप्रेत र्ै भारतीय आयुविज्ञान पररषद् अधधननयम 1956 (1956 का सं० 102) की धारा 21 के अधीन रखा गया रम्िस्टर; (ग) ''आयुविज्ञान'' से अलभप्रेत र्ै आधुननक आयुविज्ञान की समस्त शाखाएँ और उसके अन्तगित शल्य विज्ञान और प्रसूनत विज्ञान (अब्स्टस्रेहटक्स) भी र्ै ककन्तु उसके अन्तगित पशु आयुविज्ञान और शल्य विज्ञान नर्ीं र्ै; (घ) ''मान्यता प्राप्त आयुविज्ञान अर्िता '' से अलभप्रेत र्ै- (एक) भारतीय आयुविज्ञान पररषद् अधधननयम 1956 (1956 का सं० 102) की अनुसूधचयों में तत्समय सम्म्मललत आयुविज्ञान अर्िताओं में से कोई अर्िता; (र्दो) अनुसूची में विननहर्दिष्ट आयुविज्ञान अर्िताओं में से कोई अर्िता; (क) ''रम्िस्रीकृत व्यिसायी'' से अलभप्रेत र्ै इस अधधननयम के उपर्न्धों के अधीन राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में नामांककत कोई व्यम्क्त; (ख) ''विननयम'' से अलभप्रेत र्ै धारा 28 के अधीन र्नाया गया कोई विननयम; (ग) ''राज्य धचककत्सक रम्िस्टर'' से अलभप्रेत र्ै धारा 11 के अधीन रखा गया रम्िस्टर ।
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