section 31
निलसन तथा अन्य परिर्ाम
The Chhattisgarh Ayurvigyan Parishad Adhiniyam, 1987इस अधधननयम के प्रारम्भ की तारीख से ननम्न ललखखत पररणाम र्ोगे अथाित्-- (क) सेन्रल प्रविन्सेि एण्ड र्रार मेडीकल रम्िस्रे शन एक्ट, 1916 (क्रमांक 1 सन् 1916) और मध्य प्रर्देश स्टेट यूटरी र्ाँडीि (रीिनल कान्स्टीट यूशन एक्ट 1956 (क्रमांक 17 सन् 1956) िर्ाँ तक कक िर् उक्त एक्ट से सम्र्म्न्धत र्ै मध्यभारत धचककत्सा व्यिसायी रम्िस्रीकरण विधान, 1954 (विधान क्रमांक 16 सन् 1954 तथा मेडीकल प्रेम्क्टशनसि रम्िस्रेशन एक्ट 1935 ( भोपाल एक्ट क्र० 7 सन् 1935) िर्ां तक की िर् धारा 2 के खण्ड (ग) में यथापररभावषत धचककत्सा व्यिसाय करने िाले रम्िस्रीकृत व्यिसानययों से सम्र्म्न्धत र्ै; ननरस्त र्ो िायेंगे; (ख) मर्ाकौशल मेडीकल काउम्न्सल, मध्यभारत (रीिन) धचककत्सा पररषद् तथा मेडीकल प्रेम्क्टशनसि रम्िस्रेशन एक्ट, 1935 (भोपाल एक्ट क० 7 सन् 1935) की धारा 3 के अधीन स्थावपत मेडीकल काउंलसल विघहटत र्ो िाएगी । (ग) खंड (ख) में ननहर्दिष्ट काउँलसल/पररषद् समस्त आम्स्तयां और र्दानयत्ि धारा 3 के अधीन स्थावपत या स्थावपत समझी गई पररषद् की आम्स्तयां तथा र्ो िायेंगे और समझे िायेंगे; (घ) खंड (ख) में ननहर्दिष्ट काउंलसल/पररषद् के समस्त अलभलेख और कागि पत्र, धारा 3 के अधीन स्थावपत या स्थावपत समझी गई पररषद् में ननहर्त र्ो िायेंगे और उसे अन्तररत कर हर्दये िायेंगे ।
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