Bare Act
The Chhattisgarh Ayurvigyan Parishad Adhiniyam, 1987
0. Preamble
मध्य प्रदेश आय ु र्विज्ञान परिषद् अधिननयम, 1987 [क्रमाांक 11 सन ् 1990]
र्वषय-स ू ची
अध्याय 1-प्रािम्भिक
1. सािंधक्षिप्त नाम, र्वस्ट्ताि औि प्रािभि
(1) इस अधधननयम का संक्षिप्त नाम म० प्र० आयुविज्ञान पररषद् अधधननयम, 1987 र्ै । (2) इसका विस्तार सम्पूणि भारत पर र्ै । (3) यर् ऐसी तारीख को प्रिृत्त र्ोगा म्िसे राज्य सरकार, अधधसूचना द्िारा, ननयत करे।
2. परििाषाएां
इस अधधननयम में, िर् तक सन्र्दभि से अन्यथा अपेक्षित न र्ो- (क) ''पररषद्'' से अलभप्रेत र्ै धारा 3 के अधीन स्थावपत मध्य प्रर्देश आयुविज्ञान पररषद्; (ख) ''भारतीय धचककत्सक रम्िस्टर'' से अलभप्रेत र्ै भारतीय आयुविज्ञान पररषद् अधधननयम 1956 (1956 का सं० 102) की धारा 21 के अधीन रखा गया रम्िस्टर; (ग) ''आयुविज्ञान'' से अलभप्रेत र्ै आधुननक आयुविज्ञान की समस्त शाखाएँ और उसके अन्तगित शल्य विज्ञान और प्रसूनत विज्ञान (अब्स्टस्रेहटक्स) भी र्ै ककन्तु उसके अन्तगित पशु आयुविज्ञान और शल्य विज्ञान नर्ीं र्ै; (घ) ''मान्यता प्राप्त आयुविज्ञान अर्िता '' से अलभप्रेत र्ै- (एक) भारतीय आयुविज्ञान पररषद् अधधननयम 1956 (1956 का सं० 102) की अनुसूधचयों में तत्समय सम्म्मललत आयुविज्ञान अर्िताओं में से कोई अर्िता; (र्दो) अनुसूची में विननहर्दिष्ट आयुविज्ञान अर्िताओं में से कोई अर्िता; (क) ''रम्िस्रीकृत व्यिसायी'' से अलभप्रेत र्ै इस अधधननयम के उपर्न्धों के अधीन राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में नामांककत कोई व्यम्क्त; (ख) ''विननयम'' से अलभप्रेत र्ै धारा 28 के अधीन र्नाया गया कोई विननयम; (ग) ''राज्य धचककत्सक रम्िस्टर'' से अलभप्रेत र्ै धारा 11 के अधीन रखा गया रम्िस्टर ।
3. िाज्य आयुर्विज्ञान परिषद् का ननगमन
(1) राज्य सरकार, यथाशक्य शीघ्र, अधधसूचना द्िारा, राज्य के ललए एक आयुविज्ञान पररषद् की स्थापना ऐसी तारीख से करेगी िो अधधसूचना में विननहर्दिष्ट की िाए । (2) पररषद् मध्य प्रर्देश आयुविज्ञान पररषद् के नाम से एक ननगलमत ननकाय र्ोगी और उसका शाश्ित् उत्तराधधकार तथा सामान्य मुरा र्ोगी और उसे िंगम तथा स्थािर र्दोनों प्रकार की सम्पवत्त अम्ित और धारण करने तथा इस अधधननयम के उपर्न्धों के अध्यधीन रर्ते र्ुये, ककसी ऐसी सम्पवत्त की, िो उसके द्िारा धाररत र्ो, आन्तररत करने तथा संविर्दा करने की ओर अपने गठन के प्रयोिनों के ललये आिश्यक समस्त अन्य र्ातें करने की शम्क्त र्ोगी और िर् अपने ननगलमत नाम से िार्द चला सकेगी तथा उक्त नाम से उसके विरुद्ध िार्द चलाया िा सकेगा : परन्तु पररषर्द, राज्य सरकार की पूि अनुमनत के बर्ना, अपने द्िारा धाररत ककसी सपवत्त को विक्रय, र्ंधक पट टा के रूप में या अन्यथा अन्तररत नर्ीं करेगी या ककसी व्यम्क्त या अलभकरण से धन उधार नर्ीं लेगी ।
4. परिषद् का गठन
(1) पररषद् में ननम्नललखखत सर्दस्य र्ोंगे, अथाित्- (क) राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में नामांककत व्यम्क्तयों द्िारा अपने में से ननिािधचत पांच सर्दस्य; (ख) पांच सर्दस्य िो राज्य सरकार द्िारा ननम्नानुसार नाम ननहर्दिष्ट ककये िायेंगे- (एक) इंडडयन मेडडकल एसोलसयेशन, मध्य प्रर्देश राज्य शाखा द्िारा प्रस्तावित ककये िाने िाले पांच व्यम्क्तयों के पैनल में से उक्त एसोलसयेशन की राज्य शाखा का एक प्रनतननधध; (र्दो) राज्य में के विश्िविद्यालयों के आयुविज्ञान संकायों के सर्दस्यों में से एक सर्दस्य; (तीन) मध्य प्रर्देश स्िास््य सेिाओं (मध्य प्रर्देश र्ेल्थ सविसेस) में र्दो सर्दस्य िो प्रथम िगि का पर्द धारण करते र्ों, म्िनमें से एक महर्ला डाक्टर र्ोगी; (चार) राज्य सरकारी धचककत्सा मर्ाविद्यालयों में से एक का संकायाध्यि (डीन); (2) संचालक, धचककत्सों सेिाएँ (डायरेक्टर मेडडकल सविसेस) पररषद् का अध्यि र्ोगा और संकायाध्यि; पररषद् का उपाध्यि र्ोगा । (3) उपधारा (1) के अधीन ननिािधचत या नाम-ननहर्दिष्ट प्रत्येक व्यम्क्त का नाम रािपत्र में प्रकालशत ककया िायेगा और सर्दस्य ऐसे प्रकाशन की तारीख से अपना-अपना पर्द ग्रर्ण करेंगे और उनकी पर्दािधध के प्रयोिनों के ललये; यर् समझा िायेगा कक उन्र्ोंने अपना-अपना पर्द ऐसे प्रकाशन की तारीख से ग्रर्ण कर ललया र्ै । (4) उपाध्यि, अध्यि के ऐसे कत्तिव्यों का पालन करेगा तथा उसकी ऐसी शम्क्तयों का प्रयोग िो अध्यि द्िारा उसे सौंपी िाएँ ।
5. ननवािचन का ढांग
(1) धारा 4 की उपधारा (1) के खण्ड (क) के अधीन ननिािचन का संचालन पररषद् द्िारा ऐसे ननयमों के अनुसार ककया िायेगा िो राज्य सरकार द्िारा इसे ननलमित र्नाये िाएँ । (2) िर्ां पररषद् के ललये ककसी ननिािचन के सम्र्न्ध में कोई वििार्द अद् भूत र्ोता र्ै, यर्ां िर् ऐसी कालािधध के भीतर, िो विहर्त की िाये, राज्य सरकार को ननर्देलशत ककया िायेगा और उस पर राज्य सरकार का विननश्चय अम्न्तम आर्द्धकर र्ोगा ।
6. नाम-ननर्देश या सर्दस्यता पर ननर्िन्धन
कोई भी व्यम्क्त धारा 4 के अधीन ननिािचन या नाम-ननर्देशन के ललये- (एक) पात्र नर्ीं र्ोगा िर् तक कक उसका नाम राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में न रर्े; और (र्दो) र्दो से अधधक क्रमिती अिधधयों के ललये पात्र नर्ीं र्ोगा ।
7. सदस्ट्यों की पदावधि
(1) इस अधधननयम के उपर्न्धों के अध्यधीन रर्ते र्ुये कोई ननिािधचत या नाम-ननहर्दिष्ट सर्दस्य उस तारीख से, म्िसको िर् धारा 4 की उपधारा (3) में उपर्ंधधत ककये गये अनुसार अपना पर्द ग्रर्ण करता र्ै, पांच िषि की अिधध के ललये पर्द धारण करेगा. परन्तु पर्दािरोर्ी सर्दस्य तर् तक अपने पर्द पर र्ना रर्ेगा िर् तक कक उसका उत्तरा- धधकारी अपना पर्द ग्रर्ण नर्ीं कर लेता । (2) ककसी ननिािधचत या नाम-ननहर्दिष्ट सर्दस्य के सम्र्न्ध में यर् समझा िायेगा कक उसने अपना स्थान ररक्त कर हर्दया र्ै, या िर् पररषद् की राय में, पयािप्त प्रनतर्ेतु के बर्ना, पररषद् के तीन कमिती साधारण सम्म्मलनों से अनुपम्स्थत रर्ता र्ै, अथिा यहर्द िर् रम्िस्रीकृत व्यिसायी नर्ीं रर् िाता र्ै । (3) पररषद् में की गई कोई आकम्स्मक ररक्त, यथासम्भि शीघ्र यथाम्स्थनत ननिािचन या नाम-निर्देशन द्िारा भरी िाएगी और उसी उस ररम्क्त को भरने के ललये ननिािधचत या नामननहर्दिष्ट ककया गया व्यम्क्त, अपने पूििती की अनिलसत अिधध के ललये पर्द धारण करेगा । (4) िर्ां ककसी सर्दस्य की र्ार्त् उक्त पांच िषं की अिधध का अिसान र्ोने िाला र्ो, िर्ां ककसी पर्दोन्ननत का ननिािचन या नाम-ननर्देशन उक्त अिधी का अिसान र्ोने के पूि तीन मास के भीतर ककसी भी समय ककया िा सकेगा ककन्तु िर् तर् तक पर्द ग्रर्ण नर्ीं करेगा िर् तक कक उक्त अिधध का अिसान न र्ो चुका र्ो ।
8. परिषद् का सम्भमलन
(1) पररषद्, प्रत्येक िषि में कम से कम र्दो र्ार ऐसे समय और स्थान पर सम्म्मलन करेगी िो अध्यि द्िारा ननयत ककया िाये । (2) िर् तक विननयम द्िारा अन्यथा उपर्म्न्धत न ककया िाए, पररषद् के पांच सर्दस्यों से म्िनमें से कम से कम एक अशासकीय सर्दस्य र्ोगा गणपूती र्ोगी और पररषद् के ककसी सम्म्मलन के समि लाये गय, समस्त प्रश्न, उपम्स्थत तथा मत र्देने िाले सर्दस्यों के र्र्ुमत से विननम्श्चत ककये िाएँगे और मतों के र्रार्र-र्रार्र र्ोने की र्दशा में, पीठासीन प्राधधकारी का द्वितीय या ननणाियक मत र्ोगा ।
9. परिषद् के अध्यि, उपाध्यि औि सदस्ट्यों के ललए ित्ते
पररषद् के अध्यि, उपाध्यि और सर्दस्यों को सम्म्मलनों में र्ाम्िर र्ोने के ललये ऐसे भत्तों का संर्दाय ककया िायेगा िैसा कक पररषद् विननयमों द्िारा अिधाररत करे ।
10. िम्िस्ट्राि औि अन्य अधिकािी
(1) पररषद् राज्य सरकार की पूि मंिूरी से, एक रम्िस्रार ननयुक्त करेगी िो पररषद् के सधचि कोषाध्यि के रूप में कायि करेगा : परन्तु कोई भी व्यम्क्त रम्िस्रार के रूप में ननयुक्त ककया िाने के ललये तर् तक पात्र नर्ीं र्ोगा िर् तक कक िर् रम्िस्रीकृत व्यिसायी न र्ो : परन्तु यर् और भी कक धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन पररषद् की स्थापना के ललए विननहर्दिष्ट की गई तारीख से प्रथम चार िषो के ललये रम्िस्रार िर् व्यम्क्त र्ोगा िो राज्य सरकार द्िारा ननयुक्त ककया िाये और िर् अपना पर्द राज्य सरकार के प्रसार्दपयिन्त धारण करेगा । (2) पररषद् राज्य सरकार के पूि अनुमोर्दन से, अधधकाररयों और सेिकों के उतने पर्द सुम्ित कर सकेगी म्ितने िर् इस अधधननयम के उपर्न्धों को कायािम्न्ित करने के ललये आि- श्यक समझे, और उन पर अधधकाररयों और सेिकों की ननयुक्त कर सकेगी : परन्तु उन पर्दों पर, म्िनका न्यूनतम िेतन Rs. 1820 या उससे अधधक र्ो, पररषर्द द्िारा ननयुम्क्तयां, राज्य सरकार का पूि अनुमोर्दन प्राप्त ककये बर्ना नर्ीं की िाएगी । (3) रम्िस्रार के र्ारे में अर्िताएँ, ननयुम्क्त और सेिा की शते तथा िेतनमान ऐसे र्ोंगे िो विहर्त ककये िाएँ और अन्य कमिचाररयों के र्ारे में िे ऐसे र्ोंगे िो पररषद्, विननयमों द्िारा, उपर्म्न्धत करें । (4) पररषद्, रम्िस्रार से या ककसी अन्य कमिचारी से उसके कतिव्यों के सम्यक् पालन के ललये ऐसी प्रनतभूनत अपेक्षित करेगी और लेंगी िैसी कक िर् आिश्यक समझे । (5) इस धारा के अधीन पररषद् द्िारा ननयुक्त रम्िस्रार और अन्य कमिचारी भारतीय र्दण्ड संहर्ता, 1860 (1860 का सं० 5) की धारा 21 के अथि के अन्तगित लोक सेिक समझे िाएँगे ।
11. Preparation of Register
(1) The Registrar shall prepare and maintain, in accordance with the provisions of this Act, a State Medical Register of medical practitioners for the State. (2) The State Medical Register shall be in such form and shall be divided into such parts as may be prescribed. The Register shall contain the full name and address and qualifications of the registered practitioner, the date on which each qualification was obtained and such other particulars as may be prescribed. (3) Any person who possesses the recognised medical qualification shall, at any time, on making an application in the prescribed form to the Registrar and on payment of such fee as may be prescribed by regulations and on presenting his degree or diploma, as the case may be, and after fulfilling the prescribed formalities, be entitled to have his name entered in the State Medical Register within three months ordinarily: Provided that if any person possesses such more recognised medical qualifications then he shall mention in the application all those recognised medical qualifications which he possesses on the date of making the application: Provided further that any person, who for sufficient cause, is unable to present his degree or diploma, may be registered provisionally for a period not exceeding one year if he satisfies the Council that he holds such degree or diploma. (4) Notwithstanding anything contained in sub-section (3), the name of every such person whose name is entered in the register maintained by the Madhya Pradesh Medical Council or Medical Council, Bhopal, on the day immediately preceding the date of commencement of this Act, shall be entered in the State Medical Register prepared under this Act, without requiring him to apply for this purpose or to pay any fee. (5) Every registered practitioner shall be given a certificate of registration in the prescribed form. The registered practitioner shall display the registration certificate or its certified true copy at some conspicuous place at his place of practice.
12. Maintenance of Register
(1) It shall be the duty of the Registrar of the Council to maintain the State Medical Register in accordance with the provisions of this Act and any orders made by the Council, and to revise the register from time to time in the prescribed manner. The Registrar shall cause the Medical Register to be published in the Gazette and every change made during the year may be published annually in the Gazette. (2) Such register shall be deemed to be a public document within the meaning of the Indian Evidence Act, 1872 (No. 1 of 1872) and may be proved by the copy published in the Gazette.
13. Registration of additional qualifications
(1) Every registered practitioner, who, after the entry of his name in the State Medical Register, obtains any title, degree or diploma, which is a recognised medical qualification, shall be entitled to have the entry made in the State Medical Register in accordance with the provisions of this Act. (2) Every registered practitioner, to whom sub-section (1) applies, on obtaining any title, degree or diploma, which is a recognised medical qualification, shall apply to the Council in such form and within such period as may be prescribed, and with such fee for every qualification obtained as may be prescribed by regulations, for having the entry of such title, degree or diploma made in the State Medical Register either in place of or in addition to any entry previously made: Provided that where such title, degree or diploma has been obtained before the date of commencement of this Act, such application shall be made within six months from the date of such commencement. (3) On receipt of an application under sub-section (1), the Council shall, after the prescribed formalities are fulfilled, ordinarily within three months, make the entry of the title, degree or diploma in the State Medical Register. (4) No registered practitioner, who has obtained any additional qualification, shall be entitled to use that qualification for the purpose of practice or for any other purpose or to derive any benefit from it during the course of practice or for the purpose of employment until he has had the entry of that qualification made in the State Medical Register in accordance with the provisions of this section.
14. Privileges of registered practitioner
(1) Subject to the conditions and rules laid down in this Act or the Indian Medical Council Act, 1956 (No. 102 of 1956) regarding the practice of medicine by persons possessing certain recognised medical qualifications, every such person, whose name is for the time being in the State Medical Register, shall be entitled to practice as medical practitioners within the State according to his qualifications and to recover any expenses, charges or any fees in respect of such practice for medicines (medicaments) or other aids which he is entitled to. (2) A certificate required by any law to be given by a medical practitioner shall not be valid unless it is signed by a registered practitioner and bears his name and registration number seal. (3) Every prescription given by a registered practitioner shall bear the seal of the name and registration number of such registered practitioner. (4) No person other than a registered practitioner shall be qualified to hold any post as physician, surgeon or medical officer in any hospital, asylum, infirmary, dispensary or any other medical institution or as a medical officer in any other branch related to health or medicine.
15. Power of Council to prohibit entry in or direct removal of name from State Medical Register
The Council, on receiving instructions from the Registrar or otherwise, may prohibit the entry of the name of any such person in the State Medical Register or may direct the removal of the name of any such person from that register— (a) who has been convicted by a criminal court for any offence which, in the opinion of the Council, shows such a defect in his character as to make his enrollment in the State Medical Register or the remaining of his name in the State Medical Register undesirable; or (b) who has been found guilty of disgraceful conduct in a professional respect by the Council, after such an inquiry in which he has been given an opportunity of being heard, and which may be held in camera in the discretion of the Council, by a two-thirds majority of the members present and voting in the Council meeting, but such members shall not be less than five.
16. Changes in State Medical Register by Council
(1) The Council may, after giving the concerned person a reasonable opportunity of being heard and after inquiring into his objections, if any, direct that any such entry in the State Medical Register, which in the opinion of the Council has been made fraudulently or by mistake, be removed or amended. (2) The Council may direct the removal of the name of any registered practitioner from the State Medical Register for ever or for any specified period for the same reasons on the basis of which prohibition can be made by it under Section 15. (3) The Council may direct that any name removed under sub-section (2) be restored, subject to such conditions, if any, as the Council deems fit to impose.
17. Procedure in inquiries
For the purpose of any inquiry under Section 12, 15 or 16, the Council or any committee authorised by rules made under Section 29 shall be deemed to be a court within the meaning of the Indian Evidence Act, 1872 (No. 1 of 1872), and shall exercise all powers of a Commissioner appointed under the Public Servants (Inquiries) Act, 1850 (No. 37 of 1850), and such inquiry shall be conducted as far as may be in accordance with the provisions of Section 5 and Sections 8 to 20 of the Public Servants (Inquiries) Act, 1850 (No. 37 of 1850).
18. Appeal against the decision of Council
(1) Any person, who is aggrieved by the decision of the Council made under Section 12, 15 or 16, may appeal to the State Government. (2) Any appeal under sub-section (1) shall be made within three months from the date of receipt of the copy of such decision by the concerned party and shall be accompanied by such fee as may be prescribed by regulations.
19. Council Fund
(1) The Council shall establish a fund which shall be called the Council Fund. (2) The following shall form part of the Council Fund, or shall be paid into it: (a) Any contribution or grant by the Central Government or State Government; (b) Income from all sources of the Council, including income from fees; (c) Trusts, willed (testamentary), donations, endowments and other grants, if any; (d) All other sums received by the Council.
20. Objects for which Council Fund may be utilized
The Council Fund shall be utilized for the following objects, that is to say: (a) For the repayment of those debts which have been incurred by the Council for the purposes of this Act and the rules and regulations made thereunder; (b) For the expenses of any suit or any such proceedings in which the Council is a party; (c) For the payment of salaries and allowances of the employees of the Council; (d) For the payment of allowances to the office-bearers of the Council; (e) For the payment of any such expenses which have been incurred by the Council in implementing the provisions of this Act and the rules and regulations made thereunder.
21. Prohibition of practicing except as provided in this Act or Central Act, 1956
Except as provided in this Act or the Indian Medical Council Act, 1956 (No. 102 of 1956)...
22. राज्य सरकार द्वारा नियंत्रण
यहर्द ककसी भी समय राज्य सरकार को यर् प्रतीत र्ोता र्ै पररषद् ने इस अधधननयम द्िारा या उसके अधीन उसको प्रर्दत्त शम्क्तयों में से ककसी शम्क्त का प्रयोग करने में चूक की र्ै या अनतरेक ककया र्ै उसका र्दुरुपयोग ककया र्ै अथिा इस अधधननयम द्िारा या उसके अधीन उस पर अधधरोवपत कत्तिव्यों में से ककसी कत्तिव्य का पालन करने में चूक की र्ै, तो राज्य सरकार यहर्द िर् ऐसी चूक र्ै अनतरेक या र्दुरूपयोग को गंभीर प्रकृनत का समझती र्ै । उसकी विलशम्ष्टयां पररषद् को अधधसूधचत कर सकेगी, और यहर्द पररषद् ऐसे समय के भीतर िो राज्य सरकार इस ननलमत्त ननयत करें, ऐसी चूक अनतरेक या र्दुरूपयोग का उपचार करने में असफल रर्ती र्ै, तो राज्य सरकार, पररषद् को र्दो िषि की कालािधध के ललए िो राज्य सरकार द्िारा एक र्ार में एक िषि से अधधक न र्ोने िाली कालािधध के ललए र्ढ़ाई िा सकेगी । विघहटत कर सकेगी । ककन्तु विघहटत की कालािधध कुल लमलाकर पाँच िषि से अधधक नर्ीं र्ोगी, और पररषद् की समस्त शम्क्तयों और कत्तिव्यों या उनमें से ककसी शम्क्त या कतिव्य का प्रयोग और पालन व्यम्क्त द्िारा और ऐसी कालािधध के ललए म्िसे िर् ठीक समझें करिा सकेगी और नई पररषद् को अम्स्तत्ि में लाने की कायििार्ी करेगी ।
23. परिषद् द्वारा दी जाने वाली जानकारी और उसका प्रकाशन
(1) पररषद् ऐसी ररपोटि अपने ऐसे कायि िृवत्तयों की प्रनतललवपयां अपने ऐसे लेखाओं की संक्षिम्प्तयां (एब्स्टस्रेक्टस) तथा ऐसी अन्य िानकारी राज्य सरकार को र्देगी िो राज्य सरकार उपेक्षित करें । (2) राज्य सरकार इस धारा के अधीन उसे र्दी गई ककसी ररपोटि प्रनतललवप संक्षिप्त या अन्य िानकारी को ऐसी रीनत में प्रकालशत कर सकेगी िैसी कक िर् उधचत समझे ।
24. शास्ति
यहर्द कोई व्यम्क्त म्िसका नाम राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में अंककत नर्ीं र्ै रम्िस्रीकृत धचककत्सा व्यिसायी के रूप में व्यिसाय करेगा तो िर् कठोर कारािास से, म्िसकी अिधध तीन िषि तक की र्ो सकेगी और िुमािने से िो पांच र्िार रुपये तक का र्ो सकेगा र्दण्डनीय र्ोगा : परन्तु- (एक) ऐसा व्यम्क्त िो र्ैचलर इन आयुिेहर्दक विथ माडिन मेडडलसन एण्ड सिरी की उपाधध रखता र्ो और मध्य प्रर्देश आयुिेहर्दक तथा यूनानी धचककत्सा पद्धनत एिं प्राकृनतक धचककत्सा र्ोडि में रम्िस्रीकृत र्ो, विषम धचककत्सीय औषधधयों (एलोपैधथक मेडडलसन विहर्त करने या शल्य धचककत्सा व्यिसाय करने के ललये, इस धारा के अधीन र्दण्डनीय नर्ीं र्ोगा यहर्द उसका रम्िस्रीकरण प्रमाण-पत्र उसे ऐसा करने के ललये प्राधधकृत नर्ीं करता र्ै; (र्दो) ऐसा धचककत्सा व्यिसायी, िो भारतीय आयुविज्ञान पररषद् अधधननयम, 1956 (1956 का सं० 102) की धारा 27 विशेषाधधकारी का र्कर्दार र्ो, मध्य प्रर्देश में उसका रम्िस्रीकरण न र्ोने के कारण इस धारा के अधीन र्दण्डनीय नर्ीं र्ोगा ।
25. रिक्त के कारण कार्यवाहियाँ आदि अविमान्य नहीं होगी
पररषद् का कोई कायि या उसकी कोई कायििार्ी केिल इस कारण अधधमान्य नर्ीं र्ोगी कक- (क) उसमें कोई ररक्त र्ै या उसके गठन में कोई त्रुहट र्ै; या (ख) उसके सर्दस्य के रूप में कायि करने िाले ककसी व्यम्क्त के ननिािचन या नाम ननर्देशन में कोई त्रुहट र्ै; या (ग) उसकी प्रकक्रया में कोई ऐसी अननयलमतता र्ै िो मामले के गुणािगुण पर प्रभाि नर्ीं डालती र्ै ।
26. सद्भावनापूर्वक की गई कार्यवाही का संरक्षण
इस अधधननयम के अधीन सद् भािपूिक की गई या की िाने के ललये प्राशनयत ककसी भी र्ात के ललये कोई भी िार्द, अलभयोिन या अन्य विधधक कायििार्ी राज्य सरकार, पररषद् या उसकी ककसी सलमनत या सरकार के या पररषद् के विरुद्ध ककसी अधधकारी या सेिक के विरुद्ध नर्ीं र्ोगी ।
27. राज्य सरकार द्वारा नियम बनाने की शक्ति
(1) राज्य सरकार, इस अधधननयम के प्रयोिनों को कायािम्न्ित करने के ललये ननयम, अधधसूचना द्िारा र्ना सकेगी । (2) विलशष्टतया और पूिगामी शम्क्त की व्यापकता पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना ऐसे ननयमों में ननम्नललखखत समस्त विषयों या उनमें से ककसी भी विषय के ललये उपर्न्ध र्ो सकेंगे, अथाित् - (क) रम्िस्रार की अर्िताएँ, ननयुम्क्त तथा सेिा की शते उसका िेतनमान, पद्धािधध तथा शम्क्त और कत्तिव्य; (ख) कोई भी अन्य विषय िो विहर्त ककया िाना र्ो या विहर्त ककया िाए । (3) इस अधधननयम के अधीन र्नाए गए समस्त ननयम विधान सभा के पटल पर रखे िायेंगे ।
28. परिषद द्वारा विनियमन बनाने की शक्ति
पररषद्, साधारणत: इस अधधननयम के प्रयोिनों को कायािम्न्ित करने के ललये विननयम, राज्य सरकार की पूि मंिूरी से र्ना सकेगी, और इस शम्क्त की व्यापकता पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना ऐसे विननयमों में ननम्नललखखत के ललए उपर्न्ध र्ो सकेंगे- (क) पररषद् की सम्पवत्त का प्रर्न्ध तथा उसके लेखाओं का रखा िाना और उनकी सम्परीिा; (ख) पररषर्द के सम्म्मलनों का र्ुलाया िाने का और ककया िान, िर् समय िर् और िर् स्थान िर्ाँ ऐसे सम्म्मलन ककए िाने र्ों, तथा उनमें काम काि का संचालन; पररषद् के सर्दस्यों का त्याग पत्र; (ग) अध्यि और उपाध्यि की शम्क्तयां और कत्तिव्य; (घ) सलमनत की ननयुम्क्त का ढ़ग, ऐसी सलमनत के सम्म्मलनों का र्ुलाया िाना और ककया िाना तथा ऐसी सलमनतयों के काम-काि का संचालन; (ङ) पररषद् के अन्य कमिचाररयों की अर्िताएँ और सेिा की शते; (च) इस अधधननयम के अधीन रम्िस्रीकरण के आिेर्दन में कधथत की िाने िाली विलशम्ष्टयाँ तथा उसके साथ हर्दये िाने िाला अर्िताओं का सर्ूत, (छ) इस अधधननयम के अधीन ककए गये आिेर्दनों तथा अपीलों पर संर्दत्त की िाने िाली फीस; (ि) राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में अनतररक्त अर्ितायें प्रविष्ट कराने के ललये संर्दत्त की िाने िाली फीस; और (झ) कोई भी विषय म्िसके ललये इस अधधननयम के अधीन उपर्न्ध विननयमों द्िारा ककया िา सकता र्ो ।
29. सांच्रमणकालीन उपबन्ध
(1) राज्य सरकार, इस अधधननयम के उपर्न्धों के अनुसार पररषद् को अम्स्तत्ि में लाने के ललए संचालक, धचककत्सा सेिाएँ मध्य प्रर्देश का इस अधधननयम के प्रारम्भ र्ोने के पश्चात् प्रथम र्ार स्थावपत की िाने िाली पररषद् के ननिािचन का संचालन करने के ललये विशेष अधधकारी ननयुक्त कर सकेगी । (2) धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन पररषद् की स्थापना र्ोने तक उपधारा (1) के अधीन ननयुक्त विशेष अधधकारी को इस अधधननयम के प्रयोिनों के ललये धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन स्थावपत पररषद् समझा िाएगा और िर् पररषद् 'की शम्क्तयों का प्रयोग और उसके कत्तिव्यों का ननिर्न करेगा ।
30. धचककत्सा व्यवसानययों को लागू र्ोने वाले सािािर् उपबन्ि
इस अधधननयम के उपर्न्ध, भारतीय आयुविज्ञान पररषद् अधधननयम, 1956 (1956 का सं० 102) के उन उपर्न्धों के म्िनमें समस्त धचककत्सा व्यिसानययों को लागू र्ोने िाले साधारण उपर्न्ध अन्तविष्ट र्ै, अनतररक्त र्ै, न कक उनके अल्पीकारक ।
31. निलसन तथा अन्य परिर्ाम
इस अधधननयम के प्रारम्भ की तारीख से ननम्न ललखखत पररणाम र्ोगे अथाित्-- (क) सेन्रल प्रविन्सेि एण्ड र्रार मेडीकल रम्िस्रे शन एक्ट, 1916 (क्रमांक 1 सन् 1916) और मध्य प्रर्देश स्टेट यूटरी र्ाँडीि (रीिनल कान्स्टीट यूशन एक्ट 1956 (क्रमांक 17 सन् 1956) िर्ाँ तक कक िर् उक्त एक्ट से सम्र्म्न्धत र्ै मध्यभारत धचककत्सा व्यिसायी रम्िस्रीकरण विधान, 1954 (विधान क्रमांक 16 सन् 1954 तथा मेडीकल प्रेम्क्टशनसि रम्िस्रेशन एक्ट 1935 ( भोपाल एक्ट क्र० 7 सन् 1935) िर्ां तक की िर् धारा 2 के खण्ड (ग) में यथापररभावषत धचककत्सा व्यिसाय करने िाले रम्िस्रीकृत व्यिसानययों से सम्र्म्न्धत र्ै; ननरस्त र्ो िायेंगे; (ख) मर्ाकौशल मेडीकल काउम्न्सल, मध्यभारत (रीिन) धचककत्सा पररषद् तथा मेडीकल प्रेम्क्टशनसि रम्िस्रेशन एक्ट, 1935 (भोपाल एक्ट क० 7 सन् 1935) की धारा 3 के अधीन स्थावपत मेडीकल काउंलसल विघहटत र्ो िाएगी । (ग) खंड (ख) में ननहर्दिष्ट काउँलसल/पररषद् समस्त आम्स्तयां और र्दानयत्ि धारा 3 के अधीन स्थावपत या स्थावपत समझी गई पररषद् की आम्स्तयां तथा र्ो िायेंगे और समझे िायेंगे; (घ) खंड (ख) में ननहर्दिष्ट काउंलसल/पररषद् के समस्त अलभलेख और कागि पत्र, धारा 3 के अधीन स्थावपत या स्थावपत समझी गई पररषद् में ननहर्त र्ो िायेंगे और उसे अन्तररत कर हर्दये िायेंगे ।
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