section 4
परिषद् का गठन
The Chhattisgarh Ayurvigyan Parishad Adhiniyam, 1987(1) पररषद् में ननम्नललखखत सर्दस्य र्ोंगे, अथाित्- (क) राज्य धचककत्सक रम्िस्टर में नामांककत व्यम्क्तयों द्िारा अपने में से ननिािधचत पांच सर्दस्य; (ख) पांच सर्दस्य िो राज्य सरकार द्िारा ननम्नानुसार नाम ननहर्दिष्ट ककये िायेंगे- (एक) इंडडयन मेडडकल एसोलसयेशन, मध्य प्रर्देश राज्य शाखा द्िारा प्रस्तावित ककये िाने िाले पांच व्यम्क्तयों के पैनल में से उक्त एसोलसयेशन की राज्य शाखा का एक प्रनतननधध; (र्दो) राज्य में के विश्िविद्यालयों के आयुविज्ञान संकायों के सर्दस्यों में से एक सर्दस्य; (तीन) मध्य प्रर्देश स्िास््य सेिाओं (मध्य प्रर्देश र्ेल्थ सविसेस) में र्दो सर्दस्य िो प्रथम िगि का पर्द धारण करते र्ों, म्िनमें से एक महर्ला डाक्टर र्ोगी; (चार) राज्य सरकारी धचककत्सा मर्ाविद्यालयों में से एक का संकायाध्यि (डीन); (2) संचालक, धचककत्सों सेिाएँ (डायरेक्टर मेडडकल सविसेस) पररषद् का अध्यि र्ोगा और संकायाध्यि; पररषद् का उपाध्यि र्ोगा । (3) उपधारा (1) के अधीन ननिािधचत या नाम-ननहर्दिष्ट प्रत्येक व्यम्क्त का नाम रािपत्र में प्रकालशत ककया िायेगा और सर्दस्य ऐसे प्रकाशन की तारीख से अपना-अपना पर्द ग्रर्ण करेंगे और उनकी पर्दािधध के प्रयोिनों के ललये; यर् समझा िायेगा कक उन्र्ोंने अपना-अपना पर्द ऐसे प्रकाशन की तारीख से ग्रर्ण कर ललया र्ै । (4) उपाध्यि, अध्यि के ऐसे कत्तिव्यों का पालन करेगा तथा उसकी ऐसी शम्क्तयों का प्रयोग िो अध्यि द्िारा उसे सौंपी िाएँ ।
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