section 10
िम्िस्ट्राि औि अन्य अधिकािी
The Chhattisgarh Ayurvigyan Parishad Adhiniyam, 1987(1) पररषद् राज्य सरकार की पूि मंिूरी से, एक रम्िस्रार ननयुक्त करेगी िो पररषद् के सधचि कोषाध्यि के रूप में कायि करेगा : परन्तु कोई भी व्यम्क्त रम्िस्रार के रूप में ननयुक्त ककया िाने के ललये तर् तक पात्र नर्ीं र्ोगा िर् तक कक िर् रम्िस्रीकृत व्यिसायी न र्ो : परन्तु यर् और भी कक धारा 3 की उपधारा (1) के अधीन पररषद् की स्थापना के ललए विननहर्दिष्ट की गई तारीख से प्रथम चार िषो के ललये रम्िस्रार िर् व्यम्क्त र्ोगा िो राज्य सरकार द्िारा ननयुक्त ककया िाये और िर् अपना पर्द राज्य सरकार के प्रसार्दपयिन्त धारण करेगा । (2) पररषद् राज्य सरकार के पूि अनुमोर्दन से, अधधकाररयों और सेिकों के उतने पर्द सुम्ित कर सकेगी म्ितने िर् इस अधधननयम के उपर्न्धों को कायािम्न्ित करने के ललये आि- श्यक समझे, और उन पर अधधकाररयों और सेिकों की ननयुक्त कर सकेगी : परन्तु उन पर्दों पर, म्िनका न्यूनतम िेतन Rs. 1820 या उससे अधधक र्ो, पररषर्द द्िारा ननयुम्क्तयां, राज्य सरकार का पूि अनुमोर्दन प्राप्त ककये बर्ना नर्ीं की िाएगी । (3) रम्िस्रार के र्ारे में अर्िताएँ, ननयुम्क्त और सेिा की शते तथा िेतनमान ऐसे र्ोंगे िो विहर्त ककये िाएँ और अन्य कमिचाररयों के र्ारे में िे ऐसे र्ोंगे िो पररषद्, विननयमों द्िारा, उपर्म्न्धत करें । (4) पररषद्, रम्िस्रार से या ककसी अन्य कमिचारी से उसके कतिव्यों के सम्यक् पालन के ललये ऐसी प्रनतभूनत अपेक्षित करेगी और लेंगी िैसी कक िर् आिश्यक समझे । (5) इस धारा के अधीन पररषद् द्िारा ननयुक्त रम्िस्रार और अन्य कमिचारी भारतीय र्दण्ड संहर्ता, 1860 (1860 का सं० 5) की धारा 21 के अथि के अन्तगित लोक सेिक समझे िाएँगे ।
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