section 42
नियम बनाने की शक्ति
The Act of Madhya Pradesh Niji Vishwavidyalaya (Sthapna evam Sanchalan) adhiniyam 2007(1) राज्य सरकार, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना द्वारा नियम बना सकेगी। (2) पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, इन नियमों में निम्नलिखित समस्त मामलों के या किसी मामले के बारे में उपबंध किया जा सकेगा, अर्थात्:- (क) निजी विश्वविद्यालय की स्थापना संबंधी प्रस्ताव की रीति तथा धारा 4 की उपधारा (1) के अंतर्गत देय फीस; (ख) धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन परियोजना रिपोर्ट में निहित किए जाने वाले अन्य ब्यौरे; (ग) धारा 11 की उपधारा (3) के अधीन विन्यास निधि की स्थापना, निवेश, की रीति उससे होने वाली आय का प्रायोजी निकाय को भुगतान, उसके समपहरन तथा प्रायोजी निकाय को वापस करने की पद्धति; (घ) धारा 12 के परंतुक अधीन निजी विश्वविद्यालय से फीस का संग्रहण और इस प्रकार संग्रहीत राशि को संचित निधि में जमा करने की पद्धति; (ड.) धारा 25 की उपधारा (1) के अधीन अन्य विषय, जिनका उपबंध परिनियमों द्वारा किया जाना है; (च) विनियामक आयोग के आदेशों तथा विनिश्चयों और विनियामक आयोग द्वारा जारी की गई लिखितों के अधिप्रमाणीकरण की पद्धति, सभापति (चेयरमेन) तथा सदस्यों की सेवा के निबंधन तथा शर्तें, विनियामक आयोग की बैठक की प्रक्रिया, विनियामक आयोग के कर्मचारिवृन्द और उनकी सेवा शर्तें का उपबंध, विनियामक आयोग के साथ व्यक्तियों का अस्थायी सहयोजन, उसका बजट, वार्षिक रिपोर्ट, लेखे तथा संपरीक्षा और ऐसे अन्य मामले जो धारा 36 की उपधारा (1) के अधीन विनियामक आयोग के समुचित कार्यकरण के लिए आवश्यक हों; (छ) अन्य मामले जिनका इस अधिनियम के अधीन नियमों द्वारा विहित किया जाना अपेक्षित हो। (3) इस अधिनियम के अधीन बनाए गए समस्त नियम विधान सभा के पटल पर रखे जाएंगे।
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