section 36
विनियामक आयोग.
The Act of Madhya Pradesh Niji Vishwavidyalaya (Sthapna evam Sanchalan) adhiniyam 2007३६. (१) राज्य सरकार द्वारा, राज्य स्तर पर विनियामक संरचना प्रदाय करने के प्रयोजन से तथा अध्यापन, परीक्षा, गवेषणा, विस्तार कार्यक्रम, छात्रों के हितों का संरक्षण तथा कर्मचारियों की युक्तियुक्त सेवा शर्तों को सुनिश्चित करने के प्रयोजन हेतु और राज्य सरकार तथा केन्द्रीय विनियामक निकायों के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य करने के लिए, एक विनियामक आयोग की स्थापना की जाएगी.
(२) विनियामक आयोग, कुलाध्यक्ष के सामान्य नियंत्रण के अधीन कार्य करेगा.
(३) विनियामक आयोग में एक सभापति (चेयरमेन) और दो पूर्णकालिक सदस्य होंगे जिनमें से एक सदस्य "शैक्षणिक" और दूसरा सदस्य, "सदस्य-प्रशासनिक" होगा तथा दो से अनधिक अंशकालिक सदस्य होंगे.
(४) विनियामक में आयोग एक पूर्णकालिक या अंशकालिक सचिव होगा.
(५) कुलाध्यक्ष द्वारा सभापति (चेयरमेन) की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा अनुशंसित पैनल में से की जायेगी, जिसमें ऐसे प्राप्त शिक्षाविद सम्मिलित होंगे, जिन्हें उच्चतर शिक्षा की संस्थाओं के कार्य का पूर्ण ज्ञान हो.
(६) सदस्य तथा सचिव की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा अनुशंसित पैनल में से कुलाध्यक्ष द्वारा की जायेगी, जिसमें वित्त, विधि, प्रशासन और प्रबंधन के क्षेत्र के विख्यात व्यक्ति होंगे.
(७) सभापति (चेयरमेन) तथा सदस्य, इस अधिनियम के अधीन स्थापित किन्हीं निजी विश्वविद्यालयों से किसी संबद्ध नहीं होंगे.
(८) विनियामक आयोग का सभापति (चेयरमेन) तथा सदस्य उस तारीख, से जिसको वह अपना पद ग्रहण करता इसके पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक, इनमें से जो पूर्वतर हो, क्रमशः तीन वर्ष तथा दो वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा और वह पैंसठ वर्ष की उच्चतर आयु सीमा के अध्यधीन रहते हुए पूर्वोक्त वर्षों की द्वितीय अवधि के लिए विचार किए जाने हेतु पात्र होगा : परन्तु यथास्थिति, तीन वर्ष या दो वर्ष की उक्त कालावधि का अवसान होने पर भी वह उसके उत्तराधिकारी के नियुक्त होने और अपना पद ग्रहण करने तक पद पर बना रहेगा किन्तु ऐसी कालावधि छह मास से अधिक नहीं होगी : परन्तु यह और कि अवधि के अवसान के पश्चात् विनियामक आयोग का सभापति (चेयरमेन) तथा सदस्य किसी भी रूप में या किसी भी नाम में, चाहे वह जो भी हो, किन्हीं आर्थिक फायदों और इस अधिनियम के अधीन स्थापित निजी विश्वविद्यालयों में से किसी विश्वविद्यालय में कोई कर्तव्यभार या नियोजन स्वीकार करने से प्रतिषिद्ध होगा.
(९) विनियामक आयोग के सभापति (चेयरमेन) तथा सदस्यों की सेवा के अन्य निबंधन तथा शर्तें, विनियामक आयोग के आदेशों तथा विनिश्चयों के अधिप्रमाणन की पद्धति और विनियामक आयोग द्वारा जारी की गई लिखत, विनियामक आयोग के बैठक की प्रक्रिया, विनियामक आयोग के कर्मचारीवृन्द की भरती तथा सेवा शर्तें, विशिष्ट प्रयोजन के लिए विनियामक आयोग के साथ व्यक्तियों का अस्थायी संयोजन, विनियामक आयोग की निधि, उसका बजट, वार्षिक रिपोर्ट, लेखे, संपरीक्षा और ऐसे अन्य विषयों के संबंध में, जो विनियामक आयोग के उचित कार्यकरण के लिए अपेक्षित हो, राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में बनाए गए नियमों में उपबंध किया जाएगा.
(१०) विनियामक आयोग का यह सामान्य कर्तव्य होगा कि वह :— (क) निजी विश्वविद्यालयों में अध्यापन, परीक्षा और गवेषणा का मानक बनाए रखने के लिये समस्त ऐसे कदम उठाए जिन्हें वह आवश्यक समझे;
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