section 22
कार्य परिषद् की शक्तियां तथा कृत्य
The Dr. B.R.Ambedkar University of Social Sciences Act, 2015Education201527 sections
Statutory text
- (1) कार्य परिषद् निम्नलिखित शक्तियों का प्रयोग तथा कृत्यों का पालन करेगी— (एक) समय-समय पर विश्वविद्यालय के अध्यादेश एवं परिनियमों से अनअसंगत विनियम बनाना एवं उन्हें संशोधित करना; (दो) शिक्षक वर्ग के पदों के वेतनमान के साथ-साथ अर्हताएं, पारिश्रमिक, कर्तव्य, सेवा शर्तें, अनुशासनिक तथा अपील प्राधिकारी सृजित करना तथा वर्गीकृत करना तथा निर्धारित करना; (तीन) ग्रंथपाल, आचार्य, सह आचार्य, सहायक आचार्य और शिक्षक वर्ग के उतने अन्य सदस्यों को, इस प्रयोजन हेतु विनियमों द्वारा गठित की गई चयन समिति की सिफारिश पर, समय-समय पर नियुक्त करना जो कि आवश्यक हों: परंतु शैक्षणिक पदों का सृजन राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से किया जाएगा; (चार) राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से प्रशासकीय, लिपिकीय एवं आवश्यक पदों को सृजित करना तथा इन पदों की न्यूनतम अर्हताएं तथा परिलब्धियां निर्धारित करना; (पांच) विश्वविद्यालय के वित्त, लेखे, निवेश, संपत्ति और सभी अन्य प्रशासनिक मामलों का प्रबंध करना तथा उन्हें विनियमित करना तथा उस प्रयोजन के लिये उतने अभिकर्ताओं की नियुक्ति करना जितने कि वह आवश्यक समझे; (छह) क्रय, दान, विनियमन, पट्टे, भाड़े द्वारा या अन्यथा ऐसी चल या अचल संपत्ति या निधियां अर्जित करना जो विश्वविद्यालय के उद्देश्यों तथा अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों; (सात) विश्वविद्यालय की किसी चल या अचल संपत्ति को बेचना, बंधक रखना, भारित करना/पट्टे पर देना, विनिमय करना या अन्यथा अंतरण या व्ययन करना; (आठ) बांड, डिबेंचर और वचन पत्रों या अन्य बाध्यताओं या विश्वविद्यालय की प्रतिभूतियों पर, विश्वविद्यालय की किसी स्थावर अथवा जंगम संपत्ति के बंधक, भार, आड़मान अथवा गिरवी द्वारा ऐसे धन जुटाना अथवा उधार लेना जो कि विश्वविद्यालय के प्रयोजन के लिए आवश्यक हों; (नौ) शिक्षक वर्ग के विरुद्ध अनुशासनत्मक कार्यवाही में जांच के प्रतिवेदन पर विचार करना, जहां विश्वविद्यालय के परिनियमों के अनुसार दीर्घ दण्ड प्रस्तावित हो; (दस) अध्यादेश में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामलों में अपील प्राधिकारी के रूप में कृत्य करना; (ग्यारह) (क) वार्षिक प्रतिवेदन; (ख) वार्षिक लेखे तथा संपरीक्षक का प्रतिवेदन; (ग) वार्षिक बजट; पर विचार करना तथा उनका अनुमोदन करना। (बारह) बजट में यथा अनुमोदित, आवर्ती और अनावर्ती मदों पर व्यय मंजूर करना; (तेरह) एक बजट शीर्ष से दूसरे बजट शीर्ष में निधियों को पुनर्विनियोजित करना; (चौदह) शासी निकाय के समक्ष विचारण हेतु रखे जाने से पूर्व समस्त मामलों की छंटनी कर उनकी अनुशंसा करना; (पंद्रह) कार्य परिषद् द्वारा समय-समय पर यथा नियत ऐसी सीमाओं से अधिक मौद्रिक मूल्य के अभियांत्रिकी कार्यों, पूंजीगत उपस्कर के क्रय और योजनाओं तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन का अनुमोदन प्रदान करना; (सोलह) विश्वविद्यालय की सामान्य मुद्रा का चयन करना और ऐसी मुद्रा की अभिरक्षा तथा उपयोग हेतु उपबंध करना; (सत्रह) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करना तथा ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करना जैसे कि शासी निकाय द्वारा उसे प्रदत्त या प्रत्यायोजित किए जाएं; (अठारह) विश्वविद्यालय के कुलपति को या उसके द्वारा नियुक्त समिति को, जिसे कि वह उचित समझे, अपनी किन्हीं शक्तियों का प्रत्यायोजित करना। (2) कार्य परिषद् : (एक) विश्वविद्यालय के उद्देश्यों की पूर्ति तथा अभिवृद्धि हेतु नये विभागों, अनुसंधान तथा विकास केन्द्रों, विस्तार तथा प्रशिक्षण केन्द्रों का सृजन कर सकेगी। (दो) राज्य सरकार के वित्त विभाग के निर्बंधन के अधीन रहते हुए, नवीन विद्यालयों, संचालनालयों तथा संस्थाओं के सृजन हेतु शासी निकाय को अनुशंसा कर सकेगी।
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