Bare Act
The Dr. B.R.Ambedkar University of Social Sciences Act, 2015
1. Short title
This Act may be called the Dr. B.R. Ambedkar University of Social Sciences Act, 2015.
2. Definitions
In this Act, unless the context otherwise requires,— (क) "Academic Council" means the Academic Council of the University; (ख) "Chancellor" means the Chancellor of the University; (ग) "Dean" means the Dean of the School of the University; (घ) "Dean Student Welfare" means the Dean Student Welfare of the University; (ङ) "Department" means a Department of the University; (च) "Director" means the Director of Extension and Training of the University; (छ) "Executive Council" means the Executive Council of the University; (ज) "Finance Controller" means the Finance Controller of the University; (झ) "Governing Body" means the Governing Body of the University; (ञ) "Hall" means a unit of residence or of corporate life for the students of the University, or a body, by whatever name it may be known, maintained by the University; (ट) "Prescribed" means prescribed by the Statutes, Ordinances or Regulations; (ठ) "Recognized Institution" means an institution maintained or recognized by, or associated with, the University; (ड) "Registrar" means the Registrar of the University; (ढ) "Centre" means a Centre maintained by the University; (ण) "Statutes", "Ordinance" and "Regulations" mean respectively the Statutes, Ordinances and Regulations of the University for the time being in force; (त) "University" means the Dr. B.R. Ambedkar University of Social Sciences established under section 3; (थ) "University Grants Commission" means the University Grants Commission established under section 4 of the University Grants Commission Act, 1956 (No. 3 of 1956); (द) "Vice-Chancellor" means the Vice-Chancellor of the University;
3. Establishment and incorporation of the University
- (1) A University by the name of "Dr. B.R. Ambedkar University of Social Sciences" shall be established in the State of Madhya Pradesh.
- (2) The headquarters of the University shall be at Dr. Ambedkar Nagar (Mhow), District Indore, Madhya Pradesh.
- (3) The University shall be a body corporate by the aforesaid name, having perpetual succession and a common seal and shall by the said name sue and be sued.
4. Objects of the University
- (1) The object of the University shall be to promote higher education, research, extension and training in social sciences and other subjects through creative approach along with development of technical skills for social and economic development of Scheduled Castes, Scheduled Tribes and other backward classes and for academic excellence.
- (2) The objects of the University shall be as follows:— (एक) to disseminate and advance knowledge, wisdom and understanding through teaching, research and extension and to sensitize and train functionaries in evolving and implementing policies and programs focused on social, economic and academic development of Scheduled Castes, Scheduled Tribes and other backward classes; (दो) to provide institutional and research facilities in such branches of learning as may be required for the objects of the University; (तीन) to establish networks with national and international universities, institutions and organizations for higher education in the areas of social, economic or academic development, social evils, superstitious practices, discriminatory practices, by utilizing modern tools and techniques, contemporary approaches, norms and standards, strategies, views, plans and programs, beyond the international standing of faculty and students in teaching, research, extension and training activities, irrespective of caste, creed, race, religion, ethnicity, region, language, gender; (चार) to organize integrated courses at postgraduate and higher levels in social sciences and relevant programs in technical and other subjects, including engineering, medical sciences, management studies, agricultural technology and basic frontiers of rural crafts, to facilitate socio-economic development of the deprived sections; (पांच) to contribute significantly in the area of social, economic and academic development and empowerment of socially deprived sections according to the vision of various social thinkers and reformers initiated by Dr. B.R. Ambedkar; (छ) to conduct studies for finding out appropriate remedial measures for social, economic and academic inequality, disability and discrimination arising from the caste system and its various aspects like inertia and resistance to change; (सात) to discover innovative strategies by combining technical advancement with scientific approaches of social sciences focused on socio-economic development, poverty eradication and rooting out social evils, social inequalities and injustice.
5. Jurisdiction of the University
(१) विश्वविद्यालय की अधिकारिता संपूर्ण मध्यप्रदेश पर होगी। (२) विश्वविद्यालय, शासी निकाय के अनुमोदन से अपनी शिक्षा, गवेषणा विस्तार तथा प्रशिक्षण की गतिविधियों को आंशिक रूप से या पूर्ण रूप से क्रियान्वित करने के लिए मध्यप्रदेश राज्य के बाहर या विदेश में जिसमें विदेशी छात्र सम्मिलित हैं, किसी संस्था के साथ सहयोग कर सकेगा।
6. Prohibition of discrimination in all matters relating to the University
विश्वविद्यालय, इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसे प्रदत्त या उस पर अधिरोपित शक्तियों का प्रयोग अथवा कृत्यों का पालन करने में भारत के किसी भी नागरिक के साथ धर्म, वंश, जाति, नस्ल, लिंग, जन्म-स्थान, राजनैतिक या अन्य अभिमत के आधार पर या उनमें से किसी भी आधार पर विभेद नहीं करेगा।
7. Powers and functions of the University
विश्वविद्यालय की निम्नलिखित शक्तियां और कृत्य होंगे, अर्थात् :- (एक) शिक्षा, गवेषणा, विस्तार एवं प्रशिक्षण के लिए विभाग/केन्द्र और ऐसी अन्य इकाईयां स्थापित करना जैसी कि इसके उद्देश्यों को पूरा करने के लिये आवश्यक हों; (दो) पहिर्वर्ती शिक्षण, विस्तार एवं प्रशिक्षण गतिविधियां, व्यक्तित्व एवं कौशल विकास, क्षमता निर्माण और उपचारी पाठ्यक्रम आयोजित करना एवं उनका जिम्मा लेना; (तीन) शिक्षण के लिए, जिसमें दूरस्थ शिक्षा में अध्ययन की ऐसी शाखाएं सम्मिलित हैं जिन्हें कि विश्वविद्यालय समय-समय पर अवधारित करे, व्यवस्था करना और गवेषणा के लिये एवं ज्ञान के उन्नयन एवं प्रसार के लिए उपबंध करना; (चार) प्रवेश के लिये परीक्षा आयोजित करना और व्यक्तियों को उपाधि-पत्र या प्रमाण-पत्र देना और उपाधियां तथा विद्या संबंधी अन्य विशिष्टाएं प्रदान करना और ऐसे किन्हीं उपाधि-पत्रों, प्रमाण-पत्रों, उपाधियों या विद्या संबंधी अन्य विशिष्टताओं का युक्तियुक्त तथा पर्याप्त कारणों से प्रत्याहरण करना; (पांच) अध्यादेश में अभिकथन रीति से सामाजिक उपाधियां या विद्या संबंधी अन्य विशिष्टताएं प्रदान करना; (छह) ऐसे अध्यापन, तकनीकी, प्रशासनिक तथा अन्य पदों का सृजन करना जो कि विश्वविद्यालय समय-समय पर, आवश्यक समझे और उन पर नियुक्तियां करना; (सात) आचार्य, सह-आचार्य, सहायक आचार्य के रूप में व्यक्तियों को नियुक्त करना या अन्यथा विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों के रूप में मान्यता देना; (आठ) अध्येतावृत्तियां, छात्रवृत्तियां, अभिनंदन तथा पुरस्कार संस्थित करना तथा प्रदान करना; (नौ) डॉ. बी. आर. अम्बेडकर और बौद्ध धर्म की विचारधारा, विचार, दर्शन तथा सिद्धांतों पर लेखन और व्याख्यान, साहित्य के संदर्भ में संग्रहालय, कला विधि, पुस्तकालय सृजित करना; (दस) विश्वविद्यालय के छात्रों तथा कर्मचारियों में अनुशासन विनियमित करना एवं उसका पालन करवाना और इस संबंध में ऐसे अनुशासनात्मक उपाय करना जो कि आवश्यक समझे जाएं; (ग्यारह) विश्वविद्यालय के छात्रों एवं कर्मचारियों के स्वास्थ्य एवं सामान्य कल्याण को प्रोन्नत करने के लिए व्यवस्था करना; (बारह) ऐसे प्रयोजनों के लिए, जिन पर परस्पर सहमति हो, ऐसे निबंधनों तथा शर्तों पर, जो कि समय-समय पर विहित किए जाएं, उन उद्देश्यों को प्रोन्नत करने की दृष्टि से, जो कि विश्वविद्यालय के समान हो, भारत तथा विदेश में किसी अन्य विश्वविद्यालय, प्राधिकारी या कोई सार्वजनिक अथवा निजी निकाय के साथ सहयोग करना; (तेरह) केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या अन्य प्राधिकारियों के साथ अनुदान प्राप्त करने और किसी अन्य संस्था के विश्वविद्यालय में निगमन के लिये भी और इसके अधिकार, संपत्तियां प्राप्त करने और किसी ऐसे अन्य प्रयोजन के लिये जो इस अधिनियम से असंगत न हो, कोई करार करना; (चौदह) ऐसे शुल्क तथा अन्य प्रभार, जिसमें समय-समय पर यथाविहित स्ववित्तीय पाठ्यक्रम सम्मिलित है, की मांग करना तथा भुगतान प्राप्त करना; (पन्द्रह) दान प्राप्त करना और विश्वविद्यालय के उद्देश्यों के लिये कोई चल-अचल संपत्ति जिसमें मध्यप्रदेश राज्य के भीतर अथवा बाहर स्थित न्यास अथवा विन्यास संपत्ति सम्मिलित है, अर्जित करना, धारण करना और व्ययन करना, और निधियों का ऐसी रीति में निवेश करना, जैसी कि विश्वविद्यालय उचित समझे; (सोलह) शोध एवं सलाहकारी एवं परामर्शी सेवाओं के लिये उपबंध करना और उस प्रयोजन के लिये अन्य संस्थाओं या निकायों के साथ ऐसे करार करना जैसा कि विश्वविद्यालय आवश्यक समझे; (सत्रह) शोध तथा अन्य कार्यों के, जो कि विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए जाएं, मुद्रण प्रत्युत्पादन और प्रकाशन की व्यवस्था करना; (अठारह) राज्य सरकार के अनुमोदन से, विश्वविद्यालय के मामलों के प्रयोजन के लिए, विश्वविद्यालय की संपत्ति की प्रतिभूति पर धन उधार लेना; (उन्नीस) समस्त ऐसे कार्य तथा बातें, जो विश्वविद्यालय के समस्त या उनमें से किसी उद्देश्य को प्राप्त करने या उसमें अभिवृद्धि करने के लिए आवश्यक, सहायक या आनुषंगिक हों।
8. Kulpati (Chancellor)
(१) मध्यप्रदेश का राज्यपाल विश्वविद्यालय का कुलाधिपति होगा। (२) वह उपाधि प्रदान करने के लिए दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करेगा और शासी निकाय के सम्मिलन की अध्यक्षता करेगा।
9. Kulpati (Vice-Chancellor)
(१) कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति द्वारा ऐसी रीति में तथा ऐसी शक्तियों तथा कर्तव्यों के साथ जैसा कि परिनियमों में विहित किया जाए, पांच वर्ष की कालावधि अथवा ७० वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पूर्वतर हो, के लिए की जाएगी। (२) कुलपति, विश्वविद्यालय का मुख्य प्रशासनिक एवं शैक्षणिक अधिकारी होगा और कार्य परिषद तथा विद्या परिषद के सम्मिलनों की अध्यक्षता करेगा। (३) कुलाधिपति की अनुपस्थिति में, कुलपति उपाधि प्रदान हेतु दीक्षांत समारोह और शासी निकाय के सम्मिलन की अध्यक्षता करेगा।
10. Officers of the University
विश्वविद्यालय के अधिकारियों में संचालक, अध्ययन केन्द्र का संकायाध्यक्ष, संकायाध्यक्ष छात्र कल्याण, कुलसचिव, वित्त नियंत्रक और ऐसे अन्य अधिकारी सम्मिलित होंगे, जिन्हें कि परिनियमों द्वारा विश्वविद्यालय का अधिकारी घोषित किया जाए।
11. Director
एक निदेशक होगा, जो ऐसी रीति में, ऐसी शक्तियों तथा कर्तव्यों, जिसमें प्रशिक्षण तथा विस्तार सम्मिलित है, सहित नियुक्त किया जाएगा जैसा कि विनियमों में विहित किया जाए।
12. Dean
प्रत्येक केन्द्र के लिए एक संकायाध्यक्ष होगा, जो ऐसी रीति में, ऐसी शक्तियों तथा कर्तव्यों सहित नियुक्त किया जाएगा जो कि विनियमों में विहित किए जाएं।
13. Dean Student Welfare
एक संकायाध्यक्ष छात्र कल्याण होगा, जो ऐसी रीति में ऐसी शक्तियों तथा कर्तव्यों सहित नियुक्त किया जाएगा, जो कि विनियमों में विहित किए जाएं।
14. Registrar
एक कुलसचिव होगा, जो शासी निकाय, कार्य परिषद तथा विद्या परिषद के सचिव के रूप में कार्य करेगा और जो मध्यप्रदेश राज्य विश्वविद्यालय सेवा नियम, १९८३ में यथाविनिर्दिष्ट रीति में, इसके सदस्यों में से नियुक्त किया जाएगा। उसकी शक्तियां तथा कर्तव्य विनियमों में विहित किए जा सकेंगे।
15. Finance Controller
एक वित्त नियंत्रक होगा जो वित्त समिति का सचिव होगा और मध्यप्रदेश राज्य विश्वविद्यालय सेवा नियम, १९८३ में यथाविनिर्दिष्ट रीति में नियुक्त किया जाएगा। उसकी शक्तियां तथा कर्तव्य विनियमों में विहित किए जा सकेंगे।
16. Authorities of the University
विश्वविद्यालय के निम्नलिखित प्राधिकारी होंगे:- (एक) शासी निकाय; (दो) कार्य परिषद; (तीन) विद्या परिषद; (चार) वित्त समिति; और (पांच) ऐसे अन्य प्राधिकारी जो परिनियमों द्वारा विहित किए जाएं।
17. Governing Body
(१) मध्यप्रदेश के राज्यपाल की अध्यक्षता में शासी निकाय विश्वविद्यालय का सर्वोच्च प्राधिकरण होगा। पदेन सदस्यों से भिन्न इसके सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। अशासकीय सदस्य, कुलपति के परामर्श से राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाएंगे। (२) शासी निकाय को कार्य परिषद तथा विद्या परिषद के कार्यों का पुनर्विलोकन करने की शक्ति होगी (सिवाय तब के जब कि इन अधिकारियों ने इस अधिनियम, परिनियमों अथवा अध्यादेशों द्वारा उन्हें प्रदत्त शक्तियों के अनुसार कार्य किया हो) और वह विश्वविद्यालय की उन समस्त शक्तियों का प्रयोग करेगा जो इस अधिनियम, परिनियमों, अध्यादेशों या विनियमों द्वारा अन्यथा उपबंधित नहीं की गई हों: परन्तु इस उपधारा के अधीन पुनर्विलोकन की शक्ति का, शासी निकाय के कुल सदस्यों के बहुमत से तथा उपस्थित तथा मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत के सिवाय प्रयोग नहीं किया जाएगा। (३) शासी निकाय की बैठक हेतु गणपूर्ति शासी निकाय के एक-तिहाई सदस्यों से कम नहीं होगी।
18. Constitution of the Governing Body
विश्वविद्यालय का शासी निकाय निम्नलिखित से मिलकर बनेगा: (एक) विश्वविद्यालय का कुलाधिपति-अध्यक्ष (दो) विश्वविद्यालय का कुलपति-उपाध्यक्ष पदेन सदस्य: (तीन) प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग अथवा उपसचिव से अनिम्र श्रेणी का उसका नामनिर्दिष्टी; (चार) प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, आदिम जाति कल्याण विभाग अथवा उपसचिव से अनिम्र श्रेणी का उसका नामनिर्दिष्टी; (पांच) प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग अथवा उपसचिव से अनिम्र श्रेणी का उसका नामनिर्दिष्टी; (छह) प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, वित्त विभाग अथवा उपसचिव से अनिम्र श्रेणी का उसका नामनिर्दिष्टी; (सात) प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, विधि और विधायी कार्य विभाग अथवा अतिरिक्त सचिव से अनिम्र श्रेणी का उसका नामनिर्दिष्टी; (आठ) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अध्यक्ष या उसका नामनिर्दिष्टी; (नौ) भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् का अध्यक्ष या भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के निदेशक से अनिम्र श्रेणी का उसका नामनिर्दिष्टी; (दस) सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय, नई दिल्ली का संयुक्त सचिव या उपसचिव से अनिम्र श्रेणी का उसका नामनिर्दिष्टी; (ग्यारह) निदेशक, डॉ. अम्बेडकर फाउन्डेशन, नई दिल्ली; (बारह) विश्वविद्यालय के विस्तार एवं प्रशिक्षण का निदेशक; (तेरह) विश्वविद्यालय के तीन संकायाध्यक्ष जो चक्रानुक्रम आधार पर तीन वर्ष के लिए कुलपति द्वारा नामनिर्दिष्ट होंगे; (चौदह) विश्वविद्यालय का कुल सचिव-सचिव। अशासकीय सदस्य: (पन्द्रह) दो ख्याति प्राप्त सामाजिक वैज्ञानिक जिनमें से कम से कम एक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति से हो और अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक तथा शैक्षणिक विकास के क्षेत्र में शैक्षणिक या गवेषणा का अनुभव रखता हो; (सोलह) दो ख्याति प्राप्त व्यक्ति जिनमें से कम से कम एक व्यक्ति अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से हो तथा ख्याति प्राप्त शासकीय/अशासकीय संगठनों से सहयुक्त हो तथा अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक तथा शैक्षणिक विकास के क्षेत्र में अनुभव रखते हों।
19. Powers and functions of the Governing Body
(१) विश्वविद्यालय के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए शासी निकाय समस्त आवश्यक कार्यवाहियां करेगा। (२) शासी निकाय, निम्नलिखित शक्तियों का प्रयोग करेगा- (एक) विश्वविद्यालय के परिनियम बनाना एवं उन्हें संशोधित करना; (दो) प्रगति का पुनर्विलोकन करना तथा विश्वविद्यालय के उद्देश्यों की पूर्ति सुनिश्चित करना; (तीन) कार्य परिषद या इस अधिनियम के अधीन नियुक्त किसी निकाय के किसी प्रस्ताव, सिफारिश, विनिश्चय या प्रतिवेदन को स्वीकार करना, रद्द करना, पुनर्विलोकन करना, अभिखंडित करना या उसे वापस निर्दिष्ट करना; (चार) अध्यादेश में संशोधन को प्रस्तावित करना; (पांच) शासी निकाय के सदस्यों के अतिरिक्त विशेष आमंत्री के रूप में और व्यक्तियों को आमंत्रित करना; (छह) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करना जो कि अधिनियम द्वारा उसे प्रदत्त किए जाएं।
20. कार्य परिषद्
- (1) कार्य परिषद्, विश्वविद्यालय की कार्यकारी निकाय होगी। (2) पदेन सदस्यों के अलावा कार्यकारी परिषद् के सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा, अशासकीय सदस्यों का नामनिर्देशन, कार्यकारी परिषद् के अध्यक्ष द्वारा शासी निकाय के अशासकीय सदस्यों में से किया जाएगा। (3) कार्य परिषद्, विश्वविद्यालय के सामान्य प्रबंध तथा प्रशासन (जिसमें राजस्व एवं संपत्ति सम्मिलित हैं) की प्रभारी होगी। (4) बैठक हेतु गणपूर्ति कार्य परिषद् के कुल सदस्यों के कम से कम आधे सदस्यों से होगी।
21. कार्य परिषद् का गठन
विश्वविद्यालय की कार्य परिषद् का गठन निम्नलिखित से मिलकर होगा :— (एक) विश्वविद्यालय का कुलपति — अध्यक्ष; पदेन-सदस्य (दो) प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग या उसके द्वारा नामनिर्दिष्ट व्यक्ति जो उपसचिव से अन्निम श्रेणी का न हो; (तीन) प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग या उपसचिव से अन्निम श्रेणी का उसका कोई नामनिर्देशिती; (चार) प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग या उपसचिव से अन्निम श्रेणी का उसका कोई नामनिर्देशिती; (पांच) प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन, वित्त विभाग या उपसचिव से अन्निम श्रेणी का उसका कोई नामनिर्देशिती; (छह) अध्यक्ष (चेयरपर्सन), भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद् या भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद्, नई दिल्ली के संचालक से अन्निम श्रेणी का उसका कोई नामनिर्देशिती; (सात) निदेशक, विश्वविद्यालय विस्तार एवं प्रशिक्षण; (आठ) विश्वविद्यालय के तीन संकायाध्यक्ष जो शासी निकाय के सदस्य हों। (नौ) विश्वविद्यालय का कुलसचिव—सचिव; अशासकीय-सदस्य (दस) दो ख्याति प्राप्त समाज विज्ञानी जो शासी निकाय के सदस्य हैं; (ग्यारह) दो ख्याति प्राप्त व्यक्ति जो शासी निकाय के सदस्य हैं;
22. कार्य परिषद् की शक्तियां तथा कृत्य
- (1) कार्य परिषद् निम्नलिखित शक्तियों का प्रयोग तथा कृत्यों का पालन करेगी— (एक) समय-समय पर विश्वविद्यालय के अध्यादेश एवं परिनियमों से अनअसंगत विनियम बनाना एवं उन्हें संशोधित करना; (दो) शिक्षक वर्ग के पदों के वेतनमान के साथ-साथ अर्हताएं, पारिश्रमिक, कर्तव्य, सेवा शर्तें, अनुशासनिक तथा अपील प्राधिकारी सृजित करना तथा वर्गीकृत करना तथा निर्धारित करना; (तीन) ग्रंथपाल, आचार्य, सह आचार्य, सहायक आचार्य और शिक्षक वर्ग के उतने अन्य सदस्यों को, इस प्रयोजन हेतु विनियमों द्वारा गठित की गई चयन समिति की सिफारिश पर, समय-समय पर नियुक्त करना जो कि आवश्यक हों: परंतु शैक्षणिक पदों का सृजन राज्य सरकार के पूर्व अनुमोदन से किया जाएगा; (चार) राज्य सरकार की पूर्व मंजूरी से प्रशासकीय, लिपिकीय एवं आवश्यक पदों को सृजित करना तथा इन पदों की न्यूनतम अर्हताएं तथा परिलब्धियां निर्धारित करना; (पांच) विश्वविद्यालय के वित्त, लेखे, निवेश, संपत्ति और सभी अन्य प्रशासनिक मामलों का प्रबंध करना तथा उन्हें विनियमित करना तथा उस प्रयोजन के लिये उतने अभिकर्ताओं की नियुक्ति करना जितने कि वह आवश्यक समझे; (छह) क्रय, दान, विनियमन, पट्टे, भाड़े द्वारा या अन्यथा ऐसी चल या अचल संपत्ति या निधियां अर्जित करना जो विश्वविद्यालय के उद्देश्यों तथा अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हों; (सात) विश्वविद्यालय की किसी चल या अचल संपत्ति को बेचना, बंधक रखना, भारित करना/पट्टे पर देना, विनिमय करना या अन्यथा अंतरण या व्ययन करना; (आठ) बांड, डिबेंचर और वचन पत्रों या अन्य बाध्यताओं या विश्वविद्यालय की प्रतिभूतियों पर, विश्वविद्यालय की किसी स्थावर अथवा जंगम संपत्ति के बंधक, भार, आड़मान अथवा गिरवी द्वारा ऐसे धन जुटाना अथवा उधार लेना जो कि विश्वविद्यालय के प्रयोजन के लिए आवश्यक हों; (नौ) शिक्षक वर्ग के विरुद्ध अनुशासनत्मक कार्यवाही में जांच के प्रतिवेदन पर विचार करना, जहां विश्वविद्यालय के परिनियमों के अनुसार दीर्घ दण्ड प्रस्तावित हो; (दस) अध्यादेश में अंतर्विष्ट उपबंधों के अनुसार कर्मचारियों के सेवा संबंधी मामलों में अपील प्राधिकारी के रूप में कृत्य करना; (ग्यारह) (क) वार्षिक प्रतिवेदन; (ख) वार्षिक लेखे तथा संपरीक्षक का प्रतिवेदन; (ग) वार्षिक बजट; पर विचार करना तथा उनका अनुमोदन करना। (बारह) बजट में यथा अनुमोदित, आवर्ती और अनावर्ती मदों पर व्यय मंजूर करना; (तेरह) एक बजट शीर्ष से दूसरे बजट शीर्ष में निधियों को पुनर्विनियोजित करना; (चौदह) शासी निकाय के समक्ष विचारण हेतु रखे जाने से पूर्व समस्त मामलों की छंटनी कर उनकी अनुशंसा करना; (पंद्रह) कार्य परिषद् द्वारा समय-समय पर यथा नियत ऐसी सीमाओं से अधिक मौद्रिक मूल्य के अभियांत्रिकी कार्यों, पूंजीगत उपस्कर के क्रय और योजनाओं तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन का अनुमोदन प्रदान करना; (सोलह) विश्वविद्यालय की सामान्य मुद्रा का चयन करना और ऐसी मुद्रा की अभिरक्षा तथा उपयोग हेतु उपबंध करना; (सत्रह) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करना तथा ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करना जैसे कि शासी निकाय द्वारा उसे प्रदत्त या प्रत्यायोजित किए जाएं; (अठारह) विश्वविद्यालय के कुलपति को या उसके द्वारा नियुक्त समिति को, जिसे कि वह उचित समझे, अपनी किन्हीं शक्तियों का प्रत्यायोजित करना। (2) कार्य परिषद् : (एक) विश्वविद्यालय के उद्देश्यों की पूर्ति तथा अभिवृद्धि हेतु नये विभागों, अनुसंधान तथा विकास केन्द्रों, विस्तार तथा प्रशिक्षण केन्द्रों का सृजन कर सकेगी। (दो) राज्य सरकार के वित्त विभाग के निर्बंधन के अधीन रहते हुए, नवीन विद्यालयों, संचालनालयों तथा संस्थाओं के सृजन हेतु शासी निकाय को अनुशंसा कर सकेगी।
23. विद्या परिषद्
- (1) विद्या परिषद्, विश्वविद्यालय की उच्चतम शैक्षणिक निकाय होगी। (2) पदेन सदस्यों से भिन्न, इसके सदस्यों का कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। (3) विद्या परिषद्, शिक्षण, शिक्षा और परीक्षा के मानकों के अनुरक्षण के लिये उत्तरदायी होगी तथा ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करेगी जो अध्यादेश में विहित किए जाएं।
24. विद्या परिषद् का गठन
विश्वविद्यालय की विद्या परिषद् निम्नलिखित से मिलकर बनेगी :— (एक) विश्वविद्यालय का कुलपति — अध्यक्ष; (दो) संकायाध्यक्ष, अध्ययन विभाग; (तीन) निदेशक, विस्तार तथा प्रशिक्षण; (चार) संकायाध्यक्ष, छात्र कल्याण; (पांच) ग्रंथपाल; (छह) वित्त नियंत्रक; (सात) विभागाध्यक्ष; (आठ) दो ख्याति प्राप्त सामाजिक विज्ञानी शासी निकाय के अशासकीय सदस्य होंगे जो अध्यक्ष द्वारा नामनिर्देशित किए जाएंगे; (नौ) विश्वविद्यालय का कुल सचिव — सचिव
25. विद्या परिषद् की शक्तियां तथा कृत्य
विद्या परिषद्, विश्वविद्यालय की प्रमुख विद्या संबंधी निकाय होगी तथा उसकी निम्नलिखित शक्तियां तथा कृत्य होंगे :— (एक) प्रवेश, शिक्षण के मानकों, परीक्षा, मूल्यांकन, अध्येतावृत्तियों, फीस, छूट, उपस्थिति, अनुशासन, शैक्षणिक समुन्नति और शैक्षणिक उत्कृष्टता आदि के लिए अध्यादेश बनाना तथा उनमें संशोधन करना, जिससे कि विश्वविद्यालय के उद्देश्यों की पूर्ति की जा सके; (दो) विश्वविद्यालय के समस्त विद्या संबंधी मामलों जैसे शिक्षा, गवेषणा विस्तार तथा प्रशिक्षण; दूरस्थ शिक्षा, अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग तथा विनिमय कार्यक्रमों आदि के संबंध में परामर्श करना, योजना बनाना, परिचालन, पर्यवेक्षण, मानीटर तथा प्रबंध करना; (तीन) अन्य विश्वविद्यालयों तथा संस्थाओं की उपाधियों तथा उपाधिपत्रों को मान्यता देना और विश्वविद्यालय की उपाधियों तथा उपाधिपत्रों के संबंध में समतुल्यता अवधारित करना; (चार) परिसर में, जिसमें सम्मिलित हैं केन्द्र तथा विभाग, परीक्षा, पुस्तकालय, छात्रावास, खेल, सांस्कृतिक गतिविधियां और शासित तथा दण्ड, आचरण, परिवीक्षा, समय-पालन आदि, अनुशासन तथा शालीनता बनाए रखने के लिए छात्रों के लिये विनियम बनाना; (पांच) शैक्षणिक कार्यक्रम और कलेण्डर, शिक्षण पाठ्यक्रम अनुमोदित करना तथा विश्वविद्यालय की वृहत् शैक्षणिक नीतियां निर्धारित करना जिसमें पाठ्यचर्या विकास, अध्ययन बोर्ड के माध्यम से समय-समय पर पाठ्यक्रम विरचित करना तथा पुनरीक्षित करना सम्मिलित है; (छह) विद्या संबंधी मामलों के संबंध में समस्त ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करना और ऐसे समस्त कार्य करना जैसे कि इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए परिनियमों, अध्यादेशों तथा विनियमों के उपबंधों के उचित कार्यान्वयन के लिए आवश्यक हों; (सात) शासी निकाय या कार्य परिषद् द्वारा उसे निर्दिष्ट किसी विषय पर, रिपोर्ट करना; (आठ) ऐसी अन्य शक्तियों का प्रयोग करना तथा ऐसे अन्य कर्तव्यों का निर्वहन करना जैसे कि इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसे प्रदत्त किए जाएं या उस पर अधिरोपित किए जाएं।
26. वित्त समिति
- (1) वित्त समिति में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात् :— (एक) कुलपति — अध्यक्ष (चेयरपर्सन); (दो) विश्वविद्यालय के समस्त संकायाध्यक्ष/निदेशक (तीन) विश्वविद्यालय का कुल सचिव (चार) विश्वविद्यालय का वित्त नियंत्रक — सचिव (2) वित्त समिति ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कर्तव्यों का निर्वहन करेगी जैसे कि परिनियमों द्वारा विहित किए जाएं। (3) वित्त नियंत्रक द्वारा तैयार विश्वविद्यालय के वार्षिक लेखे और वित्तीय प्राक्कलन, विचार तथा समीक्षा हेतु वित्त समिति के समक्ष रखे जाएंगे तथा तत्पश्चात् संशोधनों सहित या बिना संशोधन के कार्य परिषद् के अनुमोदन के लिये प्रस्तुत किए जाएंगे।
27. प्राध्ययन स्कूल
- (1) उतनी संख्या में, अध्ययन स्कूल होंगे जितनी शासी निकाय द्वारा अवधारित किए जाएं और उतनी संख्या में प्राध्ययन केन्द्र तथा विभाग होंगे, जितनी कि कार्य परिषद् द्वारा समय-समय पर अवधारित की जाए। (2) पूर्वगामी उपबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, आरंम्भिक तौर पर विश्वविद्यालय में निम्नलिखित अध्ययन स्कूल होंगे :— (एक) डॉ. अम्बेडकर विचार और दर्शन स्कूल; (दो) सामाजिक विज्ञान और प्रबंधन अध्ययन स्कूल; (तीन) कृषि और ग्रामीण विकास स्कूल; (चार) शिक्षा और कौशल विकास स्कूल; (पांच) विधि और सामाजिक न्याय स्कूल; (3) शासी निकाय स्कूल गठित कर सकेगी और कार्य परिषद्, विद्या परिषद् की सिफारिश पर केन्द्रों तथा विभागों को स्थापित कर सकेगी। (4) प्रत्येक अध्ययन स्कूल का एक संकायाध्यक्ष होगा जो ऐसी रीति में नियुक्त किया जाएगा जैसी कि विनियमों में विहित किए जाए।
PDF: pending for this language.