section 29
कुलपति
The Madhya Pradesh Dharmashastra National Law University Act, 2018२९. (१) कुलाधिपति द्वारा कुलपति की नियुक्ति चयन समिति की अनुशंसाओं पर की जाएगी :
परन्तु कुलाधिपति द्वारा विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति की नियुक्ति तीन वर्ष से अनधिक अवधि के लिए ऐसे निबंधनों व शर्तों पर की जाएगी जैसी कि कुलाधिपति द्वारा, आदेश द्वारा विनिर्दिष्ट की जाए.
(२) कुलपति, विधि के क्षेत्र में विख्यात शिक्षाविद् जिसके पास विश्वविद्यालय प्रणाली में विधि के आचार्य के रूप में न्यूनतम १० वर्षों का अनुभव हो या प्रख्यात न्यायविद जो जिला न्यायाधीश से निम्न श्रेणी का न हो या कोई प्रशासक जो भारत सरकार के सचिव से अनिम्न श्रेणी का हो तथा उसकी आयु ७० वर्ष से अधिक न हो. कुलाधिपति द्वारा उसकी नियुक्ति, उपधारा (३) तथा (७) के अधीन गठित चयन समिति द्वारा अनुशंसित तीन व्यक्तियों से अनिम्न व्यक्तियों के पैनल में से की जाएगी :
Provided that if the person or persons approved by the Chancellor out of those recommended by the Selection Committee are not willing to accept the appointment, the Chancellor may call for fresh recommendations from such committee.
- (3) The Chancellor shall appoint a Selection Committee consisting of the following persons, namely:—
- (i) one person elected by the Executive Council ;
- (ii) one person nominated by the Chairman of the University Grants Commission:
- (iii) one person nominated by the Chancellor from amongst eminent scholars or jurist as well as from sitting High Court Judge of High Court of Madhya Pradesh or retired Judge of Supreme Court or High Court of Madhya Pradesh. The Chancellor shall appoint one of the three persons to be the Chairman of the (४) उपधारा (३) के अधीन समिति गठित करने के लिए कुलाधिपति, कुलपति की अवधि का अवसान होने के छह मास पूर्व, कार्य परिषद् तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष को अपने-अपने नामनिर्देशितियों को चुनने के लिए अपेक्षा करेगा और यदि उनमें से कोई एक या दोनों इस बारे में कुलाधिपति की संसूचना प्राप्त होने के एक मास के भीतर ऐसा करने में असफल रहते हैं, तो कुलाधिपति, यथास्थिति, किसी एक या दोनों व्यक्तियों को आगे नामनिर्दिष्ट कर सकेगा. (५) किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जो विश्वविद्यालय का कर्मचारी हो, उपधारा (३) के अधीन गठित समिति के लिए निर्वाचित या नामनिर्दिष्ट नहीं किया जाएगा. (६) समिति अपने गठन की तारीख से छह सप्ताह के भीतर या चार सप्ताह से अनधिक ऐसे और समय के भीतर, जो कि कुलाधिपति द्वारा बढ़ाया जाए, तालिका (पैनल) प्रस्तुत करेगी. (७) यदि किसी कारण से उपधारा (३) के अधीन गठित की गई समिति, उपधारा (६) में विनिर्दिष्ट की गई कालावधि के भीतर तालिका (पैनल) प्रस्तुत करने में असफल रहे, तो कुलाधिपति एक अन्य समिति गठित करेगा जिसमें ऐसे तीन व्यक्ति होंगे, जो विश्वविद्यालय से संसक्त न हों, जिनमें से एक को अध्यक्ष के रूप में पदाभिहित किया जाएगा और इस प्रकार गठित की गई समिति, अपने गठन की तारीख से छह सप्ताह की कालावधि के भीतर या ऐसी लघुतर कालावधि, जैसी कि विनिर्दिष्ट की जाए, के भीतर तीन व्यक्तियों की तालिका (पैनल) प्रस्तुत करेगी. (८) यदि उपधारा (७) के अधीन गठित समिति, उसमें विनिर्दिष्ट की गई कालावधि के भीतर तालिका (पैनल) प्रस्तुत करने में असफल रहे, तो कुलाधिपति किसी भी ऐसे व्यक्ति को, जिसे वह उपयुक्त समझे, कुलपति नियुक्त कर सकेगा.
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