section 28
कतिपय परिस्थितियों में विश्वविद्यालय के बेहतर प्रशासन के लिए विशेष उपबंध
The Madhya Pradesh Dharmashastra National Law University Act, 2018२८. (१) यदि कुलाधिपति का किसी रिपोर्ट के प्राप्त होने पर या अन्यथा यह समाधान हो जाए कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें विश्वविद्यालय का प्रशासन छात्रों के हितों का अपाय किए बिना, इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता और यह कि ऐसा करना विश्वविद्यालय के हित में समीचीन है, तो वह अधिसूचना द्वारा, उसमें वर्णित किए जाने वाले कारणों से यह निर्देश दे सकेगा कि धारा १० से २४ तक तथा उपधारा (२), (३), (४) और (५) के उपबंध अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की गई तारीख से (जो इसमें इसके पश्चात इस धारा में नियत तारीख के रूप में निर्दिष्ट है) विश्वविद्यालय को लागू होंगे.
(२) उपधारा (१) के अधीन जारी की गई अधिसूचना (जो इसमें इसके पश्चात् अधिसूचना के नाम से निर्दिष्ट है), नियत तारीख से एक वर्ष की कालावधि तक के लिए प्रवर्तन में रहेगी और कुलाधिपति, समय-समय पर, उस कालावधि में ऐसी और कालावधि की वृद्धि, जैसा कि वह उचित समझे, इस प्रकार कर सकेगा कि अधिसूचना के प्रवर्तित रहने की कुल कालावधि तीन वर्ष से अधिक न हो.
(३) कुलाधिपति, अधिसूचना के जारी होने के साथ-साथ कुलपति को नियुक्त करेगा जो अधिसूचना के प्रवर्तन में रहने की कालावधि के दौरान पद धारण करेगा :
परन्तु कुलपति, अधिसूचना के प्रवर्तन की कालावधि का अवसान होने पर भी तब तक पद धारण किए रह सकेगा, जब तक कि उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण न कर ले, किन्तु यह कालावधि एक वर्ष से अधिक नहीं होगी.
(४) नियत तारीख से निम्नलिखित परिणाम होंगे :—
(एक) कुलपति, जो नियत तारीख के अव्यवहित पूर्व पदधारणा करता है, इस बात के होते हुए भी कि उसकी पदावधि का अवसान नहीं हुआ है, पद पर नहीं रह जाएगा.
(दो) प्रत्येक व्यक्ति जो नियत तारीख के अव्यवहित पूर्व यथास्थिति कार्य परिषद् या विद्या परिषद् के सदस्य के रूप में पद धारण किए हुए हो, उस पद पर नहीं रह जाएगा;
(तीन) जब तक यथास्थिति, कार्य परिषद् या विद्या परिषद् का पुनर्गठन न हो जाए तब तक उपधारा (३) के अधीन नियुक्त किया गया कुलपति, उन शक्तियों का प्रयोग करेगा तथा उन कर्तव्यों का पालन करेगा, जो कि कार्य परिषद् या विद्या परिषद् को इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त की गई हों या उन पर अधिरोपित किए गए हों :
परन्तु कुलाधिपति यदि वह ऐसा करना आवश्यक समझे, तो इस प्रकार नियुक्त किए गए कुलपति को ऐसी शक्तियों का प्रयोग करने में तथा ऐसे कर्तव्यों का पालन करने में सहायता देने के लिए ऐसी समिति की नियुक्ति कर सकेगा, जिसमें कि एक शिक्षाविद्, एक प्रशासनिक विशेषज्ञ तथा एक वित्त विशेषज्ञ होंगे.
(५) अधिसूचना के प्रवर्तन की कालावधि का अवसान होने के पूर्व या उसके अव्यवहित पश्चात् यथाशीघ्र, कुलपति, अधिनियम के उपबंधों के अनुसार कार्य परिषद् तथा विद्या परिषद् का गठन करने के लिए कार्रवाई करेगा और इस प्रकार गठित की गई कार्य परिषद् तथा विद्या परिषद्, अधिसूचना के प्रवर्तन की कालावधि का अवसान होने की तारीख के अव्यवहित पश्चात् आने वाली तारीख को या उस तारीख को, जिसको कि संबंधित निकायों का इस प्रकार गठन हो जाए, इनमें से जो भी पश्चात्वर्ती हो, कार्य करना प्रारंभ कर देगी :
परन्तु यदि कार्य परिषद् तथा विद्या परिषद्, अधिसूचना के प्रवर्तन की कालावधि का अवसान होने के पूर्व गठित न हो जाए तो कुलपति, ऐसा अवसान हो जाने पर, इन प्राधिकारियों में से प्रत्येक प्राधिकारी की शक्तियों का प्रयोग, कुलाधिपति के पूर्व अनुमोदन के अध्यधीन रहते हुए उस समय तक करेगा, जब तक कि यथास्थिति कार्य परिषद् या विद्या परिषद् का इस प्रकार गठन न हो जाए.
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