section 27
परिनियम, अध्यादेश और विनियम
The Madhya Pradesh Dharmashastra National Law University Act, 2018२७. (१) परिनियम—
(क) विश्वविद्यालय के परिनियम कार्य परिषद् द्वारा तैयार किए जाएंगे और इसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न निकायों के गठन तथा कृत्यों के उपबंध, नियुक्तियां तथा नियुक्तियों के निबंधन, विश्वविद्यालय के विभिन्न पदाधिकारियों की सेवा शर्तें तथा शक्तियां और विश्वविद्यालयों की निधि का गठन तथा उसका अभिनियोजन समाविष्ट होंगे.
(ख) परिनियम, विश्वविद्यालय के समस्त प्राधिकारियों, अधिकारियों, अध्यापकों तथा कर्मचारियों और विश्वविद्यालय से संबंधित व्यक्तियों पर बाध्यकारी होंगे.
(ग) प्रत्येक नया परिनियम या परिनियम में कुछ जोड़ा जाना या कोई संशोधन या परिनियम का निरसन, साधारण परिषद् के अनुमोदन से किया जाएगा.
(२) अध्यादेश—
(क) इस अधिनियम और समय-समय पर यथा संशोधित परिनियमों के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, विश्वविद्यालय के अध्यादेश निम्नलिखित समस्त या उनमें से किसी एक विषय के लिए कार्य परिषद् द्वारा बनाए जा सकेंगे, अर्थात् :-
(एक) पाठ्यक्रम, विद्यार्थियों के प्रवेश, शुल्क, उपाधि, पत्रोपाधि या प्रमाणपत्र के लिए अपेक्षित अर्हताएं तथा अध्येतावृत्ति प्रदान करना;
(दो) परीक्षा का संचालन जिसमें परीक्षकों की नियुक्ति तथा उनके निबंधन तथा शर्तें सम्मिलित हैं;
(तीन) परिनियमों द्वारा अपेक्षित कोई अन्य मामला विश्वविद्यालय के अध्यादेशों द्वारा निराकृत किया जाएगा.
(ख) विश्वविद्यालय में प्रवेश या इसकी परीक्षाएं, पाठ्यक्रम, परीक्षाओं की स्कीम, परीक्षकों की उपस्थिति और नियुक्ति संबंधी किसी अध्यादेश पर कार्य परिषद् द्वारा तब तक विचार नहीं किया जाएगा जब तक कि ऐसे अध्यादेश का प्रारूप विद्या परिषद् द्वारा प्रस्तावित नहीं किया जाता.
(ग) कार्य परिषद्, विद्या परिषद् द्वारा प्रस्तावित अध्यादेश के प्रारूप को तब तक संशोधित नहीं करेगी जब तक कि विद्या परिषद् उक्त संशोधन पर स्वीकृति नहीं दे देती किन्तु कार्य परिषद् को विद्या परिषद् के प्रारूप को, पुनर्विचार के लिए या तो पूर्णतः या अंशतः, किन्हीं संशोधनों के साथ जो कि कार्य परिषद् द्वारा सुझाए जाएं, रद्द करने या वापस करने की शक्ति होगी.
(घ) कार्य परिषद् द्वारा बनाए गए अध्यादेश के प्रारूप, साधारण परिषद् को प्रस्तुत किए जाएंगे और साधारण परिषद् द्वारा उसके आगामी सम्मलेन में विचार किया जाएगा और उस दिनांक को प्रवृत्त होंगे जिसको साधारण परिषद् संकल्प द्वारा उन्हें अनुमोदित कर दे.
(ङ) साधारण परिषद् को, उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के दो तिहाई से अन्यून के बहुमत द्वारा पारित संकल्प द्वारा, कार्य परिषद् द्वारा बनाए गए ऐसे प्रस्तावित अध्यादेश को अनुमोदित, उपांतरित या विखंडित करने की शक्ति होगी. ऐसे अध्यादेश साधारण परिषद् के अनुमोदन के पश्चात् प्रवृत्त होंगे.
(३) विनियम—
(क) उन अध्यादेशों के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, कार्य परिषद् को उसमें विनिहित की गई अन्य समस्त शक्तियों के अतिरिक्त, विश्वविद्यालय के कार्यकलापों के प्रशासन तथा प्रबन्ध के लिए उपबन्ध करने हेतु विनियम बनाने की शक्ति भी होगी :
परन्तु कार्य परिषद् ऐसा कोई विनियम जो विश्वविद्यालय के किसी प्राधिकारी की हैसियत, शक्तियों या उसके गठन को प्रभावित करता है तब तक नहीं बनाएगी जब तक कि ऐसे प्राधिकारी को प्रस्तावित तब्दीलियों पर लिखित में राय अभिव्यक्त करने का एक अवसर नहीं दे दिया गया है और इस प्रकार अभिव्यक्त की गई किसी राय पर कार्य परिषद् द्वारा विचार किया जाएगा:
परन्तु यह और भी कि कार्य परिषद् निम्नलिखित समस्त या किन्हीं विषयों पर प्रभाव डालने वाला कोई विनियम विद्या परिषद् की पूर्व सहमति के बिना नहीं बनाएगी, और न ही उसे संशोधित या निरसित करेगी, अर्थात् :-
(एक) विद्या परिषद् का गठन, उसकी शक्तियां तथा कर्तव्य;
(दो) विश्वविद्यालय के संबंध में अध्यापन पाठ्यक्रम तथा विद्या संबंधी कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए जिम्मेदार प्राधिकारी;
(तीन) उपाधियों, पत्रोपाधियों, प्रमाण-पत्रों और विद्या संबंधी अन्य विशिष्टताओं का प्रत्याहरण;
(चार) संकायों, विभागों, सभागृहों तथा संस्थाओं की स्थापना और उनका समाप्त किया जाना;
(पांच) अध्येतावृत्तियां, छात्रवृत्तियां, अध्ययनवृत्तियां, छात्र-सहायतावृत्तियां, पदक और पारितोषिक संस्थित करना;
(छह) परीक्षकों की नियुक्ति की शर्तें तथा ढंग या परीक्षाओं या अन्य अध्ययन पाठ्यक्रमों का संचालन या उनके मानक;
(सात) छात्रों के नामांकन या प्रवेश का ढंग;
(आठ) अन्य परीक्षाओं को विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के समतुल्य मान्यता प्रदान करना.
(ख) विद्या परिषद् को यह शक्ति होगी कि वह खण्ड (क) के द्वितीय परन्तुक के खण्ड (एक) से (आठ) तक में विनिर्दिष्ट समस्त मामलों पर और उससे संसक्त या आनुषंगिक मामलों पर विनियम प्रस्तावित करे;
(ग) जहां विद्या परिषद् द्वारा प्रस्तावित किसी विनियम का प्रारूप कार्य परिषद् ने नामंजूर कर दिया हो, वहां विद्या परिषद्, कुलाधिपति को अपील कर सकेगी और कुलाधिपति, आदेश द्वारा यह, निर्देश दे सकेगा कि प्रस्तावित विनियम, साधारण परिषद् के आगामी सम्मलेन के समक्ष उसके अनुमोदन के लिए रखें और साधारण परिषद् का ऐसा अनुमोदन लम्बित रहने तक वह विनियम ऐसी तारीख से जो ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, प्रभावी होगा :
परन्तु ऐसे विनियम को यदि साधारण परिषद् के ऐसे सम्मलेन में अनुमोदित नहीं किया जाता है तो वह प्रभावी नहीं रह जाएगा.
(घ) कार्य परिषद् द्वारा बनाए गए समस्त विनियम साधारण परिषद् के समक्ष उसके आगामी सम्मलेन में प्रस्तुत किए जाएंगे और साधारण परिषद् को यह शक्ति होगी कि वह कार्य परिषद् द्वारा बनाए गए किसी विनियम को संशोधित या रद्द कर दे :
परन्तु ऐसे विनियम, जहां तक कि वे धारा ३७ में प्रगणित किए गए अनुसार भविष्य निधि, उपदान तथा ऐसी अन्य योजनाओं से संबंधित हैं, साधारण परिषद् द्वारा अनुमोदन के पश्चात् ही प्रवृत्त होंगे.
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