section 22
Disqualifications of membership
Pandit Deendayal Upadhayaya Uttrakhand Vishwavidalaya Act, 2011General201149 sections
Chapter 4 Chapter 4
Statutory text
- (1) किसी विश्वविद्यालय अधिकार निकाय का कोई सदस्य, यदि वह विश्वविद्यालय के किसी निकाय का सदस्य बना रहने के लिये अयोग्य है या हो जाता है, तो वह सदस्य नहीं रहेगा;
- (2) इस प्रावस्था के अर्थ में, अयोग्यता निर्धारित की जायेगी :- (क) यदि वह सक्षम न्यायालय द्वारा विकृत चित्त का घोषित किया गया है; (ख) यदि वह अनुन्मोचित दिवालिया है; (ग) यदि वह भारत के किसी न्यायालय द्वारा ऐसे अपराध के लिये सिद्धदोष ठहराया गया है, जिसमें नैतिक अधमता निहित है; (घ) यदि वह मानसिक रोगी है; (ङ) यदि वह मद्यप है; (च) यदि वह राज्य विधान सभा की अयोग्यता का पात्र है; (छ) यदि वह सक्षम प्राधिकारी की संस्तुति के बिना किसी विश्वविद्यालय पद से वित्तीय लाभ ले रहा है; (ज) यदि वह किसी अपराध के लिए दोषी है, जिसके कारण वह विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा या अनुशासन के प्रतिकूल कार्य करने का दोषी है: परन्तु यह कि, यदि सदस्य पर लगाये गये किसी आरोप के आधार पर वह अयोग्य घोषित नहीं होता है, तो वह अयोग्यता के पूर्व की स्थिति में बहाल माना जायेगा। प्रवर्ग-2 - सिद्धदोषी व्यक्ति का अयोग्य होना। प्रवर्ग-3 - इस प्रावस्था के अनुसार अयोग्यता की स्थिति में व्यक्ति का पद से हटा दिया जाना, यदि वह अपराधी है, तो उसे उस पद पर बने रहने से रोका जायेगा। प्रवर्ग-4 - कर्मचारी का पद से सम्बन्धित अयोग्यता। प्रवर्ग-5 - विश्वविद्यालय पद से सम्बन्धित अयोग्यता। प्रवर्ग-6 - सदस्य का कोई अयोग्य पद से हटाना। प्रवर्ग-7 - अयोग्यता सम्बन्धी प्रमाण। (क) सदस्य का प्रमाण; (ख) उप धारा
- (1) के अधीन अयोग्यता सम्बन्धी कोई प्रश्न, उप धारा
- (1) तथा
- (3) के उपबन्धों का पालन करते हुये उप धारा
- (4) के अनुसार किया जायेगा।
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