section 2
Definitions
The Madhya Pradesh Tendu Patta (Vyapar Viniyaman) Adhiniyam, 1964General195928 sections
Statutory text
धारा 2. पिरभाषाएं - इस अिधिनयम में, जब तक ूसंग से अन्यथा अपेिक्षत न हो – (क) अिभकतार् (Agent) से तात्पयर् धारा ‘‘4’’ के अधीन िनयुक्त िकये गये अिभकतार् से है। (ख) संिहता
- (Code) से तात्पयर् ‘‘मध्य ूदेश लैण्ड रेवेन्यू कोड, 1959’’ (भूराजःव संिहता, 1959) (वषर् 1959 का 20) से है। (ग) व्यापारी से तात्पयर् कोई व्यिक्त, ःथानीय ूािधकारी, कम्पनी, अिवभािजत िहन्दू पिरवार या सोसायटी (िजसमें सहकारी सिमित सिम्मिलत है) क्लब, भमर्, एसोिसयेशन, कमीशन ऐजेन्ट, या अन्य वािणिज्यक एजेण्ट से है जो तेन्दू पत्ता खरीदने, बेचने और ूदाय करन े का व्यापार सीधे सीधे या अन्य ूकार से करता है, चाहे नगदी, में आःथािगत भुगतान में, या कमीशन मजदूरी या ूितफल से करें। (घ) ‘‘तेन्दू पत्ता उगाने वाला’’ (Grower of Tendu Leaves) से तात्पयर् –
- (i) उन क्षेऽों म ें, जो समय-समय पर भारतीय वन अिधिनयम, 1927 (ब. 16, वषर् 1927) के अधीन आरिक्षत एवं संरिक्षत वनों के रूप में गिठत िकये गये क्षेऽ में, उगे तेन्दू के पौधों के सम्बन्ध में राज्य शासन से हैं।
- (ii) उपरोक्त
- (i) के अन्तगर्त न आने वाले क्षेऽों में उगाए गये तेंदू के पौधों के सम्बन्ध में –
- (a) राज्य शासन है, जहां तेन्दूपत्ता संिहता की धारा
- (2) के खण्ड ‘ब’ में पिरभािषत दिखल रिहत भूिम पर उगाया जावे। (ब) िकसी इकाई के अन्तगर्त आने वाले ऐसे खाते के यथािःथित भूधारी या भाड़ेदार, या शासकीय पट्टाधारी या ऐसी सेवा भूिम के धारक से, है िजसमें तेन्दू के पौधे उगते हों, और उसमें ऐसा ूत्येक व्यिक्त सिम्मिलत है, जेा समय-समय पर, उसके माध्यम से तेन्दू के पौधों पर हक का दावा करता हो। (स) िकसी ऐसी इकाई में िजसमें तेन्दू पत्ता उगते हों, यथािःथित मध्य ूदेश भूदान यज्ञ अिधिनयम, 1953 (ब. 15 वषर् 1953) के अधीन भूदान धारक, मध्य-भारत भूदान यज्ञ िवधान, 1955 (ब. 3, वषर् 1955) के अधीन भूदान कृषक या भूदान पट्टेदार, िवध्य ूदेश भूदान यज्ञ अिधिनयम, 1955 (ब. 1, वंज्र्ञ 1956) के अधीन भूदान कृषक, तथा राजःथान भूदान यज्ञ एक्ट, 1954 (ब. 16, वषर् 1954) के अधीन अनुदान महीता से है और उसमें ऐसा ूत्येक व्यिक्त सिम्मिलत है जो समय-समय पर, उसके माध्यम से तेन्दू के पौधों पर हक का दावा करता हो। (ङ) ‘‘खाता से तात्पयर् - (एक) ऐसे भूिम खण्ड से है िजसका भूराजःव पृथक से िनधार्िरत ह ु आ हो और जो भूिम ःवामी द्वारा धािरत हो, और (दो) भाड़ेदार या शासकीय पट्टाधारी द्वारा धािरत भूिम के सम्बन्ध में, एक ही पट्टे या एक ही साथ चलने वाली शतोर्ं के अधीन यथा िःथित भूिमःवामी या राज्य शासन से धारण िकए गए भूिम खण्ड से है। (च) ‘‘सेवा भूिम के धारक’’ से तात्पयर् गांव के सेवक के रूप में सेवा करने की शतर् पर भूधारण करने वाले व्यिक्त से है। (छ) ‘‘शासकीय यपट्टेधारी’’ से तात्पयर् संिहता की धारा 181 के अधीन राज्य शासन से भूिम धारण करने वाले व्यिक्त से है। (छछ) िनमार्ता- से तात्पयर् ऐसा व्यक्त ् ि◌(बीड़ी मजद ू र के अितिरक्त ् ) ःथानीय अिधकारी, कम्पनी, अिवभािजत िहन्द ू पिरवार, या सोयायटी (िजसमें सहकारी सोसायटी सिम्मिलत है। क्लब, फमर्, या एसोिसयेशन, जो बीडी बनाने के कायर् में लगी हो बेचा है िकसी भी तरीके से बीड़ी बनावे। (ज) ‘‘उिल्लिखत क्षेऽ’’ (Specified Area) से तात्पयर् धारा 1 की उपधारा
- (3) के अधीन अिधसूचना में उिल्लिखत क्षेऽ से है। (झ) ‘‘भाड़ेदार’’ (Tenant) से तात्पयर् संिहता के चैदहवें अध्यशय के अधीन भूिम ःवामी से मौरूसी काँतकार के रूप में भूिम धारण करने वाले व्यिक्त से है। (ण) ‘‘भूधारी’’ (Tennure holder) से तात्पयर् उस व्यिक्त से है जो राज्य शासन से भूिम धारण करता हो और जो संिहता के उपबंधों के अधीन भूिम ःवामी हो या भूिम ःवामी माना गया हो। (ट) ‘‘इकाई’’
- (Unit) से तात्पयर् उिल्लिखत क्षेऽ के उस उप-खण्ड से है जो धारा 3 के अधीन इकाई के रूप में गिठत िकया गया हो। (ठ) उन शब्दों तथा अिभव्यिक्तययों का, जो इस अिधिनयम में ूयोग में लाई गई हो, िकन्तु पिरभािषत न की गई हों और जो भारतीय वन अिधिनयम, 1927 (ब. 16, वषर् 1927) में पिरभािषत की गई हों, का वही तात्पयर् होगा जो उनके िलये उस अिधिनयम में िदया है।
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