Bare Act
The Madhya Pradesh Tendu Patta (Vyapar Viniyaman) Adhiniyam, 1964
1. Short title, extent and commencement
धारा 1. संिक्षप्त नाम व िवःतार तथा ूारम्भ -
- (1) यह अिधिनयम मध्यूदेश तेन्दू पत्ता (व्यापार िविनयमन) अिधिनयम, 1964 कहलावेगा।
- (2) इसका िवःतार क्षेऽ पूरा मध्यूदेश होगा।
- (3) यह ऐसे क्षेऽों में, या क्षेऽ में तथा ऐसे िदनांकों को ूवृत्त होगा, िजसे या िजन्हें राज्य शासन अिधसूचना द्वारा, उल्लेिखत करे।
2. Definitions
धारा 2. पिरभाषाएं - इस अिधिनयम में, जब तक ूसंग से अन्यथा अपेिक्षत न हो – (क) अिभकतार् (Agent) से तात्पयर् धारा ‘‘4’’ के अधीन िनयुक्त िकये गये अिभकतार् से है। (ख) संिहता
- (Code) से तात्पयर् ‘‘मध्य ूदेश लैण्ड रेवेन्यू कोड, 1959’’ (भूराजःव संिहता, 1959) (वषर् 1959 का 20) से है। (ग) व्यापारी से तात्पयर् कोई व्यिक्त, ःथानीय ूािधकारी, कम्पनी, अिवभािजत िहन्दू पिरवार या सोसायटी (िजसमें सहकारी सिमित सिम्मिलत है) क्लब, भमर्, एसोिसयेशन, कमीशन ऐजेन्ट, या अन्य वािणिज्यक एजेण्ट से है जो तेन्दू पत्ता खरीदने, बेचने और ूदाय करन े का व्यापार सीधे सीधे या अन्य ूकार से करता है, चाहे नगदी, में आःथािगत भुगतान में, या कमीशन मजदूरी या ूितफल से करें। (घ) ‘‘तेन्दू पत्ता उगाने वाला’’ (Grower of Tendu Leaves) से तात्पयर् –
- (i) उन क्षेऽों म ें, जो समय-समय पर भारतीय वन अिधिनयम, 1927 (ब. 16, वषर् 1927) के अधीन आरिक्षत एवं संरिक्षत वनों के रूप में गिठत िकये गये क्षेऽ में, उगे तेन्दू के पौधों के सम्बन्ध में राज्य शासन से हैं।
- (ii) उपरोक्त
- (i) के अन्तगर्त न आने वाले क्षेऽों में उगाए गये तेंदू के पौधों के सम्बन्ध में –
- (a) राज्य शासन है, जहां तेन्दूपत्ता संिहता की धारा
- (2) के खण्ड ‘ब’ में पिरभािषत दिखल रिहत भूिम पर उगाया जावे। (ब) िकसी इकाई के अन्तगर्त आने वाले ऐसे खाते के यथािःथित भूधारी या भाड़ेदार, या शासकीय पट्टाधारी या ऐसी सेवा भूिम के धारक से, है िजसमें तेन्दू के पौधे उगते हों, और उसमें ऐसा ूत्येक व्यिक्त सिम्मिलत है, जेा समय-समय पर, उसके माध्यम से तेन्दू के पौधों पर हक का दावा करता हो। (स) िकसी ऐसी इकाई में िजसमें तेन्दू पत्ता उगते हों, यथािःथित मध्य ूदेश भूदान यज्ञ अिधिनयम, 1953 (ब. 15 वषर् 1953) के अधीन भूदान धारक, मध्य-भारत भूदान यज्ञ िवधान, 1955 (ब. 3, वषर् 1955) के अधीन भूदान कृषक या भूदान पट्टेदार, िवध्य ूदेश भूदान यज्ञ अिधिनयम, 1955 (ब. 1, वंज्र्ञ 1956) के अधीन भूदान कृषक, तथा राजःथान भूदान यज्ञ एक्ट, 1954 (ब. 16, वषर् 1954) के अधीन अनुदान महीता से है और उसमें ऐसा ूत्येक व्यिक्त सिम्मिलत है जो समय-समय पर, उसके माध्यम से तेन्दू के पौधों पर हक का दावा करता हो। (ङ) ‘‘खाता से तात्पयर् - (एक) ऐसे भूिम खण्ड से है िजसका भूराजःव पृथक से िनधार्िरत ह ु आ हो और जो भूिम ःवामी द्वारा धािरत हो, और (दो) भाड़ेदार या शासकीय पट्टाधारी द्वारा धािरत भूिम के सम्बन्ध में, एक ही पट्टे या एक ही साथ चलने वाली शतोर्ं के अधीन यथा िःथित भूिमःवामी या राज्य शासन से धारण िकए गए भूिम खण्ड से है। (च) ‘‘सेवा भूिम के धारक’’ से तात्पयर् गांव के सेवक के रूप में सेवा करने की शतर् पर भूधारण करने वाले व्यिक्त से है। (छ) ‘‘शासकीय यपट्टेधारी’’ से तात्पयर् संिहता की धारा 181 के अधीन राज्य शासन से भूिम धारण करने वाले व्यिक्त से है। (छछ) िनमार्ता- से तात्पयर् ऐसा व्यक्त ् ि◌(बीड़ी मजद ू र के अितिरक्त ् ) ःथानीय अिधकारी, कम्पनी, अिवभािजत िहन्द ू पिरवार, या सोयायटी (िजसमें सहकारी सोसायटी सिम्मिलत है। क्लब, फमर्, या एसोिसयेशन, जो बीडी बनाने के कायर् में लगी हो बेचा है िकसी भी तरीके से बीड़ी बनावे। (ज) ‘‘उिल्लिखत क्षेऽ’’ (Specified Area) से तात्पयर् धारा 1 की उपधारा
- (3) के अधीन अिधसूचना में उिल्लिखत क्षेऽ से है। (झ) ‘‘भाड़ेदार’’ (Tenant) से तात्पयर् संिहता के चैदहवें अध्यशय के अधीन भूिम ःवामी से मौरूसी काँतकार के रूप में भूिम धारण करने वाले व्यिक्त से है। (ण) ‘‘भूधारी’’ (Tennure holder) से तात्पयर् उस व्यिक्त से है जो राज्य शासन से भूिम धारण करता हो और जो संिहता के उपबंधों के अधीन भूिम ःवामी हो या भूिम ःवामी माना गया हो। (ट) ‘‘इकाई’’
- (Unit) से तात्पयर् उिल्लिखत क्षेऽ के उस उप-खण्ड से है जो धारा 3 के अधीन इकाई के रूप में गिठत िकया गया हो। (ठ) उन शब्दों तथा अिभव्यिक्तययों का, जो इस अिधिनयम में ूयोग में लाई गई हो, िकन्तु पिरभािषत न की गई हों और जो भारतीय वन अिधिनयम, 1927 (ब. 16, वषर् 1927) में पिरभािषत की गई हों, का वही तात्पयर् होगा जो उनके िलये उस अिधिनयम में िदया है।
3. Constitution of units
धारा 3. इकाइयों का गठन - राज्य शासन ूत्येक उिल्लिखत क्षेऽ को उतनी इकाइयों में िवभािजत कर सकेगा िजतनी िक वह उपयुक्त समझे।
4. Appointment of agents
धारा 4.
- (1) राज्य शासन, अपनी ओर से तेन्दू पत्तों के बय तथा व्यापार के हेतु िभन्न-िभन्न इकाइयों के िलये अिभकतार्ओं की िनयुिक्त कर सकेगा तथा कोई भी ऐसा अिभकतार् एक से अिधक इकाइयों के िलए िनयुक्त िकया जा सकेगा।
- (2) अिभकतार्ओं की िनयुिक्त सम्बन्धी िनबर्न्धन तथा शतेर्ं ऐसी होंगी जैसी शासन द्वारा समय-समय पर िनधार्िरत की जावें -
5. Restriction on purchase or transport of Tendu leaves
धारा 5. तेन्दू पत्ते के बय या पिरवहन पर िनबन्धन -
- (1) िकसी भी क्षेऽ में धारा 1 की उपधारा
- (3) के अधीन सूचना जारी होने पर - (क) राज्य शासन। (ख) इस सम्बन्ध में िलिखत रूप से ूािधकृत िकये गये शासन के िकसी पदािधकारी, या (ग) िजस इकाई में पत्ते उगाये गये हों उस इकाई से सम्बिन्धत अिभकतार् को छोड़कर कोई भी अन्य व्यिक्त तेन्दू पत्तों का न तो बय करेगा और न पिरवहन करेगा। व्याख्या 1. (एक) राज्य शासन या पूवोर्क्त शासकीय पदािधकारी, या अिभकतार् द्वारा धारा 12 A के अन्तगर्त िकया गया तेन्दू पत्तों का बय इस अिधिनयम के उपबंधों के उल्लंघन में िकया गया बय नहीं समझा जावेगा। (दो) खाते में कोई िहत न रखने वाले िकसी ऐसे व्यिक्त के सम्बन्ध में, िजसने िक ऐसे खातों में उगाये गये तेन्दू पत्तों का संमह करने का अिधकार अिजर्त कर िलया हो, यह समझा जायेगा िक उसने इस अिधिनयम के उपबंधों के उल्लंघन में ऐसे पत्तों का बय िकया है।
- (2) उपधारा
- (1) में अन्तिवर्ष्ट िकसी बात के होते ह ु ए भी – (क) तेन्दू पत्ते को उगाने वाला, अपने पत्तों का पिरवहन, ऐसी इकाई के भीतर, िजसमें तेन्दू पत्ते उगे हों, िकसी ःथान से उस इकाई में िकसी ःथान तक कर सकेगा और, (ख) ‘‘ऐसे तेन्दू पत्तों का, िजनका बय राज्य शासन से तथा उक्त उपधारा में उिल्लिखत िकये गये िकसी पदािधकारी या अिभकतार् से िकसी व्यिक्त द्वारा राज्य के भीतर बीिडयों के िनमार्ण के िलये या िकसी व्यिक्त द्वारा राज्य के बाहर िवबय के िलए धारा 5 के संशोधन जो म.ू. तेन्दू पत्ता (व्यापार िविनयमन) संशोधन अिधिनयम 7 वषर् 1989 द्वारा िकये गये है िकसी ऐसे व्यिक्त द्वारा ईकाई के बाहर पिरवहन उस सम्बन्ध में ऐसे ूािधकार द्वारा, ऐसी रीित में और ऐसी फीस की देनगी की जाने पर, जैसा िक िविहत िकया जाये, जारी िकये जाने वाले अनुज्ञा-पऽ के िनबन्धेां तथा शतोर्ं के अनुसार िकया जा सकेगा। िविभन्न ूकार की पिरवहन गाि़डयों के िलये फीस की िविभन्न दरें िविहत की जा सकेंगी।’
- (3) तेन्दू पत्ते का िवबय करने का इच्छ ु क कोई भी व्यिक्त उन्हें पूवोर्क्त शासकीय पदािधकारी या अिभकतार् को इकाई के भीतर िःथत िकसी भी संमहागार (फड़) में बेंच सकेगा।
6. Omitted
धारा 6. लुप्त।
7. Government to fix price
धारा 7. राज्य शासन मूल्य िनधार्िरत करेगी: राज्य शासन, तेन्दूपत्ता उगाने वालों का तेन्दूपत्ता, उसके द्वारा, अिधकृत अिधकारी द्वारा या एजेन्ट द्वारा, राज्य शासन के अितिरक्त खरीदने का मूल्य, उस िविध से जो िनधार्िरत की जाव े, िनधार्िरत करेगी।
8. Opening of depots and publication of price list etc
धारा 8. संमहागारों का खोला जाना तथा संमहागारों (फड़ों) पर मूल्य सूची आिद का ूकाशन - ूत्येक इकाई में ऐसी संख्या में तथा ऐसी ःथानों पर, जैसा िक राज्य शासन, तेन्दू पत्ता उगाने वालों की सुिवधा का िवचार करते हए िनदेर्िशत करे, संमहागार (फड़ें) ःथािपत िकए जायेंगे और धारा 7 के अधीन राज्य शासन द्वारा िनिश्चत की गई तेन्दू पत्तों की मूल्य सूची, काम-काज के घण्टे, उस सूचना-फलक पर ूमुख रूप से संूदिशर्त िकए जायेंगे जो िक इस ूयोजन के िलए ूत्येक ऐसे संमहागार में रखा गया हो।
9. State Government or agent to purchase Tendu leaves
धारा 9. राज्य शासन या अिभकतार् तेन्दू पत्तों का बय करेगा -
- (1) राज्य शासन या उसका ूािधकृत अिधकारी या अिभकतार्, काम-काज के घंटों के भीतर, संमहागार (फड़) में िवबय के, िलए ूःतुत िकए गए तेन्दू पत्ते, धारा 7 के अधीन िनिश्चत िकए मूल्य पर, खरीदने को बाध्य होगा:
- (2) उपधारा
- (1) के परन्तुक के अधीन ूािधकृत अिधकारी या अिभकतार् द्वारा, उसके पत्तों के अःवीकार कर िदए जाने के कारण पिरवेिदत (Aggrieved) कोई भी व्यिक्त, ऐसी अःवीकृित के पन्िह िदन के भीतर, ऐसी इकाई पर िजसमें िक पत्ते उगे हों क्षेऽािधकार रखने वाले वन मण्डलािधकारी या इस सम्बन्ध में राज्य शासन द्वारा सशक्त िकए गये अन्य पदािधकारी को मामला िनिदर्ष्ट कर सकेगा।
- (3) उपधारा
- (2) के अधीन िशकायत ूाप्त होने पर, यथािःथित वन मण्डलािधकारी, या ऐसा अन्य पदािधकारी, उसी ःथान पर या मुख्यालय पर िविहत रीित से जांच करेगा और सम्बिन्धत पक्षों या उनके ूािधकृत अिभकतार् को सुनने के पश्चात ऐसे आदेश पािरत करेगा जैसे िक वह ठीक समझे और उस दशा में जब वह पत्तों को अःवीकार करना अनुिचत पाता हो। (क) यिद वह ूश्नाधीन पत्तों को अब भी बीि़डयों के िनमार्ण के िलए उपयुक्त समझता हो, यथािःथित पदािधकारी या अिभकतार् को उसका बय करने के आदेश दे सकेगा और पिरवेिदत व्यिक्त (Aggrieved person) को ऐसा अमेतर ूितकर (Further compensation), जैसा िक वह उिचत समझे, और जो उसे पत्तों के देय मूल्य के बीस ूितशत से अिधक न हो, भुगतान के िलए िनदेर्श दे सकेगा। (ख) यिद वह समझे िक ूश्नाधीन (in question) पत्ते, इस बीच बीड़ी के िनमार्ण के िलए अनुपयुक्त हो गए हैं तो पिरवेिदत व्यिक्त को ऐसी रकम जो िक उपधारा
- (1) के अधीन, उसको ऐसे पत्तों के देय मूल्य से कम न हो, तथा ऐसे व्यिक्त के द्वारा उठाई गई हािन के िलए क्षितपूितर् धन के रूप में ऐसा अमेतर ूितकर, जैसा िक वह उिचत समझे और जो ऐसे मूल्य के बीस ूितशत से अिधक न हो, भुगतान के िलए िनदेर्श दे सकेगा।
- (4) इस धारा की िकसी बात का यह अथर् नहीं िलया जायेगा िक यिद राज्य शासन, उसके ूािधकृत अिधकारी या अिभकतार् को यह िवश्वास करने के कारण हो िक िवबय के िलये ूःतुत िकये गये पत्ते, राज्य शासन के वनों या भूिमयों के हैं, तो ऐसे पत्तों को अिधकार में लेने और केवल ऐसे संमहण सम्बन्धी व्ययों के, िजद कोई हों, जैसे िक राज्य शासन समय-समय पर अवधािरत करे, भुगतान करने में कोई रुकावट आती है: Provided that िकन्तु िकसी िववाद की दशा में, वन मण्डलािधकारी या ऐसा अन्य पदािधकारी, जो िक उपधारा
- (2) में उिल्लिखत िकये गये रूप में इस सम्बन्ध में िविशष्ट रूप से सशक्त कर िदया जावे, उसमें उपबंिधत रीित में उसे सुनेगा तथा उसका िनपटारा करेगा।
10. Registration
धारा 10. रिजःशीकरण - राज्य शासन को छोड़कर, तेन्दू पत्तों का अन्य उगाने वाला, यिद यह संभावना हो िक वषर् के दौरान, उसके द्वारा उगाये पत्ते का पिरणाम, ऐसे पिरणाम से जो िविहत िकया जावे, अिधक हो जावेगा, ःवयं को िविहत रीित से रिजःशीकृत करा लेगा।
11. Registration of manufacturers of Bidis and traders of Tendu leaves
धारा 11. बीि़डयों के िनमार्ता और तेन्दूपत्ता व्यापारी का रिजःशीकरण -
- (1) ूत्येक बीि़डयों का िनमार्ता तथा ूत्येक तेन्दू पत्ते का व्यापारी, जैसे कालाविध के भीतर जो िनधार्िरत की जावे और ऐसी फीस का भुगतान कर और उस िविध से जो िनधार्िरत की जावे, ःवयं को रिजःशीकृत करावेगा।
- (2) बीि़डयों का ूत्येक िनमार्ता और तेन्दू पत्ते का ूत्येक व्यापारी को उपधारा
- (1) में रिजःशीकृत िकया गया हो, ऐसे ूारूप में, ऐसे िदनांक तक ऐसी रीित से जो िविहत की जावे, घोषणा ूःतुत करेगा।
12. Disposal of leaves
धारा 12. पत्तों का िनवतर्न - इस अिधिनयम के अधीन, राज्य शासन द्वारा या उसके पदािधकारी या अिभकतार् द्वारा बय िकये तेन्दू पत्ते ऐसी रीित में, जैसा िक राज्य शासन िनदेर्श दे, बेच िदये जावेंगे या उनका अन्यथा िनवतर्न कर िदया जायेगा।
12A. Resale of surplus Tendu leaves
धारा 12.क. अितिरक्त तेन्दू पत्तों का पुनिवर्बय -
- (1) कोई बीि़डयों का िनमार्ता या तेन्दू पत्तों का िनयार्तक, िजसके पास उसकी आवँयकता 1{ } के पश्चात अितिरक्त माऽा में तेन्दू पत्ता बचा रह जाता हो, वह ऐसे अितिरक्त बचे तेन्दू पत्तों का पुनिवर्बय राज्य शासन की या ऐसी िकसी पदािधकारी की, जो इस सम्बन्ध में ूािधकृत िकया जाए, अनुज्ञा के िबना नहीं करेगा। वह व्यिक्त, जो ऐसे तेन्दू पत्तों का पुनिवर्बय करने का अिभूाय रखता हो, राज्य शासन अथवा ूािधकृत अिधकारी को ऐसे ूारूप में, ऐसी िविशष्टयां अन्तिवर्ष्ट करते हए, जैसा िक िविहत िकया जाए, आवेदन करेगा।
- (2) कोई बीि़डयों का िनमार्ता या तेन्दू पत्तों का 1{व्यापारी} जो इस धारा की उपधारा
- (1) में विणर्त तेन्दू पत्तों में ऐसे अितिरक्त पिरणाम का बय करने का अिभूाय रखता हो, उसका बय राज्य शासन की या ऐसी िकसी ूािधकारी की, जो इस सम्बन्ध में ूािधकृत िकया जाए, अनुज्ञा के िबना नहीं करेगा। ऐसा बीि़डयों का िनमार्ता या तेन्दू पत्तों का 1{व्यापारी} राज्य शासन को या ऐसे िकसी पदािधकारी को, जो इस सम्बन्ध में ूािधकृत िकया जाए, ऐसे ूारूप में, ऐसी िविशिष्टयां अन्तिवर्ष्ट करते हए जैसा िक िविहत िकया जाए, आवेदन करेगा।
- (3) तेन्दू पत्तों का पुनिवर्बय करने के उपधारा
- (1) के अधीन आवेदन तथा ऐसे तेन्दू पत्तों का बय करने के िलए उपधारा
- (2) के अधीन आवेदन ूाप्त होने पर, राज्य शासन या ूािधकृत पदािधकारी बेता द्वारा ऐसी रािश की, जो िक िविहत की जाए, देनगी की जाने पर, उन दोनों को िलिखत में अनुज्ञा दे सकेगा।
13. Delegation of powers
धारा 13. शिक्तयों का ूत्यायोजन (Delegation of Power) - राज्य शासन, आदेश द्वारा इस अिधिनयम या उसके अधीन बनाये गये िनयमों के अधीन सहायक वन संरक्षक से िनम्न ौेणी के िकसी भी पदािधकारी या ूािधकारी को अपनी िकन्हीं भी शिक्तयों से या कृत्यों से ूत्योिजत (delegate) कर सकेगा जो िक उन्हें ऐसी शतोर्ं या िनबन्धनों के अधीन, जैसी की राज्य शासन आदेश में उिल्लिलखत करे, ूयोग में लायेगा या सम्पािदत करेगा। नोट - राज्य शासन ने िनम्नानुसार अिधकार िदये हैं। अिधसूचना ब. 246/X/65 िदनांक 12‐1‐65 मध्य ूदेश तेन्दू पत्ता (व्यापार िविनयमन), 1964 (ब. 29, वषर् 1964) की धारा 13 द्वारा ूदत्त शिक्तयों का ूयोग करते हये राज्य शासन, िनम्न अनुसूची के ःतम्भ (Column 2) में ूदिशर्त अिधकारों को इन्हीं अनुसूची के ःतम्भ (Column 3) में ूदिशर्त अिधकािरयों को अिधकार ूदत्त करता है जो किथत अनुसूची के ःतम्भ 4 में िनदेर्िशत यिद कोई शतर् या ूितबन्ध हो तो उसको मानते हये किथत अिधकारों का ूयोग करेगा। (म.ू. राजपऽ िदनांक 12‐1‐1965, पृष्ठ 34 पर ूकािशत)
अनु. 1 अिधकार 2 अिधकारी 3 शतर् एवं ूितबंध 4 िरमाकर् 5 1. 2. 3. अिधिनयम की धारा 3 के अनुसार इकाई गठन का अिधकार अिधिनयम की धारा 4 के अधीन अिभकतार्-कताओं की िनयुिक्त का अिधकार तथा अिभकतार्ओं की िनयुिक्त को रद्द करने की शिक्त अिधिनयम की धारा 8 के अंतगर्त िडपो खोलने का अिधकार 1. वन संरक्षक, तेन्पू पत्ता, भोपाल। 2. मुख्य वन संरक्षक, म.ू. भोपाल। 3. उप मुख्य वन संरक्षक, म.ू. भोपाल। क्षेऽीय वृत्तों के ूभारी वन संरक्षक संभागीय वन अिधकारी (वन मण्डलािधकरी) राज्य सरकार की पूवर् अनुमित से अिधकार का ूयोग होगा अिधसूचना ब. 618‐X‐71 िद. 18‐2‐71 द्वारा संशोिधत ूितबन्ध म.ू. शासन वन िवभाग की अिधसूचना ब. 974/X/(2)‐70 िद. 14‐4‐70 जो राजपऽ िदनांक 21‐4‐70 पर पृष्ठ 915‐916 पर ूकािशत से िवलोिपत
14. Power of seizure of property liable to confiscation and procedure therefor
धारा 14. अिधहरणीय सम्पित्त के अिभमहण की शिक्त और उसके िलये ूिबया -
- (1) समःत वन पदािधकारी या सहायक उप-िनरीक्षक से अिनम्न ौेणी का कोई भी पुिलस पदािधकारी या राज्य शासन द्वारा ूािधकृत कोई अन्य व्यिक्त, इस अिधिनयम के या उसके अधीन बनाये गए िनयमों के उपबंधों के पालन को सुिनिश्चत करने की दृिष्ट से या ःवयं का यह समाधान करने की दृिष्ट से उक्त उपबंधों का पालन िकया गया है – (एक) तेन्दू पत्ते के िलये उपयोग में लाये गये या उपयोग में लाये जाने के िलये अिभूेत िकसी नाव, गाड़ी या तेन्दू पत्ता भरने के िलये उपयोग में लाया जाने वाला सामान (भक्कू) को रोक सकेगा या उसकी तलाशी ले सकेगा। (दो) िकसी ःथान में ूवेश कर सकेगा और उसकी तलाशी ले सकेगा।
- (2) तेन्दू के उन पत्तों का िजनके सम्बन्ध में यिद संदेह को िक इस अिधिनयम के अधीन या उसके बनाये िनयमों के िकसी उपबंध का उल्लंघन िकया है, िकया जा रहा है, िकया जाने वाला है, तो वह सामान, िजसमें पत्ते रखे हों या पत्तों को ले जाने हेतु उपयोग में लाई जाने वाली गाि़डयों या नाव सिहत अिभमहण कर सकेगा।
- (3) इस धारा के अधीन िकसी सम्पित्त का अिभमहण करने वाला कोई भी ऐसा व्यिक्त, िजसे राज्य शासन ने इस सम्बन्ध में ूािधकृत िकया हो, ऐसी समःत सम्पित्त पर यह उपदिशर्त करने वाला एक िचन्ह लगायेगा िक उसका इस ूकार अिभमहण िकया गया है, और अिभमहीत की गई सम्पित्त को या तो यथाशक्य शीय सहायक वन संरक्षक से अिनम्न ौेणी के पदािधकारी के या िकसी ऐसे व्यिक्त के िजसे राज्य शासन ने, अिधसूचना द्वारा, इस सम्बन्ध में ूािधकृत अिधकारी िनयुक्त िकया हो, (जो इसमें इसके पश्चात ूािधकृत पदािधकारी के नाम से िनिदर्ष्ट है) समक्ष पेश करेगा, या जहां पिरणाम या ूपुंज (बल्क) को, अन्य वाःतिवक किठनाई को ध्यान में रखते हए यह साध्य न हो िक अिभमहीत की गई सम्पित्त को ूािधकृत पदािधकारी के समक्ष पेश िकया जा सके, वहां वह अिभमहण की बाबत ूितवेदन ूािधकारी को करेगा, या जहां अपराधी के िवरूद्ध दािण्डक कायर्वािहयां तुरंत आरम्भ करना अिभूेत हो, वहां ऐसे अिभमहण का ूितवेदन उस मिजःशेट को करेगा जो उस अपराध का िवचारण करने की अिधकािरता रखता हो िजसके िक कारण अिभमहण िकया गया है। परंतु जब वे तेन्दू पत्ते िजनके बारे में ऐसा अपराध िकये जाने का िवश्वास िकया जाता है, शासन की सम्पित्त है, और अपराधी अज्ञात है।, तब यिद पदािधकारी पिरिःथितयों के बारे में ूितवेद न अपने पदीय विरष्ठ को यथाशीय दे देता है तो वह पयार्प्त होगा। (3.A)
- (1) कोई वन अिधकारी, जो वन क्षेऽ पाल के पद से अिनम्न पद का न हों और िजसके अधीनःथ अिधकारी ने उपधारा
- (2) के अन्तगर्त कोई औजार, नाव, वाहन रःसी चेन या अन्य वःतु जप्त की हो, को उन वःतुओं के मािलक द्वारा, उन वःतुओं के मूल्य मािलक, द्वारा उन वःतुओं के मूल्य के बराबर या उस अिधकारी की सन्तुिष्ट तक की रािश की जमानत िनंपािदत की हो और यह िलिखत में, यह बन्ध पऽ ूःतुत करे िक वह उन वःतुओं को िजस ःथान पर, िजस िदनांक को िनदेर्िशत िकया जावे, ूािधकृत अिधकारी या उस मिजःशेट के सामने, िजसको, उस ूकरण की सुनवाई की अिधकािरता है, ूःतुत करेगा, सुपुदर्गी में दे सकेगा।
- (4) उपधारा
- (6) के उपबंधों के अध्याधीन रहते हए, जब ूािधकृत पदािधकारी का यथािःथित तेन्दू पत्तों को अपने समक्ष पेश िकये जाने पर या अिभमहण के बारे में ूितवेदन के ूाप्त होने पर, यह समाधान हो जाता है िक उसके बारे में अपराध िकया गया है, तो वह, िलिखत आदेश द्वारा, अिभिलिखत िकये जाने वाले कारणों से, उन तेन्दू पत्तों को, जो इस ूकार अिभगृिहत िकये गये हैं, समःत औजारों, गाि़डयों, नावों, रःसों, जंजीरों या िकन्हीं अन्य वःतुओं सिहत?, िज नका िक उपयोग ऐसे अपराध के करने में िकया गया है अिधहृत कर सकेगा। (ूािधकृत अिधकारी के आदेश की एक ूित) असम्यक् िवलम्ब के िबना उस वृत्त के वन संरक्षक को भेजी जायेगी िजसमें िक तेन्दू पत्तों को अिभगृहीत िकया गया है।
- (5) उपधारा
- (3) के अधीन िकसी संपित्त को अिधहृत करने वाला कोई आदेश तब तक नहीं िकया जायेगा जब तक िक ूािधकृत पदािधकारी – (क) सम्पित्त के अिधहरण के िलये कायर्वािहयां शुरू िकये जाने के बारे में सूचना उस अपराध का, िजसके कारण अिभमहण िकया गया है, िवचारण करने की अिधकािरता रखने वाले मिजःशेट को िविहत ूारूप में नहीं भेज देता। (ख) उस व्यिक्त को, िजससे यह सम्पित्त अिभगृहीत की गई है तथा िकसी ऐसे अन्य व्यिक्त को, िजसके बारे में ूािधकृत पदािधकारी को यह ूतीत होता हो िक उसका ऐसी सम्पित्त में कोई िहत है, िलिखत सूचना नहीं दे देता। (ग) खण्ड (ख) में िनिदर्ष्ट व्यिक्त को ूःतािवत अिधहरण के िवरूद्ध ऐसे युिक्तयुक्त समय के भीतर, जैसा िक सूचना में उिल्लिखत िकया जाये, अभ्यावेदन करने का अवसर दे देता; और (घ) अिभमहण करने वाले पदािधकारी की तथा उस व्यिक्त या उन व्यिक्तयों की, िजसे उन्होंने खण्ड (ख) के अधीन सूचना दी हो सुनवाई, उस ूयोजन के िलये िनयत िकये जाने वाले िदनांक को नहीं कर लेता।
- (6) उपधारा
- (4) के अधीन, िकन्हीं औजारों, गाि़डयों, नावों, रःसों, जंजीरों या िकसी अन्य वःतु के (जो अिभगृहीत िकये तेन्दू पत्तों से िभन्न हो) अिधहरण का कोई आदेश नहीं िकया जायेगा यिद उपधारा
- (2) के खण्ड (ख) में िनिदर्ष्ट कोई व्यिक्त, ूािधकृत पदािधकारी के समाधानूद रूप में यह सािबत कर देता है िक िकन्हीं ऐसे औजारों, गाि़डयों, नावों, रःसों, जंजीरों या अन्य वःतुओं का उपयोग उसकी जानकारी या मौनानुकूलता के िबना िकया गया था और यह िक इस अिधिनयम के अधीन िकसी अपराध के िकये जाने के िकये पूवोर्क्त वःतुओं के उपयोग को रोकने के िलये समःत युिक्तयुक्त और आवँयक पूवार्वधािनयां बरती गई थीं।
- (7) इस धारा के अन्तगर्त की जाने वाली तलाशी एवं जप्त के सम्बन्ध में, भा.द.ू. संिहता 1973 (ब. 2 1974) को धारा 102 एवं 103 के तलाशी एवं जप्ती के ूावधान, जहां तक लागू हों, इसमें भी लागू होंगे।
- (8) जब उस ूािधकृत अिधकृत द्वारा, िजसका उस क्षेऽ पर क्षेऽािधकार हो, उसने ःवयं वःतुएं जप्त की हो या िजसने उस ूकरण का अन्वेषण िकया हो, तो वन मण्डलािधकारी उस ूकरण को उसी पद के दूसरे अिधकारी को हःतांतिरत कर सकेगा जो इस धारा के अन्तगर्त कायर्वाही करेगा।
14A. Appeal against order of confiscation
क. अिधहरण के आदेश के िवरूद्ध अपील -
- (1) अिधहरण के िकसी आदेश से पिरवेिदत कोई व्यिक्त, आदेश के िलए िकये जाने के िदनांक से तीस िदन के भीतर, या यिद ऐसे आदेश सम्बन्धी तथ्य की संसूचना उसे नहीं दी गई हो तो ऐसे आदेश की जानकारी होने के िदनांक से तीस िदन के भीतर, उस वन वृत्त के, िजसमें तेन्दू पत्ते अिभगृहीत िकये गये हों, वन संरक्षक (जो इसमें इसके पश्चात अपील ूािधकारी के नाम से िनिदर्ष्ट है) को िलिखत में अपील कर सकेगा िजसके साथ ऐसी फीस जमा की जायेगी और जो ऐसे रूप में देय होगी जैसा िक िविहत िकया जाए, और उसके साथ अिधहरण के आदेश की ूमािणत ूित संलग्न होगी।
- (2) उपधारा
- (1) में िनिदर्ष्ट अपील ूािधकारी, उस दशा में जबिक उसके समक्ष कोई अपील न की गई हो, अिभमहण करने वाले 1{पदािधकारी} को, और ऐसे िकसी अन्य व्यिक्त को, िजसका िक अपील अिधकारी की राय में ूािधकृत अिधकारी के आदेश से ूितकूलतः ूभािवत होना संभाव्य है, (िजसके अन्तगर्त अपीलाथीर्, यिद कोई हो, आता है) ःवूेरणा से की जाने वाली कायर्वाई की सुनवाई की सूचना 1{ूािधकृत अिधकारी} के आदेश की ूित उसे ूाप्त होने के िदनांक से तीस िदन के भीतर ःवूेरणा से दे सकेगा, और अपील के ज्ञापन के पेश िकये जाने की दशा में, वह अपील की सुनवाई की सूचना उक्त व्यिक्तयों को देगा, और मामले के अिभलेख मंगा सकेगा। परंतु अपील की कोई औपचािरक सूचना अपीलाथीर्, अिभमहण करने वाले पदािधकारी और ऐसे िकसी अन्य व्यिक्त िजसका िक पूवोर्क्तानुसार ूितकूल, ूभािवत होना संभाव्य है, में से उसको िदया जाना आवँयक नहीं होगा जो सूचना अिधत्यजन कर दे या िजसे अपील की सुनवाई का िदनांक, अपील ूािधकारी द्वारा िकसी अन्य रीित में सूिचत िकया जा सकता हो।
- (3) अपील अिधकारी, अपील िकये जाने की, या ःवूेरणा से की जाने वाली कायर्वाही िकये जाने के बारे में में ूािधकृत अिधकारी को िलिखत सूचना देगा।
- (4) अपील अिधकारी, अिधहरण की िवषय वःतु की अिभरक्षा पिररक्षण या व्ययन (यिद आवँयक हो) के िलये अिन्तिरम ःवरूप ऐसे आदेश पािरत कर सकेगा जैसे िक उसे उस मामले की पिरिःथितयों में न्यायसंगत ूतीत हो।
- (5) अपील अिधकारी, मामले की ूकृित या अन्तगर्त जिटलताओं को ध्यान में रखते हए अपील के पक्षकारों को, उनका ूितिनिधत्व उनके अपने िविध व्यावसािययों के द्वारा िकये जाने की अनुज्ञा दे सकेगा।
- (6) अपील की या ःवूेरणा से की जाने वाली कायर्वाही की सुनवाई के िलए िनयत की गई तारीख को, या ऐसी तारीख को, िजसके िलए सुनवाई रखी जावे, अपील अिधकारी अिभलेख का पिरशीलन करेगा और यिद अपील के पक्षकार ःवयं उपिःथत हों तो उनकी सुनवाई करेगा या िलिखत में सम्यक रूप से ूािधकृत िकये गये िकसी अिभकतार् या िविध व्यवसायी की माफर्त सुनवाई करेगा और उसके पश्चात अिधहरण के आदेश की पुिष्ट करने, उसे उलटने या उसे उपान्तिरत करने का आदेश पािरत करने के िलए अमसर होगा, परन्तु कोई आदेश पािरत करने के पूवर् अपील अिधकारी यिद अपील के या ःवूेरणा से की गई कायर्वाही के उिचत िनपटारे के िलये, यह आवँयक समझा जाता है तो अितिरक्त जांच या तो ःवयं कर सकेगा या ूािधकृत अिधकारी से करवा सकेगा और िकसी ऐसे तथ्य का, जो िवचारथर् उद्भूत हो, ूाख्यान या खण्डन करने के िलए पक्षकारों को शपथ पऽ फाइल करने के िलये अनुज्ञा दे सकेगा और तथ्यों का सबूत शपथ पऽ द्वारा िकये जाने की अनुज्ञा दे सकेगा।
- (7) अपील ूािधकारी पािरणािमक ःवरूप के ऐसे आदेश भी पािरत कर सकेगा जैसे िक वह आवँयक समझे।
- (8) अंितम आदेश की, या पािरणािमक ःवरूप के आदेश की ूित पालन के िलये अपील ूािधकारी के आदेश के अनुरूप कोई अन्य समुिचत आदेश पािरत करने के िलये, ूािधकृत पदािधकारी को भेजी जायेगी।
14B. Revision before Sessions Court against order of appellate authority
धारा 14. ख. अपील ूािधकारी के आदेश के िवरूद्ध सेशन न्यायालय के समक्ष पुनरीक्षण -
- (1) अपील का कोई भी पक्षकार, जो अपील ूाधीकारी द्वारा पािरत िकये गये अंितम आदेश से या पािरणािमक ःवरूप के आदेश से पिरवेिदत हो, उस आदेश के, िजसके िवरूद्ध आक्षेप िकया जाना ईिप्सत है, तीस िदन के भीतर, उस सेशन न्यायालय को, पुनरीक्षण के िलये यािचका ूःतुत कर सकेगा िजसके सेशन खण्ड के भीतर अपील ूािधकारी का मुख्यालय िःथत हो। व्याख्या - इस उपधारा के अधीन तीस िदन की कालाविध की संगणना करने में, वह समय अपविजर्त कर िदया जायेगा जो अपील ूािधकारी के आदेश की ूमािणत ूित अिभूाप्त करने के िलए अपेिक्षत रहा हो।
- (2) सेशन न्यायालय, अपील ूािधकारी द्वारा पािरत िकये गये िकसी अंितम आदेश या िकसी पािरणािमकःवरूप के आदेश की पुिष्ट कर सकेगा, उसे उलट सकेगा, या उसे उपान्तिरत कर सकेगा।
- (3) पुनरीक्षण में पािरत िकये आदेश की ूितयां, अपील ूािधकारी को तथा ूािधकृत पदािधकारी को, पालन के हेतु या ऐसे अितिरक्त आदेश पािरत करने हेतु या ऐसी अितिरक्त कायर्वाही करने हेतु भेजी जायेगी जैसा िक ऐसे न्यायालय द्वारा िनदेिशत िकया जाये।
- (4) इस धारा के अधीन िकसी पुनरीक्षण को महण करने, उसकी सुनवाई करने और उसका िविनिश्चत करने के िलये सेशन न्यायालय, जहां तक हो सके उन्हीं अिधकारों का ूयोग करेगा और उसी ूिबया का अनुसरण करेगा िजसका िक ूयोग और अनुसरण वह दण्ड ूिबया संिहता, 1973 (1974 का सं. 2) के अधीन िकसी पुनरीक्षण को महण करने, उसकी सुनवाई करने और उसका िविनश्चय करने के समय करता है।
- (5) दण्ड ूिबया संिहता, 1973 (1974 का सं. 2) में अन्तिवर्ष्ट िकसी तत्ूितकूल बात के होते हए भी, इस धारा के अधीन पािरत िकया गया सेशन न्यायालय का आदेश अंितम होगा और िकसी भी न्यायालय के समक्ष ूश्नगत नहीं िकया जायेगा।
14C. Bar of jurisdiction of court etc. in certain circumstances
धारा 14. ग. कितपय पिरिःथितयों में न्यायालय आिद की अिधकािरता का वजर्न -
- (1) उस अपराध का, िजसके कारण उस सम्पित्त का, जो िक अिधहरण की िवषय-वःतु है, अिभमहण िकया गया है िवचारण करने की अिधकािरता रखने वाले मिजःशेट को सम्पित्त के अिधहरण के िलये कायर्वािहयां शुरू की जाने के बारे में धारा 14 की उपधारा
- (5) के अधीन सूचना के ूाप्त होने पर, िकसी भी न्यायालय, अिधकरण या ूािधकारी (जो यथािःथित धारा 14, 14-क में िनिदर्ष्ट ूािधकृत पदािधकारी, अपील पदािधकारी तथा सेशन न्यायालय से िभन्न हो) को, इस अिधिनयम में या तत्समय ूवृत्त िकसी अन्य िविध में अन्तिवर्ष्ट िकसी बात के होते हए भी, उस सम्पित्त के कब्जे, पिरदान, िनवतर्न या िववरण के िवषय में कोई आदेश करने की अिधकािरता नहीं होगी िजसके बारे में धारा 14 के अधीन अिधहरण की कायर्वािहयां शुरू हो गई हैं। परन्तु सम्पित्त के िनवतर्न के िलए कोई आदेश पािरत करने के पूवर्, मिजःशेट अपना यह समाधान कर लेगा िक धारा 14 की उपधारा
- (5) के अधीन कोई सूचना उसके न्यायालय को या उस अपराध का िजसके कारण सम्पित्त का अिभमहण िकया गया है, िवचारण करने की अिधकािरता रखने वाले िकसी अन्य न्यायालय को ूाप्त नहीं हई है। व्याख्या - जहां तत्समय ूवृत्त िकसी िविध के अधीन, इस अिधिनयम के अधीन अपराध का िवचारण करने की अिधकािरता दो या अिधक न्यायालयों को हो, वहां ऐसी अिधकािरता रखने वाले मिजःशेट के न्यायालयों में से िकसी एक को धारा 14 की उपधारा
- (5) के अधीन की सूचना ूाप्त हो जाने पर यह अथर् लगाया जायेगा िक उस उपबंध के अधीन सूचना समःत न्यायालयों पर ूवितर्त होगी।
- (2) इसमें इसके पूवर् अन्तिवर्ष्ट िकसी भी बात के सम्बन्ध में यह नहीं समझा जायेगा िक वह राज्य शासन द्वारा इस सम्बन्ध में ूािधकृत िकये गये िकसी पदािधकारी को इस बात से िनवािरत करती है िक वह धारा 14 अधीन अिभगृहीत की गई िकसी सम्पित्त को तुरन्त िनमुर्क्त िकये जाने का िनदेर्श िकसी भी समय दें।
14D. Confiscation of property where produce is not property of Government
धारा 14. घ. सम्पित्त का अिधहरण, जब िक वह उपज शासन की सम्पित्त न हो - ऐसे समःत तेन्दू पत्ते, जो दोनों में से ूत्येक दशा में शासन की सम्पित्त नहीं है और िजसके िवषय में इस अिधिनयम के या उसके अधीन बनाये गये िनयमों के िकसी उपबंध का उल्लंघन िकया गया है, तथा समःत औजार, नावें, गाि़डयां, रःसे, जंजीर या कोई अन्य वःतुएं, िजननका ूत्येक दशा में उपयोग ऐसा उल्लंघन करने में िकया गया है, अपराध को ऐसे उल्लंघन के िलये दोषिसद्ध ठहराये जाने पर धारा 14-14-क, 14-ख तथा 14-ग के अध्यधीन रहते हःए अिधहरणीय होगी।
15. Penalty
धारा 15. शािःत - यिद कोई व्यिक्त इस अिधिनयम या उसके अधीन बनाये गये िनयमों के िकन्हीं भी उपबंधों का उल्लंघन करेगा तो - (क) वह कारावास से िजसकी अविध तीन मास से कम न हो तो जो एक वषर् तक बढ़ाई जा सकती है या अथर्दण्ड से जो पांच हजार रूपये से कम न हो और जो रूपये 50,000 तक हो सकता है, से दण्डनीय होगा। जब तक िक न्यायालय इस बात से सन्तुष्ट हो िक सजा से भी न्याय की मांग की पूितर् हो जावेगी और वह उन कारणों को लेखबद्ध करेगी। (ख) उन तेन्दू पत्तों को, िजनके सम्बन्ध में ऐसा उल्लंघन िकया गया हो, या उनके ऐसे भाग को, जैसा िक न्यायालय को उिचत ूतीत हो, शासन के पक्ष में जप्त कर िलया जायेगा: परंतु यिद न्यायालय की राय है िक यथािःथित सम्पूणर् पत्तों या उनके िकसी भाग के सम्बन्ध में जप्ती का िनदेर्श देना आवँयक नहीं है, तो वह अिभिलिखत िकये जाने वाले कारणों के आधार, पर, ऐसा नहीं करेगा।
16. Attempt and abetment
धारा 16. चेष्टायें तथा अिभूेरण (Attempt and abetment) - िकसी भी व्यिक्त को, जो इस अिधिनयम या उसके अधीन बनाये गये िनयमों के उपबन्ध का उल्लंघन करने की चेष्टा करे, या उसके उल्लंघन को अिभूेिरत (abets) - करे, ऐसे उपबन्ध का उल्लंघन करने वाला समझा जावेगा।
17. Cognizance of offences
धारा 17. अपराधों का ूसंज्ञान (Congizance) - खण्डीय वन पदािधकारी (वन मण्डलािधकारी) से अिनम्न िकसी वन पदािधकारी द्वारा या िकसी अन्य पदािधकारी द्वारा, जो िक इस सम्बन्ध में राज्य शासन द्वारा ूािधकृत कर िदया जावे, उन तथ्यों के सम्बन्ध में िजनसे िक अपराध बनता हो, िकये गये िलिखत ूितवेदन के िबना कोई भी न्यायालय इस अिधिनयम के अधीन दण्डनीय िकसी अपराध का ूसंज्ञान नहीं करेगा।
17A. Power to compound offences
धारा 17 A. अवराधों का ूशमन करने की शिक्त - राज्य शासन शासकीय राजपऽ में अिधसूचना जारी कर वन अिधकारी को िनम्न के िलए अिधकृत कर सकता है -
- (a) उस व्यिक्त से, िजसके िवरूद्ध इन अिधिनयम के या इसके अन्तगर्त बने िनयमों के अन्तगर्त अपराध करने का युिक्तयुक्त सन्देह हो, उस अपराध के िलए जो उस अपराधी ने िकया हो, ूितकर के रूप में रािश ःवीकार करने।
- (b) जब कोई ऐसी सम्पित्त जप्त ह ुई हो, जो राजसात होने के दाियत्वाधीन हो, उसको राजसात होने के आदेश होने के पूवर्, समुिचत अिधकारी द्वारा अनुमािनत िकया जावे, सम्पित्त के मािलक द्वारा भुगतान करने पर छोड़ सकता है।
- (2) इस ूकार रािश या मूल्य दोनों के, जैसा ूकरण हो, के भुगतान होने पर वह सन्देहाःूद व्यिक्त, यिद वह अिभरक्षा में हो को मुक्त िकया जावेगा, और वह सम्पित्त के िवरूद्ध आगे कोई कायर्वाही नहीं की जावेगी।
- (3) इस धारा के अन्तगर्त उस अिधकारी को अिधकृत नहीं िकया जावेगा जो वन क्षेऽपाल के पद से िनम्न पद का हो और क्लाज
- (a) के अन्तगर्त ूितकार के रूप में जो रािश वसूल की जावेगी वह जप्त शुदा तेन्दू पत्ते के मूल्य के दस गुना से अिधक नहीं होगी। परन्तु यिद वह तेन्दू पत्ता, िजसके सम्बन्ध में अपराध कािरत ह ु आ है, वह शासन की सम्पित्त नहीं है या जप्तशुदा तेन्दू पत्ते का मूल्य रू. 1000/‐ से कम हो, और अपराधी ने ूथम बार अपराध िकया हो, तो उस व्यिक्त को रू. या जप्तशुदा वःतु का (तेन्दू पत्ता छोड़कर) मूल्य जमा करने पर (जो कम हो) छोड़ िदया जावेगा, और जप्तशुदा तेन्दू पत्ता यिद शासन की सम्पित्त न हो, तो उसके मूल्य के भुगतान करने पर या अन्यथा छोड़ िदया जावेगा।
18. Saving in respect of acts done in good faith
धारा 18. सद्भावना पूवर्क िकये गये कार्यों के सम्बन्ध में व्यावृित्त (Saving) - िकसी भी व्यिक्त के िवरूद्ध, िकसी भी ऐसी बात के िलये, जो इस अिधिनयम या उसके अधीन बनाये गये िनयमों के अनुसरण में, सद्भावनापूवर्क की गई हो या िजसका इस ूकार िकया जाना अिभूेत रहा हो, पह ु ंचाये गये या संभाव्यतः पह ु ंचाने वाले िकसी नुकसान अथवा उठाई गई या सम्भाव्यतः उठाई जाने वाली क्षित के िलए कोई वाद या अिभयोजन या िविधक कायर्वाही ूःतुत नहीं होगी।
19. Power to make rules
धारा 19. िनयम बनाने की शिक्त -
- (1) राज्य शासन, पूवर् ूकाशन की शतर् के अधीन रहते ह ु ए, इस अिधिनयम के सामान्यतया िकन्हीं भी उपबन्धों को कायार्िन्वत करने के िलए िनयम बना सकेगा।
- (2) िवशेषतः और पूवोर्क्त शिक्त की व्यापकता पर ूितकूल ूभाव डाले िबना ऐसे िनयमों में िनम्निलिखत समःत या िकन्हीं भी िवषयों के िलये उपबन्ध हो सकेगा, अथार्त - (क) िवलोिपत, (ख) तेन्दू पत्ते की मूल्य सूची का ूकाशन, (ग) इस अिधिनयम के अधीन जांच करने की िविध, (घ) वे िनबर्न्धन तथा शतेर्ं िजनके अधीन अनुज्ञापऽ जारी िकया जायेगा, वह ूािधकारी िजसके द्वारा वह रीित िजसमें तथा वह फीस या फीसें िजसकी या िजनकी देनगी की जाने पर िविभन्न ूकार की पिरवहन गाि़डयों के िलये अनुज्ञापऽ जारी िकये जा सकेंगे। (ङ) धारा 10 के अधीन पंजीयन (Registration) - की रीित, (च)
- (1) धारा 11 की उपधारा
- (1) के अधीन रिजःशेशन की रीित, कालाविध, िजसके भीतर ऐसा रिजःशेशन िकया जावेगा तथा उसक े िलये देय फीस।
- (2) धारा 11 की उपधारा 2 अधीन घोषणा का ूारूप। अिधकारी िजसको, िदनांक तथा रीित, िजस ूकार घोषणा ूःतुत की जावेगी। (च-एक) धारा 12 (क) की उपधारा
- (3) के अधीन वह रािश (Consideration) िजसकी देनगी की जाने पर अनुज्ञा दी जा सकेगी। (च-दो) धारा 14 की उपधारा
- (5) के अधीन वह ूारूप। िजसमें सम्पित्त के अिधहरण के िलये कायर्वािहयों की सूचना भेजी जायेगी। (च-तीन) धारा 14-क की उपधारा
- (1) के अधीन वह ूारूप िजसमें अपील की जाएगी तथा फीस की वह रकम जो ऐसी अपील के साथ दी जायेगी और वह रूप िजसमें वह देय होगी। (छ) कोई अन्य िवषय िजसका इस अिधिनयम के अधीन अिभव्यक्त व िवविक्षत (expressly) रूप से िविहत िकया जाना अपेिक्षत हो।
- (3) इस अिधिनयम के अधीन बनाये गये समःत िनयम िवधान-सभा के पटल पर रखे जावेंगे।
20. Application of provisions of Indian Forest Act to other matters
धारा 20. भारतीय वन अिधिनयम के उपबन्ध अन्य िवषयों को लगा◌ू होंगे - तेन्दू पत्तें से सम्बिन्धत वे िवषय िजसके िलये अिधिनयम में उपबन्ध नहीं हैं और िजनके िलये उपबन्ध भारतीय वन अिधिनयम, 1927 (1927 का सं. 16) में है, उस अिधिनयम के उपबन्धों द्वारा शशिसत होंगे।
21. Repeal
धारा 21. िनरसन - िवन्ध्यूदेश तेन्दू पत्ता अिधिनयम, 1953 (ब. 6, वंज्र्ञ 1953) एतद्द्वारा िनरिसत िकया जाता है।
22. Removal of difficulties
धारा 22. किठनाइयों का िनवारण - इस अिधिनयम के उपबन्धों को ूभावशील करने में कोई किठनाई उत्पन्न हो, तो राज्य शासन आदेश द्वारा ऐसे उपबन्धां से असंगत न होने वाला कोई भी ऐसा कायर् कर सकेगा जो िक उसे किठनाई का िनवारण करने के ूयाजनों के िलये आवँयक या इघ्टकर ूतीत हो।
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