section 8
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The Madhya Pradesh Krishi Upaj Mandi Act 1972Vesting of property of local authority in Market Committee. (1) मण्डी समिति किसी स्थानीय प्राधिकारी से यह अपेक्षा कर सकेगी कि वह उसे अपनी कोई ऐसी भूमि या भवन, जो मण्डी-प्रांगण के भीतर स्थित हो और जो मण्डी की स्थापना के अव्यवगत पूर्व (immediately before the establishment of the market) स्थानीय प्राधिकारी द्वारा मण्डी के प्रयोजनों के लिये उपयोग में लाया जाता था, अंतरित कर दे और स्थानीय प्राधिकारी अध्यापेक्षा प्राप्त होने के एक मास के भीतर यथास्थिति भूमि या भवन, को ऐसे निर्बंधनों पर, जिनका कि उनके बीच करार हो जाये, मण्डी समिति को अंतरित कर देगा।
(2) जहां स्थानीय प्राधिकारी को उपधारा (1) के अधीन अध्यापेक्षा (requisition) प्राप्त होने की तारीख से तीस दिन की कालावधि के भीतर स्थानीय प्राधिकारी तथा मण्डी समिति के बीच उक्त उपधारा के अधीन कोई करार न हो पाये, वहां मण्डी समिति द्वारा अपेक्षित भूमि या भवन इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये समिति में निहित हो जायेगा और स्थानीय प्राधिकारी को ऐसे प्रतिकर (compensation) का संदाय कर दिया जायेगा जैसा कि कलेक्टर द्वारा उपधारा (5) के अधीन अवधारित किया जायेः
परंतु किसी स्थानीय प्राधिकारी को कोई प्रतिकर किसी ऐसी भूमि या भवन के संबंध में देय नहीं होगा जो ऐसे स्थानीय प्राधिकारी के गठन से संबंधित अधिनियमिति में अंतर्विष्ट उपबंधों के आधार पर इसमें निहित हुआ था किंतु ऐसे निहित होने के लिये किसी भी रकम का संदाय नहीं किया गया थाः
परंतु यह और भी कि कलेक्टर के आदेश से व्यथित कोई भी पक्षकार, ऐसे आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर, राज्य सरकार को अपील कर सकेगा।
(3) स्थानीय प्राधिकारी उपधारा (2) के अधीन मण्डी समिति में निहित होने वाली भूमि या भवन का कब्जा ऐसे निहित होने से सात दिन की कालावधि के भीतर परिदत्त कर देगा और पूर्वोक्त कालावधि के भीतर स्थानीय प्राधिकारी के ऐसा करने में चूक होने पर, कलेक्टर उस भूमि या उस भवन का कब्जा ले लेगा और उसे मण्डी समिति को परिदत्त (Delivered) करा देगा।
(4) राज्य सरकार का आदेश तथा उस आदेश के अध्यधीन रहते हुये उपधारा (2) के अधीन कलेक्टर का आदेश अंतिम होगा और दोनों पक्षकारों पर आबद्धकर होगा।
(5) कलेक्टर भूमि या भवन के लिये प्रतिकर की रकम निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखते हुये नियत करेगा :- (एक) वार्षिक भाटक (annual rent) जिस पर उस भवन को वर्ष प्रति वर्ष भाड़े पर दिये जाने की युक्तियुक्त रूप से प्रत्याशा की जा सकती हो; (दो) भवन की दशा; (तीन) ऐसे भूमि के अर्जन (acquisition) के लिये स्थानीय प्राधिकारी द्वारा दी गई प्रतिकर की रकम और उस भूमि का वर्तमान बाजार मूल्य; और (चार) स्थानीय प्राधिकारी द्वारा उस भूमि पर परिसीमित किये गये किसी भवन की या भूमि पर निष्पादित किये गये किसी अन्य कार्य की लागत या उसका बाजार मूल्य।
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