section 17
Powers and duties of the Mandi Committee
The Madhya Pradesh Krishi Upaj Mandi Act 1972(1) इस अधिनियम के उपबंधों के अव्याधीन रहते हुये मंडी समिति का यह कर्तव्य होगा कि वह-- (क) इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाये गये नियमों एवं उपविधियों के उपबंधों को मंडी क्षेत्र में कार्यान्वित करे; (ख) अधिसूचित कृषि उपज का उसमें (मंडी क्षेत्र में) विपणन करने के लिये ऐसी सुविधाओं का प्रबंध करना जैसा कि प्रबंधक संचालक समय-समय पर निर्देश दे; (ग) ऐसे अन्य कार्य करना, जो कि मंडी के अधीक्षण, संचालन तथा नियंत्रण के संबंध में या अधिसूचित कृषि-उपज का मंडी क्षेत्र में किसी स्थान पर विपणन करने का विनियमन करने के लिये तथा पूर्वोक्त विषयों से संबंधित प्रयोजनों के लिये आवश्यक हो और वह उस प्रयोजन के लिये ऐसी शक्तियों का प्रयोग तथा ऐसे कृत्यों का निर्वहन कर सकेगी जैसे कि इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उपबंधित किया जाये। (2) पूर्वगामी उपबंधों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना मंडी समिति-- (एक) मंडी प्रांगणों तथा उपमंडी प्रांगणों का सन्निर्माण, अनुरक्षण तथा प्रबंधन करेगी और मंडी क्षेत्र में हाट बाजारों के विकास का प्रोन्नयन करेगी; (दो) मंडी प्रांगण में कृषि-उपज के विपणन के लिये आवश्यक सुविधाओं का प्रबंध करेगी; (तीन) मंडी कृत्यकारियों को अनुज्ञप्तियां मंजूर करेगी या मंजूर करने से इंकार करेगी और ऐसी अनुज्ञप्तियों को नवीकृत, निलंबित या रद्द करेगी; (चार) मंडी कृत्यकारियों के आचरण का पर्यवेक्षण करेगी; (पांच) मंडी-प्रांगणों में व्यापार आरंभ करने, बंद करने तथा निलंबित करने का विनियमन करेगी; (छह) अनुज्ञप्तियों की शर्तों को प्रवर्तित करेगी; (सात) अधिसूचित कृषि-उपज के विपणन से संबंधित विक्रयों का करार करने, उसके कार्यान्वयन तथा प्रवर्तन या रद्दकरण का, अधिसूचित कृषि-उपज के विपणन से संबंधित तौल, परिदान, भुगतान तथा समस्त अन्य विषयों का विनियमन करेगी; (आठ) ऐसे समस्त विवादों को, जो कि अधिसूचित कृषि-उपज के विपणन से संबंधित किसी भी प्रकार के संव्यवहार से विक्रेता तथा क्रेता के बीच उद्भूत हुये हों, तय करने के लिये तथा उससे अनुषक्त समस्त मामलों के लिये उपबंध करेगी; (नौ) अधिसूचित कृषि-उपज के उत्पादन, विक्रय, भंडारण, प्रसंस्करण, कीमतों तथा संचलन के संबंध में जानकारी संग्रहीत करेगी तथा उसे बनाये रखेगी और ऐसी जानकारी को प्रबंधक संचालक द्वारा निर्देशित किये गये अनुसार प्रसारित करेगी; (दस) माल में अपमिश्रण को रोकने के लिये तथा अधिसूचित कृषि-उपज के श्रेणीकरण तथा मानकीकरण के संप्रवर्तन के लिये समस्त संभव कार्यवाही करेगी; (ग्यारह) मंडी में स्थिरता बनाये रखने की दृष्टि से-- (क) यह सुनिश्चित करने के लिये यथोचित उपाय करेगी कि व्यापारी अपनी सामर्थ्य के परे, कृषि-उपज का क्रय न करे तथा उपज का व्ययन करने में विक्रेताओं को होने वाली जोखिम न रहे; और (ख) क्रेताओं की हैसियत के अनुसार नकद या बैंक गारंटी के रूप में आवश्यक प्रतिभूति अभिप्राप्त करने के पश्चात ही अनुज्ञप्तियां मंजूर करेगी; (बारह) फीस तथा अन्य शोध्य प्रभारों से संबंधित समस्त धन, जिसे प्राप्त करने के लिये मंडी समिति प्राधिकृत है, उद्ग्रहीत करेगी तथा वसूलेगी; (तेरह) (क) यह सुनिश्चित करेगी कि मंडी प्रांगण में या मूल मंडी में हुये संव्यवहारों के संबंध में भुगतान विक्रेता को उसी दिन किया जाये, और इसमें व्यतिक्रम होने पर प्रश्नगत कृषि-उपज को तथा संबंधित व्यक्ति की अन्य संपत्ति को अभिगृहीत करेगी तथा उसके पुनः विक्रय के लिये व्यवस्था करेगी और हानि होने की दशा में, उस हानि को तथा हानि, यदि कोई हो, की मूल क्रेता से वसूली करने संबंधी प्रभारों को मूल क्रेता से वसूली करेगी और कृषि उपज की कीमत का भुगतान विक्रेता को करायेगी; (ख) तुलाई तथा हम्माली से संबंधित प्रभारों को वसूलेगी और उन्हें तुलइयों तथा हम्मालों में वितरित करेगी; (चौदह) इस अधिनियम के तथा उसके अधीन बनाये गये नियमों एवं उपविधियों के उपबंधों के दक्षतापूर्ण कार्यान्वयन के लिये आवश्यक संख्या में अधिकारियों तथा सेवकों को नियोजित करेगी; (पंद्रह) मंडी प्रांगण में व्यक्तियों के प्रवेश तथा गाड़ियों के यातायात का विनियमन करेगी; (सोलह) इस अधिनियम के तथा उसके अधीन बनाये गये नियमों एवं उपविधियों के उपबंधों का अतिक्रमण करने के लिये, व्यक्तियों को अभियोजित करेगी और यदि आवश्यक हो तो ऐसे अपराधों का शमन करेगी; (सत्रह) अपने कर्तव्यों का दक्षतापूर्ण पालन करने के प्रयोजन से किसी भी जंगम या स्थावर संपत्ति को अर्जित करेगी, धारण करेगी तथा उसका व्ययन करेगी; (अठारह) कोई वाद, कार्य, कार्यवाही, आवेदन पत्र या माध्यस्थम संस्थापित करेगी या उसमें प्रतिरक्षा करेगी और ऐसे वाद, कार्य, कार्यवाही, आवेदन पत्र या माध्यस्थम में समझौता करेगी; (उन्नीस) मंडी-प्रांगण में किये गये संव्यवहारों के संबंध में माल के तोलने तथा उसके परिवहन के लिये तुलइयों तथा हम्मालों का बारी-बारी से नियोजन करने की व्यवस्था करेगी: परंतु इस खंड की कोई भी बात उन हम्मालों के नियोजित किये जाने के लिये लागू नहीं होगी जो कि व्यापारियों द्वारा मंडी प्रांगण से अपने गोदामों तक अपने माल के परिवहन के लिये नियोजित किये जायें। (3) प्रबंधक संचालक की पूर्व मंजूरी से, मंडी समिति, अपने विवेकानुसार निम्नलिखित कर्तव्यों का भार अपने ऊपर ले सकेगी: (एक) इस हेतु से कि कृषि उपज के परिवहन तथा भंडारण में सुविधा हो या इस प्रयोजन से कि मंडी प्रांगण का विकास हो, मंडी क्षेत्र में सड़कों या गोदामों के सन्निर्माण के लिये (बोर्ड या राज्य सरकार के लोक निर्माण विभाग या किसी अन्य विभाग या उपक्रम) को या प्रबंधक संचालक द्वारा प्राधिकृत किये गये किसी अन्य अभिकरण को अनुदान देना या अग्रिम निधि देना; (दो) विक्रय हेतु उर्वरक, नाशक-जीवहर (पेस्टिसाइट्स), कीटनाशक (इन्सेक्टिसाइट्स), उन्नत बीज, कृषि संबंधी उपस्करों और आधानों (इनपुट्स) का स्टॉक बनाये रखना; (तीन) कृषकों को, कृषि उपज का स्टॉक रखने के लिये भंडारण सुविधायें भाड़े पर देने की व्यवस्था करना; (चार) गौशाला या संस्थाओं के जो मध्यप्रदेश गौसेवा आयोग अधिनियम, 1995 (क्रमांक 18 सन् 1995) के अधीन पंजीकृत की गई हैं, अनुरक्षण के लिये अनुदान देना। (4) पूर्व में वर्णित कर्तव्यों के अतिरिक्त मंडी समिति निम्नलिखित के लिये भी उत्तरदायी रहेगी: (एक) अपने अधिकारियों द्वारा प्राप्त हुई प्राप्तियों तथा किये गये भुगतानों पर उचित अंकुश बनाये रखना; (दो) मंडी समिति की निधि पर भारित किया जा सकने वाले समस्त कार्यों का समुचित निष्पादन; (तीन) इस अधिनियम तथा उसके अधीन बनाये गये नियमों तथा जारी की गई अधिसूचनाओं की और अपनी उपविधियों की एक-एक प्रति निःशुल्क निरीक्षण के लिये अपने कार्यालय में रखना; और (चार) सांसर्गिक पशु रोग फैलने की रोकथाम के लिये निवारक उपायों की व्यवस्था करना। (5) मंडी समिति किसी ऐसे निर्देश को कार्यान्वित करेगी जिसे कि राज्य सरकार मंडी प्रांगण में युक्तियुक्त सुविधाओं का प्रबंध करने के लिये समय-समय पर जारी करे। (6) यदि मंडी समिति, उपधारा (5) के अधीन जारी किये गये किसी निर्देश का युक्तियुक्त समय के भीतर अनुपालन करने में चूक करे, तो राज्य सरकार को, मंडी समिति के खर्चे पर ऐसे निर्देश को प्रवर्तन करने के लिये आवश्यक समस्त शक्तियां प्राप्त होंगी। (7) यदि कोई समिति, किसी भी ऐसी राशि का, जिसकी कि रकम उपधारा (5) के अधीन जारी किये गये किन्हीं निर्देशों के आधार पर नियत की गई हो या देय हो भुगतान करने में व्यतिक्रम करे, तो राज्य सरकार, ऐसे व्यक्ति को, जिसके अभिरक्षा में मंडी समिति की निधि का अतिशेष हो, यह निर्देश देते हुये एक आदेश दे सकेगी कि वह ऐसी भुगतान या तो पूर्ण रूप से या ऐसे भाग में, जो ऐसी निधि में संभव हो, करे। (8) मंडी समिति ऐसी समस्त जानकारी देगी जिसकी कि कलेक्टर या संचालक या इनमें से किसी के भी द्वारा सम्यक रूप से प्राधिकृत अधिकारी को अपेक्षा हो।
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