section 6
आयोग के कृत्य
The Chhattisgarh Nagarpalik Rajaswa (Viniyamak Aayog ki Sthapna) Adhiniyam, 2011General201127 sections6 chapters
Chapter III FUNCTIONS OF THE COMMISSION
Statutory text
- (1) आयोग निम्नलिखित कृत्यों का निर्वहन करेगा, अर्थात्, (क) विभिन्न नगरपालिक लोक सेवाओं जैसे जल-प्रदाय, स्वच्छता, सड़कों का रख-रखाव तथा सेवायें, विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र तथा/या अनुज्ञप्तियां तथा/या परमिट जारी किया जाना तथा कसाई घर, कांजी हाउस सेवाओं का संचालन (प्रवर्तन) एवं रख-रखाव तथा सभी अन्य सुविधायें एवं सेवायें, जो कि संविधान की 12वीं अनुसूची तथा/या छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 (क्र. 23 सन् 1956) तथा/या छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 (क्र. 37 सन् 1961) के अंतर्गत स्थानीय नगरीय निकाय को न्यस्त हों, के लिये शुल्क निर्धारण तथा विनियोजन. स्पष्टीकरण, आयोग, स्थानीय नगरीय निकाय के पृथक वर्गों के लिए पृथक तौर पर तथा/या उस स्थान तथा अन्य कारण जो सुविधाओं तथा सेवाओं के मूल्य पर भौगोलिक प्रभाव डाले, के आधार पर स्थानीय नगरीय निकाय के लिए पृथक तौर पर उपरोक्त शुल्क का निर्धारण कर सकेगा. (ख) किसी शुल्क, लेवी, कर, टोल, भाड़ा, ड्यूटी, जुर्माना, दण्ड तथा किसी अन्य प्राप्तियों के संबंध में स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा दी जाने वाली रियायतों का विनियमन करना. (ग) स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा जनता को दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता, निरंतरता तथा निर्भरता से संबंधित मापदंडों का निर्धारण तथा/या प्रवर्तन करना. (घ) स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा अधिरोपित किये जाने वाले जुर्माने तथा दंड की मात्रा विनियोजित करना. (ङ) स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा उद्गृहीत किये जाने वाले टोल (शुल्क) एवं कर का निर्धारण एवं विनियोजन. (च) कुशल, पारदर्शी, जवाबदेही, उत्तरदायी, आर्थिक रूप से स्व-पोषित स्थानीय स्व-शासन प्रणाली को सहायता देना. (छ) ई-शासन प्रणाली की सहायता करना. (ज) नागरिकों के अधिकारों एवं दायित्वों के प्रवर्तन में सहायक होना. (झ) स्थानीय नगरीय निकायों में अंतर्वलित शुल्क, लेवी, कर, टोल, भाड़ा, डयूटी, जुर्माना, दंड, सेवायें तथा सुविधाओं से संबंधित तथा उससे उत्पन्न विवादों को न्यायनिर्णित करना. (ञ) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए शुल्क उद्ग्रहीत करना. (ट) ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करना जो कि इस अधिनियम के अंतर्गत उससे संबंधित हों या उसे सौंपे गये हों.
- (2) आयोग, दो वर्ष में कम से कम एक बार समस्त शुल्क, लेवी, कर, टोल, भाड़ा, डयूटी, जुर्माना, दण्ड तथा किसी अन्य प्राप्तियों के संबंध में दरों की समीक्षा (पुनर्विलोकन) एवं यथोचित पुनरीक्षण करेगा : परन्तु, तथापि, किसी वित्तीय वर्ष में किसी शुल्क, लेवी, कर, टोल, भाड़ा, डयूटी, जुर्माना, दण्ड तथा किसी अन्य प्राप्तियों के संबंध में दरों की एक बार से अधिक समीक्षा (पुनर्विलोकन) तथा पुनरीक्षण नहीं करेगा.
- (3) आयोग, शासन को निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों पर सलाह देगा, अर्थात् :- (क) संवैधानिक तथा अन्य विधिक प्रावधानों के आशय के अनुसार स्थानीय नगरीय निकायों को स्थानीय स्व-शासन के प्रोत्साहन के लिए शक्तियों का अंतरण. (ख) स्थानीय नगरीय निकायों की क्षमता बढ़ाना. (ग) स्थानीय नगरीय निकायों में पारदर्शिता एवं सु-शासन के प्रयोग को प्रोत्साहित करना. (घ) स्थानीय नगरीय निकायों के आर्थिक आधार को सुदृढ़ करना.
- (4) आयोग, अपनी शक्तियों का प्रयोग और अपने कृत्यों का निर्वहन करते समय पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा.
- (5) आयोग, अपने कृत्यों के निर्वहन में, राष्ट्रीय नीतियों तथा सभी सुसंगत विधियों द्वारा मार्गदर्शित होगा.
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