Bare Act
The Chhattisgarh Nagarpalik Rajaswa (Viniyamak Aayog ki Sthapna) Adhiniyam, 2011
Chapter I PRELIMINARY
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ
- (1) यह अधिनियम छत्तीसगढ़ नगरपालिक राजस्व (विनियामक आयोग की स्थापना) अधिनियम, 2011 कहलाएगा.
- (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य में होगा.
- (3) यह ऐसी तारीख से प्रवृत्त होगा जैसा कि शासन, अधिसूचना द्वारा नियत करे.
Chapter I PRELIMINARY
2. परिभाषा
2. इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) "आयोग" से अभिप्रेत है, धारा 3 के अधीन गठित छत्तीसगढ़ नगरपालिक राजस्व विनियामक आयोग;
(ख) "निधि" से अभिप्रेत है, धारा 22 के अधीन सृजित आयोग की निधि;
(ग) "शासन" से अभिप्रेत है, छत्तीसगढ़ शासन;
(घ) "सदस्य" से अभिप्रेत है, अधिनियम की धारा 3 के अधीन गठित आयोग में नियुक्त अध्यक्ष एवं सदस्य;
(ङ) "नगरपालिक राजस्व" से अभिप्रेत है, ऐसा कोई भी राजस्व जो किसी भी स्थानीय नगरीय निकाय के उपभोक्ता प्रभार या अन्य राजस्व लेखों के किसी भी शीर्ष के अधीन आता हो, चाहे वह वसूला गया हो अथवा वसूला नहीं गया हो, रोपित हो या बकाया हो, उद्ग्रहीत हो या उद्ग्रहीत न हो तथा इसमें कर, शुल्क, लेवी, टोल, रायल्टी, चार्ज, भाड़ा, जुर्माना, दंड सहित ब्याज तथा दांडिक ब्याज, जो राजस्व राशि पर भुगतान न करने अथवा भुगतान में विलंब के कारण हो, सम्मिलित होंगे;
(च) "स्थानीय नगरीय निकाय" से निर्देशित है, छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 (क्र. 23 सन् 1956) अथवा छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 (क्र. 37 सन् 1961) के अंतर्गत, यथास्थिति, बनाया गया नगरपालिक निकाय तथा इसमें छत्तीसगढ़ राज्य के नगरपालिक निगम, नगरपालिक परिषद् तथा नगर पंचायतें सम्मिलित हैं.
Chapter II CHHATTISGARH MUNICIPAL REVENUE REGULATORY COMMISSION
3. छत्तीसगढ़ नगर पालिक राजस्व विनियामक आयोग का गठन
- (1) शासन, इस अधिनियम के कानून बनने के पश्चात्, छः माह के भीतर, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिसूचना द्वारा एक आयोग का गठन करेगा, जिसे "छत्तीसगढ़ नगर पालिक राजस्व विनियामक आयोग" कहा जायेगा.
- (2) आयोग पूर्वोक्त नाम से एक निगमित निकाय होगा, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और एक सामान्य मुद्रा होगी और जिसे चल और अचल दोनों सम्पत्तियों का अर्जन, धारण और निपटान करने तथा संविदा करने की शक्ति होगी और उक्त नाम से वाद लाया जायेगा या वाद प्रस्तुत किया जायेगा.
- (3) आयोग का मुख्यालय ऐसे स्थान पर होगा, जैसा कि शासन अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे.
- (4) आयोग में अध्यक्ष सहित, सदस्य जो तीन से अधिक न हों, समाविष्ट होंगे.
- (5) आयोग का अध्यक्ष और सदस्य, शासन द्वारा धारा 5 में निर्दिष्ट चयन समिति की अनुशंसाओं पर नियुक्त किए जाएंगे.
Chapter II CHHATTISGARH MUNICIPAL REVENUE REGULATORY COMMISSION
4. आयोग के अध्यक्ष, और सदस्यों की नियुक्ति के लिये अर्हताएं
4. (1) आयोग का अध्यक्ष और सदस्य ऐसे सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी होंगे, जो राज्य सरकार के सचिव से निम्न स्तर के नहीं होंगे और जो योग्य, सत्यनिष्ठ और ख्याति प्राप्त व्यक्ति हों तथा जिन्हें नगरीय विकास का पर्याप्त ज्ञान हो एवं जिन्होंने इनसे संबंधित समस्याओं का निपटान करने की क्षमता दर्शित की हो.
- (2) उपधारा (1) में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, शासन, ऐसे सेवारत या सेवानिवृत्त व्यक्ति जो उच्चतर न्यायिक सेवा से संबंधित जिला न्यायाधीश से निम्न स्तर का न हो, को अध्यक्ष या सदस्य के रूप में नियुक्त कर सकेगा : परन्तु यदि नियुक्ति हेतु चिन्हांकित न्यायाधीश, सेवारत हो, तो इस उपधारा के अधीन नियुक्ति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करने के पश्चात् ही की जाएगी, अन्यथा नहीं.
- (3) आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में नियुक्ति किये जाने वाले व्यक्ति के लिए, उसकी आयु नियुक्ति की तिथि को पैंसठ वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिये.
- (4) आयोग का अध्यक्ष या कोई अन्य सदस्य, कोई अन्य पद धारण नहीं करेगा.
- (5) अध्यक्ष, आयोग का मुख्य कार्यपालक होगा.
Chapter II CHHATTISGARH MUNICIPAL REVENUE REGULATORY COMMISSION
5. आयोग के सदस्यों का चयन करने के लिये चयन समिति का गठन
5. (1) शासन, आयोग के सदस्यों का चयन करने के प्रयोजन के लिए, एक चयन समिति का गठन करेगा, जिसमें समाविष्ट होंगे:-
- (2) शासन, अध्यक्ष या किसी सदस्य की मृत्यु, त्यागपत्र या उसके हटाए जाने के कारण हुई किसी रिक्ति की तारीख से एक माह के भीतर रिक्ति को भरने के लिये चयन समिति को संदर्भित करेगा.
- (3) चयन समिति, अध्यक्ष तथा सदस्यों के चयन को, उसे संदर्भित किये जाने की तारीख से तीन माह के भीतर, अंतिम रूप देगी.
- (4) चयन समिति, उसे निर्दिष्ट प्रत्येक रिक्ति के लिये तीन नामों के एक पैनल की अनुशंसा करेगी.
- (5) चयन समिति, आयोग के अध्यक्ष या अन्य सदस्य के रूप में नियुक्ति के लिये किसी व्यक्ति की अनुशंसा करने से पूर्व अपना यह समाधान करेगी कि ऐसे व्यक्ति का ऐसा कोई वित्तीय या अन्य हित नहीं है, जिससे ऐसे अध्यक्ष या सदस्य के रूप में, यथास्थिति, उसके कृत्यों पर प्रभाव पड़ने की संभावना है.
- (6) अध्यक्ष या अन्य सदस्य की नियुक्ति, केवल इस कारण से अविधिमान्य नहीं होगी कि चयन समिति में कोई रिक्ति है.
Chapter III FUNCTIONS OF THE COMMISSION
6. आयोग के कृत्य
- (1) आयोग निम्नलिखित कृत्यों का निर्वहन करेगा, अर्थात्, (क) विभिन्न नगरपालिक लोक सेवाओं जैसे जल-प्रदाय, स्वच्छता, सड़कों का रख-रखाव तथा सेवायें, विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र तथा/या अनुज्ञप्तियां तथा/या परमिट जारी किया जाना तथा कसाई घर, कांजी हाउस सेवाओं का संचालन (प्रवर्तन) एवं रख-रखाव तथा सभी अन्य सुविधायें एवं सेवायें, जो कि संविधान की 12वीं अनुसूची तथा/या छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 (क्र. 23 सन् 1956) तथा/या छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 (क्र. 37 सन् 1961) के अंतर्गत स्थानीय नगरीय निकाय को न्यस्त हों, के लिये शुल्क निर्धारण तथा विनियोजन. स्पष्टीकरण, आयोग, स्थानीय नगरीय निकाय के पृथक वर्गों के लिए पृथक तौर पर तथा/या उस स्थान तथा अन्य कारण जो सुविधाओं तथा सेवाओं के मूल्य पर भौगोलिक प्रभाव डाले, के आधार पर स्थानीय नगरीय निकाय के लिए पृथक तौर पर उपरोक्त शुल्क का निर्धारण कर सकेगा. (ख) किसी शुल्क, लेवी, कर, टोल, भाड़ा, ड्यूटी, जुर्माना, दण्ड तथा किसी अन्य प्राप्तियों के संबंध में स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा दी जाने वाली रियायतों का विनियमन करना. (ग) स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा जनता को दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता, निरंतरता तथा निर्भरता से संबंधित मापदंडों का निर्धारण तथा/या प्रवर्तन करना. (घ) स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा अधिरोपित किये जाने वाले जुर्माने तथा दंड की मात्रा विनियोजित करना. (ङ) स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा उद्गृहीत किये जाने वाले टोल (शुल्क) एवं कर का निर्धारण एवं विनियोजन. (च) कुशल, पारदर्शी, जवाबदेही, उत्तरदायी, आर्थिक रूप से स्व-पोषित स्थानीय स्व-शासन प्रणाली को सहायता देना. (छ) ई-शासन प्रणाली की सहायता करना. (ज) नागरिकों के अधिकारों एवं दायित्वों के प्रवर्तन में सहायक होना. (झ) स्थानीय नगरीय निकायों में अंतर्वलित शुल्क, लेवी, कर, टोल, भाड़ा, डयूटी, जुर्माना, दंड, सेवायें तथा सुविधाओं से संबंधित तथा उससे उत्पन्न विवादों को न्यायनिर्णित करना. (ञ) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए शुल्क उद्ग्रहीत करना. (ट) ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करना जो कि इस अधिनियम के अंतर्गत उससे संबंधित हों या उसे सौंपे गये हों.
- (2) आयोग, दो वर्ष में कम से कम एक बार समस्त शुल्क, लेवी, कर, टोल, भाड़ा, डयूटी, जुर्माना, दण्ड तथा किसी अन्य प्राप्तियों के संबंध में दरों की समीक्षा (पुनर्विलोकन) एवं यथोचित पुनरीक्षण करेगा : परन्तु, तथापि, किसी वित्तीय वर्ष में किसी शुल्क, लेवी, कर, टोल, भाड़ा, डयूटी, जुर्माना, दण्ड तथा किसी अन्य प्राप्तियों के संबंध में दरों की एक बार से अधिक समीक्षा (पुनर्विलोकन) तथा पुनरीक्षण नहीं करेगा.
- (3) आयोग, शासन को निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों पर सलाह देगा, अर्थात् :- (क) संवैधानिक तथा अन्य विधिक प्रावधानों के आशय के अनुसार स्थानीय नगरीय निकायों को स्थानीय स्व-शासन के प्रोत्साहन के लिए शक्तियों का अंतरण. (ख) स्थानीय नगरीय निकायों की क्षमता बढ़ाना. (ग) स्थानीय नगरीय निकायों में पारदर्शिता एवं सु-शासन के प्रयोग को प्रोत्साहित करना. (घ) स्थानीय नगरीय निकायों के आर्थिक आधार को सुदृढ़ करना.
- (4) आयोग, अपनी शक्तियों का प्रयोग और अपने कृत्यों का निर्वहन करते समय पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा.
- (5) आयोग, अपने कृत्यों के निर्वहन में, राष्ट्रीय नीतियों तथा सभी सुसंगत विधियों द्वारा मार्गदर्शित होगा.
Chapter III FUNCTIONS OF THE COMMISSION
7. सलाहकार समिति
7. (1) आयोग, अधिसूचना द्वारा, ऐसी तारीख से जिसे वह ऐसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे, प्रवृत्त करते हुए, एक समिति स्थापित करेगा जिसे राज्य सलाहकार समिति कहा जायेगा.
- (2) राज्य सलाहकार समिति में निम्नलिखित नौ हित-समूहों के प्रत्येक समूह से एक प्रतिनिधि समाविष्ट होंगे- (एक) वाणिज्य (दो) उद्योग (तीन) परिवहन (चार) बिल्डर (भवन निर्माता), (पांच) वरिष्ठ नागरिक (को), (छः) महिला (सात) नगरीय विकास में सम्मिलित गैर-शासकीय संगठन (आठ) नगरीय विकास में सम्मिलित शैक्षणिक तथा शोध संस्थायें (नौ) विज्ञापन एजेंसी.
- (3) आयोग का अध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति का पदेन अध्यक्ष होगा, और आयोग के सदस्य तथा शासन के गृह (हाउसिंग), पर्यावरण, नगरीय विकास एवं प्रशासन के प्रभारी सचिव या उनका प्रतिनिधि जो उप सचिव से निम्न स्तर के न हो, समिति के पदेन सदस्य होंगे.
Chapter III FUNCTIONS OF THE COMMISSION
8. सलाहकार समिति के उद्देश्य
8. सलाहकार समिति का उद्देश्य आयोग को निम्न पर सलाह देने का होगा:-- (क) नीति का मुख्य प्रश्न. (ख) स्थानीय नगरीय निकायों तथा/या उनके अनुज्ञप्तिधारियों द्वारा प्रदान की गई सेवा की क्वालिटी (गुणवत्ता), निरंतरता और विस्तार से संबंधित विषय. (ग) अनुज्ञप्तिधारियों द्वारा उनकी अनुज्ञप्तियों की शर्तों और अपेक्षाओं का अनुपालन. (घ) नागरिकों के हितों का संरक्षण. (ङ) स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा सेवाओं के प्रदाय में क्वालिटी (गुणवत्ता) के स्तर में सुधार.
Chapter III FUNCTIONS OF THE COMMISSION
9. सदस्यों की पदावधि और सेवा की शर्तें
9. (1) अध्यक्ष या अन्य सदस्य, अपने पद ग्रहण करने की तारीख से पांच वर्षों की अवधि के लिये पद धारण करेंगे : परन्तु आयोग में अध्यक्ष या अन्य सदस्य उसी हैसियत में (पद पर) पुनर्नियुक्ति के लिये पात्र नहीं होंगे.
- (2) अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन, भत्ते और सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें ऐसे होंगे, जैसा कि शासन द्वारा विहित किया जाए : परन्तु सदस्यों के वेतन, भत्ते और सेवा के अन्य निबंधनों और शर्तों में, नियुक्ति के पश्चात् उनके लिये अलाभप्रद फेरफार (परिवर्तन) नहीं किया जायेगा.
- (3) प्रत्येक सदस्य, अपना पद ग्रहण करने के पूर्व, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में तथा ऐसे प्राधिकारी के समक्ष जैसा कि विहित किया जाए, अपने पद और गोपनीयता की शपथ लेगा और हस्ताक्षर करेगा.
- (4) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई सदस्य-- (क) शासन को लिखित में सूचना देकर जो तीन माह से कम न हो, अपना पद त्याग सकेगा ; (ख) धारा 10 के उपबंधों के अनुसार उसे पद से हटाया जा सकेगा.
- (5) किसी सदस्य के उपधारा (4) के अंतर्गत सदस्य न रहने पर, वह आयोग के समक्ष किसी व्यक्ति के मामले में किसी भी रीति से प्रतिनिधित्व नहीं करेगा.
Chapter III FUNCTIONS OF THE COMMISSION
10. सदस्य का हटाया जाना
10. (1) किसी सदस्य को, इस धारा के उपबंधों के अनुसार ही पद से हटाया जायेगा, अन्यथा नहीं.
- (2) शासन, आदेश द्वारा, किसी सदस्य को पद से हटा सकेगा, यदि वह, (क) दिवालिया न्यायनिर्णीत हो; (ख) किसी ऐसे अपराध के लिये सिद्धदोष ठहराया गया है, जो शासन की राय में नैतिक अधमता से अन्तर्वलित हो; (ग) सदस्य के रूप में कार्य करने में शारीरिक या मानसिक रूप से असमर्थ हो गया हो; (घ) ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लिया हो, जिससे सदस्य के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना हो; (ङ) अपनी स्थिति का इस प्रकार दुरूपयोग किया हो जिससे उसके पद पर बने रहने से लोकहित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा; (च) साबित कदाचार का दोषी रहा है. परन्तु कोई भी सदस्य, खण्ड (घ), (ङ) और (च) में विनिर्दिष्ट किसी आधार पर, अपने पद से तब तक नहीं हटाया जायेगा, जब तक कि जांच की ऐसी प्रक्रिया न अपनाई गई हो जैसा कि शासन द्वारा विहित किया जाये तथा जांच प्राधिकरण ने यह रिपोर्ट न की हो कि ऐसे सदस्य को ऐसे आधार या आधारों पर हटा दिया जाना चाहिए.
- (3) शासन, जांच प्राधिकरण के अध्यक्ष के परामर्श से, आयोग के किसी सदस्य को निलंबित कर सकेगा जिसके संबंध में जांच प्राधिकरण के अध्यक्ष को, उपधारा (2) के अधीन निर्देशित किया गया है, जब तक कि शासन ऐसे निर्देश पर जांच प्राधिकरण के अध्यक्ष के रिपोर्ट की प्राप्ति के आधार पर आदेश पारित न करें.
Chapter IV PROCEEDINGS AND POWERS OF THE COMMISSION
11. आयोग के सचिव, अधिकारी और अन्य कर्मचारी
- (1) आयोग, ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करने के लिये, जैसा कि विनिर्दिष्ट किया जाए, एक सचिव की नियुक्ति कर सकेगा.
- (2) आयोग, शासन के अनुमोदन से, अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या, प्रकृति और संवर्ग विनिर्दिष्ट कर सकेगा.
- (3) सचिव, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को देय वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन एवं शर्तें ऐसी होंगी जैसा कि आयोग के अनुमोदन से विनिर्दिष्ट किया जाए.
- (4) आयोग, अपने कृत्यों के निर्वहन में आयोग की सहायता के लिये अपेक्षित परामर्शियों, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर नियुक्त कर सकेगा, जैसा कि विनिर्दिष्ट किया जाए.
Chapter IV PROCEEDINGS AND POWERS OF THE COMMISSION
12. आयोग की कार्यवाहियां
- (1) आयोग, मुख्यालय या ऐसे अन्य स्थान में, ऐसे समय पर बैठक करेगा जैसा कि अध्यक्ष निर्देशित करे, और अपने बैठकों में कारबार के संव्यवहार के संबंध में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा (जिसमें उनके अधिवेशनों में गणपूर्ति भी सम्मिलित है) जो कि विनिर्दिष्ट किये जाएं.
- (2) अध्यक्ष, या यदि वह आयोग के अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ है, तो अध्यक्ष द्वारा इस निमित्त नामांकित कोई अन्य सदस्य, और ऐसे नामांकित किये जाने के अभाव में या जहां कोई अध्यक्ष नहीं हो, वहां उपस्थित सदस्यों द्वारा उनके स्वयं के बीच से चुना गया कोई सदस्य अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा.
- (3) ऐसे सभी प्रश्नों का जो आयोग के किसी अधिवेशन के समक्ष आयें, उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत द्वारा विनिश्चय किया जायेगा और बराबर मत होने की स्थिति में, अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति का द्वितीयक या निर्णायक मत होगा.
- (4) उपधारा (3) में जैसा कि उपबंधित है के अन्यथा, प्रत्येक सदस्य का एक मत होगा.
- (5) आयोग के सभी आदेश और विनिश्चय, आयोग के सचिव या किसी अन्य अधिकारी जिसे अध्यक्ष द्वारा इस निमित्त सम्यक् रूप से प्राधिकृत किया गया हो, के द्वारा अधिप्रमाणित किये जायेंगे.
Chapter IV PROCEEDINGS AND POWERS OF THE COMMISSION
13. रिक्तियों आदि से कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होना
13. आयोग का कोई कार्य या कार्यवाही मात्र किसी रिक्ति के कारण या आयोग के गठन में किसी त्रुटि के आधार पर अविधिमान्य नहीं होगी.
Chapter IV PROCEEDINGS AND POWERS OF THE COMMISSION
14. आयोग की शक्तियां
14. (1) आयोग को इस अधिनियम के अधीन किसी जांच या कार्यवाहियों के प्रयोजनों के लिये, निम्नलिखित विषयों के संबंध में ऐसी शक्तियां प्राप्त होंगी, जो कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का सं. 5) के अधीन सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात् :- (क) किसी व्यक्ति को समन करना या उसको हाजिर कराना और उसकी शपथ पर परीक्षा करना ; (ख) साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किये जाने योग्य किसी दस्तावेज या अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं का प्रकटीकरण और प्रस्तुतीकरण ; (ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना ; (घ) किसी लोक अभिलेख की अध्यपेक्षा करना; (ङ) साक्षियों की परीक्षा के लिये कमीशन जारी करना; (च) अपने विनिश्चयों, निर्देशों और आदेशों का पुनर्विलोकन करना; (छ) ऐसा कोई अन्य विषय जो विहित किया जाए.
- (2) आयोग को आयोग के समक्ष किसी कार्यवाही, सुनवाई या विषय में, ऐसा अंतरिम आदेश पारित करने की शक्तियां होंगी, जिसे वह उचित समझे.
- (3) आयोग, अपने समक्ष कार्यवाहियों में उपभोक्ताओं के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को प्राधिकृत कर सकेगा जिसे वह ठीक समझे.
Chapter IV PROCEEDINGS AND POWERS OF THE COMMISSION
15. पुनर्विलोकन तथा अपील
- (1) आयोग के किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसे आदेश के पैंतालीस दिनों के भीतर पुनर्विलोकन हेतु आवेदन प्रस्तुत कर सकेगा.
- (2) पुनर्विलोकन आवेदन के संबंध में पारित किसी आदेश के विरुद्ध अपील, आदेश के नब्बे दिनों के भीतर उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जा सकेगी.
Chapter IV PROCEEDINGS AND POWERS OF THE COMMISSION
16. आयोग की प्रक्रिया
इस अधिनियम के अधीन न्यायनिर्णयन के लिए आयोग सिविल प्रक्रिया संहिता द्वारा बाध्य नहीं होगा, किन्तु अपने स्वयं की प्रक्रिया निर्धारित कर सकेगा, जिसमें प्राख्यान तथा अधिकारिता संबंधी नियम एवं साक्ष्य सम्मिलित होंगे जिसकी प्रक्रिया, विधिशास्त्र के सिद्धांत, पारदर्शिता, स्थिरता तथा त्वरित, विधिवत् एवं सस्ते न्याय के सिद्धांतों पर आधारित होगी.
Chapter IV PROCEEDINGS AND POWERS OF THE COMMISSION
17. आयोग के समक्ष कार्यवाहियां
17. आयोग के समक्ष सभी कार्यवाहियां, भारतीय दंड संहिता (1860 का सं. 45) की धारा 193 और 228 के अंतर्गत न्यायिक कार्यवाहियां समझी जायेंगी और आयोग को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का सं. 2) की धारा 345 और 346 के प्रयोजनों के लिये सिविल न्यायालय समझा जाएगा.
Chapter IV PROCEEDINGS AND POWERS OF THE COMMISSION
18. प्रवेश और अधिग्रहण की शक्तियां
आयोग या आयोग द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी जो राजपत्रित अधिकारी की श्रेणी से निम्न का न हो, ऐसे किसी भवन या स्थान में प्रवेश कर सकेगा, जहां आयोग के पास यह विश्वास करने का कारण है कि जांच की किसी विषयवस्तु से संबंधित कोई दस्तावेज वहां पर पाया जा सकता है, और ऐसे किसी दस्तावेज को, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का सं. 2) की धारा 100 के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, जहां तक वह प्रयोज्य हो, अभिग्रहीत कर सकेगा या उससे उद्धरण या उसकी प्रतियां ले सकेगा।
Chapter IV PROCEEDINGS AND POWERS OF THE COMMISSION
19. प्रत्यायोजन
आयोग, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियों और कृत्यों को (धारा 14 के अधीन विवादों को न्यायनिर्णीत करने की शक्तियों तथा धारा 16 के अधीन अपनी प्रक्रिया अवधारित करने की शक्तियों को छोड़कर) जिन्हें वह आवश्यक समझे, ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, यदि कोई हो, जैसा कि आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, आयोग के किसी सदस्य, सचिव, अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति को, लिखित रूप में साधारण या विशेष आदेश द्वारा, प्रत्यायोजित कर सकेगा।
Chapter IV PROCEEDINGS AND POWERS OF THE COMMISSION
20. नियम बनाने की शक्ति
20. (1) इस अधिनियम के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु आयोग को नियम बनाने की शक्ति होगी.
- (2) उपधारा (1) के अधीन बनाये गये नियम शासकीय राजपत्र में प्रकाशित किये जायेंगे.
- (3) उपधारा (2) के अनुसार बनाये गये नियम, यथाशीघ्र राज्य विधानमण्डल के समक्ष रखे जायेंगे.
Chapter V GRANTS, FUND, ACCOUNTS, AUDIT AND REPORT
21. शासन द्वारा अनुदान और उधार
21. शासन, राज्य विधानमंडल द्वारा इस निमित्त किए गए सम्यक् विनियोग के पश्चात् आयोग को ऐसी राशियों का अनुदान और उधार दे सकेगा, जैसा कि शासन आवश्यक समझे.
Chapter V GRANTS, FUND, ACCOUNTS, AUDIT AND REPORT
22. शासन द्वारा निधि की स्थापना
22. (1) एक निधि का गठन किया जायेगा जिसे राज्य नगरपालिक राजस्व विनियामक आयोग निधि कहा जायेगा और उसमें निम्नलिखित जमा किए जाएंगे :- (क) धारा 21 के अधीन शासन द्वारा आयोग को दिया गया कोई अनुदान और उधार. (ख) इस अधिनियम के अधीन आयोग द्वारा प्राप्त की गई सभी फीसें. (ग) आयोग द्वारा ऐसे अन्य स्रोतों से, जो शासन द्वारा विनिश्चित किये जाएं, प्राप्त सभी राशियां.
- (2) निधि निम्नलिखित को पूरा करने के लिये उपयोजित की जायेगी :- (क) आयोग के अध्यक्ष, सदस्य, सचिव, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और अन्य पारिश्रमिक. (ख) धारा 6 के अधीन अपने कृत्यों के निर्वहन में आयोग के व्यय. (ग) इस अधिनियम द्वारा प्राधिकृत उद्देश्यों पर और प्रयोजनों के लिये व्यय.
Chapter V GRANTS, FUND, ACCOUNTS, AUDIT AND REPORT
23. आयोग का लेखा और लेखा-परीक्षा
आयोग का लेखा और लेखा-परीक्षा. 23. (1) आयोग, उचित लेखा और अन्य सुसंगत अभिलेख संधारित करेगा और वार्षिक लेखा विवरण, ऐसे प्ररूप में तैयार करेगा, जो छत्तीसगढ़ के महालेखा परीक्षक के परामर्श से शासन द्वारा विहित किया जाए.
- (2) आयोग के लेखाओं की, छत्तीसगढ़ के महालेखा परीक्षक द्वारा ऐसे अन्तरालों पर, जो उसके द्वारा विनिर्दिष्ट किये जाएं, लेखा-परीक्षा की जायेगी और ऐसी लेखा-परीक्षा के संबंध में उपगत कोई भी व्यय, आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ के महालेखा परीक्षक को संदेय होंगे.
- (3) छत्तीसगढ़ के महालेखा परीक्षक तथा इस अधिनियम के अधीन आयोग के लेखाओं की लेखा-परीक्षा के संबंध में उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति को, ऐसी लेखा-परीक्षा के संबंध में वैसे ही अधिकार एवं विशेषाधिकार तथा प्राधिकार होंगे, जो छत्तीसगढ़ के महालेखा परीक्षक को शासकीय लेखाओं के लेखा-परीक्षा के संबंध में साधारणतः प्राप्त होते हैं, और विशिष्टतः आयोग की बहियों, लेखाओं, संबंधित वाउचरों और अन्य दस्तावेजों तथा कागज-पत्रों को प्रस्तुत करने की मांग करने और आयोग के किसी भी कार्यालयों का निरीक्षण करने का अधिकार होगा.
- (4) छत्तीसगढ़ के महालेखा परीक्षक या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी अन्य व्यक्ति द्वारा यथाप्रमाणित आयोग के लेखे, उन पर लेखा-परीक्षा की रिपोर्ट के साथ, वार्षिक रूप से शासन को अग्रेषित किये जायेंगे और शासन, उसके प्राप्त होने के पश्चात्, यथाशीघ्र इसे राज्य विधानमंडल के समक्ष वैसे ही (यथावत्) रखे जाने हेतु कार्य करेगा.
Chapter V GRANTS, FUND, ACCOUNTS, AUDIT AND REPORT
24. आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन
24. (1) आयोग प्रतिवर्ष एक बार ऐसे प्रारूप में, ऐसे समय पर, जैसा कि विहित किया जाए, एक वार्षिक प्रतिवेदन तैयार करेगा, जिसमें पूर्व वर्ष के दौरान के उनके क्रियाकलाप संक्षेप में होंगे और प्रतिवेदन की प्रतियां, शासन को अग्रेषित की जायेंगी।
- (2) उपधारा (1) के अधीन प्राप्त प्रतिवेदन की एक प्रति, उसके प्राप्त होने के पश्चात् यथाशीघ्र, राज्य विधानमंडल के समक्ष रखी जायेगी।
Chapter V GRANTS, FUND, ACCOUNTS, AUDIT AND REPORT
25. आयोग का बजट
आयोग, प्रत्येक वित्तीय वर्ष में आगामी वित्तीय वर्ष के लिये ऐसे प्रारूप में और ऐसे समय पर, जैसा कि विहित किया जाए, अपना बजट तैयार करेगा जिसमें अपने प्राक्कलित प्राप्तियां और व्यय दर्शित करेगा और उसे वैसे ही (यथावत्) शासन को अग्रेषित करेगा।
Chapter VI MISCELLANEOUS
26. शासन द्वारा निर्देश
26. (1) आयोग, अपने कृत्यों के निर्वहन में, नीति के ऐसे विषयों में, जिनमें लोकहित अंतर्वलित हैं, ऐसे निर्देशों द्वारा मार्गदर्शन प्राप्त करेगा, जैसा कि शासन लिखित रूप में दे.
- (2) यदि ऐसा कोई प्रश्न उद्भूत हो कि क्या ऐसा कोई निर्देश, नीति के ऐसे विषय से संबंधित है जिसमें लोकहित अंतर्वलित है, तो उस पर शासन का विनिश्चय अंतिम होगा.
Chapter VI MISCELLANEOUS
27. अधिनियम का अभिभावी (सर्वोपरि प्रभाव) होना
27. अधिनियम के अधीन दिये गये विषयों में, उसमें अंतर्विष्ट प्रावधान, किसी अन्य अधिनियम, नियम या आदेश में अंतर्विष्ट किसी भी प्रावधानों पर अभिभावी (सर्वोपरि प्रभाव) होंगे.
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