Bare Act
Chapter III FUNCTIONS OF THE COMMISSION
Chapter III FUNCTIONS OF THE COMMISSION
6. आयोग के कृत्य
- (1) आयोग निम्नलिखित कृत्यों का निर्वहन करेगा, अर्थात्, (क) विभिन्न नगरपालिक लोक सेवाओं जैसे जल-प्रदाय, स्वच्छता, सड़कों का रख-रखाव तथा सेवायें, विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र तथा/या अनुज्ञप्तियां तथा/या परमिट जारी किया जाना तथा कसाई घर, कांजी हाउस सेवाओं का संचालन (प्रवर्तन) एवं रख-रखाव तथा सभी अन्य सुविधायें एवं सेवायें, जो कि संविधान की 12वीं अनुसूची तथा/या छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 (क्र. 23 सन् 1956) तथा/या छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 (क्र. 37 सन् 1961) के अंतर्गत स्थानीय नगरीय निकाय को न्यस्त हों, के लिये शुल्क निर्धारण तथा विनियोजन. स्पष्टीकरण, आयोग, स्थानीय नगरीय निकाय के पृथक वर्गों के लिए पृथक तौर पर तथा/या उस स्थान तथा अन्य कारण जो सुविधाओं तथा सेवाओं के मूल्य पर भौगोलिक प्रभाव डाले, के आधार पर स्थानीय नगरीय निकाय के लिए पृथक तौर पर उपरोक्त शुल्क का निर्धारण कर सकेगा. (ख) किसी शुल्क, लेवी, कर, टोल, भाड़ा, ड्यूटी, जुर्माना, दण्ड तथा किसी अन्य प्राप्तियों के संबंध में स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा दी जाने वाली रियायतों का विनियमन करना. (ग) स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा जनता को दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता, निरंतरता तथा निर्भरता से संबंधित मापदंडों का निर्धारण तथा/या प्रवर्तन करना. (घ) स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा अधिरोपित किये जाने वाले जुर्माने तथा दंड की मात्रा विनियोजित करना. (ङ) स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा उद्गृहीत किये जाने वाले टोल (शुल्क) एवं कर का निर्धारण एवं विनियोजन. (च) कुशल, पारदर्शी, जवाबदेही, उत्तरदायी, आर्थिक रूप से स्व-पोषित स्थानीय स्व-शासन प्रणाली को सहायता देना. (छ) ई-शासन प्रणाली की सहायता करना. (ज) नागरिकों के अधिकारों एवं दायित्वों के प्रवर्तन में सहायक होना. (झ) स्थानीय नगरीय निकायों में अंतर्वलित शुल्क, लेवी, कर, टोल, भाड़ा, डयूटी, जुर्माना, दंड, सेवायें तथा सुविधाओं से संबंधित तथा उससे उत्पन्न विवादों को न्यायनिर्णित करना. (ञ) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए शुल्क उद्ग्रहीत करना. (ट) ऐसे अन्य कृत्यों का निर्वहन करना जो कि इस अधिनियम के अंतर्गत उससे संबंधित हों या उसे सौंपे गये हों.
- (2) आयोग, दो वर्ष में कम से कम एक बार समस्त शुल्क, लेवी, कर, टोल, भाड़ा, डयूटी, जुर्माना, दण्ड तथा किसी अन्य प्राप्तियों के संबंध में दरों की समीक्षा (पुनर्विलोकन) एवं यथोचित पुनरीक्षण करेगा : परन्तु, तथापि, किसी वित्तीय वर्ष में किसी शुल्क, लेवी, कर, टोल, भाड़ा, डयूटी, जुर्माना, दण्ड तथा किसी अन्य प्राप्तियों के संबंध में दरों की एक बार से अधिक समीक्षा (पुनर्विलोकन) तथा पुनरीक्षण नहीं करेगा.
- (3) आयोग, शासन को निम्नलिखित सभी या किन्हीं विषयों पर सलाह देगा, अर्थात् :- (क) संवैधानिक तथा अन्य विधिक प्रावधानों के आशय के अनुसार स्थानीय नगरीय निकायों को स्थानीय स्व-शासन के प्रोत्साहन के लिए शक्तियों का अंतरण. (ख) स्थानीय नगरीय निकायों की क्षमता बढ़ाना. (ग) स्थानीय नगरीय निकायों में पारदर्शिता एवं सु-शासन के प्रयोग को प्रोत्साहित करना. (घ) स्थानीय नगरीय निकायों के आर्थिक आधार को सुदृढ़ करना.
- (4) आयोग, अपनी शक्तियों का प्रयोग और अपने कृत्यों का निर्वहन करते समय पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा.
- (5) आयोग, अपने कृत्यों के निर्वहन में, राष्ट्रीय नीतियों तथा सभी सुसंगत विधियों द्वारा मार्गदर्शित होगा.
Chapter III FUNCTIONS OF THE COMMISSION
7. सलाहकार समिति
7. (1) आयोग, अधिसूचना द्वारा, ऐसी तारीख से जिसे वह ऐसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट करे, प्रवृत्त करते हुए, एक समिति स्थापित करेगा जिसे राज्य सलाहकार समिति कहा जायेगा.
- (2) राज्य सलाहकार समिति में निम्नलिखित नौ हित-समूहों के प्रत्येक समूह से एक प्रतिनिधि समाविष्ट होंगे- (एक) वाणिज्य (दो) उद्योग (तीन) परिवहन (चार) बिल्डर (भवन निर्माता), (पांच) वरिष्ठ नागरिक (को), (छः) महिला (सात) नगरीय विकास में सम्मिलित गैर-शासकीय संगठन (आठ) नगरीय विकास में सम्मिलित शैक्षणिक तथा शोध संस्थायें (नौ) विज्ञापन एजेंसी.
- (3) आयोग का अध्यक्ष, राज्य सलाहकार समिति का पदेन अध्यक्ष होगा, और आयोग के सदस्य तथा शासन के गृह (हाउसिंग), पर्यावरण, नगरीय विकास एवं प्रशासन के प्रभारी सचिव या उनका प्रतिनिधि जो उप सचिव से निम्न स्तर के न हो, समिति के पदेन सदस्य होंगे.
Chapter III FUNCTIONS OF THE COMMISSION
8. सलाहकार समिति के उद्देश्य
8. सलाहकार समिति का उद्देश्य आयोग को निम्न पर सलाह देने का होगा:-- (क) नीति का मुख्य प्रश्न. (ख) स्थानीय नगरीय निकायों तथा/या उनके अनुज्ञप्तिधारियों द्वारा प्रदान की गई सेवा की क्वालिटी (गुणवत्ता), निरंतरता और विस्तार से संबंधित विषय. (ग) अनुज्ञप्तिधारियों द्वारा उनकी अनुज्ञप्तियों की शर्तों और अपेक्षाओं का अनुपालन. (घ) नागरिकों के हितों का संरक्षण. (ङ) स्थानीय नगरीय निकायों द्वारा सेवाओं के प्रदाय में क्वालिटी (गुणवत्ता) के स्तर में सुधार.
Chapter III FUNCTIONS OF THE COMMISSION
9. सदस्यों की पदावधि और सेवा की शर्तें
9. (1) अध्यक्ष या अन्य सदस्य, अपने पद ग्रहण करने की तारीख से पांच वर्षों की अवधि के लिये पद धारण करेंगे : परन्तु आयोग में अध्यक्ष या अन्य सदस्य उसी हैसियत में (पद पर) पुनर्नियुक्ति के लिये पात्र नहीं होंगे.
- (2) अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन, भत्ते और सेवा के अन्य निबंधन और शर्तें ऐसे होंगे, जैसा कि शासन द्वारा विहित किया जाए : परन्तु सदस्यों के वेतन, भत्ते और सेवा के अन्य निबंधनों और शर्तों में, नियुक्ति के पश्चात् उनके लिये अलाभप्रद फेरफार (परिवर्तन) नहीं किया जायेगा.
- (3) प्रत्येक सदस्य, अपना पद ग्रहण करने के पूर्व, ऐसे प्ररूप में और ऐसी रीति में तथा ऐसे प्राधिकारी के समक्ष जैसा कि विहित किया जाए, अपने पद और गोपनीयता की शपथ लेगा और हस्ताक्षर करेगा.
- (4) उपधारा (1) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई सदस्य-- (क) शासन को लिखित में सूचना देकर जो तीन माह से कम न हो, अपना पद त्याग सकेगा ; (ख) धारा 10 के उपबंधों के अनुसार उसे पद से हटाया जा सकेगा.
- (5) किसी सदस्य के उपधारा (4) के अंतर्गत सदस्य न रहने पर, वह आयोग के समक्ष किसी व्यक्ति के मामले में किसी भी रीति से प्रतिनिधित्व नहीं करेगा.
Chapter III FUNCTIONS OF THE COMMISSION
10. सदस्य का हटाया जाना
10. (1) किसी सदस्य को, इस धारा के उपबंधों के अनुसार ही पद से हटाया जायेगा, अन्यथा नहीं.
- (2) शासन, आदेश द्वारा, किसी सदस्य को पद से हटा सकेगा, यदि वह, (क) दिवालिया न्यायनिर्णीत हो; (ख) किसी ऐसे अपराध के लिये सिद्धदोष ठहराया गया है, जो शासन की राय में नैतिक अधमता से अन्तर्वलित हो; (ग) सदस्य के रूप में कार्य करने में शारीरिक या मानसिक रूप से असमर्थ हो गया हो; (घ) ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लिया हो, जिससे सदस्य के रूप में उसके कृत्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना हो; (ङ) अपनी स्थिति का इस प्रकार दुरूपयोग किया हो जिससे उसके पद पर बने रहने से लोकहित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा; (च) साबित कदाचार का दोषी रहा है. परन्तु कोई भी सदस्य, खण्ड (घ), (ङ) और (च) में विनिर्दिष्ट किसी आधार पर, अपने पद से तब तक नहीं हटाया जायेगा, जब तक कि जांच की ऐसी प्रक्रिया न अपनाई गई हो जैसा कि शासन द्वारा विहित किया जाये तथा जांच प्राधिकरण ने यह रिपोर्ट न की हो कि ऐसे सदस्य को ऐसे आधार या आधारों पर हटा दिया जाना चाहिए.
- (3) शासन, जांच प्राधिकरण के अध्यक्ष के परामर्श से, आयोग के किसी सदस्य को निलंबित कर सकेगा जिसके संबंध में जांच प्राधिकरण के अध्यक्ष को, उपधारा (2) के अधीन निर्देशित किया गया है, जब तक कि शासन ऐसे निर्देश पर जांच प्राधिकरण के अध्यक्ष के रिपोर्ट की प्राप्ति के आधार पर आदेश पारित न करें.
PDF: pending for this language.