Bare Act
Chapter IV PROCEEDINGS AND POWERS OF THE COMMISSION
Chapter IV PROCEEDINGS AND POWERS OF THE COMMISSION
11. आयोग के सचिव, अधिकारी और अन्य कर्मचारी
- (1) आयोग, ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे कर्तव्यों का पालन करने के लिये, जैसा कि विनिर्दिष्ट किया जाए, एक सचिव की नियुक्ति कर सकेगा.
- (2) आयोग, शासन के अनुमोदन से, अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की संख्या, प्रकृति और संवर्ग विनिर्दिष्ट कर सकेगा.
- (3) सचिव, अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को देय वेतन और भत्ते तथा सेवा के अन्य निबंधन एवं शर्तें ऐसी होंगी जैसा कि आयोग के अनुमोदन से विनिर्दिष्ट किया जाए.
- (4) आयोग, अपने कृत्यों के निर्वहन में आयोग की सहायता के लिये अपेक्षित परामर्शियों, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर नियुक्त कर सकेगा, जैसा कि विनिर्दिष्ट किया जाए.
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12. आयोग की कार्यवाहियां
- (1) आयोग, मुख्यालय या ऐसे अन्य स्थान में, ऐसे समय पर बैठक करेगा जैसा कि अध्यक्ष निर्देशित करे, और अपने बैठकों में कारबार के संव्यवहार के संबंध में प्रक्रिया के ऐसे नियमों का पालन करेगा (जिसमें उनके अधिवेशनों में गणपूर्ति भी सम्मिलित है) जो कि विनिर्दिष्ट किये जाएं.
- (2) अध्यक्ष, या यदि वह आयोग के अधिवेशन में उपस्थित होने में असमर्थ है, तो अध्यक्ष द्वारा इस निमित्त नामांकित कोई अन्य सदस्य, और ऐसे नामांकित किये जाने के अभाव में या जहां कोई अध्यक्ष नहीं हो, वहां उपस्थित सदस्यों द्वारा उनके स्वयं के बीच से चुना गया कोई सदस्य अधिवेशन की अध्यक्षता करेगा.
- (3) ऐसे सभी प्रश्नों का जो आयोग के किसी अधिवेशन के समक्ष आयें, उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत द्वारा विनिश्चय किया जायेगा और बराबर मत होने की स्थिति में, अध्यक्ष या उसकी अनुपस्थिति में अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति का द्वितीयक या निर्णायक मत होगा.
- (4) उपधारा (3) में जैसा कि उपबंधित है के अन्यथा, प्रत्येक सदस्य का एक मत होगा.
- (5) आयोग के सभी आदेश और विनिश्चय, आयोग के सचिव या किसी अन्य अधिकारी जिसे अध्यक्ष द्वारा इस निमित्त सम्यक् रूप से प्राधिकृत किया गया हो, के द्वारा अधिप्रमाणित किये जायेंगे.
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13. रिक्तियों आदि से कार्यवाहियों का अविधिमान्य न होना
13. आयोग का कोई कार्य या कार्यवाही मात्र किसी रिक्ति के कारण या आयोग के गठन में किसी त्रुटि के आधार पर अविधिमान्य नहीं होगी.
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14. आयोग की शक्तियां
14. (1) आयोग को इस अधिनियम के अधीन किसी जांच या कार्यवाहियों के प्रयोजनों के लिये, निम्नलिखित विषयों के संबंध में ऐसी शक्तियां प्राप्त होंगी, जो कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का सं. 5) के अधीन सिविल न्यायालय में निहित हैं, अर्थात् :- (क) किसी व्यक्ति को समन करना या उसको हाजिर कराना और उसकी शपथ पर परीक्षा करना ; (ख) साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किये जाने योग्य किसी दस्तावेज या अन्य महत्वपूर्ण वस्तुओं का प्रकटीकरण और प्रस्तुतीकरण ; (ग) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना ; (घ) किसी लोक अभिलेख की अध्यपेक्षा करना; (ङ) साक्षियों की परीक्षा के लिये कमीशन जारी करना; (च) अपने विनिश्चयों, निर्देशों और आदेशों का पुनर्विलोकन करना; (छ) ऐसा कोई अन्य विषय जो विहित किया जाए.
- (2) आयोग को आयोग के समक्ष किसी कार्यवाही, सुनवाई या विषय में, ऐसा अंतरिम आदेश पारित करने की शक्तियां होंगी, जिसे वह उचित समझे.
- (3) आयोग, अपने समक्ष कार्यवाहियों में उपभोक्ताओं के हितों का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को प्राधिकृत कर सकेगा जिसे वह ठीक समझे.
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15. पुनर्विलोकन तथा अपील
- (1) आयोग के किसी आदेश से व्यथित कोई व्यक्ति, ऐसे आदेश के पैंतालीस दिनों के भीतर पुनर्विलोकन हेतु आवेदन प्रस्तुत कर सकेगा.
- (2) पुनर्विलोकन आवेदन के संबंध में पारित किसी आदेश के विरुद्ध अपील, आदेश के नब्बे दिनों के भीतर उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जा सकेगी.
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16. आयोग की प्रक्रिया
इस अधिनियम के अधीन न्यायनिर्णयन के लिए आयोग सिविल प्रक्रिया संहिता द्वारा बाध्य नहीं होगा, किन्तु अपने स्वयं की प्रक्रिया निर्धारित कर सकेगा, जिसमें प्राख्यान तथा अधिकारिता संबंधी नियम एवं साक्ष्य सम्मिलित होंगे जिसकी प्रक्रिया, विधिशास्त्र के सिद्धांत, पारदर्शिता, स्थिरता तथा त्वरित, विधिवत् एवं सस्ते न्याय के सिद्धांतों पर आधारित होगी.
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17. आयोग के समक्ष कार्यवाहियां
17. आयोग के समक्ष सभी कार्यवाहियां, भारतीय दंड संहिता (1860 का सं. 45) की धारा 193 और 228 के अंतर्गत न्यायिक कार्यवाहियां समझी जायेंगी और आयोग को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का सं. 2) की धारा 345 और 346 के प्रयोजनों के लिये सिविल न्यायालय समझा जाएगा.
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18. प्रवेश और अधिग्रहण की शक्तियां
आयोग या आयोग द्वारा इस निमित्त विशेष रूप से प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी जो राजपत्रित अधिकारी की श्रेणी से निम्न का न हो, ऐसे किसी भवन या स्थान में प्रवेश कर सकेगा, जहां आयोग के पास यह विश्वास करने का कारण है कि जांच की किसी विषयवस्तु से संबंधित कोई दस्तावेज वहां पर पाया जा सकता है, और ऐसे किसी दस्तावेज को, दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का सं. 2) की धारा 100 के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, जहां तक वह प्रयोज्य हो, अभिग्रहीत कर सकेगा या उससे उद्धरण या उसकी प्रतियां ले सकेगा।
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19. प्रत्यायोजन
आयोग, इस अधिनियम के अधीन अपनी ऐसी शक्तियों और कृत्यों को (धारा 14 के अधीन विवादों को न्यायनिर्णीत करने की शक्तियों तथा धारा 16 के अधीन अपनी प्रक्रिया अवधारित करने की शक्तियों को छोड़कर) जिन्हें वह आवश्यक समझे, ऐसी शर्तों के अध्यधीन रहते हुए, यदि कोई हो, जैसा कि आदेश में विनिर्दिष्ट किया जाए, आयोग के किसी सदस्य, सचिव, अधिकारी या किसी अन्य व्यक्ति को, लिखित रूप में साधारण या विशेष आदेश द्वारा, प्रत्यायोजित कर सकेगा।
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20. नियम बनाने की शक्ति
20. (1) इस अधिनियम के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु आयोग को नियम बनाने की शक्ति होगी.
- (2) उपधारा (1) के अधीन बनाये गये नियम शासकीय राजपत्र में प्रकाशित किये जायेंगे.
- (3) उपधारा (2) के अनुसार बनाये गये नियम, यथाशीघ्र राज्य विधानमण्डल के समक्ष रखे जायेंगे.
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