section 37
Power to require removal of unauthorized development
The Chhattisgarh Nagar Tatha Gram Nivesh (Amendment and Validation) Act, 2017(1) जहां धारा 36 में यथा उपदर्शित कोई विकास कार्यान्वित किया गया हो, वहां संचालक, ऐसे विकास के पांच वर्ष के भीतर, स्वामी पर एक सूचना तामील कर सकेगा जिसमें उससे यह अपेक्षा की जायेगी कि वह ऐसी कालावधि के भीतर जो सूचना की तामील की तारीख से एक माह से कम तथा तीन माह से अधिक न हो, जैसी कि उसमें विनिर्दिष्ट की जाये - (क) उन मामलों में, जो कि धारा 36 के खंड (क) या (ग) विनिर्दिष्ट किये गये हैं, भूमि को उसकी उस अवस्था में प्रत्यावर्तित करें जो कि उक्त विकास के किये जाने के पूर्व थी, (ख) उन मामलों में जो धारा 36 के खंड (ख) या (घ) में विनिर्दिष्ट किये गये हैं, शर्तों के या यथा उपांतरित अनुज्ञा का अनुपालन सुनिश्चित करें, परंतु जहां सूचना में भूमि के किसी उपयोग को बंद कर दिये जाने की अपेक्षा की जाये, वहां सूचना की तामील अधिभोगी पर भी की जायेगी। (2) विशिष्टतया, ऐसी सूचना में उपधारा (1) के प्रयोजन के लिए, (क) किसी भवन या किन्हीं संकर्मों को तोड दिये जाने या परिवर्तित किये जाने, (ख) भूमि पर कोई निर्माण संबंधी या अन्य संक्रियाएं कार्यान्वित किये जाने, या (ग) भूमि के किसी उपयोग को बंद कर दिये जाने की अपेक्षा की जा सकेगी। (3) ऐसी सूचना से व्यथित कोई भी व्यक्ति सूचना की प्राप्ति से पंद्रह दिन के भीतर तथा विहित रीति में संचालन को इस बात की अनुज्ञा के लिए आवेदन कर सकेगा कि उस भूमि पर किसी ऐसे भवन या संकर्मों को, जिनसे कि सूचना संबंधित है, बना रहने दिया जाये या उस भूमि के किसी ऐसे उपयोग को, जिससे कि सूचना संबंधित है, चालू रहने दिया जाये और जब तक कि आवेदन का निपटारा न हो जाये तब तक सूचना प्रत्याहृत रहेगी। (4) इस अध्याय के पूर्वगामी उपबंध जहां तक कि वे लागू हो सकते हों, उपधारा (3) के अधीन किये गये आवेदन को लागू होंगे। (5) यदि वह अनुज्ञा, जिसके कि लिए आवेदन किया गया है, दे दी जाती है तो सूचना प्रत्याहत हो जायेगी, किंतु यदि वह अनुज्ञा जिसके लिए आवेदन किया गया है, नहीं दी जाती है, तो सूचना प्रवृत रहेगी, या यदि ऐसा अनुज्ञा केवल कुछ भवनों या संकर्मों के बनाये रखे जाने के लिए या भूमि के केवल किसी भाग का उपयोग चालू रखने के लिए दी जाती है, तो सूचना, ऐसे भवनों या संकर्मों के बारे में या भूमि के ऐसी भाग के बारे में या भूमि के अन्य भागों के बारे में प्रवृत रहेगी, और तदुपरी स्वामी इस बात के लिए अपेक्षित किया जायेगा कि वह ऐसे अन्य भवनों, संकर्मों या भूमि के भाग के बारे में उपधारा (1) के अधीन सूचना में विनिर्दिष्ट की गयी कार्यवाही करें। (6) यदि सूचना में विनिर्दिष्ट की गयी कालावधि के भीतर या आवेदन के निपटारे के पश्चात उतनी ही कालावधि के भीतर, सूचना का या उसके उतने भाग का, जो कि प्रवृत हो, अनुपालन किया जाये, तो संचालक - (क) सूचना का अनुपालन न करने के लिये स्वामी को अभियोजित कर सकेगा, और जहां सूचना में भूमि के किसी उपयोग को बंद कर दिये जाने की अपेक्षा की गयी हो, वहां किसी ऐसे अन्य व्यक्ति को भी, जो सूचना के उल्लंघन में भूमि का उपयोग करता हो, या जो सूचना के उल्लंघन में भूमि का उपयोग करवाता हो या किये जाने देता हो, अभियोजित कर सकेगा, और (ख) जहां सूचना में किसी भवन या संकर्मों के तोड दिये जाने या परिवर्तित किये जाने या किन्हीं निर्माण संबंधी या अन्य संक्रियाओं के कार्यान्वित किये जाने की अपेक्षा की गयी हो, वहां वह स्वयं, उस भूमि को उस अवस्था में प्रत्यावर्तित करवा सकेगा जिसमें कि वह विकास किये जाने के पूर्व थी और ऐसी कार्यवाही जैसी कि संचालक आवश्यक समझे, जिसके अंतर्गत किसी भवन या संकर्मों का तोडा जाना या परिवर्तित किया जाना या कोई निर्माण संबंधी या अन्य संक्रियाओं का कार्यान्वित किया जाना आता है, करके अनुज्ञा की शर्तों के या यथायुपांतरित अनुज्ञा का अनुपालन सुनिश्चित कर सकेगा और उसके द्वारा इस संबंध में उपगत किये गये व्ययों की रकम स्वामी से भू-राजस्व के बकाया की भांति वसूल कर सकेगा। (7) कोई भी व्यक्ति, जो उपधारा (6) के खंड (क) के अधीन अभियोजित किया गया हो, दोषसिद्धि पर सादा कारावास से जिसकी अवधि छ: माह तक की हो सकेगी, या जुर्माने से दो हजार रुपये तक का हो सकेगा या दोनों से और चालू रहने वाले अपराध की दशा में अतिरिक्त जुर्माने से, जो अपराध के प्रथम बार किये जाने के लिए दोषसिद्धि के पश्चात प्रत्येक ऐसे दिन के लिए जिसके दौरान अपराध चालू रहे, दो सौ पचास रुपये तक का हो सकेगा, दंडित किया जायेगा।
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