section 3
Definitions
Shri Sanwaliaji Temple Act, 1992General199237 sections
Statutory text
परिभाषायें :- जब तक सन्दर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, इस अधिनियम में - (क) ‘‘बोर्ड’’ से इस अधिनियम के अधीन गठित श्री सांवरियाजी मंदिर बोर्ड अभिप्रेत है; (ख) ‘‘विद्य्यास’’ से मंदिर की या उसके रख-रखाव, सुधार, परिवर्धन या सहायता के लिए या उसमें उपासना करने के लिए या उससे सम्बन्धित किसी भी सेवा या खैरात के लिए या मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों के फायदे, सुविधा या सुख के लिए किसी भी नाम से मंदिर को दी गयी या सौंपी गयी सारी जांगम या स्थावर सम्पत्ति अभिप्रेत हैं और उसके अन्तर्गत निम्नलिखित है -
- (i) मंदिर में प्रतिष्ठापित मूर्तियां;
- (ii) मंदिर के परिसर;
- (iii) वे समस्त भूमियां और अन्य जांगम या स्थावर सम्पत्तियां, चाहे वे कहीं भी स्थित हो, तथा किसी भी स्त्रोत से प्राप्त किसी के भी नाम में होने वाली सम्पूर्ण आय जो मंदिर को समर्पित की गयी हो अथवा किन्हीं धार्मिक, पवित्र या खैराती प्रयोजनों के लिए बोर्ड के अधीन रखी गयी हो, या विद्य्यासों से अथवा ऐसे विद्य्यासों की आय से खरीदी गयी हो और मंदिर के लिए किये गये तथा मंदिर की ओर से प्राप्त चढ़ावे तथा भेंटें;
- (iv) श्री सांवरियाजी विद्य्यास के न्यासी बोर्ड के द्वारा धारित जांगम अथवा स्थावर सम्पत्तियां, जिनमें न्यासी बोर्ड के द्वारा गठित और प्रबंधित निधियां भी सम्मिलित हैं; (ग) ‘‘मुख्य कार्यपालक अधिकारी’’ से इस अधिनियम के अधीन नियुक्त मंदिर का मुख्य कार्यपालक अधिकारी अभिप्रेत है; (घ) ‘‘विहित’’ से इस अधिनियम के अधीन बनाये गये नियमों द्वारा विहित अभिप्रेत है; (ङ) ‘‘मंदिर’’ से चित्तौड़गढ़ जिले के मंडफिया स्थित श्री सांवरियाजी का मंदिर अभिप्रेत है; (च) ‘‘श्री सांवरियाजी विद्य्यास’’ से देवस्थान विभाग द्वारा 19-8-1986 को राजस्थान लोक विद्य्यास अधिनियम, 1959 के अधीन रजिस्ट्रीकृत विद्य्यास विलेख के अधीन इस नाम से जाना जाने वाला विद्य्यास अभिप्रेत है; (छ) ‘‘मंदिर निधि’’ से विद्य्यास अभिप्रेत है और उनमें ऐसी समस्त राशियां, चढ़ावे, भेंटें और पूजा-स्थल के फायदे के लिए किया गया कोई भी अन्य दान या अभिदाय सम्मिलित है तथा समस्त ऐसे विद्य्यास भी सम्मिलित है जो पूजा-स्थल, उसकी सेवा-पूजा के फायदे के लिए श्री सांवरियाजी विद्य्यास के विलेख में उल्लिखित प्रयोजनों के अधीनस्थ प्रयोजनों के लिए किये गये हैं या किये जायें; (ज) ‘‘सेवा-पूजा’’ से ऐसी सभी प्रकार की सेवा, उपासना, धार्मिक कृत्य और धार्मिक पूजा जो मंदिर में परम्परानुसार की जाती है, अभिप्रेत है।
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