section 28
Purposes for which funds of Temple may be used
Shri Sanwaliaji Temple Act, 1992General199237 sections
Statutory text
वे प्रयोजि, लजिके लिए मांलिर की लिलि का उपयोग लकया जा सके गा:-
- (1) मांलिर की वनवियों का उपयोग वनमनवलवित समस्त या उनमें से वकसी भी प्रयोजन के वलए वकया जा सकेगा, अथाात् -
- (i) मांलिर का प्रशासन और रि-रिाि तथा उसमें दैवनक पूजा और िावमचक कमच करना तथा उत्सि मनाना;
- (ii) माांलिर में आने वाले यावत्रयों और पूजा करने वालों की सहायता के वलए अस्पताल और औषिालय खोलना और उनका रि-रिाि और अदय शैषितवणक तथा पूच प्रयोजन वजनमें मावसक िाद्य चढ़ािे सवममवलत हैं;
- (iii) ऐसे यावत्रयों और पूजा करने वालों के उपयोग तथा आिास सुवििा के वलए िमचशालाओं और विश्राम-गृहों का वनमाचण और रि-रिाि;
- (iv) उनमें जलप्रदाय और स्िच्छता समबदिी अदय प्रबदिों की व्यिस्था करना;
- (v) वकसी भी समपवत्त का राज्य सरकार वारा प्राविकृत अजचन; और
- (vi) यावत्रयों और पूजा करने वालों की सुवििा के वलए सड़कों और सांचार-सािनों का वनमाचण और रि-रिाि तथा उनमें प्रकाश की व्यिस्था करना।
- (2) उप-िारा
- (1) में वनवदचष्ट प्रयोजनों पर प्रवतकूल प्रभाि डाले वबना, बोच, राज्य सरकार की पूच मांजूरी से यह आदेश दे सकेगा वक माांलिर की अविशेष वनवियों का उपयोग वनमनवलवित प्रयोजनों के वलए वकया जाये -
(क) ऐसी सांस्थाए संस्थापत करना वजनमें वहददू िमच, दशचन और शास्त्रों के अध्ययन के वलए और भारतीय कला तथा सांस्कृति की अभिवृवद्ध के वलए विशेष व्यिस्था हो;
(ि) सांस्कृत और वहददी के अध्ययन की अभिवृवद्ध करना; (ग) अस्पताल या कोढ़ी आश्रम की स्थापना और रि-रिाि करना। (घ) ऐसे वनरावश्रत व्यवक्तयों के वलए जो शरीर से असमथच तथा असहाय हो, दीनगृह का वनमाचण और रि-रिाि करना; और (ङ) ऐसे कोइ भी पूतच, िावमचक या शैषितवणक प्रयोजन जो माांलिर के उद्देश्यों से असांगत न हो।
- (3) उप-िारा
- (2) के अिीन वकया गया बोच का आदेश विवहत रीवत से प्रकावशत वकया जायेगा।
Study data processing for this section.
PDF: pending for this language.