section 11
संचालक द्वारा संदाय के लिये या घोर उपेक्षा या अपचार द्वारा अवैध कारित हानि तथा प्रभार का स्थानीय प्राधिकारी की प्रशासन रिपोर्ट में समाविष्ट किया जाना
The Madhya Pradesh Sthaniya Nidhi Samparikha Adhiniyam, 1973(1) यदि प्रतिकूल हेतु दर्शित करने का संबंधित व्यक्ति को युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् संचालक को यह समाधान हो जाय कि स्थानीय प्राधिकारी के किसी धन या अन्य संपत्ति की हानि, दुर्व्यय या दुरुपयोग अपचारी व्यक्ति द्वारा किये गये अपचार या इसके द्वारा की गई घोर उपेक्षा के प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप हुआ है, या यह समाधान हो जाय कि उक्त व्यक्ति द्वारा किये गये अवैध संदाय के किये जाने में या अवैध संदाय के किये जाने का प्राधिकार प्रदान करने में एक पक्षकार हैं, तो संचालक, लिखित आदेश द्वारा, ऐसे व्यक्ति को यह निदेश देगा कि वह संबंधित स्थानीय प्राधिकारी को विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व ब्याज सहित ऐसी रकम का जैसी कि उस स्थानीय प्राधिकारी की, उसके धन संपत्ति की ऐसी हानि, दुर्व्यय, दुरुपयोग के लिये प्रतिभूति करने के हेतु न्यायसंगत तथा साम्यिक पाई जाय भुगतान कर दे : परन्तु— किसी ऐसी मद के संबंध में जो उस तारीख के, जब कि धारा 8 के अधीन रिपोर्ट स्थानीय प्राधिकारी के प्रधान अधिकारी को भेजी गई थी, या उस तारीख को जिसकी कि वह संचालक की जानकारी में आई हो, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, पांच वर्ष के पूर्व की कालावधि के विसी लेखे में सम्मिलित की गई थी या उस लेखे में सम्मिलित की जानी चाहिये थी किन्तु उसमें से छोड़ दी गई प्रभार का कोई आदेश इस अधिनियम के अधीन नहीं किया जाएगा : परन्तु यह और भी कि किसी मृत अपचारी व्यक्ति के विधिक प्रतिनिधि का दायित्व मृतक की उस सम्पत्ति व सीमा तक होगा जो ऐसे विधिक प्रतिनिधि को प्राप्त हुई हो। (2) उपधारा (1) के अधीन किये गये समस्त प्रभार संबंधित स्थानीय प्राधिकारी की अगली प्रशासन रिपोर्ट में समाविष्ट किये जाएंगे और ऐसी रिपोर्ट जनता के निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेगी। (3) यदि वह व्यक्ति जिसे कि आदेश की प्रतिलिपि उपधारा (1) के अधीन दी जाए, उसे लेने से इन्कार करे, तो उसके संबंध में यह समझा जाएगा कि वह प्रतिलिपि उसी दिन सम्यक रूपेण प्राप्त हो चुकी है, जिस दिनांक को वह प्रतिलिपि लेने से उसके द्वारा इन्कार किया गया था।
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