Bare Act
The Madhya Pradesh Sthaniya Nidhi Samparikha Adhiniyam, 1973
1. संक्षिप्त नाम
इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश स्थानीय निधि संपरीक्षा (संशोधन) अधिनियम, 1979 है।
2. धारा 2 का संशोधन
मध्यप्रदेश स्थानीय निधि संपरीक्षा अधिनियम, 1973 (क्रमांक 43 सन् 1973) (जो इसमें इसके पश्चात् धारा 2 का संशोधन मूल अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है) की धारा 2 में,— (एक) खंड (क) के स्थान पर निम्नलिखित खंड स्थापित किया जाय, अर्थात्:— "(क) 'संपरीक्षा' के अंतर्गत आता है विस्तृत संपरीक्षा, विशेष संपरीक्षा, स्थानिक संपरीक्षा (रेजीडेंट आडिट) तथा ऐसी अन्य संपरीक्षा जैसी कि राज्य सरकार, समय-समय पर विनिर्दिष्ट करें।" (दो) खंड (घ) में शब्द "स्थानीय निधि लेखा" के स्थान पर "स्थानीय निधि संपरीक्षा" स्थापित किये जायें; और (तीन) खंड (ज) के पश्चात्, निम्नलिखित खंड अंतःस्थापित किया जाय, अर्थात्:— "(झ) 'स्थानिक संपरीक्षा' से अभिप्रेत है व्यय की संवर्ती या पूर्व संपरीक्षा तथा प्राप्तियों का पुनर्विलोकन."
3. धारा 3 का संशोधन
मूल अधिनियम की धारा 3 में,— (एक) जहां कहीं भी शब्द "स्थानीय निधि लेखा आवे हों, वहां उनके स्थान पर शब्द "स्थानीय निधि संपरीक्षा" स्थापित किये जायें। (दो) उपधारा (4) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा स्थापित की जाय, अर्थात्:— "(4) राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा धारा 8, 9, 10 तथा 11 के अधीन संचालक की समस्त शक्तियों या उनमें से कोई भी शक्ति स्थानीय निधि संपरीक्षा के सहायक संचालक की पद श्रेणी से अभिन्न पदश्रेणी के किसी अधिकारी को ऐसे निबंधनों तथा शर्तों के साथ प्रदत्त कर सकेगी जो कि ऐसी अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाय."
4. धारा 11 का संशोधन
मूल अधिनियम की धारा 11 की उपधारा (3) में शब्द "विनिश्चय" के स्थान पर शब्द "आदेश" स्थापित किया जाये.
5. धारा 12 तथा 13 के स्थान पर नवीन धाराओं का स्थापन
मूल अधिनियम की धारा 12 तथा 13 के स्थान पर निम्नलिखित धारायें स्थापित की जायें, अर्थात्:— "12. (1) धारा 11 की उपधारा (1) के अधीन के प्रत्येक आदेश पर से कोई अपील,— (क) उस दशा में जबकि ऐसा आदेश किसी सहायक संचालक द्वारा, जिसे कि उस धारा के अधीन संचालक की शक्तियों से विनिहित किया गया हो, पारित किया गया हो, उपसंचालक को होगी. (ख) उस दशा में जबकि ऐसा आदेश ऐसे उपसंचालक द्वारा जिसे कि उस धारा के अधीन संचालक की शक्तियों से विनिहित किया गया हो, पारित किया गया हो, संचालक को होगी. (ग) उस दशा में जबकि ऐसा आदेश संचालक द्वारा पारित किया गया हो, आयुक्त को होगी. (2) उपधारा (1) के अधीन के अपील उस तारीख से जिसको कि वह आदेश अपील करने वाले व्यथित को प्राप्त हुआ हो, तीस दिन के भीतर की जायगी. 13. यथास्थिति स्थानीय निधि संपरीक्षा का सहायक संचालक, उप संचालक या संचालक तथा कोई भी ऐसा व्यक्ति, जो स्थानीय निधि संपरीक्षा के उपसंचालक या संचालक के अथवा आयुक्त के किसी ऐसे आदेश से, जो धारा 12 के अधीन किया गया हो, व्यथित हो, उस तारीख से, जिसको कि उसे वह आदेश प्राप्त हुआ हो, तीस दिन के भीतर इस बात के लिये कि यथास्थिति उप संचालक, संचालक या आयुक्त का ऐसा आदेश अप्रस्त किया जाय, आवेदन — (एक) उस दशा में कि धारा 12 के अधीन प्रथम अपील में वह आदेश उप संचालक द्वारा पारित किया गया हो, संचालक को, (दो) उस दशा में कि धारा 12 के अधीन प्रथम अपील में वह आदेश संचालक द्वारा पारित किया गया हो, आयुक्त को, (तीन) उस दशा में कि धारा 12 के अधीन प्रथम अपील में वह आदेश आयुक्त द्वारा पारित किया गया हो, राजस्व मंडल को, कर सकेगा जो पक्षकारों की सुनवाई करने तथा ऐसा साक्ष्य जैसा कि वह सुसंगत तथा आवश्यक समझे, लेने के पश्चात प्रभार की पुष्टि करेगा, उसे उपान्तरित करेगा या उसका परिहार करेगा और उस डिक्री पारित करेगा तथा खर्च के संबंध में ऐसे आदेश करेगा जैसा कि वह ठीक समझे और ये आदेश अंतिम होंगे."
6. Power of auditor to require production of documents and attendance of concerned persons
(1) is adhiniyam ke adheen kisi sampariksha ke prayojan ke liye samparikshak— (k) likhit mein yah apeksha kar sakega ki lekhaon ke sambandh mein aise vauchar, vivaran, vivarani, patra-vyavahar, tippan ya koi anya dastavez, jinhe vah uchit samjhe, sthaniya pradhikari ke pradhan karyalay mein pesh kiye jaye; Jahan kisi mamle mein mool adhiniyam ki dhara 8 ke adhin riport prapt hone par,--
(ka) arop is adhiniyam ke prarambh hone ke poorv us kalavadhi ke bheetar jo ki dhara 10 ki updhara (3) mein vinirdisht hai, virachit nahi kiya gaya tha, ya
(kha) prabhar ka adesh is adhiniyam ke prarambh hone ke poorv us kalavadhi ke bheetar, jo ki dhara 11 ki updhara (1) ke parantuk ke khand (do) mein vinirdisht hai, nahi kiya gaya tha.
Wan, bhale hi mool adhiniyam mein koi bhi baat kyon na ho, arop virachit karne ya prabhar ka adesh karne sambandhi ve karyawadhiyan, jo vyagat ho chuki thin, aisa prarambh hone par punah: pravartit ho jayengi tatha is adhiniyam ke prarambh hone ki tarikh se ek varsh ki kalavadhi ke bheetar yathasthiti arop virachit kiya ja sakega ya prabhar ka adesh kiya ja sakega.
7. धारा 6 के अधीन की गई मध्यपेक्षा की प्रवक्षा करने के लिये शासति
(1) कोई भी व्यक्ति, जो धारा 6 की उपधारा (1) के खण्ड (क) था खण्ड (ख) के अधीन उससे विधि पूर्वक की गई किसी मध्यपेक्षा का अनुपालन करने में जानबूझकर उपेक्षा करेगा या उस मध्यपेक्षा का अनुपालन करने से जानबूझकर इंकार करेगा किसी मजिस्ट्रेट के समक्ष दोषसिद्धि पर ऐसे जुर्माने के दायित्वाधीन होगा जो पांच सौ रुपये तक का हो सकेगा। (2) इस धारा के अधीन कोई भी कार्यवाही संचालक की लिखित मंजूरी के बिना संस्थित नहीं की जायगी। (3) उपधारा (2) के अधीन ऐसी, मंजूरी देने के पूर्व, संचालक उस व्यक्ति से, जिसके विरुद्ध कार्यवाही संस्थित की जाती है, यह अपेक्षा करेगा कि वह यह हेतु दर्शाये कि ऐसी मंजूरी क्यों न दे दी जाय। (4) प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के न्यायालय से निम्न वर्ग का कोई भी न्यायालय इस अधिनियम के विरुद्ध किसी अपराध का विचारण नहीं करेगा।
8. संपरीक्षा-रिपोर्ट संबंधित स्थानीय प्राधिकारी और कतिपय प्राधिकारियों तथा निकायों को भेजी जायगी
संपरीक्षा के पूर्ण होने के पश्चात् यथासाध्य शीघ्रता से, किन्तु उसके बाद तीन माह से अधिक पश्चात् नहीं, उन लेखाओं के संबंध में, जिनकी कि संपरीक्षा तथा परीक्षा की गई हो, एक रिपोर्ट तैयार करेगा और ऐसी रिपोर्ट संबंधित स्थानीय प्राधिकारी को भेजेगा और उसकी प्रतिलिपियां ऐसे अधिकारियों तथा निकायों को भेजेगा जिनके कि संबंध में राज्य सरकार इस बारे में निर्देश दे।
9. संपरीक्षा-रिपोर्ट की विषय-वस्तु
अचालक अपनी रिपोर्ट में निम्नलिखित का विवरण सम्मिलित करेगा:— (क) ऐसा प्रत्येक संदाय जो उसे विधि के प्रतिकूल प्रतीत होता हो; (ख) किसी ऐसी कमी या हानि की, जिसके संबंध में यह प्रतीत होता हो कि वह किसी व्यक्ति की घोर उपेक्षा या अपचार के कारण कारित हुई है, रकम; (ग) किसी धनराशि की ऐसी रकम जो लेखे में लाई जानी चाहिये थी किन्तु किसी व्यक्ति द्वारा लेखे में नहीं लाई गई हो; और (घ) उपर्युक्त खण्ड (क), (ख) तथा (ग) में वर्णित से भिन्न कोई अन्य सारवान् धनौचित्य या अनियमितता; कपट या दुर्विनियोग जिसे वह लेखाओं में देखे।
10. धारा 8 के अधीन संचालक की रिपोर्ट के पश्चात् अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया
(1) धारा 8 के अधीन रिपोर्ट प्राप्त होने के पैंतालीस दिन के भीतर स्थानीय प्राधिकारी का प्रधान स्थानीय प्राधिकारी (क) उस रिपोर्ट में बतलाई गई ऐसी त्रुटियों या अनियमितताओं को छांटेगा या छंटवाएगा— (एक) जिन्हें वह कार्यपालिक अधिकारी स्थानीय प्राधिकारी को निर्दिष्ट किये बिना ही दूर करने के लिये सक्षम हो; (दो) जिन्हें दूर करने के लिये स्थानीय प्राधिकारी ही सक्षम हो; (ख) स्थानीय प्राधिकारी से संबंधित विधि में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, उस रिपोर्ट पर विचार करने के लिये स्थानीय प्राधिकारी का एक विशेष सम्मिलन बुलायेगा, जो सम्मिलन स्थानीय प्राधिकारी से संबंधित विधि के प्रयोजनों के लिये एक ऐसा विशेष सम्मिलन समझा जायेगा जो उक्त विधि के अधीन संयोजित किया गया हो; और (ग) स्थानीय प्राधिकारी के उस विशेष सम्मिलन के, जो कि खण्ड (ख) के अधीन बुलाया गया हो, समक्ष उस रिपोर्ट को एक ऐसे टिप्पण सहित प्रस्तुत करेगी जिसमें उन तथ्यों के बारे में, जो कि उस रिपोर्ट में वर्णित किये गये हों, स्थिति वह कार्यवाही, जिसे कि वह उन तथ्यों के बारे में की जाने के लिये प्रस्तावित करे, दर्शायी जावेगी। स्पष्टीकरण.—किसी "नगरपालिक निगम" के मामले में खण्ड (ख) तथा (ग) के प्रयोजनों के लिये उस नगरपालिक निगम के महापौर को नगरपालिक आयुक्त के स्थान पर स्थानीय प्राधिकारी का प्रधान अधिकारी समझा जाएगा। (1-क) यदि स्थानीय प्राधिकारी का प्रधान अधिकारी, उपधारा (1) के खण्ड (ख) द्वारा अपेक्षित किये गये अनुसार विशेष सम्मिलन नहीं बुलाता है, तो स्थानीय प्राधिकारी का कार्यपालिक अधिकारी उपधारा (1) में वर्णित कालावधि के अवसान की तारीख से तीस दिन के भीतर विशेष सम्मिलन बुलायेगा और उपधारा (1) के खण्ड (ख) तथा (ग) के उपबन्ध उसके उसी प्रकार लागू होंगे जिस प्रकार कि वे उक्त उपधारा के खण्ड (ख) के अधीन संयोजित किये गये विशेष सम्मिलन को लागू होते हैं। स्पष्टीकरण.—इस उपधारा के प्रयोजन के लिये, "स्थानीय प्राधिकारी के कार्यपालिक अधिकारी से अभिप्रेत है,— (एक) नगरपालिक निगम के मामले में, नगरपालिका आयुक्त; (दो) नगरपालिका परिषद या अधिसूचित क्षेत्र समिति के मामले में, मुख्य नगरपालिका अधिकारी; (तीन) नगर तथा ग्राम विकास प्राधिकारी के मामले में, मुख्य कार्यपालिक अधिकारी; (चार) (क) ग्राम पंचायत के मामले में, सचिव; (ख) जनपद पंचायत के मामले में, मुख्य कार्यपालिक अधिकारी; (ग) जिला पंचायत के मामले में, सचिव; (पाँच) कृषि-उपज मण्डी समिति के मामले में, सचिव; (छ:) किसी अन्य स्थानीय प्राधिकारी के मामले में, उसका ऐसा पदाधिकारी या अधिकारी जिसे राज्य सरक र अधिसूचना द्वारा, इस सम्बन्ध में विनिर्दिष्ट करे। (1-ख) स्थानीय प्राधिकारी का प्रधान अधिकारी उपधारा (1) के अधीन बुलाये गये विशेष सम्मिलन में उस विषय पर स्थानीय प्राधिकारी द्वारा विचार कर लिया जाने के पश्चात्, त्रुटियों या अनियमितताओं का परिशोधन करने के लिये आवश्यक कार्यवाही करेगा तथा रिपोर्ट प्राप्त होने के चार मास के भीतर— (क) संचालक को इस बात की प्रज्ञापना भेजेगा कि उस रिपोर्ट में बतलाई गई त्रुटियां या अनियमितताएं दूर कर दी गई हैं; या (ख) ऐसी त्रुटियों या अनियमितताओं के सम्बन्ध में स्पष्टीकरण, जो कि स्थानीय प्राधिकारी देना चाहे, संचालक को देगा। (1-ग) यदि स्थानीय प्राधिकारी का प्रधान अधिकारी को वह रिपोर्ट समझने में कोई कठिनाई मालूम होती है या उस बारे में कोई शंका होती है, तो वह ऐसी रीति में तथा ऐसी कालावधि के भीतर जो कि विहित की जाय, संचालक से उस रिपोर्ट के सम्बन्ध में स्थिति स्पष्ट करेगा। संचालक, उन बातों को स्पष्ट करने के लिये जिन्हें कि स्थानीय प्राधिकारी के प्रधान अधिकारी को, उससे अपेक्षा करते हुए समन कर सकेगा कि वह स्वयं ऐसे समय पर तथा ऐसे स्थान पर और ऐसे अभिलेखों सहित, जैसा कि वह (संचालक) निर्देशित करे, उपस्थित हो या संचालक, यदि वह ऐसा करना उचित समझे अभिलेख का निरीक्षण ऐसे स्थान पर जहां कि वह रखा हुआ हो कर सकेगा।” (2) ऐसी प्रज्ञापना या स्पष्टीकरण के प्राप्त होने पर, संचालक अपनी रिपोर्ट में वर्णित समस्त विषयों के बारे में (क) स्थानीय प्राधिकारी के प्रधान अधिकारी द्वारा दी गई प्रज्ञापना या दिये गये स्पष्टीकरण को प्रतिगृहीत कर सकेगा तथा आरोपों का प्रत्याहरण कर सकेगा; या (ख) यह निदेश दे सकेगा कि आगामी संपरीक्षा के समय या किसी पूर्वतर तारीख को उस विषय के सम्बन्ध में पुनः अन्वेषण किया जाय; या (ग) यह मान सकेगा कि रिपोर्ट में बतलाई गई त्रुटियां या अनियमितताएं या उनमें से कोई त्रुटियां, अनियमितता हटाई या दूर नहीं की गई हैं। (3) यदि संचालक यह मानता है कि "रिपोर्ट में बतलाई गई त्रुटियां या अनियमितताएं हटाई या दूर नहीं की गई हैं, तो वह उपधारा (1-ख) के अधीन संबंधित स्थानीय प्राधिकारी के प्रधान अधिकारी द्वारा दी गई प्रज्ञापना या दिये गये नये स्पष्टीकरण के अपने द्वारा प्राप्त किये जाने पर या उपधारा (1-ग) के अधीन विहित की गई कालावधि का अवसान हो जाने पर या जब कि स्थानीय प्राधिकारी का प्रधान अधिकारी ऐसी प्रज्ञापना या स्पष्टीकरण देने से चूक गया हो, उपधारा (1-ख) में वर्णित चार मास की कालावधि का अवसान हो जाने पर, यथाशक्य शीघ्र किन्तु रिपोर्ट प्राप्त होने से अधिक से अधिक एक वर्ष के भीतर, अभिकथित भ्रष्टाचारी व्यक्तियों के विरुद्ध आरोप उस धनराशि का, जिससे कि त्रुटियां या अनियमितताएं संबंधित हैं, वर्णन करते हुए विरचित करेगा और उक्त आरोपों की प्रतिलिपि आयुक्त को प्रेषित करने के अलावा स्थानीय प्राधिकारी के प्रधान अधिकारी को भी प्रेषित करेगा; और (3-क) यदि यथास्थिति स्थानीय प्राधिकारी का प्रधान अधिकारी या स्थानीय प्राधिकारी का कार्यपालिक अधिकारी उपधारा (1) या उपधारा (1-क) या उपधारा (1-ख) या उपधारा (1-ग) के अधीन कार्यवाही नहीं करता है, तो वह इस बात के लिये दायी होगा कि उसके विरुद्ध आरोप विरचित किये जायें तथा संचालक, उपधारा (1-ख) में वर्णित चार मास की कालावधि का अवसान हो जाने पर, अभिकथित भ्रष्टाचारी व्यक्ति या व्यक्तियों के विरुद्ध उपधारा (3) के अधीन आरोप विरचित करने के साथ-साथ यथास्थिति स्थानीय प्राधिकारी के प्रधान अधिकारी या स्थानीय प्राधिकारी के कार्यपालिक अधिकारी के विरुद्ध भी आरोप विरचित कर सकेगा। (4) इस धारा में कोई भी बात संचालक को भी कोई भी ऐसी जानकारी जिसके संबंध में यह प्रतीत हो कि वह आपराधिक दुर्विनियोग या कपट की उपधारणा का समर्थन करती है या जो, उसकी राय में, विशेष ध्यान दिये जाने या तत्काल अन्वेषण किये जाने के योग्य है, आयुक्त के ध्यान में, ऐसी कार्यवाही की जाने के लिये, जैसी कि आयुक्त आवश्यक समझे लाने से किसी भी समय प्रभावित नहीं करेगी।
11. संचालक द्वारा संदाय के लिये या घोर उपेक्षा या अपचार द्वारा अवैध कारित हानि तथा प्रभार का स्थानीय प्राधिकारी की प्रशासन रिपोर्ट में समाविष्ट किया जाना
(1) यदि प्रतिकूल हेतु दर्शित करने का संबंधित व्यक्ति को युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् संचालक को यह समाधान हो जाय कि स्थानीय प्राधिकारी के किसी धन या अन्य संपत्ति की हानि, दुर्व्यय या दुरुपयोग अपचारी व्यक्ति द्वारा किये गये अपचार या इसके द्वारा की गई घोर उपेक्षा के प्रत्यक्ष परिणामस्वरूप हुआ है, या यह समाधान हो जाय कि उक्त व्यक्ति द्वारा किये गये अवैध संदाय के किये जाने में या अवैध संदाय के किये जाने का प्राधिकार प्रदान करने में एक पक्षकार हैं, तो संचालक, लिखित आदेश द्वारा, ऐसे व्यक्ति को यह निदेश देगा कि वह संबंधित स्थानीय प्राधिकारी को विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व ब्याज सहित ऐसी रकम का जैसी कि उस स्थानीय प्राधिकारी की, उसके धन संपत्ति की ऐसी हानि, दुर्व्यय, दुरुपयोग के लिये प्रतिभूति करने के हेतु न्यायसंगत तथा साम्यिक पाई जाय भुगतान कर दे : परन्तु— किसी ऐसी मद के संबंध में जो उस तारीख के, जब कि धारा 8 के अधीन रिपोर्ट स्थानीय प्राधिकारी के प्रधान अधिकारी को भेजी गई थी, या उस तारीख को जिसकी कि वह संचालक की जानकारी में आई हो, इनमें से जो भी पूर्वतर हो, पांच वर्ष के पूर्व की कालावधि के विसी लेखे में सम्मिलित की गई थी या उस लेखे में सम्मिलित की जानी चाहिये थी किन्तु उसमें से छोड़ दी गई प्रभार का कोई आदेश इस अधिनियम के अधीन नहीं किया जाएगा : परन्तु यह और भी कि किसी मृत अपचारी व्यक्ति के विधिक प्रतिनिधि का दायित्व मृतक की उस सम्पत्ति व सीमा तक होगा जो ऐसे विधिक प्रतिनिधि को प्राप्त हुई हो। (2) उपधारा (1) के अधीन किये गये समस्त प्रभार संबंधित स्थानीय प्राधिकारी की अगली प्रशासन रिपोर्ट में समाविष्ट किये जाएंगे और ऐसी रिपोर्ट जनता के निरीक्षण के लिए उपलब्ध रहेगी। (3) यदि वह व्यक्ति जिसे कि आदेश की प्रतिलिपि उपधारा (1) के अधीन दी जाए, उसे लेने से इन्कार करे, तो उसके संबंध में यह समझा जाएगा कि वह प्रतिलिपि उसी दिन सम्यक रूपेण प्राप्त हो चुकी है, जिस दिनांक को वह प्रतिलिपि लेने से उसके द्वारा इन्कार किया गया था।
12. प्रथम अपील
(1) धारा 1 की उपधारा (1) के अधीन के प्रत्येक आदेश पर से कोई अपील— (क) उस दशा में जबकि ऐसा आदेश किसी सहायक संचालक द्वारा जिसे कि उस धारा के अधीन संचालक की शक्तियों से विनिहित किया गया हो, पारित किया गया हो, उप संचालक को होगी। (ख) उस दशा में जबकि ऐसा आदेश ऐसे उप संचालक द्वारा जिसे कि उस धारा के अधीन संचालक की शक्तियों से विनिहित किया गया हो, पारित किया गया हो, संचालक को होगी। (ग) उस दशा में जबकि ऐसा आदेश संचालक द्वारा पारित किया गया हो आयुवत को होगी। (2) उपधारा (1) के अधीन कोई अपील उस तारीख से जिसको कि वह आदेश अपील करने वाले व्यक्ति को प्राप्त हुआ हो तीस दिन के भीतर की जायेगी।
13. द्वितीय अपील
यथास्थिति स्थानीय निधि संपरीक्षा का सहायक संचालक, उप संचालक या संचालक तथा कोई भी ऐसा व्यक्ति जो स्थानीय निधि संपरीक्षा के उप संचालक या संचालक के अथवा आयुक्त के किसी ऐसे आदेश से, जो धारा 12 के अधीन किया गया हो, व्यथित हो, उस तारीख से जिसको उसे वह आदेश प्राप्त हुआ हो, तीस दिन के भीतर इस बात के कि यथास्थिति उप संचालक, संचालक या आयुक्त का ऐसा आदेश अपास्त जाय, आवेदन (एक) उस दशा में कि जब कि धारा 12 के अधीन प्रथम अपील में वह आदेश उप संचालक द्वारा पारित किया गया हो, संचालक को। (दो) उस दशा में कि जब कि धारा 12 के अधीन प्रथम अपील में वह आदेश संचालक द्वारा पारित किया गया हो, आयुक्त को (तीन) उस दशा में कि जब कि धारा 12 के अधीन प्रथम अपील में वह आदेश आयुक्त द्वारा पारित किया गया हो, राजस्व मण्डल को कर सकेगा जो पक्षकारों की सुनवाई करने तथा ऐसा साक्ष्य जैसा कि वह, सुसंगत तथा आवश्यक समझे, लेने के पश्चात प्रभार की पुष्टि करेगा उसे उपार्ंतरित करेगा या उसका परिहार करेगा और ऐसी डिक्री पारित करेगा तथा खर्च के संबंध में ऐसे आदेश करेगा जैसा कि वह ठीक समझे और ये आदेश अंतिम होंगे।
14. अपील का लम्बित रहना
आयुक्त, राजस्व मण्डल या राज्य सरकार यथास्थिति धारा 12 के अधीन अपील का या धारा 13 के वसूली रोकने का अधीन आवेदन का निपटारा लम्बित रहने की स्थिति में तथा व्यथित व्यक्ति द्वारा तदर्थ आवेदन किये जाने पर, एक निदेश देने की शक्ति ऐसा आदेश पारित कर सकेगी जिसके द्वारा कि धारा 11 के अधीन रकम की वसूली ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए, जैसी कि ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट की जाय, रोक दी जायगी।
15. Recovery of audit surcharges
ऐसे समस्त मामलों में, जिनमें धारा 12 के अधीन कोई अपील न की गई हो या धारा 13 के अधीन कोई प्रभारों की भू-आवेदन न किया गया हो संचालक के प्रमाण-पत्र में कथित की गई राशि का और ऐसे समस्त मामलों में, जिनमें यथा-स्थिति अपील की गई हो या आवेदन किया गया हो, धारा 12 के अधीन अपील प्राधिकारी के आदेश में या राजस्व मण्डल वसुली या राज्य सरकार के आदेश में कथित की गई राशि का, यथास्थिति प्रमाण-पत्र या आदेश की तारीख के तीन मास के भीतर भुगतान किया जायेगा और यदि इस प्रकार भुगतान न किया गया हो, तो संचालक द्वारा आवेदन किये जाने पर या संबंधित प्राधिकारी द्वारा आवेदन किया जाने पर वह कलेक्टर द्वारा इस प्रकार वसूल की जा सकेगी मानो कि वह भू-राजस्व का बकाया हो और स्थानीय प्राधिकारी की स्थानीय निधि में जमा की जा सकेगी।
16. Expenses of audit
किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा इस अधिनियम के अधीन उपगत किये गये समस्त व्यय उसके स्थानीय निधि में से देय होंगे।
17. Delegation of powers
राज्य सरकार इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन उसको (राज्य सरकार की) प्रदत्त समस्त शक्तियाँ या उनमें से कोई भी शक्ति, नियम बनाने की शक्ति, के अपवाद के साथ, किसी ऐसे अधिकारी को जो कलेक्टर के पद से निम्न पद का न हो, अधिसूचना द्वारा प्रत्यायोजित कर सकेगी।
18. Auditors and other officers to be deemed public servants
संचालक, प्रत्येक संपरीक्षक या कोई अधिकारी या प्राधिकारी, जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये नियमों के अधीन शक्तियों का प्रयोग कर रहा हो या उनका प्रयोग करने के लिये प्राधिकृत किया गया हो, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (क्रमांक 45 सन् 1860) की धारा 21 के अर्थ के अन्तर्गत लोक सेवक समझा जायेगा।
19. Bar of jurisdiction of civil courts
इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय इस अधिनियम के अधीन किसी प्राधिकारी द्वारा किये गये किसी आदेश को अपास्त या उपांतरित करने के लिये कोई भी वाद या अन्य कार्यवाहियां किसी सिविल न्यायालय में नहीं लाई जायेगी।
20. Protection of action taken in good faith
संपरीक्षक, संचालक, राज्य सरकार या किसी अन्य अधिकारी के जो यथास्थिति संपरीक्षक, संचालक, राज्य सरकार के अधीनस्थ हो या उसके प्राधिकार के अधीन कार्य कर रहा हो, विरुद्ध, किसी भी ऐसी बात के लिये जो इस अधिनियम के अधीन सद्भावपूर्वक की गई हो या जिसका उस तरह सद्भावपूर्वक किया जा चुकना तात्पर्यित हो, कोई वाद, अभियोजन या अन्य कार्यवाहियां नहीं होंगी।
21. Application of Act to other corporate bodies and non-corporate bodies
(1) इस धारा में,— (क) "निगमित निकाय" से अभिप्रेत है स्थानीय प्राधिकारी से भिन्न ऐसा निगमित निकाय जो संविधान की सप्तम अनुसूची की सूची 2 या सूची 3 के अधीन आने वाली किसी ऐसी अधिनियमिति जो राज्य विधान मण्डल द्वारा अधिनियमित की गई हो तथा तत्समय प्रवृत्त हो द्वारा या उसके अधीन गठित किया गया हो; (ख) "अनिगमित निकाय" से अभिप्रेत है कोई ऐसा निकाय जो किसी लिखित या विलेख द्वारा या उसके अधीन गठित किया गया हो। (2) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, यह निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के उपबंध अनुसूची में विनिर्दिष्ट किये गये किसी भी निगमित निकाय या अनिगमित निकाय को लागू होंगे और ऐसी घोषणा के किये जाने पर, यह अधिनियम तथा उसके अधीन बनाये गये नियम, उस अधिनियमिति या लिखित या विलेख में, जिसके द्वारा या जिसके अधीन यथास्थिति ऐसा निगमित निकाय या अनिगमित निकाय गठित हुआ था, अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, तद्नुसार इस प्रकार लागू होंगे मानो कि ऐसा निगमित निकाय या अनिगमित निकाय स्थानीय प्राधिकारी हो किन्तु इस उपान्तरण के अध्यधीन रहते हुए कि ऐसे निगमित निकाय या अनिगमित निकाय के संबंध में प्रधान अधिकारी से अभिप्रेत होगा यथास्थिति निगमित निकाय या अनिगमित निकाय का ऐसा अधिकारी जिसे राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे। (3) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, किसी भी निगमित निकाय या अनिगमित निकाय को अनुसूची में जोड़ सकेगी या किसी भी निगमित निकाय या अनिगमित निकाय का अनुसूची में से लोप कर सकेगी और ऐसी अधिसूचना के जारी हो जाने पर अनुसूची तद्नुसार संशोधित हो जायेगी।
22. Power to make rules
(1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा तथा पूर्व प्रकाशन की शर्त के अध्यधीन रहते हुए, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिये नियम बना सकेगी। (2) विशिष्टतया तथा पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसे नियमों में निम्नलिखित समस्त विषयों या उनमें से किसी भी विषय के लिये उपबन्ध हो सकेंगे, अर्थात् :— (क) संपरीक्षा फीस का भुगतान जो कि स्थानीय प्राधिकारी द्वारा धारा 4 की उपधारा (3) के अधीन किया जायगा; (ख) वह प्ररूप तथा रीति जिसमें कि लेखे धारा 5 क अधीन संपरीक्षा के लिये प्रस्तुत किये जायेंगे; (ग) संपरीक्षकों की शक्तियां तथा कर्तव्य और संपरीक्षा के संचालन के लिये उनके द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया और वे समय जब तथा स्थान जहां ऐसी संपरीक्षा की जा सकेगी; (घ) संचालक की शक्तियां तथा कर्तव्य; (ङ) ये प्राधिकारी, जिनको धारा 8 के अधीन संपरीक्षा रिपोर्ट की प्रतिलिपियां दी जायेंगी; (च) वह रीति जिसमें तथा वह समय जिसके भीतर कि रिपोर्ट के संबंध में धारा 10 की उपधारा (1-क) के अधीन स्थिति स्पष्ट कराई जायेगी; (छ) कोई अन्य बात जो निहित की जानी है या विहित की जाय। (3) इस अधिनियम के अधीन बनाये गये समस्त नियम विधान सभा के पटल पर रखे जायेंगे।
23. Repeal
मध्यप्रदेश लोकल फण्ड ऑडिट एक्ट, 1933 (क्रमांक 9 सन् 1933) एतद्द्वारा निरस्त किया जाता है।
Schedule. अधिनियम की धारा 3 (4) के अन्तर्गत क्षेत्रीय उप संचालक तथा सहायक संचालक, स्थानीय निधि संपरीक्षा को धारा 10 एवं 11 के अधीन विषयक संचालक की शक्तियां
(1) सहायक संचालक.. प्रभार प्रकरण जिनमें हानि की राशि रुपये 3000 तक वेष्टित हो का अन्तिम निराकरण। (2) उप संचालक.. प्रभार प्रकरण जिनमें हानि की राशि रुपये 3001 से रुपये 5000 तक वष्टित हो का अंतिम निराकरण। (3) संचालक.. रुपये 5000 से अधिक के प्रभार प्रकरणों का अन्तिम निराकरण। क—राज्य विधान मण्डल द्वारा अधिनियमित की गई किसी विधि द्वारा या उसके अधीन स्थापित किये गये विश्वविद्यालय तथा उनके संघटक महाविद्यालय. (1) यूनिवर्सिटी आफ सागर, सागर. (2) विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन. (3) यूनिवर्सिटी आफ जबलपुर, जबलपुर. (4) रविशंकर यूनिवर्सिटी, रायपुर. (5) इन्दौर यूनिवर्सिटी, इन्दौर. (6) जीवाजी यूनिवर्सिटी, ग्वालियर. (7) अवधेश प्रतापसिंह विश्वविद्यालय, रीवा. (8) भोपाल विश्वविद्यालय, भोपाल. (9) इन्दिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़. (10) जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर. ख—मध्यप्रदेश के बोर्ड: (1) मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मण्डल, भोपाल. (2) बोर्ड आफ होमियोपैथिक एण्ड बायोकेमिक सिस्टम आफ मेडिसिन, मध्यप्रदेश. (3) मध्यप्रदेश डेन्टल कौंसिल, भोपाल. (4) विधिक सहायता तथा विधिक सलाहकार बोर्ड, भोपाल. ग—न्यास निधियां: (1) चेरिटेबिल एण्डाउमेंट्स मध्यप्रदेश के कोशालय में विनिहित की गई समस्त न्यास निधियां. (2) पूर्णतः या अंशतः सरकारी प्रतिभूतियों से मिलकर बनने वाली समस्त न्यास निधियां. (3) गंगाजली निधि न्यास. घ—राज्य सरकार से सहायता अनुदान प्राप्त करने वाली समस्त गैरसरकारी शैक्षिक तथा तकनीकी संस्थायें. ङ—मध्यप्रदेश सुगरकेन (रेगुलेशन आफ सप्लाई एण्ड परचेज) एक्ट, 1958 (क्रमांक 1 सन् 1959) की धारा 5 के अधीन स्थापित की गई समस्त गन्ना विकास परिषदें. च—अन्य संस्थायें: (1) मध्यप्रदेश चेरिटेबल फण्ड एण्ड चैरिटी बाक्सेस के अन्तर्गत शासकीय चिकित्सालयों द्वारा रक्षित लेखे. (2) मध्यप्रदेश कला परिषद, भोपाल. (3) गांधी शताब्दी लेखे. (4) पी. एम. टी. मण्डल, भोपाल. (5) माधव प्रायोगिकी महाविद्यालय, ग्वालियर. (6) अशासकीय पोलिटेक्निक्स. (7) भूतपूर्व जिला कौंसिल रायपुर के लेखों का पुनरावलोकन. (8) पाठ्य पुस्तक निगम, भोपाल. (9) मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मण्डी) बोर्ड, भोपाल. (10) मध्यप्रदेश आयुर्वेद, यूनानी एवं प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति बोर्ड, भोपाल. (11) लक्ष्मण बाग संस्थान, रीवा. (12) आवास एवं पर्यावरण विभाग के प्रयोग स्थापित विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों के लेखे भिलाई, खजुराहो, कोरवा, अमरकंटक, सिंगरौली, पंचमढ़ी, वेनाडिया, चित्रकूट एवं ओरछा... (13) मुख्य मंत्री सहायता कोष के लेखे. (14) माधव इंजीनियरिंग कालेज एम्पलाइज प्रोविडेंट फण्ड ट्रस्ट, ग्वालियर. (15) संचालक, स्थानीय संस्थायें, मध्यप्रदेश में स्थापित पेंशन फण्ड. (16) संचालक, स्थानीय संस्थायें, टेक्निकल फण्ड. (17) म. प्र. उर्दू अकादमी. (18) औकाफ विभाग, ग्वालियर. (19) आफिसियल लिक्विडेटर, इन्दौर. (20) म. प्र. वक्फ बोर्ड, भोपाल. (21) पोस्ट वार सर्विसेज रिकंस्ट्रक्शन ट्रस्ट एवं स्पेशल फण्ड. (22) मस्जिद कमेटी, भोपाल. (23) मेडीकल कौंसिल, भोपाल. (24) उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत अकादमी, भोपाल. (25) श्री शारदा देवी मंदिर, मैहर, जिला सतना, म. प्र. 26. मध्यप्रदेश आदिवासी लोककला परिषद भोपाल. 27. आदिवासी अकादमी... (अस्पष्ट) 28. साहित्य अकादमी... (अस्पष्ट) 29. रूपंकर ललित कला संग्रह भारत भवन भोपाल. 30. अनूप रंगमण्डल भारत भवन भोपाल.
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