section 9
Surrender of convicted prisoner on expiry of temporary release period
The Haryana Good Conduct Prisoner (Temporary Release) Act, 2022, Hindi VersionCriminal202214 sections
Statutory text
9. (1) ऐसी अवधि की समाप्ति, जिसके लिए सिद्धदोष बंदी को इस अधिनियम के अधीन रिहा किया जाता है, पर वह आत्मसमर्पण के दिन सांय 5:00 बजे से पूर्व उस जेल में आत्मसमर्पण करेगा, जहाँ से उसे रिहा किया गया था। नशे की अवस्था में अस्थाई रिहाई से आत्मसमर्पण को जेल अपराध के रूप में माना जाएगा।
- (2) यदि कोई सिद्धदोष बंदी उपधारा (1) द्वारा यथा अपेक्षित उस तिथि, जिसको उसने आत्मसमर्पण करना चाहिए, से दस दिन की अवधि के भीतर आत्मसमर्पण नहीं करता है, तो वह अपराध के समतुल्य होगा और किसी पुलिस अधिकारी या जेल अधिकारी द्वारा किसी वारंट के बिना गिरफ्तार किया जाएगा और उस जेल, जिससे वह रिहा हुआ था, के प्रभारी अधिकारी को उसकी सजा के असमाप्त भाग को भोगने के लिए सुपुर्द कर दिया जाएगा।
- (3) यदि कोई सिद्धदोष बंदी, उस तिथि, जिसको उसे आत्मसमर्पण करना चाहिए था, से दस दिन की अवधि के भीतर उस जेल अधीक्षक के सम्मुख आत्मसमर्पण कर देता है, जिससे वह रिहा किया गया था, किन्तु अधीक्षक जेल को संतुष्ट नहीं कर पाता कि उस अवधि, जिसके लिए उसे रिहा किया गया था, के समाप्त होने पर, उसे तुरंत आत्मसमर्पण करने के लिए किसी पर्याप्त कारण से रोका गया था, तो अधीक्षक जेल बंदी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के बाद, निम्नलिखित सभी या कोई भी शास्ति अधिरोपित कर सकता है, अर्थात्:- (क) अधिक समय तक ठहरने के प्रत्येक दिन के लिए माफी में अधिकतम पांच दिन की कटौती करना; (ख) अधिकतम एक मास की अवधि के लिए कैंटीन रियायत बन्द करना; (ग) अधिकतम तीन मास की अवधि के लिए मुलाकात (इलैक्ट्रानिक मुलाकात सहित) रियायत रोकना; (घ) धारा 4 के अधीन बंदी की फरलो पर अस्थाई रिहाई की अवधि को उसकी सजा में नहीं गिना जाना; (ङ) चेतावनी; (च) उच्चतर से किसी निम्नतर श्रेणी या ग्रेड में कमी करना। व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, इस धारा के अधीन दिया गया दण्ड, बंदी को उस अपराध के लिए दिए गए दण्ड (दण्डों) के अतिरिक्त होगा, जिसके लिए उसे पूर्व में सिद्धदोष ठहराया गया था तथा ऐसे सभी पूर्व दण्ड (दण्डों) के पूरा होने के बाद शुरू होगा तथा इस अधिनियम के अधीन किए गए अपराध के विचारण के दौरान बिताई गई अवधि, ऐसी अवधि के सिवाय, जो केवल इस अधिनियम के अधीन किए गए अपराध के लिए बंदी द्वारा व्यतीत की थी, इस अधिनियम के अधीन दिए गए दण्ड के विरुद्ध मुजरा नहीं होगी।
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