Bare Act
The Haryana Good Conduct Prisoner (Temporary Release) Act, 2022, Hindi Version
1. Short title, extent, application and commencement
- (1) यह अधिनियम हरियाणा सदाचारी बंदी (अस्थाई रिहाई) अधिनियम, 2022, कहा जा सकता है।
- (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण हरियाणा राज्य में है।
- (3) यह ऐसे सभी सिद्धदोष ठहराए गए बंदियों पर लागू होगा, जो हरियाणा में अधिकारिता रखने वाले न्यायालयों के आदेशों द्वारा परिरुद्ध हैं।
- (4) यह ऐसी तिथि को लागू होगा, जो राज्य सरकार, राजपत्र में, अधिसूचना द्वारा, इस निमित नियत करे।
2. Definitions
परिभाषाएं ।
2. (1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, - (क) "सक्षम प्राधिकारी" से अभिप्राय है, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए राज्य सरकार द्वारा यथा अधिसूचित सक्षम प्राधिकारी; (ख) "सिद्धदोष बंदी" से अभिप्राय है, भारत में दण्ड न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग करने वाले किसी न्यायालय या सेना न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा आजीवन कारावास या कारावास के दंडादेश के अधीन किसी जेल या उसी प्रकार की अन्य संस्था में परिरुद्ध कोई व्यक्ति; (ग) "पुलिस उपायुक्त" से अभिप्राय है, जिले का पुलिस उपायुक्त, जिसकी अधिकारिता में इस अधिनियम के अधीन सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई के बाद, उसकी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान निवास करने की संभावना है; (घ) "जिला मजिस्ट्रेट" से अभिप्राय है, जिले का जिला मजिस्ट्रेट, जिसकी अधिकारिता में इस अधिनियम के अधीन सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई के बाद, उसकी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान निवास करने की संभावना है; (ङ) "प्ररूप" से अभिप्राय है, इस अधिनियम से संलग्न प्ररूप; (च) "कट्टर सिद्धदोष बंदी" से अभिप्राय है, कोई अपराधी-
- (i) जिसे निम्नलिखित में से किसी भी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है :-
- (1) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 392 या धारा 394 के अधीन लूट; या
- (2) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 395 या धारा 396 या धारा 397 के अधीन डकैती; या
- (3) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 364-क के अधीन फिरौती के लिए अपहरण; या
- (4) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 302 के साथ पठित धारा 387 या धारा 307 के साथ पठित धारा 387 के अधीन जबरदस्ती वसूली के लिए हत्या या हत्या करने का प्रयास; या
- (5) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 376 या धारा 302 के साथ पठित धारा 377 के अधीन बलात्कार या भेदन यौन हमला या गंभीर भेदन यौन हमला या हत्या के साथ अप्राकृतिक अपराध; या
- (6) सोलह वर्ष से कम आयु के किसी बालक के साथ बलात्कार या भेदन यौन हमला या गंभीर भेदन यौन हमला या अप्राकृतिक अपराध; या
- (7) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 376-क या धारा 376-ग या धारा 376-घ या धारा 376-ङ के अधीन आने वाला सामूहिक बलात्कार या बलात्कार; या
- (8) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) के अधीन विभिन्न प्रथम सूचना रिपोर्टों (एफ.आई.आरज) के मामलों में सीरियल किलिंग अर्थात् हत्या; या
- (9) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 121 के अधीन हत्या, यदि मामले के न्यायनिर्णय में वर्णित है कि अपराधी सामूहिक हत्या में शामिल है; या
- (10) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 458 या धारा 459 या धारा 460 के अधीन छिपकर अनुधिक्कार गृह प्रवेश तथा सिद्धदोष ठहराना; या
- (11) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 121 या धारा 121-क या धारा 122 या धारा 123 या धारा 124 या धारा 124-क के अधीन अपराध; या
- (12) अवयस्कों को शामिल करते हुए अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 (1956 का केन्द्रीय अधिनियम 104) की धारा 3, 4 या 5 के अधीन अपराध; या
- (13) स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का केन्द्रीय अधिनियम 61) की धारा 15(ग) या धारा 17(ग) या धारा 18(ख) या धारा 19 या धारा 20(ग) या धारा 21(ग) या धारा 22 या धारा 24 या धारा 27-क के अधीन अपराध; या
- (14) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 224 या धारा 225 के अधीन विधिपूर्ण अभिरक्षा से भागना भागने में सहायता करना और सिद्धदोष ठहराना;
- (ii) जिसे अपनी दोषसिद्धि से ठीक पूर्व पाँच वर्ष की अवधि के दौरान, उपरोक्त खण्ड (i) के अधीन आने वाले अपराधों के सिवाय, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) के अध्याय XII या XVII में वर्णित उसी संव्यवहार का भाग रूप नहीं होते हुए विभिन्न अवसरों पर किए गए एक या से अधिक अपराधों के लिए पूर्व में सिद्धदोष ठहराया गया है और दण्डादिष्ट किया गया है और ऐसी दोषसिद्धि के परिणामस्वरूप कम से कम बारह मास की अवधि का कारावास भोग चुका है; परन्तु यदि दोषसिद्धि, जो अपील या पुनरीक्षण में अपास्त की गई है, तो उसके संबंध में भोगे गए किसी कारावास को उपरोक्त प्रयोजन के लिए गणना में नहीं लिया जाएगा; या
- (iii) जिसे मृत्यु दण्ड या प्राकृतिक जीवन तक कारावास से दण्डादिष्ट किया गया है; या
- (iv) जेल परिसरों में उसके अधिकार में बेतार संचार यंत्र या इसके घटक या कोई अप्राधिकृत इलैक्ट्रानिक यंत्र पाया गया है या उसका उपयोग करते हुए पाया गया है; या
- (v) जो ऐसी तिथि, जिसको उस द्वारा पैरोल या फरलो की अवधि, जिस के लिए उसे रिहा किया गया था, की समाप्ति पर इस प्रकार आत्मसमर्पण करना चाहिए था, से दस दिन की अवधि के भीतर आत्मसमर्पण करने में असफल होता है या हुआ है; या
- (vi) जो इस अधिनियम के अधीन जेल में परिरुद्ध होने के दौरान या अपनी अस्थाई रिहाई के दौरान सात वर्ष या से अधिक अवधि के लिए कारावास से दंडनीय कोई संज्ञेय अपराध करता है; या
- (vii) जिसे कोई जेल अपराध करने हेतु सम्बन्धित अधीक्षक जेल द्वारा बड़े दण्ड से अधिक दण्डित किया गया है या सम्बन्धित न्यायालय द्वारा न्यायिक कार्यवाहियों में सिद्धदोष ठहराया गया है ; या
- (viii) जिसे संगठित अपराध के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (1980 का केन्द्रीय अधिनियम 65), आतंकवाद और विध्वंसकारी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1987 (1987 का केन्द्रीय अधिनियम 28), शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 (1923 का केन्द्रीय अधिनियम 19), विदेशियां विषयक अधिनियम, 1946 (1946 का केन्द्रीय अधिनियम 31) या किसी अधिनियम (केन्द्रीय या राज्य) के अधीन परिरुद्ध रखा गया है या सिद्धदोष ठहराया गया है; (छ) "फरलो" से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन यथा विनिर्दिष्ट से अधिक समय अवधि के लिए सिद्धदोष बंदी के अच्छे व्यवहार तथा आचरण के कारण प्रोत्साहन के रूप में उसकी अभिरक्षा से अस्थाई रिहाई। फरलो अवधि की गणना इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों में यथा विनिर्दिष्ट शर्तों के अध्यधीन दी गई सजा के लिए की जा सकती है। (ज) "सिद्धदोष बंदी के परिवार के सदस्य" से अभिप्राय है, सिद्धदोष बंदी का पति-पत्नी, बालक, सहोदर भाई या बहन, माता-पिता, दादा-दादी तथा पोता-पोती; (झ) "पैरोल" से अभिप्राय है, सिद्धदोष बंदी की अभिरक्षा से अस्थाई रिहाई, जो निम्ननुसार वर्गीकृत की गई है-
- (i) 'अभिरक्षा पैरोल' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन यथा उपबंधित विनिर्दिष्ट कारणों के लिए तथा विनिर्दिष्ट कारणों के लिए सशस्त्र पुलिस अभिरक्षा के अधीन किसी सिद्धदोष बंदी को मुलाकात के लिए (भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर) ले जाने तथा वहां से वापस लाने का मार्गदर्शन;
- (ii) 'आपातकालीन पैरोल' से अभिप्राय है, अधीक्षक जेल द्वारा किसी सिद्धदोष बंदी को दी गई पैरोल, जब धारा 5 के अधीन सिद्धदोष बंदी के परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु हो गई है या गम्भीर अवस्था में है; या सिद्धदोष स्वयं गम्भीर अवस्था में है;
- (iii) 'नियमित पैरोल' से अभिप्राय है, धारा 3 के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा किसी सिद्धदोष बंदी को प्रदान की गई पैरोल ; (ञ) "पुलिस अधीक्षक" से अभिप्राय है, जिले का पुलिस अधीक्षक, जिसकी अधिकारिता में इस अधिनियम के अधीन सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई के बाद, उसकी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान निवास करने की संभावना है; (ट) "दण्डादेश" से अभिप्राय है, अंतिम रूप से अपील या पुनरीक्षण या अन्यथा से दिया गया कारावास का दण्डादेश और इसमें एक या से अधिक दण्डादेशों का कुलयोग भी शामिल है; (ठ) "अधीक्षक जेल" से अभिप्राय है, जेल या उसी प्रकार की अन्य संस्था का प्रभारी अधिकारी, जिसमें सिद्धदोष बंदी परिरुद्ध है; (ड) "राज्य सरकार" से अभिप्राय है, प्रशासकीय विभाग में हरियाणा सरकार; (ढ) "अस्थाई रिहाई" से अभिप्राय है, अभिरक्षा पैरोल या आपातकालीन पैरोल या नियमित पैरोल या फरलो पर किसी सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई।
- (2) इसमें प्रयुक्त किन्तु अपरिभाषित शब्दों और अभिव्यक्तियों के वही अर्थ होंगे, जो उन्हें कारागार अधिनियम, 1894 (1894 का केन्द्रीय अधिनियम 9), इसके अधीन बनाए नियमों तथा पंजाब जेल मैनुअल में दिए गए हैं।
3. Temporary release of convicted prisoner on regular parole on certain conditions
3. (1) सक्षम प्राधिकारी, धारा 11 तथा 12 के अधीन यथा विनिर्दिष्ट ऐसी शर्तों तथा प्रक्रिया के अध्यधीन किसी सिद्धदोष बंदी को नियमित पैरोल प्रदान करेगा।
- (2) ऐसी अवधि, जिसके लिए इस धारा के अधीन किसी सिद्धदोष बंदी को रिहा किया जा सकता है, कैलेंडर वर्ष में कुल मिलाकर दस सप्ताह होगी और सिद्धदोष बंदी इसे दो भागों में प्राप्त कर सकता है: परन्तु किसी सिद्धदोष महिला बंदी के प्रसव के मामले में, इस धारा के अधीन रिहाई की अवधि छह मास की होगी, जो जेल के चिकित्सा अधिकारी द्वारा यथा प्रमाणित प्रसव की सम्भावित तिथि से एक मास पूर्व शुरू होगी।
- (3) सिद्धदोष बंदी, जिसने दोषसिद्धि के बाद एक वर्ष का दण्डादेश पूरा नहीं किया है, नियमित पैरोल का पात्र नहीं होगा: परन्तु पुरूष के मामले में सत्तर वर्ष या उससे अधिक आयु के सिद्धदोष वृद्ध बंदी पर निबंधन अधिरोपित नहीं होगा तथा महिला के मामले में पैंसठ वर्ष या उससे अधिक आयु के सिद्धदोष वृद्ध बंदी पर निबंधन अधिरोपित नहीं होगा।
- (4) पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक, जैसी भी स्थिति हो, की रिपोर्ट और जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिश, सक्षम प्राधिकारी को किसी सिद्धदोष बंदी की नियमित पैरोल पर अस्थाई रिहाई के लिए इस अधिनियम के अधीन यथा विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर प्रस्तुत की जाएंगी।
- (5) धारा 9 की उपधारा (3) के खण्ड (घ) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, इस धारा के अधीन रिहाई की अवधि की गणना किसी बंदी द्वारा भोगी जा रही वास्तविक सजा के लिए की जाएगी।
4. Temporary release of convicted prisoner on furlough on certain conditions
4. (1) सक्षम प्राधिकारी, धारा 11 तथा 12 के अधीन यथा विनिर्दिष्ट ऐसी शर्तों तथा प्रक्रिया के अध्यधीन किसी सिद्धदोष बंदी को फरलो प्रदान करेगा।
- (2) ऐसी अवधि, जिसके लिए इस धारा के अधीन किसी सिद्धदोष बंदी को रिहा किया जा सकता है, तीन सप्ताह होगी और सिद्धदोष बंदी इसे एक भाग में प्राप्त कर सकता है: परन्तु किसी सिद्धदोष महिला बंदी के प्रसव के मामले में, इस धारा के अधीन रिहाई की अवधि छह मास की होगी, जो जेल के चिकित्सा अधिकारी द्वारा यथा प्रमाणित प्रसव की संभावित तिथि से एक मास पूर्व शुरू होगी।
- (3) सिद्धदोष बंदी, जिसने दोषसिद्धि के बाद एक वर्ष का दण्डादेश पूरा नहीं किया है, फरलो के लिए पात्र नहीं होगा: परन्तु पुरुष के मामले में सत्तर वर्ष या उससे अधिक आयु के सिद्धदोष वृद्ध बंदी पर निबंधन अधिरोपित नहीं होगा। उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक, जैसी भी स्थिति हो, की रिपोर्ट और जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिश पर किसी सिद्धदोष बंदी की नियमित पैरोल पर अस्थाई रिहाई यथा विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर प्रस्तुत की जाएगी। इस धारा के अधीन रिहाई की अवधि की गणना किसी बंदी की वास्तविक सजा के लिए नहीं की जाएगी। कोई भी सामान्य माफी इस अवधि के लिए प्रदान नहीं की जाएगी। सक्षम प्राधिकारी, धारा 11 तथा 12 के अधीन यथा विनिर्दिष्ट सिद्धदोष बंदी को फरलो प्रदान करेगा। ऐसी अवधि, जिसके लिए इस धारा के अधीन किसी सिद्धदोष बंदी को रिहा किया जा सकता है, तीन सप्ताह होगी तथा इस अवधि को भागों में प्राप्त नहीं किया जाएगा: परन्तु सिद्धदोष बंदी, जिसने दण्डादेश की अवधि चौथाई और आजीवन कारावास के मामले में दस वर्ष की सजा पूरी कर ली है, फरलो के लिए पात्र होगा और रिहाई की अवधि चार सप्ताह होगी और इस अवधि को भागों में प्राप्त किया जा सकेगा: परन्तु सिद्धदोष बंदी, जिसने दोषसिद्धि के बाद तीन वर्ष की सजा पूरी नहीं की है, फरलो के लिए पात्र नहीं होगा: परन्तु सिद्धदोष बंदी, जिसे किसी जेल अपराध के लिए या पिछले तीन वर्ष के दौरान अस्थाई रिहाई की शर्तों की उल्लंघना के लिए दण्डित किया गया है, फरलो के लिए पात्र नहीं होगा: परन्तु यह और कि स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का केन्द्रीय अधिनियम 61) के अधीन या राजद्रोह या हत्या के साथ बलात्कार या हत्या के साथ लूट या डकैती या फिरौती वसूलने या जबरदस्ती वसूली के आशय के साथ हत्या या बारह वर्ष से कम आयु के बालक के साथ लैंगिक अपराध के लिए दण्डादिष्ट या प्राकृतिक जीवन तक कारावास के लिए दण्डादिष्ट सिद्धदोष बंदी फरलो के लिए पात्र नहीं होंगे।
- (4) पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक, जैसी भी स्थिति हो, की रिपोर्ट और जिला मजिस्ट्रेट की सिफारिश, सक्षम प्राधिकारी को किसी सिद्धदोष बंदी की फरलो पर अस्थाई रिहाई के लिए इस अधिनियम के अधीन यथा विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर प्रस्तुत की जाएगी।
- (5) धारा 9 की उपधारा (3) के खण्ड (घ) के उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए, इस धारा के अधीन रिहाई की अवधि की गणना किसी बंदी द्वारा भोगी जा रही वास्तविक सजा के लिए की जाएगी।
5. Temporary release of convicted prisoner on emergency parole on certain conditions
5. (1) सक्षम प्राधिकारी, धारा 11 तथा 12 के अधीन यथा विनिर्दिष्ट ऐसी शर्तों तथा प्रक्रिया के अध्यधीन किसी सिद्धदोष बंदी को आपातकालीन पैरोल प्रदान करेगा। यदि किसी सिद्धदोष बंदी के परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु हो गई है या गम्भीर अवस्था में है या सिद्धदोष बंदी स्वयं गम्भीर अवस्था में है, तो उसके द्वारा भोगी जा रही सजा की अवधि पर विचार किए बिना किसी सिद्धदोष बंदी को किसी भी समय आपातकालीन पैरोल प्रदान की जाएगी।
- (2) सक्षम प्राधिकारी, संबंधित पुलिस थाना के प्रभारी के माध्यम से या जेल अधिकारी, जो सहायक अधीक्षक जेल की पदवी से नीचे का न हो, के माध्यम से तथ्यों का सत्यापन करेगा, जो चौबीस घण्टे के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा। सिद्धदोष बंदी या उसके परिवार के सदस्य की गम्भीर अवस्था के तथ्य, सम्बन्धित चिकित्सा अधिकारी द्वारा सत्यापित किए जाएंगे तथा सम्बन्धित सिविल सर्जन द्वारा प्रतिहस्ताक्षरित किए जाएंगे।
- (3) अवधि, जिसके लिए किसी सिद्धदोष बंदी को इस धारा के अधीन रिहा किया जा सकता है, सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्मित की जाएगी, जो कलैण्डर वर्ष में कुल मिलाकर चार सप्ताह से अधिक नहीं होगी तथा अवधि भागों में भी हो सकती है।
- (4) इस धारा के अधीन रिहाई की अवधि सजा की ओर नहीं गिनी जाएगी। कोई भी सामान्य माफी इस अवधि के लिए प्रदान नहीं की जाएगी।,
6. Temporary release of convicted prisoner on custody parole and special provisions for hardcore convicted prisoners
6. (1) सक्षम प्राधिकारी, धारा 11 तथा 12 के अध्यधीन किसी सिद्धदोष बंदी को अभिरक्षा पैरोल प्रदान करेगा।
- (2) धारा 3, 4 तथा 5 में दी गई किसी बात के होते हुए भी, कोई भी कट्टर सिद्धदोष बंदी आपातकालीन पैरोल या नियमित पैरोल या फरलो पर रिहा किए जाने के लिए हकदार नहीं होगा: परन्तु कट्टर सिद्धदोष बंदी को उसके परिवार के सदस्य की अंत्येष्टि तथा अपने बालकों या सहोदर भाईयों या बहनों की शादी में उपस्थित होने के लिए अभिरक्षा पैरोल प्रदान की जा सकती है।
- (3) उपधारा (1) में दी गई किसी बात के होते हुए भी, कट्टर सिद्धदोष बंदी, जिसे मृत्यु दण्ड या प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा नहीं दी गई है और पिछले पांच वर्ष के दौरान कोई बड़ा जेल अपराध या कोई संज्ञेय अपराध किए बिना, अपनी सजा के पांच वर्ष (विचारण अवधि के अधीन अधिकतम दो वर्ष सहित) पूरे कर लिए हैं, सिद्धदोष बंदियों के बराबर आपातकालीन पैरोल या नियमित पैरोल या फरलो के लिए हकदार होगा। पांच वर्ष की ऐसी अवधि की गणना उसके नवीनतम अपराध या कृत्य, जो कट्टर सिद्धदोष बंदी की श्रेणी में आता है, की तिथि से की जाएगी: परन्तु कट्टर सिद्धदोष बंदी, जिसे प्राकृतिक जीवन तक कारावास के लिए दण्डादिष्ट किया गया है, सिद्धदोष बंदियों के बराबर आपातकालीन पैरोल या नियमित पैरोल के लिए केवल सात वर्ष की कारावास की सजा पूरी होने के बाद ही पात्र होगा: परन्तु यह और कि इस प्रकार अस्थाई रूप से रिहा बंदी, पैरोल या फरलो की किसी शर्त का उल्लंघन करता है या कोई आगामी तीन वर्ष के लिए ऐसी रिहाई से वंचित कर दिया जाएगा।
- (4) कट्टर सिद्धदोष बंदी सहित सिद्धदोष बंदी को अपने परिवार के सदस्य की अंत्येष्टि या अपने बालकों या सहोदर भाईयों या बहनों की शादी में उपस्थित होने के लिए उसकी सजा की अवधि पूरी होने पर विचार किए बिना, अभिरक्षा पैरोल प्रदान की जा सकती है।
- (5) सक्षम प्राधिकारी, पुलिस थाना, जहां से बंदी अभिरक्षा पैरोल प्राप्त करना चाहता है, के प्रभारी के माध्यम से या जेल अधिकारी, जो सहायक अधीक्षक जेल की पदवी से नीचे का न हो, के माध्यम से अभिरक्षा पैरोल प्रदान करने हेतु तथ्यों का सत्यापन करेगा।
- (6) अभिरक्षा पैरोल, यात्रा समय को निकालते हुए एक प्रसंग के लिए छह घंटे से अधिक के लिए प्रदान नहीं की जाएगी और अभिरक्षा पैरोल के लिए पुलिस एस्कॉर्ट गार्ड, जिले के पुलिस अधीक्षक या पुलिस उपायुक्त, जिसकी अधिकारिता में जेल अवस्थित है, द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा। अभिरक्षा पैरोल की अवधि, जेल में बिताई गई अवधि के रूप में समझी जाएगी।
7. Exclusion of certain days under sections 3, 4 and 5
7. धारा 3, 4 तथा 5 के अधीन किसी बंदी की अस्थाई रिहाई प्रयोजन हेतु, जेल से प्रस्थान और में पहुंचने की तिथियों को छोड़कर की अवधि की गणना करने के लिए नहीं लिया जाएगा।
8. Convicted prisoner not to be entitled to release in certain cases
8. इस अधिनियम में दी गई किसी बात के होते हुए भी, कोई भी सिद्धदोष बंदी, इस अधिनियम के अधीन रिहाई के लिए हकदार नहीं होगा, यदि, जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट पर या अन्यथा से, राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकारी की संतुष्टि हो जाती है कि उसकी रिहाई से राज्य की सुरक्षा खतरे में पड़ने या लोक व्यवस्था बनाए रखने में या शांति भंग करने में यथोचित आशंका पैदा होने की संभावना है।
9. Surrender of convicted prisoner on expiry of temporary release period
9. (1) ऐसी अवधि की समाप्ति, जिसके लिए सिद्धदोष बंदी को इस अधिनियम के अधीन रिहा किया जाता है, पर वह आत्मसमर्पण के दिन सांय 5:00 बजे से पूर्व उस जेल में आत्मसमर्पण करेगा, जहाँ से उसे रिहा किया गया था। नशे की अवस्था में अस्थाई रिहाई से आत्मसमर्पण को जेल अपराध के रूप में माना जाएगा।
- (2) यदि कोई सिद्धदोष बंदी उपधारा (1) द्वारा यथा अपेक्षित उस तिथि, जिसको उसने आत्मसमर्पण करना चाहिए, से दस दिन की अवधि के भीतर आत्मसमर्पण नहीं करता है, तो वह अपराध के समतुल्य होगा और किसी पुलिस अधिकारी या जेल अधिकारी द्वारा किसी वारंट के बिना गिरफ्तार किया जाएगा और उस जेल, जिससे वह रिहा हुआ था, के प्रभारी अधिकारी को उसकी सजा के असमाप्त भाग को भोगने के लिए सुपुर्द कर दिया जाएगा।
- (3) यदि कोई सिद्धदोष बंदी, उस तिथि, जिसको उसे आत्मसमर्पण करना चाहिए था, से दस दिन की अवधि के भीतर उस जेल अधीक्षक के सम्मुख आत्मसमर्पण कर देता है, जिससे वह रिहा किया गया था, किन्तु अधीक्षक जेल को संतुष्ट नहीं कर पाता कि उस अवधि, जिसके लिए उसे रिहा किया गया था, के समाप्त होने पर, उसे तुरंत आत्मसमर्पण करने के लिए किसी पर्याप्त कारण से रोका गया था, तो अधीक्षक जेल बंदी को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के बाद, निम्नलिखित सभी या कोई भी शास्ति अधिरोपित कर सकता है, अर्थात्:- (क) अधिक समय तक ठहरने के प्रत्येक दिन के लिए माफी में अधिकतम पांच दिन की कटौती करना; (ख) अधिकतम एक मास की अवधि के लिए कैंटीन रियायत बन्द करना; (ग) अधिकतम तीन मास की अवधि के लिए मुलाकात (इलैक्ट्रानिक मुलाकात सहित) रियायत रोकना; (घ) धारा 4 के अधीन बंदी की फरलो पर अस्थाई रिहाई की अवधि को उसकी सजा में नहीं गिना जाना; (ङ) चेतावनी; (च) उच्चतर से किसी निम्नतर श्रेणी या ग्रेड में कमी करना। व्याख्या.- इस धारा के प्रयोजनों के लिए, इस धारा के अधीन दिया गया दण्ड, बंदी को उस अपराध के लिए दिए गए दण्ड (दण्डों) के अतिरिक्त होगा, जिसके लिए उसे पूर्व में सिद्धदोष ठहराया गया था तथा ऐसे सभी पूर्व दण्ड (दण्डों) के पूरा होने के बाद शुरू होगा तथा इस अधिनियम के अधीन किए गए अपराध के विचारण के दौरान बिताई गई अवधि, ऐसी अवधि के सिवाय, जो केवल इस अधिनियम के अधीन किए गए अपराध के लिए बंदी द्वारा व्यतीत की थी, इस अधिनियम के अधीन दिए गए दण्ड के विरुद्ध मुजरा नहीं होगी।
10. Penalty for failure to surrender
10. (1) धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन किसी अपराध का सिद्धदोष बन्दी, किसी भी प्रकार के कारावास, जो दो वर्ष से कम नहीं होगा, जो तीन वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और एक लाख रूपए तक के जुर्माने से दण्डनीय होगा।
- (2) उपधारा (1) के अधीन दण्डनीय अपराध को संज्ञेय और अजमानतीय समझा जाएगा।
- (3) जमानत की पूरी राशि, अधीक्षक जेल की सिफारिश पर जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जब्त की जाएगी।
- (4) ऐसा सिद्धदोष बन्दी, धारा 9 की उपधारा (3) के अधीन यथा विनिर्दिष्ट किसी भी दण्ड के लिए भी दायी होगा।
11. General provisions
11. (1) कोई भी सिद्धदोष बंदी केवल तभी इस अधिनियम के अधीन नियमित पैरोल या फरलो या आपातकालीन पैरोल या अभिरक्षा पैरोल के लिए विचार करने का हकदार होगा, यदि वह उन सभी मामलों में जमानत पर है, जो किसी न्यायालय या सक्षम प्राधिकरण के सम्मुख उसके विरुद्ध लम्बित हैं।
- (2) (क) उन सिद्धदोष बंदियों के पैरोल या फरलो के मामले, जिन्हें हरियाणा राज्य से बाहर की अधिकारिता रखने वाले न्यायालयों द्वारा सिद्धदोष ठहराया गया है और जो पारस्परिक आधार पर या अन्यथा से हरियाणा की किसी जेल में कारावास भोग रहे हैं, अधीक्षक जेल द्वारा आरंभ किए जाएंगे तथा उस राज्य के सक्षम प्राधिकारी, जहां से उसे दोषसिद्ध ठहराया गया था, को उस राज्य के पैरोल या फरलो अधिनियम या नियमों के अनुसार विचारण या मंजूरी या निपटान के लिए भेजा जाएगा। (ख) उन सिद्धदोष बंदियों के पैरोल या फरलो के मामले, जिन्हें हरियाणा राज्य के भीतर अधिकारिता रखने वाले न्यायालयों द्वारा दोषी ठहराया गया है और जो पारस्परिक आधार पर या अन्यथा से अन्य राज्य की जेल में कारावास भोग रहे हैं, सम्बद्ध अधीक्षक जेल द्वारा आरंभ किए जाएंगे और हरियाणा राज्य में उस सक्षम प्राधिकारी, जहां से उसे सिद्धदोष ठहराया गया था, को इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार विचारण / मंजूरी / निपटान के लिए भेजेगा।
- (3) कोई भी सिद्धदोष बंदी, जिसको किसी जेल अपराध के लिए छोटा दण्ड दिया गया है, ऐसे अपराध की तिथि से छह मास के लिए किसी भी प्रकार की पैरोल के लिए पात्र नहीं होगा; और कोई भी सिद्धदोष बंदी, जिसे किसी जेल अपराध के लिए बड़ा दण्ड दिया गया है या जिसने अस्थाई रिहाई की शर्तों की उल्लंघन की है, ऐसे अपराध की तिथि से एक वर्ष के लिए किसी भी प्रकार की पैरोल के लिए पात्र नहीं होगा।
- (4) सिद्धदोष बंदी की पश्चात्वर्ती पैरोल या फरलो का मामला, अंतिम स्वीकृति पैरोल या फरलो प्राप्त करने के बाद, अस्थाई रिहाई के दौरान या जेल में उसके आत्मसमर्पण के एक मास बाद, जो भी पहले हो, उसके आचरण के संबंध में पुलिस अधीक्षक या पुलिस उपायुक्त के माध्यम से संबंधित पुलिस थाना के प्रभारी से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही आरम्भ किया जाएगा।
- (5) किसी भी मामले में पैरोल या फरलो बढ़ाई नहीं जाएगी।
- (6) साधारणतः सह-अभियुक्त सिद्धदोष बंदियों को साथ-साथ नियमित पैरोल या फरलो प्रदान नहीं की जाएगी।
- (7) आपातकालीन पैरोल वारंट की वैधता अवधि, आदेश जारी होने की तिथि से पन्द्रह दिन होगी।
- (8) नियमित पैरोल या फरलो वारंट की वैधता अवधि, चार मास होगी। रिहाई या आत्मसमर्पण की विशिष्ट तिथि, रिहाई वारंट में नियत नहीं होगी।
- (9) धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन आपराधिक मामला, उस पुलिस थाना में दर्ज किया जाएगा, जहां पात्र बंदी द्वारा अस्थाई रिहाई की अवधि व्यतीत की गई है या आवेदन में जिसका पता दिया गया है। हरियाणा राज्य के बाहर का पता होने के मामले में, आपराधिक मामला, उस पुलिस थाने में दर्ज किया जाएगा, जिसकी अधिकारिता में जेल अवस्थित है।
12. Procedure for parole or furlough
12. पैरोल या फरलो के लिए प्रक्रिया।
- (1) पैरोल या फरलो प्रदान करने हेतु आवेदन, सिद्धदोष बंदी द्वारा स्वयं या उसके परिवार के वयस्क सदस्य द्वारा अधीक्षक जेल के सम्मुख प्ररूप क में प्रस्तुत किया जा सकता है।
- (2) अभिरक्षा पैरोल या आपातकालीन पैरोल के सम्बन्ध में किसी सिद्धदोष बंदी से आवेदन की प्राप्ति पर अधीक्षक जेल, जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक को सूचित करते हुए अभिरक्षा पैरोल या आपातकालीन पैरोल, जैसी भी स्थिति हो, के तथ्यों का सत्यापन करने के लिए जेल अधिकारी, जो सहायक अधीक्षक की पदवी से नीचे का न हो, को नियुक्त करते हुए सम्बन्धित पुलिस थाना के प्रभारी को तुरन्त अनुरोध भेजेगा तथा स्वयं को संतुष्ट करेगा कि आवेदन में दिए गए तथ्य वास्तविक हैं और इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार हैं।
- (3) नियमित पैरोल या फरलो के लिए किसी सिद्धदोष बंदी से आवेदन की प्राप्ति पर, अधीक्षक जेल, नियमित पैरोल या फरलो प्रदान करने के लिए पात्र सिद्धदोष बंदी का मामला पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक, सम्बन्धित पुलिस थाने के प्रभारी को एक प्रति प्रेषित करते हुए जिला मजिस्ट्रेट तथा सक्षम प्राधिकारी को भेजेगा। यदि, सिद्धदोष बंदी नियमित पैरोल या फरलो के लिए पात्र नहीं पाया जाता है, तो अधीक्षक जेल स्पीकिंग ऑर्डर पारित करेगा।
- (4) पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत करेगा।
- (5) उन सिद्धदोष बंदियों के मामले में, जिन्होंने शांतिपूर्वक दो नियमित पैरोल या एक फरलो प्राप्त की है, एक कैलेंडर वर्ष में केवल एक ही पुलिस सत्यापन आवश्यक होगा। तथापि, सक्षम प्राधिकारी अपने विवेक से नई रिपोर्ट की मांग कर सकता है।
- (6) जिला मजिस्ट्रेट, उपधारा (11) में यथा विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर सक्षम प्राधिकारी को अपनी सिफारिश या गैर-सिफारिश प्रस्तुत करेगा।
- (7) सक्षम प्राधिकारी, सम्बन्धित क्वार्टर से सिफारिश या रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद, निर्णय लेगा तथा प्ररूप ख के अनुसार नियमित पैरोल या फरलो रिहाई वारंट जारी करेगा तथा नियमित पैरोल या फरलो को अस्वीकार करने की दशा में, स्पीकिंग ऑर्डर पारित किया जाएगा। स्वीकृति या अस्वीकृति, जैसी भी स्थिति हो, सम्बन्धित जिला मजिस्ट्रेट तथा अधीक्षक जेल को भेजी जाएगी और इसकी एक प्रति पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक तथा सम्बन्धित सिद्धदोष बंदी को भी भेजी जाएगी।
- (8) सक्षम प्राधिकारी से पैरोल या फरलो रिहाई वारंट की प्राप्ति पर, अधीक्षक जेल, बंदी तथा बंदी के परिवार के ऐसे सदस्य, जिसे बंदी रिहाई प्राप्त करने के लिए क्रमशः प्ररूप ग के अनुसार व्यक्तिगत बंधपत्र और जमानत बंधपत्र के निष्पादन की व्यवस्था करने के लिए उस विनिर्दिष्ट करे, को सूचित करेगा। परन्तु सिद्धदोष बंदी के लिखित अनुरोध पर, अधीक्षक जेल, रिहाई आदेश की प्राप्ति की तिथि से पांच दिन की अवधि के लिए उसकी रिहाई मुल्तवी कर सकता है।
- (9) पैरोल या फरलो पर सिद्धदोष बंदी को रिहा करने से पूर्व, उसे शर्तों को पढ़ाया जाएगा और समझाया जाएगा और उसके आत्मसमर्पण की तिथि के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित किया जाएगा। उसके बाद, उसकी रिहाई आदेश पर उसके अंगूठे का निशान तथा हस्ताक्षर प्राप्त किए जाएंगे तथा ऐसी रिहाई के बारे में सूचना प्ररूप ड के अनुसार संबंधित प्राधिकारियों को भेजी जाएगी।
- (10) संबंधित पुलिस थाना का प्रभारी, अस्थाई रिहाई के दौरान सिद्धदोष बंदी के गतिविधियों पर नज़र रखेगा तथा इस सम्बन्ध में पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक यथासंभव शीघ्रता से अधीक्षक जेल को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, किन्तु एक मास पश्चात् नहीं।
- (11) किसी नियमित पैरोल या फरलो के लिए आवेदन पर निर्णय प्राधिकारियों द्वारा शीघ्रता से पूरी की जाएगी। विभिन्न प्राधिकारियों द्वारा किसी के आवेदन की प्रक्रिया के लिए अधिकतम समय सीमा निम्नानुसार होगी:- अधीक्षक जेल एक सप्ताह
परन्तु यदि सिफारिश या रिपोर्ट नियत समय अवधि के भीतर प्राप्त नहीं होती है, तो सक्षम प्राधिकारी यह मान सकता है कि बंदी के विरुद्ध कुछ भी प्रतिकूल नहीं है और तदनुसार आवेदन पर निर्णय ले सकता है।
13. Power to make rules
- (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकती है।
- (2) इस अधिनियम के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम, इसके बनाए जाने के बाद, यथा शीघ्र, राज्य विधान मण्डल के सदन के सम्मुख रखा जाएगा, जब सत्र हो।
14. Repeal and savings
14. (1) हरियाणा सदाचारी बंदी (अस्थाई रिहाई) अधिनियम, 1988 (1988 का 28), इसके द्वारा, निरसित किया जाता है: परन्तु ऐसा निरसन निम्नलिखित को प्रभावित नहीं करेगा, (क) इस प्रकार निरसित अधिनियम के पूर्व प्रवर्तन या उसके अधीन सम्यक् रूप से की गई या सहन की गई किसी बात; या (ख) इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन अर्जित या उपगत कोई अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व; या (ग) इस प्रकार निरसित अधिनियम के विरुद्ध किए गए किसी अपराध के बारे में उपगत कोई शास्ति, जब्ती या दण्ड; या (घ) उपरोक्त किसी ऐसे अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति, जब्ती या दण्ड के बारे में कोई अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार, और ऐसे किसी अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार को संस्थित किया जा सकता है, जारी रखा जा सकता है या लागू किया जा सकता है, और कोई ऐसी शास्ति, जब्ती या दण्ड अधिरोपित किया जा सकता है मानो यह अधिनियम पारित ही नहीं हुआ था: परन्तु यह और कि इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन की गई कोई बात या की गई कोई कार्रवाई, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन की गई कोई बात या की गई कार्रवाई समझी जाएगी और तदनुसार तब तक लागू रहेगी जब तक इस अधिनियम के अधीन की गई किसी बात या की गई किसी कार्रवाई द्वारा अधिक्रांत नहीं की जाए।
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