section 11
General provisions
The Haryana Good Conduct Prisoner (Temporary Release) Act, 2022, Hindi VersionCriminal202214 sections
Statutory text
11. (1) कोई भी सिद्धदोष बंदी केवल तभी इस अधिनियम के अधीन नियमित पैरोल या फरलो या आपातकालीन पैरोल या अभिरक्षा पैरोल के लिए विचार करने का हकदार होगा, यदि वह उन सभी मामलों में जमानत पर है, जो किसी न्यायालय या सक्षम प्राधिकरण के सम्मुख उसके विरुद्ध लम्बित हैं।
- (2) (क) उन सिद्धदोष बंदियों के पैरोल या फरलो के मामले, जिन्हें हरियाणा राज्य से बाहर की अधिकारिता रखने वाले न्यायालयों द्वारा सिद्धदोष ठहराया गया है और जो पारस्परिक आधार पर या अन्यथा से हरियाणा की किसी जेल में कारावास भोग रहे हैं, अधीक्षक जेल द्वारा आरंभ किए जाएंगे तथा उस राज्य के सक्षम प्राधिकारी, जहां से उसे दोषसिद्ध ठहराया गया था, को उस राज्य के पैरोल या फरलो अधिनियम या नियमों के अनुसार विचारण या मंजूरी या निपटान के लिए भेजा जाएगा। (ख) उन सिद्धदोष बंदियों के पैरोल या फरलो के मामले, जिन्हें हरियाणा राज्य के भीतर अधिकारिता रखने वाले न्यायालयों द्वारा दोषी ठहराया गया है और जो पारस्परिक आधार पर या अन्यथा से अन्य राज्य की जेल में कारावास भोग रहे हैं, सम्बद्ध अधीक्षक जेल द्वारा आरंभ किए जाएंगे और हरियाणा राज्य में उस सक्षम प्राधिकारी, जहां से उसे सिद्धदोष ठहराया गया था, को इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार विचारण / मंजूरी / निपटान के लिए भेजेगा।
- (3) कोई भी सिद्धदोष बंदी, जिसको किसी जेल अपराध के लिए छोटा दण्ड दिया गया है, ऐसे अपराध की तिथि से छह मास के लिए किसी भी प्रकार की पैरोल के लिए पात्र नहीं होगा; और कोई भी सिद्धदोष बंदी, जिसे किसी जेल अपराध के लिए बड़ा दण्ड दिया गया है या जिसने अस्थाई रिहाई की शर्तों की उल्लंघन की है, ऐसे अपराध की तिथि से एक वर्ष के लिए किसी भी प्रकार की पैरोल के लिए पात्र नहीं होगा।
- (4) सिद्धदोष बंदी की पश्चात्वर्ती पैरोल या फरलो का मामला, अंतिम स्वीकृति पैरोल या फरलो प्राप्त करने के बाद, अस्थाई रिहाई के दौरान या जेल में उसके आत्मसमर्पण के एक मास बाद, जो भी पहले हो, उसके आचरण के संबंध में पुलिस अधीक्षक या पुलिस उपायुक्त के माध्यम से संबंधित पुलिस थाना के प्रभारी से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही आरम्भ किया जाएगा।
- (5) किसी भी मामले में पैरोल या फरलो बढ़ाई नहीं जाएगी।
- (6) साधारणतः सह-अभियुक्त सिद्धदोष बंदियों को साथ-साथ नियमित पैरोल या फरलो प्रदान नहीं की जाएगी।
- (7) आपातकालीन पैरोल वारंट की वैधता अवधि, आदेश जारी होने की तिथि से पन्द्रह दिन होगी।
- (8) नियमित पैरोल या फरलो वारंट की वैधता अवधि, चार मास होगी। रिहाई या आत्मसमर्पण की विशिष्ट तिथि, रिहाई वारंट में नियत नहीं होगी।
- (9) धारा 9 की उपधारा (2) के अधीन आपराधिक मामला, उस पुलिस थाना में दर्ज किया जाएगा, जहां पात्र बंदी द्वारा अस्थाई रिहाई की अवधि व्यतीत की गई है या आवेदन में जिसका पता दिया गया है। हरियाणा राज्य के बाहर का पता होने के मामले में, आपराधिक मामला, उस पुलिस थाने में दर्ज किया जाएगा, जिसकी अधिकारिता में जेल अवस्थित है।
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