section 12
Procedure for parole or furlough
The Haryana Good Conduct Prisoner (Temporary Release) Act, 2022, Hindi VersionCriminal202214 sections
Statutory text
12. पैरोल या फरलो के लिए प्रक्रिया।
- (1) पैरोल या फरलो प्रदान करने हेतु आवेदन, सिद्धदोष बंदी द्वारा स्वयं या उसके परिवार के वयस्क सदस्य द्वारा अधीक्षक जेल के सम्मुख प्ररूप क में प्रस्तुत किया जा सकता है।
- (2) अभिरक्षा पैरोल या आपातकालीन पैरोल के सम्बन्ध में किसी सिद्धदोष बंदी से आवेदन की प्राप्ति पर अधीक्षक जेल, जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक को सूचित करते हुए अभिरक्षा पैरोल या आपातकालीन पैरोल, जैसी भी स्थिति हो, के तथ्यों का सत्यापन करने के लिए जेल अधिकारी, जो सहायक अधीक्षक की पदवी से नीचे का न हो, को नियुक्त करते हुए सम्बन्धित पुलिस थाना के प्रभारी को तुरन्त अनुरोध भेजेगा तथा स्वयं को संतुष्ट करेगा कि आवेदन में दिए गए तथ्य वास्तविक हैं और इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार हैं।
- (3) नियमित पैरोल या फरलो के लिए किसी सिद्धदोष बंदी से आवेदन की प्राप्ति पर, अधीक्षक जेल, नियमित पैरोल या फरलो प्रदान करने के लिए पात्र सिद्धदोष बंदी का मामला पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक, सम्बन्धित पुलिस थाने के प्रभारी को एक प्रति प्रेषित करते हुए जिला मजिस्ट्रेट तथा सक्षम प्राधिकारी को भेजेगा। यदि, सिद्धदोष बंदी नियमित पैरोल या फरलो के लिए पात्र नहीं पाया जाता है, तो अधीक्षक जेल स्पीकिंग ऑर्डर पारित करेगा।
- (4) पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट को प्रस्तुत करेगा।
- (5) उन सिद्धदोष बंदियों के मामले में, जिन्होंने शांतिपूर्वक दो नियमित पैरोल या एक फरलो प्राप्त की है, एक कैलेंडर वर्ष में केवल एक ही पुलिस सत्यापन आवश्यक होगा। तथापि, सक्षम प्राधिकारी अपने विवेक से नई रिपोर्ट की मांग कर सकता है।
- (6) जिला मजिस्ट्रेट, उपधारा (11) में यथा विनिर्दिष्ट समय सीमा के भीतर सक्षम प्राधिकारी को अपनी सिफारिश या गैर-सिफारिश प्रस्तुत करेगा।
- (7) सक्षम प्राधिकारी, सम्बन्धित क्वार्टर से सिफारिश या रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद, निर्णय लेगा तथा प्ररूप ख के अनुसार नियमित पैरोल या फरलो रिहाई वारंट जारी करेगा तथा नियमित पैरोल या फरलो को अस्वीकार करने की दशा में, स्पीकिंग ऑर्डर पारित किया जाएगा। स्वीकृति या अस्वीकृति, जैसी भी स्थिति हो, सम्बन्धित जिला मजिस्ट्रेट तथा अधीक्षक जेल को भेजी जाएगी और इसकी एक प्रति पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक तथा सम्बन्धित सिद्धदोष बंदी को भी भेजी जाएगी।
- (8) सक्षम प्राधिकारी से पैरोल या फरलो रिहाई वारंट की प्राप्ति पर, अधीक्षक जेल, बंदी तथा बंदी के परिवार के ऐसे सदस्य, जिसे बंदी रिहाई प्राप्त करने के लिए क्रमशः प्ररूप ग के अनुसार व्यक्तिगत बंधपत्र और जमानत बंधपत्र के निष्पादन की व्यवस्था करने के लिए उस विनिर्दिष्ट करे, को सूचित करेगा। परन्तु सिद्धदोष बंदी के लिखित अनुरोध पर, अधीक्षक जेल, रिहाई आदेश की प्राप्ति की तिथि से पांच दिन की अवधि के लिए उसकी रिहाई मुल्तवी कर सकता है।
- (9) पैरोल या फरलो पर सिद्धदोष बंदी को रिहा करने से पूर्व, उसे शर्तों को पढ़ाया जाएगा और समझाया जाएगा और उसके आत्मसमर्पण की तिथि के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित किया जाएगा। उसके बाद, उसकी रिहाई आदेश पर उसके अंगूठे का निशान तथा हस्ताक्षर प्राप्त किए जाएंगे तथा ऐसी रिहाई के बारे में सूचना प्ररूप ड के अनुसार संबंधित प्राधिकारियों को भेजी जाएगी।
- (10) संबंधित पुलिस थाना का प्रभारी, अस्थाई रिहाई के दौरान सिद्धदोष बंदी के गतिविधियों पर नज़र रखेगा तथा इस सम्बन्ध में पुलिस उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक यथासंभव शीघ्रता से अधीक्षक जेल को रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, किन्तु एक मास पश्चात् नहीं।
- (11) किसी नियमित पैरोल या फरलो के लिए आवेदन पर निर्णय प्राधिकारियों द्वारा शीघ्रता से पूरी की जाएगी। विभिन्न प्राधिकारियों द्वारा किसी के आवेदन की प्रक्रिया के लिए अधिकतम समय सीमा निम्नानुसार होगी:- अधीक्षक जेल एक सप्ताह
परन्तु यदि सिफारिश या रिपोर्ट नियत समय अवधि के भीतर प्राप्त नहीं होती है, तो सक्षम प्राधिकारी यह मान सकता है कि बंदी के विरुद्ध कुछ भी प्रतिकूल नहीं है और तदनुसार आवेदन पर निर्णय ले सकता है।
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