section 2
Definitions
The Haryana Good Conduct Prisoner (Temporary Release) Act, 2022, Hindi Versionपरिभाषाएं ।
2. (1) इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, - (क) "सक्षम प्राधिकारी" से अभिप्राय है, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए राज्य सरकार द्वारा यथा अधिसूचित सक्षम प्राधिकारी; (ख) "सिद्धदोष बंदी" से अभिप्राय है, भारत में दण्ड न्यायालय की शक्तियों का प्रयोग करने वाले किसी न्यायालय या सेना न्यायालय या किसी अन्य प्राधिकरण द्वारा आजीवन कारावास या कारावास के दंडादेश के अधीन किसी जेल या उसी प्रकार की अन्य संस्था में परिरुद्ध कोई व्यक्ति; (ग) "पुलिस उपायुक्त" से अभिप्राय है, जिले का पुलिस उपायुक्त, जिसकी अधिकारिता में इस अधिनियम के अधीन सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई के बाद, उसकी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान निवास करने की संभावना है; (घ) "जिला मजिस्ट्रेट" से अभिप्राय है, जिले का जिला मजिस्ट्रेट, जिसकी अधिकारिता में इस अधिनियम के अधीन सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई के बाद, उसकी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान निवास करने की संभावना है; (ङ) "प्ररूप" से अभिप्राय है, इस अधिनियम से संलग्न प्ररूप; (च) "कट्टर सिद्धदोष बंदी" से अभिप्राय है, कोई अपराधी-
- (i) जिसे निम्नलिखित में से किसी भी अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया गया है :-
- (1) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 392 या धारा 394 के अधीन लूट; या
- (2) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 395 या धारा 396 या धारा 397 के अधीन डकैती; या
- (3) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 364-क के अधीन फिरौती के लिए अपहरण; या
- (4) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 302 के साथ पठित धारा 387 या धारा 307 के साथ पठित धारा 387 के अधीन जबरदस्ती वसूली के लिए हत्या या हत्या करने का प्रयास; या
- (5) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 376 या धारा 302 के साथ पठित धारा 377 के अधीन बलात्कार या भेदन यौन हमला या गंभीर भेदन यौन हमला या हत्या के साथ अप्राकृतिक अपराध; या
- (6) सोलह वर्ष से कम आयु के किसी बालक के साथ बलात्कार या भेदन यौन हमला या गंभीर भेदन यौन हमला या अप्राकृतिक अपराध; या
- (7) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 376-क या धारा 376-ग या धारा 376-घ या धारा 376-ङ के अधीन आने वाला सामूहिक बलात्कार या बलात्कार; या
- (8) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) के अधीन विभिन्न प्रथम सूचना रिपोर्टों (एफ.आई.आरज) के मामलों में सीरियल किलिंग अर्थात् हत्या; या
- (9) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 121 के अधीन हत्या, यदि मामले के न्यायनिर्णय में वर्णित है कि अपराधी सामूहिक हत्या में शामिल है; या
- (10) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 458 या धारा 459 या धारा 460 के अधीन छिपकर अनुधिक्कार गृह प्रवेश तथा सिद्धदोष ठहराना; या
- (11) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 121 या धारा 121-क या धारा 122 या धारा 123 या धारा 124 या धारा 124-क के अधीन अपराध; या
- (12) अवयस्कों को शामिल करते हुए अनैतिक व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 (1956 का केन्द्रीय अधिनियम 104) की धारा 3, 4 या 5 के अधीन अपराध; या
- (13) स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (1985 का केन्द्रीय अधिनियम 61) की धारा 15(ग) या धारा 17(ग) या धारा 18(ख) या धारा 19 या धारा 20(ग) या धारा 21(ग) या धारा 22 या धारा 24 या धारा 27-क के अधीन अपराध; या
- (14) भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) की धारा 224 या धारा 225 के अधीन विधिपूर्ण अभिरक्षा से भागना भागने में सहायता करना और सिद्धदोष ठहराना;
- (ii) जिसे अपनी दोषसिद्धि से ठीक पूर्व पाँच वर्ष की अवधि के दौरान, उपरोक्त खण्ड (i) के अधीन आने वाले अपराधों के सिवाय, भारतीय दण्ड संहिता, 1860 (1860 का केन्द्रीय अधिनियम 45) के अध्याय XII या XVII में वर्णित उसी संव्यवहार का भाग रूप नहीं होते हुए विभिन्न अवसरों पर किए गए एक या से अधिक अपराधों के लिए पूर्व में सिद्धदोष ठहराया गया है और दण्डादिष्ट किया गया है और ऐसी दोषसिद्धि के परिणामस्वरूप कम से कम बारह मास की अवधि का कारावास भोग चुका है; परन्तु यदि दोषसिद्धि, जो अपील या पुनरीक्षण में अपास्त की गई है, तो उसके संबंध में भोगे गए किसी कारावास को उपरोक्त प्रयोजन के लिए गणना में नहीं लिया जाएगा; या
- (iii) जिसे मृत्यु दण्ड या प्राकृतिक जीवन तक कारावास से दण्डादिष्ट किया गया है; या
- (iv) जेल परिसरों में उसके अधिकार में बेतार संचार यंत्र या इसके घटक या कोई अप्राधिकृत इलैक्ट्रानिक यंत्र पाया गया है या उसका उपयोग करते हुए पाया गया है; या
- (v) जो ऐसी तिथि, जिसको उस द्वारा पैरोल या फरलो की अवधि, जिस के लिए उसे रिहा किया गया था, की समाप्ति पर इस प्रकार आत्मसमर्पण करना चाहिए था, से दस दिन की अवधि के भीतर आत्मसमर्पण करने में असफल होता है या हुआ है; या
- (vi) जो इस अधिनियम के अधीन जेल में परिरुद्ध होने के दौरान या अपनी अस्थाई रिहाई के दौरान सात वर्ष या से अधिक अवधि के लिए कारावास से दंडनीय कोई संज्ञेय अपराध करता है; या
- (vii) जिसे कोई जेल अपराध करने हेतु सम्बन्धित अधीक्षक जेल द्वारा बड़े दण्ड से अधिक दण्डित किया गया है या सम्बन्धित न्यायालय द्वारा न्यायिक कार्यवाहियों में सिद्धदोष ठहराया गया है ; या
- (viii) जिसे संगठित अपराध के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 (1980 का केन्द्रीय अधिनियम 65), आतंकवाद और विध्वंसकारी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1987 (1987 का केन्द्रीय अधिनियम 28), शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 (1923 का केन्द्रीय अधिनियम 19), विदेशियां विषयक अधिनियम, 1946 (1946 का केन्द्रीय अधिनियम 31) या किसी अधिनियम (केन्द्रीय या राज्य) के अधीन परिरुद्ध रखा गया है या सिद्धदोष ठहराया गया है; (छ) "फरलो" से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन यथा विनिर्दिष्ट से अधिक समय अवधि के लिए सिद्धदोष बंदी के अच्छे व्यवहार तथा आचरण के कारण प्रोत्साहन के रूप में उसकी अभिरक्षा से अस्थाई रिहाई। फरलो अवधि की गणना इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए नियमों में यथा विनिर्दिष्ट शर्तों के अध्यधीन दी गई सजा के लिए की जा सकती है। (ज) "सिद्धदोष बंदी के परिवार के सदस्य" से अभिप्राय है, सिद्धदोष बंदी का पति-पत्नी, बालक, सहोदर भाई या बहन, माता-पिता, दादा-दादी तथा पोता-पोती; (झ) "पैरोल" से अभिप्राय है, सिद्धदोष बंदी की अभिरक्षा से अस्थाई रिहाई, जो निम्ननुसार वर्गीकृत की गई है-
- (i) 'अभिरक्षा पैरोल' से अभिप्राय है, इस अधिनियम के अधीन यथा उपबंधित विनिर्दिष्ट कारणों के लिए तथा विनिर्दिष्ट कारणों के लिए सशस्त्र पुलिस अभिरक्षा के अधीन किसी सिद्धदोष बंदी को मुलाकात के लिए (भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर) ले जाने तथा वहां से वापस लाने का मार्गदर्शन;
- (ii) 'आपातकालीन पैरोल' से अभिप्राय है, अधीक्षक जेल द्वारा किसी सिद्धदोष बंदी को दी गई पैरोल, जब धारा 5 के अधीन सिद्धदोष बंदी के परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु हो गई है या गम्भीर अवस्था में है; या सिद्धदोष स्वयं गम्भीर अवस्था में है;
- (iii) 'नियमित पैरोल' से अभिप्राय है, धारा 3 के अधीन सक्षम प्राधिकारी द्वारा किसी सिद्धदोष बंदी को प्रदान की गई पैरोल ; (ञ) "पुलिस अधीक्षक" से अभिप्राय है, जिले का पुलिस अधीक्षक, जिसकी अधिकारिता में इस अधिनियम के अधीन सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई के बाद, उसकी अस्थाई रिहाई की अवधि के दौरान निवास करने की संभावना है; (ट) "दण्डादेश" से अभिप्राय है, अंतिम रूप से अपील या पुनरीक्षण या अन्यथा से दिया गया कारावास का दण्डादेश और इसमें एक या से अधिक दण्डादेशों का कुलयोग भी शामिल है; (ठ) "अधीक्षक जेल" से अभिप्राय है, जेल या उसी प्रकार की अन्य संस्था का प्रभारी अधिकारी, जिसमें सिद्धदोष बंदी परिरुद्ध है; (ड) "राज्य सरकार" से अभिप्राय है, प्रशासकीय विभाग में हरियाणा सरकार; (ढ) "अस्थाई रिहाई" से अभिप्राय है, अभिरक्षा पैरोल या आपातकालीन पैरोल या नियमित पैरोल या फरलो पर किसी सिद्धदोष बंदी की अस्थाई रिहाई।
- (2) इसमें प्रयुक्त किन्तु अपरिभाषित शब्दों और अभिव्यक्तियों के वही अर्थ होंगे, जो उन्हें कारागार अधिनियम, 1894 (1894 का केन्द्रीय अधिनियम 9), इसके अधीन बनाए नियमों तथा पंजाब जेल मैनुअल में दिए गए हैं।
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