section 6
छूट.
The Madhya Pradesh Nagariya Sthawar Sampati Kar Adhiniyam, 1964कर निम्नलिखित सम्पत्तियों के सम्बन्ध में उद्ग्रहणीय नहीं होगा अर्थात् :-- (क) भवन तथा भूमियां, जो-- (एक) संघ शासन; (दो) राज्य शासन; के स्वामित्व की हों या उसमें निहित हों; (ख) भवन तथा भूमियां जो स्थानीय प्राधिकरण के स्वामित्व की हों या उसके द्वारा प्रशासित हों, जब कि वे अनन्यरूपेण सार्वजनिक प्रयोजनों के लिये उपयोग में लाई जाती हों और लाभ के प्रयोजनों के लिये उपयोग में नहीं लाई जाती हों या जिनका लाभ के प्रयोजनों के लिये उपयोग में लाया जाना अभिप्रेत न रहा हो; (ग) भवन तथा भूमियां जिनका वार्षिक भाड़ा मूल्य पांच सौ रुपये से अधिक न हो : परन्तु यदि ऐसा कोई भवन या भूमि ऐसे व्यक्ति के स्वामित्व में हो जो उसी नगरीय क्षेत्र में किसी अन्य भवन या भूमि का स्वामित्व रखता हो, तो ऐसे भवन या भूमि का वार्षिक भाड़ा मूल्य इस खण्ड के प्रयोजनों के लिये, उस क्षेत्र में उसके स्वामित्व के समस्त भवनों या भूमियों का संकलित वार्षिक भाड़ा मूल्य समझा जायगा; (घ) भवन तथा भूमियां या उनके भाग जो अनन्यरूपेण शैक्षणिक प्रयोजनों के लिये, जिनमें पाठशालायें, भोजनालय, छात्रावास तथा पुस्तकालय सम्मिलित है, उपयोग में लाये जाते हों, यदि ऐसे भवन तथा भूमियां या उनके भाग सम्बन्धित शिक्षा संस्थाओं के स्वामित्व में हों या ऐसी शिक्षा संस्थाओं के अधिकार में किसी भाड़े की देनगी के बिना रखे गये हों ; (ङ) सार्वजनिक उपवन, और क्रीड़ांगन जो जनता के लिये खुले हों, और उनसे संलग्न भवन तथा भूमियां यदि उनसे व्युत्पन्न भाड़ा अनन्यरूपेण उन उपवनों तथा क्रीड़ांगनों के प्रशासन के लिये व्यय किया जाता हो, जिनसे कि वे संलग्न हों; (च) भवन तथा भूमियां या उनके भाग जो अनन्यरूपेण सार्वजनिक उपासना या सार्वजनिक खैरात के लिये, जिनमें मस्जिदें, मंदिर, गिरजाघर, धर्मशालाएं, गुरुद्वारे, चिकित्सालय, औषधालय, अनाथालय, दरिद्र शालायें, पीने के पानी के स्रोत, पशुओं के उपचार तथा देखरेख के लिये रुग्णावास तथा सार्वजनिक कब्रिस्तान या श्मशान भूमि या मृतकों की अंतिम क्रिया के अन्य स्थान सम्मिलित हैं, उपयोग में लाये जाते हों; परन्तु निम्नलिखित भवन तथा भूमियां या उनके भाग, इस धारा के तात्पर्य के अंतर्गत, अनन्यरूपेण सार्वजनिक उपासना या सार्वजनिक खैरात के लिये उपयोग में लाये जाने वाले नहीं समझे जायेंगे; अर्थात् :-- (एक) भवन जिनमें, या भूमियां जिन पर कोई व्यापार या कारबार किया जाता हो, जब तक कि ऐसे भवनों या भूमियों से व्युत्पन्न भाड़ा अनन्यरूपेण, धार्मिक प्रयोजनों या ऐसी सार्वजनिक पूर्त संस्थाओं के लिये, जैसी कि विहित की जायं, प्रयुक्त न किया जाता हो; (दो) भवन या भूमियां, जिनके संबंध में भाड़ा व्युत्पन्न होता हो और ऐसा भाड़ा अनन्यरूपेण धार्मिक प्रयोजनों या ऐसी सार्वजनिक पूर्त संस्थाओं के लिये, जैसी कि विहित की जायं, प्रयुक्त न किया जाता हो. (छ) भवन तथा भूमियां जो विधवाओं या नाबालिगों के या ऐसे व्यक्तियों के, जो कि ऐसी शारीरिक निर्योग्यता अथवा मानसिक शैथिल्य के अध्यधीन हों, जिसके कारण वे अपनी आजीविका उपार्जित करने में असमर्थ हों, स्वामित्व की हों, जहां कि ऐसी विधवाओं अथवा नाबालिगों अथवा व्यक्तियों के भरण-पोषण का प्रमुख साधन ऐसे भवनों तथा भूमियों से व्युत्पन्न भाड़ा हो: परन्तु ऐसी छूट ऐसे भवनों तथा भूमियों के वार्षिक भाड़ा मूल्य के केवल प्रथम बारह सौ रुपये से संबंधित होगी. (ज) भवन तथा भूमियां या उनका भाग, जो उनके स्वामियों के वास्तविक दखल में हों, जब कि ऐसे भवनों तथा भूमियों या उनके भाग का वार्षिक भाड़ा मूल्य तीन हजार रुपये से अधिक न हो.
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