section 25
लोक सेवक द्वारा जानकारी का प्रकटीकरण.
The Madhya Pradesh Nagariya Sthawar Sampati Kar Adhiniyam, 1964२५. (१) इस अधिनियम के अनुसार पेश किये गये किसी दस्तावेज या दी गई किसी अन्य जानकारी में अंतर्विष्ट समस्त विशिष्टियों को या किसी दण्ड न्यायालय के समक्ष दिये गये साक्ष्य को छोड़कर इस अधिनियम के अधीन अभिलिखित किये गये साक्ष्य को, उपधारा (३) में उपबंधित अवस्था को छोड़कर, गोपनीय रखा जायगा, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, १८७२ (क्रमांक १, सन् १८७२), में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, कोई न्यायालय, जैसा कि पूर्व में कहा गया है उसको छोड़कर, राज्य शासन के किसी सेवक को अपने समक्ष कोई ऐसी दस्तावेज या अभिलिखित की गई जानकारी या उसका कोई भाग पेश करने या उसके संबंध में अपने समक्ष साक्ष्य देने के लिये अपेक्षित करने का हकदार नहीं होगा.
(२) यदि उपधारा (३) में उपबंधित अवस्था को छोड़कर, राज्य शासन का कोई सेवक, उपधारा (१) में निर्दिष्ट विशिष्टियों में से किसी का भी प्रकटीकरण करे, तो वह ऐसे कारावास से, जो छह मास तक हो सकता है या ऐसे जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक हो सकता है, या दोनों से, दण्डनीय होगा.
(३) इस धारा में अन्तर्विष्ट कोई भी बात--
(क) इस अधिनियम या भारतीय दण्ड संहिता, १८६० (क्रमांक ४५, सन् १८६०), के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के अधीन किसी अन्वेषण या अभियोगन के प्रयोजन के लिये किसी ऐसे विवरण, विवरणी, लेखाओं, दस्तावेजों, साक्ष्य, शपथ-पत्र या अभिसाक्ष्य के संबंध में किन्हीं ऐसी विशिष्टियों के प्रकटीकरण को ; या
(ख) किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसे इस अधिनियम के उद्देश्यों को कार्यान्वित करने के प्रयोजनों के लिये इस अधिनियम का प्रशासन सौंपा गया हो, किये गये किन्हीं ऐसी विशिष्टियों के प्रकटीकरण को; या
(ग) जब ऐसा प्रकटीकरण किसी सूचना की तामील या किसी मांग की वसूली के लिये किसी आदेशिका के इस अधिनियम के अधीन विधिवत् नियोजन के कारण हुआ हो तब किन्हीं ऐसी विशिष्टियों के प्रकटीकरण को; या
(घ) किसी ऐसे वाद में, जिसमें शासन पक्षकार हो और जो इस अधिनियम के अधीन किसी कार्यवाही से उत्पन्न होने वाले किसी विषय से संबंधित हो, किसी सिविल न्यायालय को किये गये किन्हीं ऐसी विशिष्टियों के प्रकटीकरण को; या
(ङ) इस अधिनियम द्वारा अधिरोपित कर की प्राप्तियों या प्रतिदानों की लेखापरीक्षा करने के लिये नियुक्त किसी पदाधिकारी को किये गये किन्हीं ऐसी विशिष्टियों के प्रकटीकरण को; या
(च) किन्हीं ऐसी विशिष्टियों के प्रकटीकरण को, जहां ऐसी विशिष्टियां इस अधिनियम के प्रशासन से संबंधित पदधारी के आचरण की किसी जांच से सुसंगत हों, जो कि पब्लिक सरवेंट्स (इन्क्वायरीज) एक्ट, १८५० (क्रमांक ३०, सन् १८५०), के अधीन आयुक्त द्वारा नियुक्त किये गये किसी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों को या ऐसी जांच करने के लिये अन्यथा नियुक्त किये गये किसी पदाधिकारी को, या संविधान के अधीन स्थापित लोक सेवा आयोग को, जब कि वह ऐसी जांच से उत्पन्न होने वाले किसी विषय के संबंध में अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहा हो, दी गई हो; या
(छ) केन्द्रीय या राज्य शासन के किसी पदाधिकारी को ऐसे तथ्यों के, जो कि उस शासन को उसके द्वारा अधिरोपित किसी कर या शुल्क का उदग्रहण करने या उसे उगाहने में समर्थ बनाने के प्रयोजनों के लिये आवश्यक हों, किये गये प्रकटीकरण को; या
(ज) किन्हीं ऐसी विशिष्टियों के प्रकटीकरण को, जब कि ऐसा प्रकटीकरण किसी लोक सेवक द्वारा, अपर्याप्त रूप से मुद्रांकित किसी दस्तावेज को परिबद्ध करने के लिये इंडियन स्टाम्प एक्ट, १८९९ (क्रमांक २, सन् १८९९), के अधीन उसकी शक्तियों का विधिवत् प्रयोग किये जाने से हुआ हो; या
(झ) यथास्थिति विधि व्यवसायी या चार्टर-प्राप्त लेखापाल का व्यवसाय करने वाले सदस्यों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के लिये सशक्त प्राधिकारी को किये गये किन्हीं ऐसी विशिष्टियों के प्रकटीकरण को, जहां ऐसी विशिष्टियां किसी विधि व्यवसायी या चार्टर-प्राप्त लेखापाल के विरुद्ध इस अधिनियम के अधीन कर की कार्यवाही के संबंध में अवचार के आरोप की किसी जांच से सुसंगत हों; या
(ञ) अर्थ एवं सांख्यिकी संचालक को किये गये किन्हीं ऐसी विशिष्टियों के प्रकटीकरण को, जो नगरीय स्थावर संपत्ति पर कर के आपात की गणना करने में उसे समर्थ बनाने के लिये आवश्यक हों, जिससे कि इस संबंध में किसी सांख्यिकीय सर्वेक्षण को कार्यान्वित किया जा सके;
लागू नहीं होगी.
Study data processing for this section.
PDF: pending for this language.