section 18
पुनरीक्षण
The Madhya Pradesh Nagariya Sthawar Sampati Kar Adhiniyam, 1964संपत्ति कर आयुक्त स्वप्रेरणा से या किसी पक्षकार द्वारा प्रस्तुत किये गये आवेदन-पत्र पर, अपने किसी अधीनस्थ पदाधिकारी द्वारा पारित किसी आदेश की वैधता या औचित्य के संबंध में या उसकी कार्यवाहीयों की नियमितता के संबंध में स्वयं का समाधान करने के प्रयोजन के लिये, ऐसे पदाधिकारी के समक्ष लम्बित या उसके द्वारा निपटाये गये किसी मामले का अभिलेख किसी भी समय तलब कर सकेगा तथा उसकी परीक्षा कर सकेगा और उसके संबंध में ऐसा आदेश पारित कर सकेगा जैसा कि वह उचित समझे :
परन्तु वह किसी आदेश को तब तक परिवर्तित नहीं करेगा या तब तक नहीं उलटेगा जब तक कि हित रखने वाले पक्षकारों पर सूचना की तामील न कर दी गई हो और उन्हें सुनवाई का अवसर न दे दिया गया हो :
परन्तु यह और भी कि संपत्ति कर आयुक्त इस धारा के अधीन किसी आदेश का पुनरीक्षण नहीं करेगा — (क) जहां कि उस आदेश के विरुद्ध अपील धारा १५ की उपधारा (१) में उल्लिखित प्राधिकारी के समक्ष लंबित हो या उस स्थिति में जहां कि ऐसी अपील होती हो वह समय, जिसके भीतर वह फाइल की जा सकती हो, समाप्त न हो गया हो; या (ख) जहां उस आदेश के विरुद्ध द्वितीय अपील फाइल कर दी गई हो :
परन्तु यह भी कि ऐसा कोई आवेदन-पत्र तब तक ग्रहण नहीं किया जायगा जब तक कि वह उस आदेश के, जिस पर कि आपत्ति की गई हो, दिनांक से साठ दिन के भीतर न दिया गया हो और पूर्वोक्त कालावधि की संगणना करने में उक्त आदेश की प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिये अपेक्षित समय छोड़ दिया जायगा.
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