Bare Act
The M.P. Lok Parishar Bedakhli Act_1974
0. Preamble
म.प्र. लोक परिसि (बȯदखली) अधिनियम, 1974 विषय-स ू ची
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार तथा प्रारंभ
(1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश लोक परिसर (बेदखली) अधिनियम, 1974 है । (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण मध्यप्रदेश पर है ।
2. परिभाषाएँ
धारा 11 19 तथा 20 को, जो कि तत्काल प्रवृत्त होगी, छोड़कर यह - (एक) महाकौशल क्षेत्र में 12 सितम्बर, शुरू 1952 को और (दो) राज्य के अन्य क्षेत्रों में 9 जनवरी, सन् 1959 को, प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा ।
3. सक्षम प्राधिकारी की नियुक्ति
राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा - (क) किसी ऐसे व्यक्ति को, जो सहायक कलेक्टर या डिप्टी कलेक्टर के पद से अनिम्न पद का अधिकारी हो इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए सक्षम प्राधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकेगी; और (ख) इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन सक्षम अधिकारी को प्रदत्त की गई शक्तियों का प्रयोग या उस पर अधिरोपित किए गए कर्त्तव्यों का पालन सक्षम प्राधिकारी द्वारा जिन स्थानीय सीमाओं के भीतर तथा लोक परिसर के जिन प्रवर्गों के संबंध से किया जाएगा उन स्थानीय सीमाओं को या लोक परिसर के उन प्रवर्गों को परिनिश्चित कर सकेगी ।
4. बेदखली के आदेश के विरुद्ध कारण दर्शाने के लिए सूचना का जारी किया जाना
(1) यदि सक्षम प्राधिकारी की यह राय हो कि कोई व्यक्ति किसी लोक परिसर पर अप्राधिकृत अधिभोग रखे हुए है और यह कि उन्हें बेदखल किया जाना चाहिए, तो सक्षम प्राधिकारी एक लिखित सूचना जारी करेगा जिसमें समस्त संबंधित व्यक्तियों से यह अपेक्षा की जाएगी कि वे विनिर्दिष्ट तारीख को इस बात का कारण दर्शित करें कि बेदखली का आदेश क्यों न किया जाए । (2) उपधारा (1) के अधीन जारी की गई सूचना में - (क) वे आधार विनिर्दिष्ट किए जाएंगे, जिन पर बेदखली का आदेश किए जाने का प्रस्ताव किया गया हो, और (ख) समस्त संबंधित व्यक्तियों से अर्थात् उन समस्त व्यक्तियों से, जो लोक परिसर पर अधिभोग रखे हुए हैं या जिनके संबंध में यह संभावना हो कि वे लोक परिसर पर अधिभोग रखे हुए हैं, या जो उसमें हित रखने का दावा करते हैं यह अपेक्षा की जावेगी कि वे - (एक) प्रस्तावित आदेश के विरुद्ध कारण यदि कोई हो, सूचना मे यथा विनिर्दिष्ट तारीख, जो सूचना के जारी किए जाने की तारीख के बाद दस दिन से पूर्ववर्ती तारीख नहीं होगी, को या उसके पूर्व दर्शित करें; और (दो) दर्शित किए जाने वाले कारण के समर्थन में समस्त साक्ष्य विनिर्दिष्ट तारीख को पेश करें । (3) सक्षम प्राधिकारी उक्त सूचना की तामील उसे लोक परिसर के बाहरी दरवाजे पर या उसके किसी अन्य सहजदृश्य भाग पर लगाकर तथा ऐसी अन्य रीति में भी प्रकाशित जाएगी, जैसी कि विहित की जाए, और तदुपरि सूचना के संबंध में यह समझा जाएगा कि उसकी तामील समस्त संबंधित व्यक्तियों पर सम्यक् रूप से कर दी गई है । (4) जहाँ सक्षम प्राधिकारी यह जानता है या उसके पास यह विश्वास करने का कारण है कि कोई व्यक्ति लोक परिसर पर अधिभोग रखे हुए है, तो उपधारा (3) के उपबन्धों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, वह उस सूचना की एक प्रति की तामील ऐसे प्रत्येक व्यक्ति पर डाक द्वारा या उस व्यक्ति को परिदत्त करके या निविदत्त करके या ऐसी अन्य रीति में, जैसी कि विहित की जाए, करवाएगा ।
5. अप्राधिकृत अधिभोगियों की बेदखली
(1) धारा 4 की उपधारा (1) के अधीन जारी की गई सूचना में विनिर्दिष्ट तारीख को सक्षम प्राधिकारी ऐसा समस्त साक्ष्य लेगा जो दर्शित किए जाने वाले कारण के समर्थन में पेश किया जाए । यदि दर्शित किए गए कारण, यदि कोई हों, पर और किसी साध्य पर, जो पेश किया जाए, विचार करने के पश्चात् तथा लोक परिसर के अभिकथित अप्राधिकृत अधिभोग के बारे में संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् सक्षम प्राधिकारी का यह समाधान हो जाता है कि लोक परिसर अप्राधिकृत अधिभोग में है, तो सक्षम प्राधिकारी बेदखली का आदेश, उसमें अभिलिखित किए जाने वाले कारणों से कर सकेगा जिसमें यह विनिर्दिष्ट किया जाएगा कि वह लोक परिसर उन समस्त व्यक्तियों द्वारा, जो उस लोक परिसर पर अथवा उसके किसी भाग पर अधिभोग रखे हैं, ऐसी तारीख को, जो उस आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, खाली कर दिया जाए और वह उस आदेश की एक प्रति लोक परिसर के बाहरी दरवाजे पर या उनके किसी अन्य सहजदृश्य भाग पर लगवाएगा । (2) ऐसे व्यक्ति द्वारा, जिसके विरुद्ध उपधारा (1) के अधीन आदेश पारित किया गया हो, आवेदन किए जाने पर, सक्षम प्राधिकारी उस परिसर को खाली करने के लिए ऐसा समय, जैसा कि वह ठीक समझे, ऐसी शर्तों के साथ मंजूर कर सकेगा जिन्हें अधिरोपित करना वह उचित समझे । (3) यदि कोई अन्य व्यक्ति बेदखली के आदेश का - (एक) उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट तारीख के पूर्व, या (दो) जहाँ उपधारा (2) के अधीन समय मंजूर किया गया हो, वहाँ ऐसे मंजूर किए गए समय के भीतर, अनुपालन करने से इंकार करता है या उसका अनुपालन नहीं करता है, तो सक्षम प्राधिकारी या कोई अन्य अधिकारी, जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस संबंध में सम्यक् रूप से प्राधिकृत किया गया हो, उस व्यक्ति को लोक परिसर से बेदखल कर सकेगा और उसका कब्जा ले सकेगा, तथा उस प्रयोजन के लिए ऐसे बल का प्रयोग कर सकेगा जैसा कि आवश्यक हो ।
6. अप्राधिकृत अधिभोगियों द्वारा लोक परिसरों पर छोड़ी गई संपत्ति का व्ययन
(1) जहाँ कोई व्यक्ति किन्हीं लोक परिसर से धारा 5 के अधीन बेदखल किए गए हों, वहाँ सक्षम प्राधिकारी, उन व्यक्तियों को, जिनसे कि लोक परिसरों का कब्जा लिया गया है, चौदह दिन की सूचना देने के पश्चात् तथा उस सूचना को कम से कम एक ऐसे समाचार-पत्र में, जिसका वह परिणेत्र में परिचालन हो, प्रकाशित करने के पश्चात् ऐसे परिसरों में बच रही किसी सम्पत्ति को हटा सकेगा या हटवा सकेगा या लोक नीलाम द्वारा उसका व्ययन कर सकेगा । (2) जहाँ कोई सम्पत्ति उपधारा (1) के अधीन बेच दी गई हो, वहाँ उसके विक्रय आगम का, उसमें से विक्रय व्ययों की तथा उस रकम की, यदि कोई हो, जो कि किराये के बकाया या नुकसानी या खर्चों के मद्धे राज्य सरकार को या निगमित प्राधिकारी को शोध्य हो, कटौती करने के पश्चात्, ऐसे व्यक्ति या व्यक्तियों को भुगतान कर दिया जाएगा जो कि सक्षम प्राधिकारी को उसे प्राप्त करने के हकदार प्रतीत होते हों : परन्तु जहाँ सक्षम प्राधिकारी इस बारे में कि किस-किस व्यक्ति या किन व्यक्तियों को उस रकम का बाकी भाग देय है अथवा इस बारे में उसका प्रभार किस प्रकार किया जाए विनिश्चय करने में असमर्थ हो, वहाँ वह ऐसा विवाद सक्षम अधिकारिता वाले सिविल न्यायालय को निर्देशित कर सकेगा और उस पर उस न्यायालय का विनिश्चय अंतिम होगा ।
7. लोक परिसरों के बाबत किराये या नुकसानी का भुगतान अपेक्षित करने की शक्ति
(1) जहाँ...
8. सक्षम प्राधिकारी की शक्तियां
इस अधिनियम के अधीन कोई वाद करने के लिए सक्षम प्राधिकारी को निम्नलिखित बातों के संबंध में वही शक्तियां होंगे, जो कि किसी वाद का विचारण करते समय सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (क्रमांक 5 सन् 1908) के अधीन किसी सिविल न्यायालय में निहित होती है, अर्थात् :-(क) किसी व्यक्ति को समन करना तथा उसको हाजिर कराना और समय पर उसकी परीक्षा करना,(ख) दस्तावेजों के प्रकटीकरण तथा पेश किए जाने के लिए अपेक्षा करना,(ग) कोई अन्य विषय जो कि विहित किया जाए।
9. अपील
(1) राज्य सरकार, अभिसूचना द्वारा, ऐसे क्षेत्रों के संबंध में जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट किए जाएं, किसी ऐसे व्यक्ति को, जो कलेक्टर के पद से अनिम्न पद का अधिकारी हो, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिए अपील प्राधिकारी के रूप में नियुक्त कर सकेगी । (2) सक्षम प्राधिकारी के प्रत्येक ऐसे आदेश की, जो किसी लोक परिसर के संबंध में धारा 5 या 7 के अधीन किया गया हो, अपील उपधारा (1) के अधीन नियुक्त किए गए अपील प्राधिकारी होगी । (3) उपधारा (1) के अधीन अपील :-(क) धारा 5 के अधीन किसी आदेश की अपील की दशा में उस धारा की उपधारा (1) के अधीन आदेश के प्रकाशन की तारीख से पन्द्रह दिन के भीतर होगी; और (ख) धारा 7 के अधीन किसी आदेश की अपील की दशा में उस तारीख से, जिसको वह आदेश अपीलार्थी को संसूचित किया जाए, पन्द्रह दिन के भीतर होगी : परन्तु यदि अपील प्राधिकारी का यह समाधान हो जाए कि आवेदक समय पर अपील फाइल करने से पर्याप्त हेतु से निवारित हो गया था, तो वह अपील को पन्द्रह दिन की उक्त कालावधि के अवसान के पश्चात् भी ग्रहण कर सकेगा । (4) जहाँ सक्षम प्राधिकारी के किसी आदेश की अपील की जाए, वहां अपील प्राधिकारी उस आदेश के प्रवर्तन को इतनी कुल कालावधि तक के लिए, जो साठ दिन से अधिक की नहीं होगी, तथा ऐसी शर्तों पर, जैसी कि वह उचित समझे, रोक सकेगा । (5) इस धारा के अधीन प्रत्येक अपील, अपील प्राधिकारी द्वारा यथासम्भव शीघ्रता के साथ निपटाई जाएगी । (6) इस धारा के अधीन किसी अपील के खर्चे अपील प्राधिकारी के विवेकाधीन होंगे ।
10. आदेशों की अन्तिमता
इस अधिनियम मे अभिव्यक्त रूप से अन्यथा उपबंधित के सिवाय, सक्षम प्राधिकारी या अपील प्राधिकारी द्वारा इस अधिनियम के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश अन्तिम होगा और उसे किसी मूल वाद, आवेदन या निष्कासन कार्यवाही में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा तथा इस अधिनियम द्वारा या उसके अधीन प्रदत्त की गई किसी शक्ति के अनुसरण में की गई या जाने वाली किसी कार्यवाही के संबंध में किसी न्यायालय या अन्य अधिकारियो द्वारा कोई आदेश नहीं दिया जाएगा ।
11. अपराध तथा शास्ति
(1) यदि व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अधीन किन्हीं लोक परिसरों से बेदखल कर दिया गया हो, उन परिसरों पर पुनः अधिभोग रखने के प्राधिकार के बिना उन पर पुनः अधिभोग रखेगा, तो वह कारावास से जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो एक हजार रुपये तक का हो सकेगा, या दोनों से दंडनीय होगा । (2) किसी व्यक्ति को उपधारा (1) के अधीन सिद्धदोष ठहराने वाला कोई मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति को बेदखल करने के लिए संक्षेपतः आदेश कर सकेगा और ऐसा व्यक्ति किसी ऐसी अन्य कार्यवाही पर, जो कि इस अधिनियम के अधीन उसके विरुद्ध की जा सकती हो, प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसी बेदखली का दायी होगा ।
12. जानकारी अभिप्राप्त करने की शक्ति
यदि सक्षम प्राधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण हो कि कोई व्यक्ति किन्हीं लोक परिसरों पर अप्राधिकृत अधिभोग रखते हुए है, तो सक्षम प्राधिकारी या उसके द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत किया गया कोई अन्य अधिकारी ऐसे व्यक्ति से या किन्हीं अन्य व्यक्तियों से यह अपेक्षा कर सकेगा कि वे उन लोक परिसरों पर अधिभोग रखने वाले व्यक्तियों के नामों तथा अन्य विशिष्टियों से संबंधित जानकारी दे दें और इस प्रकार अपेक्षित किया गया प्रत्येक व्यक्ति ऐसी जानकारी देने के लिए आबद्ध होगा जो कि उसके कब्जे में हो ।
13. वारिसों तथा विधिक प्रतिनिधियों का दायित्व
(1) जहाँ कोई व्यक्ति जिसके विरुद्ध किराये का बकाया अवधारित करने के लिए नुकसान का निर्धारण करने के लिए कोई कार्यवाही की जानी हो या की जा चुकी हो, कार्यवाही की जाने के पूर्व या उसके लंबित रहने के दौरान मर जाए, वहाँ वह कार्यवाही उस व्यक्ति के वारिसों या विधिक प्रतिनिधियों के विरुद्ध की जा सकेगी या यथास्थिति चालू रखी जा सकेगी । (2) कोई भी ऐसी रकम, जो चाहे किराये के बकाया के रूप में या नुकसानी या खर्चों के रूप में किसी व्यक्ति द्वारा राज्य सरकार को या निगमित प्राधिकारी को शोध्य हो, उस व्यक्ति की मृत्यु के पश्चात् उसके वारिसों या विधिक प्रतिनिधियों द्वारा देय होगी, किन्तु उनका दायित्व मृतक की उन आस्तियों के परिणाम तक ही सीमित होगा जो कि उनके हाथ में हो ।
14. किराये आदि की भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूली
यदि कोई व्यक्ति धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन देय किराये के बकाया का या उस धारा की उपधारा (2) के अधीन देय नुकसानी का या धारा 9 की उपधारा (5) के अधीन राज्य सरकार या निगमित प्राधिकारी को दिलवाए गए खर्चों का या ऐसे किराये नुकसानी या खर्चों के किसी भाग का भुगतान उससे संबंधित आदेश में उसके लिए विनिर्दिष्ट किए गए समय यदि कोई हो के भीतर करने से इंकार करे या उसका भुगतान उस तरह न करे, तो सक्षम प्राधिकारी शोध्य रकम के लिए कलेक्टर को एक प्रमाण-पत्र जारी कर सकेगा जो उसे भू-राजस्व के बकाया के रूप में वसूल करने के लिए कार्यवाही करेगा ।
15. अधिकारिता का वर्जन
किसी भी न्यायालय को यह अधिकारिता नहीं होगी कि वह किसी ऐसे व्यक्ति की, जो किन्हीं लोक परिसरों पर अप्राधिकृत अधिभोग रखे हुए हो बेदखली के संबंध में या धारा 7 की उपधारा (1) के अधीन देय किराये के बकाया की या उस धारा की उपधारा (2) के अधीन देय नुकसानी की या धारा 9 की उपधारा (5) के अधीन राज्य सरकार या निगमित प्राधिकारी को दिलवाए गए खर्चों की या ऐसे किराये, नुकसानी या खर्चों के किसी भाग की वसूली के संबंध में कोई वाद या कार्यवाही ग्रहण करे ।
16. सदभावपूर्वक की गई कार्यवाही का संरक्षण
राज्य सरकार या निगमित प्राधिकारी या अपील प्राधिकारी या सक्षम प्राधिकारी के या किसी ऐसे अधिकारी के, जो इस अधिनियम के अधीन अधिकारी द्वारा प्राधिकृत हो, के विरुद्ध, किसी भी ऐसी बात के संबंध में, जो इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किन्हीं भी नियमों या किए गए किन्हीं भी आदेशों के अनुसरण में सदभावपूर्वक की गई हो या जिसका कि इस प्रकार सदभावपूर्वक किया जाना आशयित रहा हो, कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी ।
17. शक्तियों का प्रत्यायोजन
राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, यह निर्देश दे सकेगी कि इस अधिनियम के अधीन उसके द्वारा प्रयोक्तव्य कोई भी शक्ति ऐसी शर्तों, यदि कोई हों, जैसी कि अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, के अध्यधीन रहते हुए राज्य सरकार के किसी अधिकारी द्वारा भी प्रयोक्तव्य होगी ।
18. नियम बनाने की शक्ति
(1) राज्य सरकार, राजपत्र में अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगी। (2) विशिष्टतया तथा पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित समस्त विषयों या उनमें से किसी विषय के लिए उपबन्ध हो सकेंगे अर्थात् :-(क) किसी भी ऐसी सूचना का प्रारूप जिसका इस अधिनियम के अधीन दिया जाना अपेक्षित या प्राधिकृत गया हो, तथा वह रीति जिसमें कि उसकी तामील की जा सकेगी;(ख) इस अधिनियम के अधीन जाँचों का किया जाना;(ग) सक्षम प्राधिकारियों को कार्य का वितरण तथा बंटवारा, किसी सक्षम प्राधिकारी के समक्ष लंबित किसी कार्यवाही को अन्य सक्षम प्राधिकारी को हस्तान्तरित करने;(घ) लोक परिसरों का कब्जे लेने के संबंध में अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया;(ङ) वह रीति जिसमें प्राधिकृत अधिभोग के लिए नुकसानी का निर्धारण किया जा सकेगा और वे सिद्धान्त जो कि ऐसी नुकसानी का निर्धारण करते समय ध्यान में रखे जा सकेंगे;(च) वह रीति जिसमें अपीलें की जा सकेंगी तथा वह प्रक्रिया जो कि अपीलों में अपील प्राधिकारी द्वारा अनुसरित की जाएगी।
19. निरसन
मध्यप्रदेश गवर्नमेंट प्रिमाइसेस (इविक्शन) एक्ट 1952 (क्रमांक 16 सन् 1952) एतद्वारा निरस्त किया जाता है ।
20. विधिमान्यताकरण
किसी न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश के होते हुए भी, किसी ऐसी बात या कार्यवाही (जिसमें बनाए गए नियम या किये गए आदेश, जारी की गई सूचनाएँ आदिष्ट या की गई बेदखली, निर्धारित की गई नुकसानी, वसूल किए गए किराये या नुकसानी या खर्चे, शुरू की गई कार्यवाहियाँ सम्मिलित हैं) के संबंध में जो मध्यप्रदेश गवर्नमेंट प्रिमाइसेस (इविक्शन) एक्ट, 1952 (क्रमांक 16 सन् 1952) (जो इसमें इसके पश्चात् सन् 1952 के अधिनियम के नाम से निर्दिष्ट है) के अधीन की गई हो या जिसका कि उस तरह किया जा सकना तात्पर्यित रहा हो, यह समझा जाएगा कि वह इस तरह विधिमान्य तथा प्रभावी है मानो कि ऐसी बात या कार्यवाही इस अधिनियम के जो कि धारा 1 की उपधारा (3) के अधीन महाकौशल क्षेत्र में 12 सितम्बर, 1952 को तथा अन्य क्षेत्रों में 1 जनवरी, 1959 को प्रवृत्त हुआ समझा जाएगा तत्स्थानी उपबन्धों के अधीन की गई थी और तदनुसार : (क) सन् 1952 के अधिनियम के अधीन वसूल किए गए किसी किराये या नुकसानी या खर्चों की वापसी के लिए, उस दशा मे जबकि ऐसी वापसी का दावा केवल इस आधार पर किया गया हो कि उक्त अधिनियम असंवैधानिक तथा शून्य घोषित कर दिया गया है। किसी भी न्यायालय में कोई वाद या अन्य विधिक कार्यवाही न तो चलाई जाएगी और न चालू रखी जाएगी;. और (ख) कोई भी न्यायालय सन् 1952 के अधिनियम के अधीन वसूल किए गए किसी किराये या नुकसानी या खर्चों की वापसी के केवल इस आधार पर कि उक्त अधिनियम असंवैधानिक तथा शून्य घोषित कर दिया गया है निदेश देने वाली किसी डिक्री या आदेश को प्रवर्तित नहीं करेगा ।
PDF: pending for this language.