section 10
आयोग का कृत्य
The Jharkhand Women's Commission Act, 2005General200512 sections
Statutory text
- (1) आयोग निम्नलिखित कृत्यों में से सबों या उनमें से किसा भी कृत्य का संपादन करेगा :- (क) विद्यमान विधियों के अधीन महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित सभी तथ्यों का अन्वेषण और जाँच करना; (ख) महिलाओं की सुरक्षा के निमित्त किये गये कार्यों पर एक वार्षिक प्रतिवेदन या कोई और दावा उचित समय, जो आयोग उचित समझे, राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा; (ग) राज्य में महिलाओं की स्थिति में गुणात्मक सुधार हेतु सुरक्षा के उपायों के व्यवहारिक कार्यान्वयन हेतु प्रतिवेदनों की अनुशंसा करना; (घ) महिलाओं को प्रभावित करनेवाले विद्यमान विधियों और उसके उपबंधों का समय-समय पर पुनरावलोकन करना और उसमें संभावित संशोधनों को अनुशंसा करना, जिससे कि विधान में किसी प्रकार की कमी, अपर्याप्तता अथवा त्रुटियों को ठीक करने हेतु सुधारात्मक विधायी अध्युपायों के संबंध में परामर्श दिया जा सके; (च) राज्य में महिलाओं के विरूद्ध हो रहे उत्पीड़न, यातनाओं और अत्याचारों द्वारा महिलाओं से संबंधित विधि और विधिक उपायों के उल्लंघन के सभी मामलों को सक्षम प्राधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना; (छ) निम्नलिखित उपखंडों से संबंधित विषयकित शिकायतों की जाँच करना और स्वप्रेरणा से ध्यान देना;
- (1) महिलाओं को अधिकारों से वंचित करने या होने की दशा में;
- (2) महिलाओं को संरक्षण और समानता तथा उसके विकास के उद्देश्य की प्राप्ति के प्रयोगात्मक कोई अधिनियमित की गई विधियों का क्रियान्वयन न किये जाने की दशा में;
- (3) महिलाओं को कठिनाइयों को दूर करने तथा कल्याण और राहत उपलब्ध कराने के उद्देश्य वाले नीतिगत निर्णयों, मार्गदर्शनों या अनुदेशों का पालन न किये जाने और सक्षम प्राधिकारियों के साथ ऐसे विषयों पर विवाद उत्पन्न होने के मुद्दों की दशा में; (ज) भेदभाव से उत्पन्न होने वाली विनिर्दिष्ट समस्याओं या उससे उत्पन्न स्थितियों के बारे में विशेष अध्ययन या अन्वेषण कर उनके काम को पहचान कर उसे दूर करने के उपायों की युद्धस्तर नीति की अनुशंसा करना; (झ) उत्थान हेतु शैक्षणिक शोध का उत्तरदायित्व लेना जिससे उसके उपाय सुझाये जा सके फलस्वरूप सभी क्षेत्रों में महिलाओं का सम्यक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके जिससे उनके उत्थान जैसी बातें उनके घरों तक पहुँचे तथा इससे संबंधित, मौलिक सेवाओं अपर्याप्त समर्थक सेवाओं तथा भेषजापण व्यवसायिक स्वास्थ्य परिसंकटों को कम करने और उनकी उत्पादकता में वृद्धि लाने हेतु आसन्न उत्तरदायी बातों की पहचान करना; (ञ) महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास की योजनाबद्ध प्रक्रिया में भाग लेना और उससे संबंधित परामर्श देना; (ट) राज्य के अधीन महिलाओं के विकास की प्रगति का मूल्यांकन करना; (ठ) कारागार, प्रतिप्रेषण गृहों, महिलाओं की संस्था, या अन्य अभिरक्षा का स्थान, जहाँ महिलाएँ कैदी के रूप में या अन्यथा रूप में रखी जाती हों का निरीक्षण करना या करवाना और यदि आवश्यक समझा जाय तो सुधारात्मक कार्रवाई हेतु इस कार्य से संबंधित प्राधिकारियों के साथ सहयोग करना; (ड) महिलाओं के बड़े निकाय को प्रभावित करनेवाले अंतर्ग्रस्त मुद्दों के विवादों का निपटारा करना; (ढ) महिलाओं से संबंधित किसी विषय वस्तु जो विशेष रूप से उन विभिन्न कठिनाइयों के बारे में, जिनके अधीन महिलाएँ पीड़ित होती है, सरकार को सामयिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करना; (ण) इसके अतिरिक्त कोई अन्य विषय जिसे राज्य सरकार द्वारा उन्हें समय-समय पर सौंपा जा सके।
- (2) राज्य सरकार द्वारा उपधारा
- (1) के खंड (ख) में निर्देशित सभी प्रतिवेदनों को राज्य की अनुशंसाओं पर की गई अथवा की जानेवाली प्रस्तावित कार्रवाई या अस्वीकृति, यदि कोई हो, अथवा अनुशंसाओं में से भी किसी की अस्वीकृति के कारणों को स्पष्ट करते हुए ज्ञापन के साथ, विधान-मंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा।
- (3) आयोग को, उपधारा
- (1) खंड (क) और खंड (छ) के उपखंड
- (1) में निर्देशित किसी विषय के बारे में अन्वेषण चल रहा हो, विशेष रूप से निम्नलिखित विषयों के संबंध में, किसी वाद को विचारण करनेवाले सिविल न्यायालय की सभी शक्तियाँ प्राप्त होगी :- (क) भारत के किसी भी भाग में रहनेवाले किसी भी दोषी व्यक्ति को सम्मन करने, उपस्थित होने हेतु बाध्य करने और शपथ पत्र पर उसका परीक्षण करने; (ख) किसी दस्तावेज की खोज और उपस्थापन को अध्यपेक्षा करने; (ग) शपथ-पत्र पर साक्ष्य प्राप्त करने; (घ) किसी न्यायालय या अधिकारियों से किसी लोक-अभिलेख या उसकी प्रति की अध्यपेक्षा करने; (च) साक्ष्यों एवं दस्तावेजों के परीक्षण के लिए कमीशन बहाल करने; (छ) कोई अन्य विषय जो समय-समय पर विहित किये जाये।
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