Bare Act
The Jharkhand Restriction on Construction in Unsafe Areas Act, 2002
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ
- (i) यह अधिनियम "दि झारखण्ड रिस्ट्रिक्शन ऑन कन्स्ट्रक्शन इन अनसेफ एरियाज ऐक्ट, 2002" के नाम से जाना जायेगा ।
- (ii) यह सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य पर लागू होगा ।
- (iii) यह अधिनियम तत्काल प्रभाव से लागू होगा ।
2. परिभाषाएँ
इस अधिनियम में, अन्यथा संदर्भित स्थिति न होने तक- (क) 'निर्माण' का अर्थ भवन या संरचना का निर्माण या पुनर्निर्माण करना अथवा भवन, भवनों या संरचनाओं में अतिरिक्त निर्माण या परिवर्तन करना है । परंतु इसमें वर्त्तमान भवनों या संरचनाओं की मरम्मती शामिल नहीं होगा । (ख) 'खान' का अर्थ वही होगा जैसा माइन्स ऐक्ट, 1952 में दिया गया है । (ग) 'अधिसूचना' का तात्पर्य सरकारी गजट में प्रकाशित अधिसूचना से है । (घ) 'विहित' का तात्पर्य इस अधिनियम के तहत बनाये गये नियमों से विहित होने से है ।
3. सूचना की प्राप्ति के उपरांत जाँच
जिला दण्डाधिकारी, ऐसी कोई सूचना प्राप्त होने के उपरांत कि उनके क्षेत्राधिकार के अन्तर्गत किसी क्षेत्र में खनन् कार्य के फलस्वरूप या अन्यथा किसी कारणवश भू-धसान की संभावना है, तो वे इसकी जाँच ऐसे पदाधिकारी, जिन्हें वांछित योग्यता प्राप्त हो, से वैसे तरीके से जो विहित हो, से करायेंगे ।
4. असुरक्षित क्षेत्रों की घोषणा
जिला दण्डाधिकारी जाँच प्रतिवेदन की प्राप्ति के उपरांत संतुष्ट हों, कि उनके क्षेत्राधिकार के अन्दर यदि किसी क्षेत्र में खनन् कार्य के फलस्वरूप या अन्यथा किसी कारणवश भू-धसान की संभावना है तो वे भू-धसान होने की संभावना वाले क्षेत्र की एक रूपरेखा अंतिम रूप से प्रकाशित खतियान और इलाके के मानचित्र के संदर्भ के साथ विहित तरीके से आदेश प्रकाशित करते हुए असुरक्षित क्षेत्र की घोषणा करेंगे ।
5. बिना अनुमति के निर्माण कार्य पर रोक
यदि धारा-4 के अन्तर्गत कोई क्षेत्र असुरक्षित घोषित किया जाता है, तो उस क्षेत्र में बिना जिला दण्डाधिकारी की लिखित पूर्वानुमति के कोई निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया जाएगा अथवा आगे जारी नहीं रहेगा ।
6. दण्ड
कोई भी व्यक्ति, यदि धारा-5 के प्रावधान के विरुद्ध धारा-4 के अन्तर्गत घोषित असुरक्षित क्षेत्र में किसी प्रकार का निर्माण कार्य प्रारंभ या जारी रखता है, तो वह व्यक्ति धारा-7 के अन्तर्गत पूर्वाग्रह रहित की जाने वाली किसी कार्रवाई के तहत अधिकतम छः माह के लिये साधारण कैद की सजा या अधिकतम 2000/- रुपये जुर्माना या दोनों दण्ड का हकदार होगा और यदि वह इस तरह का अपराध जारी रखता है तो वह उल्लंघन की अवधि तक प्रतिदिन के लिये अधिकतम 500/- रु० के अतिरिक्त जुर्माने का हकदार होगा ।
7. निर्मित संरचना को ध्वस्त करने की शक्तियाँ
जहाँ कहीं भी धारा-5 के प्रावधान के विरुद्ध कोई निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया है, या आगे जारी है, तो जिला दण्डाधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र के अन्तर्गत वैसी संरचना के मालिक या दखलकार (जो मालिक नहीं हों) को, अपना पक्ष प्रस्तुत करने हेतु उन्हें सुनने का एक अवसर प्रदान करते हुए निर्धारित तिथि के अंदर प्रारंभ या जारी निर्माण को ध्वस्त करने के लिए ऐसा आदेश दे सकते हैं, और यदि निर्धारित तिथि के अंदर अगर निर्माण को ध्वस्त नहीं किया गया, तो जिला दण्डाधिकारी स्वयं या अपने द्वारा प्राधिकृत व्यक्ति के द्वारा ऐसे निर्माण को ध्वस्त करा सकते हैं, और इस प्रकार ध्वस्त कराने के खर्च को जिला दण्डाधिकारी द्वारा ऐसे निर्माण के मालिक से लोक मांग के रूप में वसूल किया जाएगा ।
8. इस अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई के प्रति संरक्षण
कोई वाद, अभियोजन या अवैध कार्यवाही (किसी क्षति के लिये की गयी कार्रवाई भी जिसमें शामिल है) अच्छी मंशा से की गई किसी कार्रवाई या कार्रवाई करने की इच्छा या किसी प्रकार का नुकसान होने या किसी प्रकार का नुकसान होने की संभावना के लिये, इस अधिनियम या किसी नियम या उसके तहत राज्य सरकार या किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी आदेश के तहत अच्छी मंशा से की गई कार्रवाई के विरुद्ध नहीं चलेगी ।
9. अपराध का संज्ञान
कोई न्यायालय इस अधिनियम के तहत सजा दिये जाने वाले अपराध के लिये तब तक संज्ञान नहीं लेगा जब-तक कि जिला दण्डाधिकारी या उनके द्वारा इसके लिए प्राधिकृत पदाधिकारी के द्वारा लिखित रूप से शिकायत दायर नहीं किया जाय ।
10. अपराध का समाहितीकरण
इस अधिनियम के तहत सजा दिए जाने वाले किसी अपराध का अभियोजन के पूर्व या बाद भी जिला दण्डाधिकारी के द्वारा विहित शर्त एवं अनुबंध के साथ समाहितीकरण किया जा सकेगा ।
11. अपील
- (1) कोई भी व्यक्ति जिला दण्डाधिकारी के द्वारा इस अधिनियम के तहत दिए गए आदेश से क्षुब्ध होने पर इस आदेश के विरुद्ध आदेश संसूचित होने के तीस दिनों के अन्दर राज्य सरकार के समक्ष विहित तरीके से अपील दायर कर सकता है ।
- (2) व्याख्या- उपरोक्त उप-धारा के लिये विहित तरीके से आदेश प्रकाशित करने की तिथि ही आदेश संसूचित करने की तिथि होगी ।
- (3) उपधारा-(1) के अन्तर्गत दायर अपील का निष्पादन किसी पदाधिकारी जो (सरकार के सचिव या प्रमण्डलीय आयुक्त के स्तर से नीचे का नहीं हो), के द्वारा किया जायेगा ।
12. राज्य सरकार द्वारा कुछ मामलों में आदेशों का पुनरीक्षण
राज्य सरकार स्वतः या अन्यथा इस अधिनियम के तहत जिला दण्डाधिकारी के द्वारा पारित आदेश का पुनरीक्षण कर सकती है ।
13. नियम बनाने की शक्ति
- (i) राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उद्देश्य को लागू करने के लिये नियम बना सकती है ।
- (ii) विशेष रूप से पूर्ववर्ती शक्तियों की व्यापकता पर बिना विपरीत प्रभाव डाले, ये नियम सबके लिये या वैसे सभी मामलों में जहाँ आवश्यक हो, लागू होंगे ।
14. खानों में प्रावधानों का लागू न होना
इस अधिनियम के प्रावधान खान अधिनियम 1952 की धारा
- (2) की उपधारा
- (1) की कंडिका
- (b) के तहत परिभाषित खान के लिए लागू नहीं होंगे । Amendment-1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ (Amendment Act, 2005)
- (i) यह अधिनियम "दि झारखण्ड रिस्ट्रिक्शन ऑन कन्स्ट्रक्शन इन अनसेफ एरियाज (संशोधन) अधिनियम, 2005" कहलायेगा ।
- (ii) इसका विस्तार संपूर्ण झारखण्ड राज्य में होगा ।
- (iii) यह संशोधन अधिनियम तत्काल प्रभाव से लागू होगा । Amendment-2. हिन्दी पाठ में निम्नांकित संशोधन/शुद्धिकरण (Amendment Act, 2005)
- (i) दि झारखण्ड रिस्ट्रिक्शन ऑन कन्स्ट्रक्शन इन अनसेफ एरियाज एक्ट, 2002 (जिसे आगे मूल एक्ट के रूप में अभिहित किया जायेगा) की धारा-6 में "हकदार" शब्द के स्थान पर "भागी" शब्द प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
- (ii) मूल एक्ट की धारा-8 में "अवैध" शब्द के स्थान पर "वैध" शब्द प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
- (iii) मूल एक्ट की धारा-11 की उपधारा-(3) निम्न प्रकार संशोधित एवं पठित होगी : "(3)-उपधारा
- (b) के तहत परिभाषित खान के लिए लागू नहीं होंगे । Amendment-1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ (Amendment Act, 2005)
- (1) के अन्तर्गत दायर अपील का निष्पादन इसके लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त पदाधिकारी (जो सरकार के सचिव या प्रमंडलीय आयुक्त से न्यून स्तर के नहीं हों) यथाविहित प्रक्रिया के अनुसार करेंगे ।"
- (iv) मूल एक्ट की धारा-14 में
- (b) के स्थान पर (बी) प्रतिस्थापित किया जाएगा । Amendment-3. अंग्रेजी पाठ में संशोधन/शुद्धिकरण (Amendment Act, 2005)
- (i) मूल एक्ट की अंग्रेजी प्राधिकृत पाठ की धारा-6 में "Whom" के स्थान पर "Who" शब्द प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
- (ii) मूल एक्ट की अंग्रेजी प्राधिकृत पाठ की धारा-7 निम्न प्रकार संशोधित एवं पठित होगी-- "7. The Power to demolish Construction:- Where any construction has been commenced or being continued in contravention of the Provisions of section-5, the District Magistrate having the jurisdiction may, after giving the owner of such construction and also to the occupier (if the owner is not the occupier) an oportunity of being heard, make an order directing the demolition of the construction commenced or continued within such period as may be specified in the order and indefault, the District Magistrate may cause or through a person authorised by him, in this behalf, cause demolition of such construction and the cost thereof shall be recoverable by the District Magistrate from the owner of the construction as a public demand."
- (iii) मूल एक्ट की धारा-8 अंग्रेजी प्राधिकृत पाठ में "Protection" शब्द के बाद "of" शब्द अंतस्थापित किया जायेगा । इस धारा में "illegal proceedings" शब्दों के स्थान पर "legal proceedings" शब्द प्रतिस्थापित किए जायेंगे तथा इस धारा के अंत में "," (अल्प विराम) के स्थान पर "." (पूर्ण विराम) प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
- (iv) मूल एक्ट की धारा-9 अंग्रेजी प्राधिकृत पाठ में "in his behalf" वाक्यांश के स्थान पर "in this behalf" वाक्यांश प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
- (v) मूल एक्ट की धारा-11 की उपधारा
- (iii) अंग्रेजी प्राधिकृत पाठ में "disposed off" शब्दों के स्थान पर "disposed of" शब्द प्रतिस्थापित किए जायेंगे तथा "Division Commissioner" के स्थान पर "Divisional Commissioner" पदनाम प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
- (vi) मूल एक्ट की धारा-14 अंग्रेजी प्राधिकृत पाठ में "Provision" शब्द के स्थान पर "Provisions" शब्द प्रतिस्थापित किया जायेगा ।
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