Bare Act
The Jharkhand Reservation in Vacancies of Posts and Services (Scheduled Caste/Scheduled Tribe and Backward Classes) Act, 2001
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ
- (1) यह अधिनियम झारखण्ड पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में आरक्षण (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए) अधिनियम, 2001 कहा जा सकेगा;
- (2) यह सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य में लागू होगा;
- (3) यह तुरन्त प्रवृत्त होगा।
2. परिभाषाएं
जब तक संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो, इस अधिनियम में :-
(क)
- (i) "नियुक्ति प्राधिकारी" जहां तक इसका संबंध किसी स्थापना में सेवा या पद से है, से अभिप्रेत है वैसी सेवाओं या पदों पर नियुक्त करने के लिए सक्षम प्राधिकारी;
- (ii) "अधिनियम" से अभिप्रेत है, झारखण्ड पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों में आरक्षण (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए) अधिनियम, 2001; (ख) "विहित" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन बनी नियमावली जो राजकीय गजट में प्रकाशित हुई हो, द्वारा विहित; (ग) "स्थापना" से अभिप्रेत है राज्य के कार्यकलाप से जुड़े लोक सेवाओं और पदों पर नियुक्तियों से संबंधित राज्य का कोई कार्यालय या विभाग और इसमें सम्मिलित हैं :-
- (i) तत्समय प्रवृत्त किसी राज्य अधिनियम के प्रधान गठित कोई स्थापना या वैधानिक प्राधिकारी; या
- (ii) बिहार सरकारी समिति अधिनियम, 1935 (बिहार अधिनियम 6, 1935) के अधीन निबंधित कोई सहकारी संस्था जिसमें राज्य सरकार द्वारा शेयर पूंजी लगाई गई है और जो राज्य सरकार से ऋण, अनुदान तथा सहायतादि आदि के रूप में सहायता प्राप्त करता है; और
- (iii) विश्वविद्यालय, विश्वविद्यालय से सम्बद्ध कॉलेज, प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च विद्यालय तथा ऐसे अन्य शैक्षिक संस्थान, जिन्हें राज्य सरकार ने स्वाधिकृत कर लिया या सहायता प्रदान करती है;
- (iv) सार्वजनिक क्षेत्र का प्रतिष्ठान; (घ) "सार्वजनिक क्षेत्र की स्थापना" से अभिप्रेत है कोई उद्योग, वाणिज्य, व्यापार या पेशा जो निम्न द्वारा स्वाधिकृत, नियंत्रित या प्रबंधित हो :-
- (i) राज्य सरकार या राज्य सरकार का कोई विभाग;
- (ii) कम्पनी अधिनियम, 1956 (अधिनियम-1; 1956) की धारा 617 में यथा परिभाषित सरकारी कम्पनी अथवा केन्द्र या राज्य अधिनियम द्वारा या उसके अधीन स्थापित निगम जिसमें राज्य सरकार द्वारा समादत्त शेयर पूंजी के अठारह प्रतिशत से अन्यून शेयर पूंजी लगाई गयी हो; (ङ) "भर्ती वर्ष" से अभिप्रेत है वह पंचांग वर्ष जिसमें वस्तुतः भर्ती की जाती है; (च) "आरक्षण" से अभिप्रेत है अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्गों के लिए पदों एवं सेवाओं में रिक्तियों का आरक्षण; (छ) "अनुसूचित जाति" का निर्देश भारत संविधान के अनुच्छेद 341 के अधीन किए गए तथा समय-समय पर यथा संशोधित संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 में विनिर्दिष्ट अनुसूचित जातियों से होगा ; (ज) "अनुसूचित जनजाति" का निर्देश भारत-संविधान के अनुच्छेद 342 के अधीन बनाए तथा समय-समय पर यथा संशोधित संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश, 1950 में विनिर्दिष्ट जनजातियों से होगा ; (झ) "अन्य पिछड़े वर्ग" से अभिप्रेत है-अत्यन्त पिछड़े वर्ग ; (ञ) "अत्यन्त पिछड़े तथा पिछड़े वर्गों" से अभिप्रेत है तथा इसमें सम्मिलित हैं वे सभी वर्ग जो इस अधिनियम की अनुसूची-1 और 2 में विनिर्दिष्ट किए गए हैं। स्पष्टीकरण-यदि अधिनियम से उपाबद्ध अनुसूची-1 और अनुसूची-2 में प्रमाजित वर्गों में से किस वर्ग का राष्ट्रपति के किसी आदेश के अंतर्गत अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित किया जाता है तो ऐसे वर्ग को उक्त अनुसूची से विलोपित हुआ समझा जाएगा। (ट) "गुणागुण-सूची" से अभिप्रेत है अधिनियम में किए गए उपबंधों के अनुसार तैयार की गई गुणागुण-क्रम से क्रमाहित उम्मीदवार का सूची। (ठ) "राज्य" में सम्मिलित है झारखण्ड राज्य का सरकार, विधान-सभा और न्यायपालिका एवं राज्य के भीतर अथवा राज्य सरकार के नियंत्रणधीन सभी स्थानीय या अन्य प्राधिकार।
3. प्रयोज्यता
यह अधिनियम निम्नांकित में लागू नहीं होगा :-
(क) केन्द्र सरकार के अधीन कोई नियोजन;
(ख) निजी क्षेत्र में कोई नियोजन;
(ग) घरेलू सेवाओं में कोई नियोजन;
(घ) सेवारत सरकारी सेवक का मृत्यु पर अनुकम्पा के आधार पर कोई नियुक्ति; और
(ङ) ऐसे अन्य पद जिसे राज्य सरकार, आदेश द्वारा, समय-समय पर विनिर्दिष्ट करे; परन्तु यह कि इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक आदेश किए जाने के बाद तुरन्त राज्य विधान-सभा के समक्ष, जब वह कुल चौदह दिनों के लिए सत्र में हो, रखा जाएगा या एक सत्र में या दो लगातार सत्र में रख सकते हैं।
4. सीधी भर्ती के लिए आरक्षण
- (1) किसी स्थापना में सेवाओं और पदों की सभी नियुक्तियाँ, जो सीधी भर्ती के द्वारा भरी जानी हो, निम्नांकित रूप में विनियमित की जाएगी, यथा :- (क) खुला गुणागुण कोटि से ... 27 प्रतिशत (ख) आरक्षित कोटि से ... 73 प्रतिशत
- (2) आरक्षित कोटि का 73 प्रतिशत रिक्तियों में से आरक्षित उम्मीदवारों को विभिन्न कोटियों की रिक्तियां इस अधिनियम के अन्य उपबंधों के अधीन निम्नललिखित रूप में होंगी :-
- (i) अनुसूचित जाति ... 14 प्रतिशत
- (ii) अनुसूचित जनजाति ... 32 प्रतिशत
- (iii) अत्यन्त पिछड़ा वर्ग ... 18 प्रतिशत
- (vi) पिछड़ा वर्ग ... 9 प्रतिशत कुल ... 73 प्रतिशत
- (2) (क) उप-धारा
- (2) के अधीन निर्धारित आरक्षण प्रतिशत में प्रत्येक कोटि के लिए निम्न प्रकार से क्षैतिज आरक्षण विनियमित होगा :--
- (i) शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए :-- (क) अंधापन अथवा कम दृष्टि ... 1 प्रतिशत (ख) बहरापन ... 1 प्रतिशत (ग) लोकामोटिव विकलांग अथवा सेरिब्रल पाल्सी ... 1 प्रतिशत कुल ... 3 प्रतिशत
- (ii) महिलाओं के लिए... 5 प्रतिशत परन्तु, यह कि राज्य सरकार झारखण्ड गजट में अधिसूचना जारी कर जिलों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के जनसंख्या के प्रतिशत के अनुसार विभिन्न जिलों के लिए विभिन्न प्रतिशत नियत कर सकेगी; परन्तु, यह और कि प्रोन्नति के मामले में केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिए इस धारा के अधीन यथा उपबंधित अनुपात में आरक्षण किया जाएगा।
- (3) आरक्षित कोटि के उम्मीदवार जो अपने गुणागुण के आधार पर चुने जाते हैं, का गणना खुली गुणागुण की कोटि की 27 प्रतिशत रिक्तियों के विरुद्ध का जाएगा न कि आरक्षित कोटि रिक्तियों के विरुद्ध।
- (4) इस अधिनियम के प्रावधानों के प्रतिकूल या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि और नियमावली या न्यायालय के किसी निर्णय या डिक्री के होते हुए भी उपधारा
- (3) का उपबंध ऐसे मामलों में लागू होगा जिसमें चयन की सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गई किन्तु नियुक्ति-पत्र निर्गत नहीं किए गए हैं।
- (5) इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित रिक्तियां ऐसे उम्मीदवारों से नहीं भरी जायेंगी, जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्ग के न हों।
- (6) (क) अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित रिक्तियों में नियुक्ति तथा प्रोन्नति के लिए उम्मीदवारों की अनुपलब्धता की स्थिति में उन भर्ती वर्षों तक के लिए उन रिक्तियों को आरक्षित बनाए रखा जाएगा और यदि तीसरे वर्ष में भी सुयोग्य उम्मीदवार नहीं उपलब्ध हों, तो अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के बीच रिक्तियों का विनिमय किया जाएगा तथा पूरत रिक्तियां उस विशेष समुदाय के उम्मीदवार जो वस्तुतः नियुक्त किए जाते हैं, के लिए आरक्षित समझा जाएंगी। (ख) अत्यन्त पिछड़ा वर्ग एवं पिछड़ा वर्ग के सुयोग्य उम्मीदवारों की अनुपलब्धता की स्थिति में वैसी आरक्षित रिक्तियां तीन भर्ती वर्षों के लिए आरक्षित बनी रहेगी और यदि तीसरे वर्ष में भी सुयोग्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं है तो रिक्तियां अत्यन्त पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों से विनिमय द्वारा भरा जायेगा और विनिमय द्वारा तथा पूरत रिक्तियां उस विशेष समुदाय के योग्य उम्मीदवारों, जो वस्तुतः नियुक्त किए जाते हैं, के लिए आरक्षित समझा जाएगा। (ग) यदि किसी भर्ती वर्ष में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्यन्त पिछड़ा वर्ग और पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवारों की संख्या, विनिमय फार्मूला के बाद भी, उनके लिए आरक्षित रिक्तियों की संख्या से कम है तो शेष पूर्वगत (बैक लॉग) रिक्तियां, सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से, उन्हें अनारक्षित करके भरा जा सकेंगी, किन्तु वैसी अनारक्षित रिक्तियां तीन भर्ती वर्षों तक अग्रणित रहेंगी। (घ) यदि आरक्षित रिक्तियों को भरने के लिए अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अत्यन्त पिछड़े वर्गों के उम्मीदवारों, अपेक्षित संख्या में, उपलब्ध न हो, तो केवल पिछली रिक्तियों को भरने के लिए, यथास्थिति, केवल अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अत्यन्त पिछड़े एवं पिछड़े वर्गों के उम्मीदवारों के लिए ही नया विज्ञापन किया सकेगा। (ङ) इस अधिनियम के प्रावधानों के प्रतिकूल या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि और नियमावली या न्यायालय के किसी निर्णय या डिक्री के होते हुए भी धारा-4 का उपबन्ध ऐसे सभी मामलों में लागू होगा जिनमें चयन की सभी औपचारिकताएं पूरा कर लिया गया है, किन्तु नियुक्ति पत्र निर्गत नहीं किए गए है।
5. आरक्षण नीति का पुनर्विलोकन
- (1) राज्य सरकार का यह कर्तव्य होगा कि वह धारा-4 के अधीन विभिन्न आरक्षित कोटा के लिए नियत अनुपात में धारा-2 के खण्ड (ग) एवं (घ) में यथाभाषित राज्य की सभी स्थापनाओं का विभिन्न सेवाओं या पदों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अत्यन्त पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व का प्राप्त हेतु प्रयास करे।
- (2) राज्य सरकार प्रत्येक 10 वर्ष के बाद अपना आरक्षण नीति का पुनर्विलोकन करेगा; परन्तु, यह कि इस धारा के अधीन किया गया प्रत्येक प्रतिवेदन सदन के पटल पर रखे जाने के बाद तुरन्त, राज्य विधान सभा के समक्ष, जब वह कुल 14 दिनों के लिए सत्र में हो, जो एक ही सत्र में या दो लगातार सत्र में पड़ सकते हैं, रखा जाएगा।
6. आदर्श रोस्टर
- (1) राज्य सरकार राज्य और जिला स्तर दानों (दोनों) की सेवाओं के लिए सीधी भर्ती के लिए 100 बिन्दुओं और प्रोन्नति के लिए 50 बिन्दुओं का आदर्श रोस्टर विहित करेगी।
- (2) नियुक्त प्राधिकारो अपने नियंत्रणाधीन प्रत्येक कोटि के पद के लिए सीधी भर्ती और प्रोन्नति हेतु विहित फार्म में पृथक चालू रोस्टर रखेगा।
7. रियायत
किसी भी सेवा या पद पर चयन के लिए परीक्षा हेतु विहित शुल्क, यदि कोई हो, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के मामले में घटाकर 1/4 कर दिया जाएगा।
8. सम्पर्क पदाधिकारी
सरकार के हरेक विभाग में, स्थापना के प्रभारी पदाधिकारी को, जो संयुक्त सचिव की पंक्ति के नीचे का न हो, इस अधिनियम द्वारा उपबंधित मामले के सम्बन्ध में सम्पर्क पदाधिकारी के रूप में कार्य करने के लिए विभागीय सचिव द्वारा प्राधिकृत किया जाएगा और वह निम्नलिखित का उत्तरदायी होगा --
(क) इस अधिनियम और उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों का समुचित कार्यान्वयन सुनिश्चित करना;
(ख) प्रोन्नति पदाधिकारी द्वारा अनुपालन सुनिश्चित करना;
(ग) विवरणियों का समय पर उपस्थापन सुनिश्चित करना;
(घ) रोस्टरों और यथाविहित ऐसे अन्य अभिलेखों का वार्षिक निरीक्षण सुनिश्चित करना;
(ङ) प्रशासनिक विभाग और कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के बीच सम्पर्क पदाधिकारी के रूप में कार्य करना;
(च) अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के संगठन या किसी व्यक्ति से प्राप्त शिकायतों के अन्वेषण में कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग और आरक्षण आयुक्त का आवश्यक सहायता सुनिश्चित करना
9. समिति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के पदाधिकारियों का मनोनयन
राज्य सरकार हरेक स्थापना/प्रोन्नति समिति में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के एक पदाधिकारी का मनोनयन करेगी।
10. अभिलेख मांगने की शक्ति
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग का कोई सदस्य, जो नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए नियमों के उपबन्धों के अनुपालन नहीं करने से प्रतिकूलतः प्रभावित होता है, तो वह राज्य सरकार को नोटिस में उस तथ्य को ला सकेगा और उसके द्वारा आवेदन करने पर राज्य सरकार ऐसा अभिलेख मंगा सकेगी या उस पर ऐसी कार्रवाई कर सकेगा, जिसे वह उचित समझे।
11. सदभावनापूर्वक की गई कार्रवाई को सुरक्षा
कोई भी वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही किसी ऐसी बात के लिए, किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं चलाई जाएगी जो इस अधिनियम के अधीन सदभावनापूर्वक की गई हो या किए जाने के लिए आशयित हो।
12. शास्ति
यदि कोई नियुक्ति प्राधिकारी इस अधिनियम के किसी भी उपबन्ध का उल्लंघन कर नियुक्ति/प्रोन्नति करता है तो वह 1000 रुपए तक के जुर्माना या तीन महीने का कारावास या दोनों से दंडनीय होगा।
13. अभियोजन
- (1) इस अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन में किया नियुक्ति या प्रोन्नति के सम्बन्ध में जब कोई शिकायत की जाए तब यथास्थिति जिला स्तर पर जिला समाहर्त्ता/अध्यक्ष या प्रमंडल स्तर पर आयुक्त या राज्य स्तर पर कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के सहमति के पश्चात सरकार के अनुमोदन से नियुक्ति प्राधिकारी तथा सम्बन्धित पदाधिकारी के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा कर सकेगा।
- (2) वैसे मामले जिनमें नियुक्त पदाधिकारी समाहर्त्ता/उपाध्यक्ष हो तो प्रमंडल आयुक्त या प्रमंडलीय आयुक्त हो, तो कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा वैसा मुकदमा किया जाएगा।
14. कठिनाइयों का निराकरण
यदि इस अधिनियम के उपबन्धों को प्रभावी बनाने में कोई कठिनाई उत्पन्न हो तो राज्य सरकार ऐसी कार्रवाई कर सकेगा या ऐसे आदेश निर्गत कर सकेगा जो इस अधिनियम से प्रावधानों से असंगत न हो, जिसे वह कठिनाई दूर करने के लिए आवश्यक समझे।
14(क). अधिनियम की अनुसूची-1 एवं 2 में जाति/वर्ग का जोड़ा या हटाने की शक्ति पिछड़े वर्गों के लिए राज्य आयोग का अनुशंसा पर राज्य सरकार शासकीय राजपत्र में अधिसूचना द्वारा अधिनियम से उपाबद्ध अनुसूची-1 अथवा अनुसूची-2 में किसी जाति, वर्ग का यथास्थिति जोड़ या हटा सकेगी।
15. नियम बनाने की शक्ति
- (1) राज्य सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिए नियम बना सकेगा।
- (2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्तियों का व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना एता नियमावली निम्नलिखित सभा या किसी भी मामले में उपबन्ध कर सकेगा, यथा -- (क) किसी सेवा या पद पर आधा भर्ती के लिए अधिकतम आयु-सीमा; (ख) किसी सेवा या पद पर आधा भर्ती के लिए न्यूनतम अहर्ता पदायो(द); (ग) वह फार्म, जिनमें प्रत्येक स्थापना, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के ऐसी स्थापना में भर्ती किए गए व्यक्तियों की संख्या से सम्बन्धित वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी; (घ) कोई अन्य विषय जो माना जाने वाला हो वह इस अधिनियम के प्रावधानों से सम्बन्धित या उस प्रयोजना का कार्यान्वित करने के लिए अन्य कोई विषय। परन्तु, यह कि इस धारा के अधीन बनाए गए नियमों का बनाए जाने के बाद तुरन्त राज्य विधान सभा के समक्ष, जब वह कुल 14 दिनों के सत्र में हो, रखा जाएगा, जो एक ही सत्र में या दो लगातार सत्र में पड़ सकते हैं। जिस सत्र में उसे प्रस्तुत किया जाए, उस सत्र में या उसके तुरन्त बाद सत्र में सदन द्वारा जिन संशोधनों का प्रस्ताव हो अथवा यदि इस बात पर सहमत हो कि नियम बनाया ही नहीं जाना था, तो वह आदेश, यथास्थित, या तो रूपांतरित रूप में प्रभावी होगा या प्रभावी नहीं होगा, किन्तु नियम के ऐसे रूपांतरण या बातिल होने से उस नियम के अधीन पूर्व किए गए किसी कार्य की मान्यता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
16. अधिनियम का अध्यारोही प्रभाव
तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि तथा नियमों तथा न्यायालयों के किए गए किसी निर्णय या डिक्री या निर्गत किसी आदेश, अधिसूचना, परिपत्र, ज्ञापन या संकल्प में प्रतिकूल किसी बात के होते हुए भी इस अधिनियम के प्रावधान प्रभावी होंगे;
परन्तु, यह कि तत्समय प्रवृत्त कोई अन्य विधि, नियम, इस अधिनियम से पूर्व बने, निर्गत या जारी कोई आदेश, अधिसूचना, परिपत्र, ज्ञापन या संकल्प, जहां तक वे इस अधिनियम से असंगत नहीं है, प्रभावी बने रहेंगे तथा इस अधिनियम के अधीन निर्गत या पारित समझे जायेंगे।
I. अनुसूची 1
{ कृपया देखें धारा 2 (ज) } अत्यन्त पिछड़े वर्गों की सूची (1) कपरिया (2) कानू (3) कवार (4) कलंदर (5) कोछ (6) कुर्मी (महतो) केवल छोटानागपुर डिवोजन के लिये । (7) केवट (कउट) (8) कादर (9) कारा (10) कोरक (11) केवतं (12) कुमारभाग पहाड़िया (13) खटवा (14) (xxx) (15) खतोरा (16) खंगर (17) खटिक (18) खेलता (19) खतवे (20) (xxx) (21) गाड़ी (छावों) (22) गंगाई (नगश) (23) गगौता (24) (xxx) (25) गढ़वं (26) गुलगुलिया (27) गोड़ (28) चाय (29) चपोता (30) चन्द्रवंशी (कहार) (31) टिकुलहार (32) ढेकारु (33) तांता (ततवा) (34) तमरिया (35) तुरहा (36) तियर (37) थारु (38) धातुक (39) घामिन (40) धौमर (41) धनवार (42) नानिया (43) नड़या (44) नाई (45) नामशूद (46) पांड़ा (47) पाब (भेंडिहार पड़ेरी) (48) प्रधान (49) पिनगनिया (50) पहिरा (51) बारी (52) बेलदार (53) बिन्द (54) (xxx) (55) सेखड़ा (56) बागदा (57) भुईयार (58) भार (59) (xxx) (60) भास्कर (61) मालो (62) मांगर (63) मदार (64) मल्लाह (सुरहिया) (65) मछवार (66) मारकण्डे (67) मोरियारा (68) मलार (मालहोर) (69) मौलिक (70) राजबाबी (71) राजभर (72) रगवा (73) वनपर (74) (xxx) (75) सोटा (सोटा) (76) (xxx) (77) अगरिया (78) पधारी (79) प्रबल (80) कसाब (कसाई) मुस्लिम (81) चाक (मुस्लिम) (82) डफाली (मुस्लिम) (83) धुनिया (मुस्लिम) (84) धोबी (मुस्लिम) (85) नट (मुस्लिम) (86) पमरिया (मुस्लिम) (87) भठियारा (मुस्लिम) (88) भाट (मुस्लिम) (89) मेहतर, लाल बेग्या, हलालखोर, भंगी (मुस्लिम) (90) मिरियासिन (मुस्लिम) (91) मदारा (मुस्लिम) (92) मोरशिकार (मुस्लिम) (93) साईं (मुस्लिम) (94) मोमिन (मुस्लिम) (95) जमात (96) चूड़ीहार (मुस्लिम) (97) प्रजापति (कुम्हार) (98) राईन या कुंजरा (मुस्लिम) (99) सोय नोट - उन जाति तथा वर्गों को जिन्हें मुस्लिम नहीं लिखा गया है हिंदू तथा मुसलमान दोनों जाति का समझना चाहिए जैसे- तेली में दोनों हिंदू तथा मुसलमान तेली।
II. अनुसूची 2
[ कृपया देखें धारा 2 (ज) ] पिछड़े वर्गों की सूची (1) (xxx) (2) कागजी (3) कमार (लोहार और कर्मकार) (4) कुशवाहा (कोइरी) (5) कोस्ता (6) गद्दी (7) घटवार (8) (xxx) (9) चनउ (10) जदुप्तिया (11) जोगी (जुगी) (12) तमोली (13) तेली (14) देबहार (15) नालबंद (मुस्लिम) (16) (xxx) (17) परया (18) बढ़ई (19) बड़ई (21) जुलाहा (जुलाहे, धुनिया, रफूगर, रंगरेज, पमरिया, कसाई, कलाल, कहार, कमरपुरे, वेश, बिन्दुरिया, फकीर, मदारी, बेदिया, अबिदा सैयद (मुसलिम) बड़वान, अबदली वेश, पेदशर, कसाई) (21) कुंजरा (कुंजरे) (मुस्लिम) (22) यादव (ग्वाला, अहीर, गोरा, घासी, मेहर) (23) राजवंश (रिसिया या पोलिया) (24) रंगरेज (मुस्लिम) (25) केँयवट (26) (xxx) (27) लहेड़ी (28) शिवहरी (29) सोवार (30) सूतधार (31) सूतियार (32) इदरसी या दर्जी (मुस्लिम) (33) ईसाई धर्मावलम्बी (हरिजन) (34) ईसाई धर्मावलम्बी (अन्य पिछड़ी जाति) (35) कुर्मी (महतो) (36) भाट (हिंदू) (37) दांगी नोट:---इन जाति/तत्व वर्गों को जिन्हें मुसलिम नहीं किया गया है हिंदू माना दोनों जाति का समझना चाहिए जैसे तेली को दोनों हिंदू तथा मुसलमान तेली। 1 (Amendment). Short title, extent and commencement (i) This Act may be called Jharkhand Pado Evum Sewaon Ki Riktion Mein Arakshan (Anusuchit Jation, Anusuchit Janjation Evum Pichchre Vergon Ke Liye) (Amendment) Act-2011. (ii) It extends to the whole state of the Jharkhand. (iii) It will come into force with immediate effect. 2 (Amendment). Substitution of Section 4(6) Subsection 4 (6) (Ka, Kha, Ga and Gha) of the Jharkhand Pado Evum Sewaon Ki Riktion Mein Arakshan (Anusuchit Jation, Anusuchit Janjation Evum Pichchre Vergon Ke Liye) Adhinium-2001 be deleted and the following be substituted as 4 (6) in lieu of that :- "During appointment or promotion, in case of unavailability of suitable candidates of reserved category, the reserved posts of services/cadres/posts of Services under the State, the vacancies of posts be carry forwarded for three years, as such, the vacant posts, in case of unavailability of suitable candidates (Appointment/promotion) during two appointment years, the State Government is empowered to be fill up the post by adopting special recruitment procedure during the third year by adopting special recruitment procedure for reserved posts. The posts earmarked for a reserved category will be filled up by the same category."
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अनुसूची 1
{ कृपया देखें धारा 2 (ज) } अत्यन्त पिछड़े वर्गों की सूची
- (1) कपरिया
- (2) कानू
- (3) कवार
- (4) कलंदर
- (5) कोछ
- (6) कुर्मी (महतो) केवल छोटानागपुर डिवोजन के लिये ।
- (7) केवट (कउट)
- (8) कादर
- (9) कारा
- (10) कोरक
- (11) केवतं
- (12) कुमारभाग पहाड़िया
- (13) खटवा (14) (xxx)
- (15) खतोरा
- (16) खंगर
- (17) खटिक
- (18) खेलता
- (19) खतवे (20) (xxx)
- (21) गाड़ी (छावों)
- (22) गंगाई (नगश)
- (23) गगौता (24) (xxx)
- (25) गढ़वं
- (26) गुलगुलिया
- (27) गोड़
- (28) चाय
- (29) चपोता
- (30) चन्द्रवंशी (कहार)
- (31) टिकुलहार
- (32) ढेकारु
- (33) तांता (ततवा)
- (34) तमरिया
- (35) तुरहा
- (36) तियर
- (37) थारु
- (38) धातुक
- (39) घामिन
- (40) धौमर
- (41) धनवार
- (42) नानिया
- (43) नड़या
- (44) नाई
- (45) नामशूद
- (46) पांड़ा
- (47) पाब (भेंडिहार पड़ेरी)
- (48) प्रधान
- (49) पिनगनिया
- (50) पहिरा
- (51) बारी
- (52) बेलदार
- (53) बिन्द (54) (xxx)
- (55) सेखड़ा
- (56) बागदा
- (57) भुईयार
- (58) भार (59) (xxx)
- (60) भास्कर
- (61) मालो
- (62) मांगर
- (63) मदार
- (64) मल्लाह (सुरहिया)
- (65) मछवार
- (66) मारकण्डे
- (67) मोरियारा
- (68) मलार (मालहोर)
- (69) मौलिक
- (70) राजबाबी
- (71) राजभर
- (72) रगवा
- (73) वनपर (74) (xxx)
- (75) सोटा (सोटा) (76) (xxx)
- (77) अगरिया
- (78) पधारी
- (79) प्रबल
- (80) कसाब (कसाई) मुस्लिम
- (81) चाक (मुस्लिम)
- (82) डफाली (मुस्लिम)
- (83) धुनिया (मुस्लिम)
- (84) धोबी (मुस्लिम)
- (85) नट (मुस्लिम)
- (86) पमरिया (मुस्लिम)
- (87) भठियारा (मुस्लिम)
- (88) भाट (मुस्लिम)
- (89) मेहतर, लाल बेग्या, हलालखोर, भंगी (मुस्लिम)
- (90) मिरियासिन (मुस्लिम)
- (91) मदारा (मुस्लिम)
- (92) मोरशिकार (मुस्लिम)
- (93) साईं (मुस्लिम)
- (94) मोमिन (मुस्लिम)
- (95) जमात
- (96) चूड़ीहार (मुस्लिम)
- (97) प्रजापति (कुम्हार)
- (98) राईन या कुंजरा (मुस्लिम)
- (99) सोय नोट - उन जाति तथा वर्गों को जिन्हें मुस्लिम नहीं लिखा गया है हिंदू तथा मुसलमान दोनों जाति का समझना चाहिए जैसे- तेली में दोनों हिंदू तथा मुसलमान तेली।
अनुसूची 2
[ कृपया देखें धारा 2 (ज) ] पिछड़े वर्गों की सूची
(1) (xxx)
- (2) कागजी
- (3) कमार (लोहार और कर्मकार)
- (4) कुशवाहा (कोइरी)
- (5) कोस्ता
- (6) गद्दी
- (7) घटवार (8) (xxx)
- (9) चनउ
- (10) जदुप्तिया
- (11) जोगी (जुगी)
- (12) तमोली
- (13) तेली
- (14) देबहार
- (15) नालबंद (मुस्लिम) (16) (xxx)
- (17) परया
- (18) बढ़ई
- (19) बड़ई
- (21) जुलाहा (जुलाहे, धुनिया, रफूगर, रंगरेज, पमरिया, कसाई, कलाल, कहार, कमरपुरे, वेश, बिन्दुरिया, फकीर, मदारी, बेदिया, अबिदा सैयद (मुसलिम) बड़वान, अबदली वेश, पेदशर, कसाई)
- (21) कुंजरा (कुंजरे) (मुस्लिम)
- (22) यादव (ग्वाला, अहीर, गोरा, घासी, मेहर)
- (23) राजवंश (रिसिया या पोलिया)
- (24) रंगरेज (मुस्लिम)
- (25) केँयवट (26) (xxx)
- (27) लहेड़ी
- (28) शिवहरी
- (29) सोवार
- (30) सूतधार
- (31) सूतियार
- (32) इदरसी या दर्जी (मुस्लिम)
- (33) ईसाई धर्मावलम्बी (हरिजन)
- (34) ईसाई धर्मावलम्बी (अन्य पिछड़ी जाति)
- (35) कुर्मी (महतो)
- (36) भाट (हिंदू)
- (37) दांगी नोट:---इन जाति/तत्व वर्गों को जिन्हें मुसलिम नहीं किया गया है हिंदू माना दोनों जाति का समझना चाहिए जैसे तेली को दोनों हिंदू तथा मुसलमान तेली। 1 (Amendment). Short title, extent and commencement
- (i) This Act may be called Jharkhand Pado Evum Sewaon Ki Riktion Mein Arakshan (Anusuchit Jation, Anusuchit Janjation Evum Pichchre Vergon Ke Liye) (Amendment) Act-2011.
- (ii) It extends to the whole state of the Jharkhand.
- (iii) It will come into force with immediate effect. 2 (Amendment). Substitution of Section 4(6) Subsection 4
- (6) (Ka, Kha, Ga and Gha) of the Jharkhand Pado Evum Sewaon Ki Riktion Mein Arakshan (Anusuchit Jation, Anusuchit Janjation Evum Pichchre Vergon Ke Liye) Adhinium-2001 be deleted and the following be substituted as 4
- (6) in lieu of that :- "During appointment or promotion, in case of unavailability of suitable candidates of reserved category, the reserved posts of services/cadres/posts of Services under the State, the vacancies of posts be carry forwarded for three years, as such, the vacant posts, in case of unavailability of suitable candidates (Appointment/promotion) during two appointment years, the State Government is empowered to be fill up the post by adopting special recruitment procedure during the third year by adopting special recruitment procedure for reserved posts. The posts earmarked for a reserved category will be filled up by the same category."