Bare Act
The MP Rajya Suraksha & Lok Vyavashtha Act, 1980
0. Preamble
मध्यप्रदेश राज्य स ु रक्षा तथा लोक व्यवस्था अधिनियम, 1980 (क्र. 30 सि ् 1981) अि ु क्रमणिका
अध्याय 1 प्रारम्भिक
1. संक्षक्षप्त िाम, ववस्तार तथा अवधि
(1) इस अधिननयम का सक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश राज्य सुरिा तथा लोक व्यिस्था अधिननयम, 1980 है । (2) इसका विस्तार सम्पूणब मध्यप्रदेश पर है । (3) यह इसके प्रारम्भ होने के तीन िषब का अिसान हो जाने पर प्रभािशील नहीं रहेगा, लसिाय उन र्ातों के सम्र्न्ि मेँ जो क्रक ऐसे अिसान के पूिब की गयी हों या करने से छोड़ दी गयी हों ।
2. पररभाषा
इस अध्याय में "ननर्बन्िन आदेश" से अलभप्रेत है िारा 3 के अिीन क्रकया गया आदेश ।
3. ननर्बन्िन आदेश करने की शक्तत
(1) यदद राज्य सरकार या क्रकसी क्जला मक्जस्रेट क्रकसी व्यक्तत के सम्र्न्ि में यह समािान हो जाता है क्रक िह क्रकसी ऐसी रीनत में कायब कर रहा है या उसके ऐसी रीनत में कायब करने की सम्भािना है क्जससे राज्य की सुरिा पर या लोक व्यिस्था र्नाये रिने पर प्रनतकूल प्रभाि पड़ता है और यह क्रक इसे इस प्रकार कायब करने से रोकने के ललए जन सािारण के दहत में यह आिश्यक है क्रक इस िारा के अिीन आदेश क्रकया जाय, तो यथाक्स्थनत राज्य सरकार या क्जला मक्जस्रेट ऐसा आदेश कर सकेगा क्जसमें - - (क) यह ननदेलशन क्रकया जा सकेगा क्रक िह, उस क्स्थनत के लसिाय जहाँ तक क्रक उसे उस आदेश के उपर्न्िों द्िारा या ऐसे प्राधिकारी या व्यक्ततयों द्िारा, जो क्रक उस आदेश में विननददबष्ट क्रकये जाये, अनुज्ञात क्रकया जाय, मध्यप्रदेश के क्रकसी ऐसे िेत्र या स्थान में नहीं रहेगा क्रक उस आदेश में विननददबष्ट क्रकया जाय; (ि) उससे यह अपेिा की जा सकेगी क्रक िह मध्यप्रदेश के ऐसे स्थान में या ऐसे िेत्र के भीतर में विननददबष्ट क्रकया जाय और यदद िह पहले से ही िहीँ न हो, तो उस स्थान या िेत्र में ऐसे समय के भीतर चला जाय जो क्रक आदेश में विननददबष्ट क्रकया जाय; (ग) उससे यह अपेिा की जा सकेगी क्रक िह ऐसी रीनत में, ऐसे समयों पर तथा ऐसे प्राधिकारी या व्यक्तत को, जैसा क्रक आदेश में विननददबष्ट क्रकया जाय, अपने आने-जाने की सूचना दे या उसके समि उपक्स्थत हो या अपने आने-जाने की सूचना भी दे और उपक्स्थत भी हो ; (घ) ऐसे व्यक्ततयों से, जो क्रक उस आदेश में उक्ल्लखित क्रकये जाये, सहयुतत रहने या उनसे सम्पकब रिने के सम्र्न्ि में उन पर ऐसे ननर्बन्िन अधिरोवपत क्रकये जा सकेंगे जैसे क्रक उस आदेश में विननददबष्ट क्रकये जायें; (ङ) क्रकसी भी ऐसी िस्तु यी िस्तुओं का, जो क्रक उस आदेश में, विननददबष्ट की जायें, उसके द्िारा कब्जे में रिा जाना प्रनतवषद्ि या ननर्बक्न्ित क्रकया जा सकेगा । (2) क्रकसी भी ऐसे व्यक्तत को, जो राज्य का मामूली तौर से ननिासी हो, राज्य से अपिक्जबत क्रकये जाने या हटाये जाने का ननदेश देते हुए कोई ननर्बन्िन आदेश क्रकया जायेगा और क्जला मक्जस्रेट द्िारा क्रकये क्रकसी ऐसे आदेश में, क्रकसी व्यक्तत को उस क्जले से, क्जसमें िह पहले से ही ननिास कर रहा है, अपिक्जबत जाने या हटाये जाने का ननदेश नहीं ददया जाएगा । (3) जहाँ क्रकसी व्यक्तत के सम्र्न्ि में उपिारा (1) के िण्ड (ि) के अिीन आदेश ददया जाता िहाँ राज्य सरकार ऐसे व्यक्तत के ललए उस कालािधि के दौरान क्जसमें क्रक ननर्बिन आदेश प्रिृर्त् रहता र्ात सुवििा का प्रर्न्ि करेगी तथा उसे ऐसे भरण-पोषण भत् ते का संदाय करेगी जैसा क्रक िह उधचत समझे: परन्तु इसमें की कोई र्ात उस क्स्थनत में लागू नहीं होगी जर्क्रक ऐसा आदेश क्रकसी व्यक्तत से यह अपेिा करता है क्रक िह ऐसे नगर या स्थान में, जहाँ क्रक िह मामूली तौर से ननिास कर रहा है, ननिास करे या र्ना रहे । (4) (क) जहाँ क्रकसी क्जला मक्जस्रेट द्िारा कोई ननर्बन्िन आदेश क्रकया जाता है, िहाँ क्जला मक्जस्रेट तुरन्त, क्रकन्तु अधिक से अधिक चार ददन के भीतर, आदेश की एक प्रनत, आदेश क्रकये जाने के आिारों तथा ऐसी अन्य विलशक्ष्टयों के साथ जो क्रक उसकी राय में उस विषय से सम्र्क्न्ित हों, राज्य सरकार को भेजेगा और आदेश िण्ड (ि) तथा (ग) के उपर्न्िों के अध्यिीन रहते हुए, पन्रह ददन की कालािधि तक प्रिृर्त् रहेगा । (ि) िण्ड क के अिीन ननर्बन्िन आदेश की प्रनत प्राप्त होने पर, राज्य सरकार आदेश की पुक्ष्ट कर सकेगी, उसे उपान्तररत कर सकेगी या उसे वििक्ण्डत कर सकेगी । (ग) ऐसा कोई ननर्बन्िन आदेश, जो (एक) राज्य सरकार द्िारा क्रकया गया है; या (दो) क्जला मक्जस्रेट द्िारा क्रकया गया है तथा राज्य सरकार द्िारा िण्ड (ि) के अिीन पुक्ष्टकृत या उपान्तररत क्रकया गया है । (5) यदद कोई व्यक्तत क्रकसी ननर्बन्िन आदेश के उल्लंघन में क्रकसी िेत्र या स्थान में पाया जाता ऐझे क्रकसी आदेश की अपेिाओं के अनुसार क्रकसी िेत्र या स्थान को छोड़ने में चूक करता है, तो (6) के उपर्न्िों पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना, उसे क्रकसी पुललस अधिकारी द्िारा ऐसे िेत्र या से हटाया जा सकेगा । (6) यदद कोई व्यक्तत क्रकसी ननर्बन्िन आदेश के उपर्न्िों का उल्लंघन करेगा तो िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो, सकेगी, या जुमाबने से, या दोनों से दण्डनीय होगा ।
4. ननर्बन्िन आदेशों का प्रनतसंहरि
(1) ननर्बन्िन आदेश क्रकसी भी समय, राज्य शासन द्िारा प्रनतसंहत या उपान्तीरत क्रकया जा सकेगा । (2) क्रकसी ननर्बन्िन आदेश का प्रनतसंहरण या अिसान, उसी व्यक्तत के विरुद्ि, क्रकसी ऐसे में, क्जसमें क्रक ऐसे प्रनतसंहरण या अिसान की तारीि के पश्चात् ऐसे नये तथ्य उद् भूत हो गये हों, । क्जनके आिार पर राज्य सरकार का यह समािान हो जाय क्रक ऐसा आदेश क्रकया जाना चादहए, नया ननर्बन्िन आदेश क्रकये जाने को िक्जबत नहीं करेगा: परन्तु कोई भी ऐसा नया आदेश केिल राज्य सरकार द्िारा ही क्रकया जायेगा ।
5. ननर्बन्िन आदेश का ननलम्र्न
(1) राज्य सरकार, क्रकसी ननर्बन्िन आदेश का प्रितबन क्रकसी शतब के या ऐसी शतों पर, जैसी क्रक िह उधचत समझे और जो उस व्यक्तत द्िारा विरुद्ि ननर्बन्िन आदेश क्रकया गया है, प्रनतग्रहीत की जायें, ननलक्म्र्त कर सकेगी और िह क्रकसी भी समय ननलम्र्न आदेश को रद्द कर सकेगी । (2) उपिारा (1) के अिीन विननददबष्ट की गई शतों में, उन शतों के, क्जन पर आदेश ननलंबर्त क्रकया गया है, सम्यक् अनुपालन के ललये प्रनतभूत सदहत या प्रनतभूत रदहत र्न्िपत्र ननष्पाददत क्रकया जाने की अपेिा की जा सकेगी । (3) कोई भी ऐसा व्यक्तत, क्जसके सम्र्न्ि में इस िारा के अिीन ननर्बन्िन आदेश ननलंबर्त कर ददया जाता है, ऐसे समय तथा स्थान पर और ऐसे प्राधिकारी के समि उपक्स्थत होगा जैसा क्रक यथाक्स्थनत ननलम्र्न आदेश में या ऐसे ननलम्र्न को रद्द करने िाले आदेश में विननददबष्ट क्रकया गया हो । (4) यदद कोई व्यक्तत उपिारा (3) में विननददबष्ट की गई रीनत में उपक्स्थत होने में पयाबप्त कारण के बर्ना चूक करेगा, तो िह कारािास से, जो तीन िषब तक का हो सकेगा, या जुमाबने से या दोनों से दण्डनीय होगा । (5) यदद कोई ऐसा व्यक्तत, क्जसके सम्र्न्ि में ननर्बन्िन आदेश ननलक्म्र्त कर ददया जाता है, इस िारा के अिीन या उसके द्िारा ननष्पाददत क्रकये गये र्ंिपत्र में उस पर अधिरोवपत की गई शतों में से क्रकसी शतब की पूनतब करने में असफल रहेगा तो क्जला मक्जस्रेट र्ंिपत्र को राज्य सरकार के पि में समपहत घोवषत कर सकेगा और उसके द्िारा आर्द्ि कोई व्यक्तत उसकी शाक्स्त का संदाय करने का दायी होगा ।
6. ननर्बन्िन आदेश के सलए आिारो का प्रकटि
(1) ननर्बन्िन आदेश क्रकया जाने के पश्चात् यथाशतय शीघ्र, क्रकन्तु अधिक से अधिक एक सप्ताह के भीतर आदेश करने िाला प्राधिकारी उस व्यक्तत को, क्जसके विरुद्ि आदेश पाररत क्रकया गया है, िे आिार, क्जन पर िह आदेश क्रकया गया है, उस सीमा तक संसूधचत करेगा जहाँ तक क्रक ऐसी संसूचना उन तथ्यों को प्रकट क्रकये बर्ना दी जा सकती हो । प्रकट करना िह लोक दहत के विरुद्ि मानता है, और साथ ही ऐसी अन्य विलशक्ष्टयाँ संसूधचत करेगा जो क्रक उसकी राय में उस आदेश के विरुद्ि राज्य सरकार को अभ्यािेदन करने के ललए उस व्यक्तत को समथब र्नाने के ललये पयाबप्त हैं, और उसे ऐसा अभ्यािेदन करने के उसके अधिकार के सम्र्न्ि में जानकारी देगा, तथा उसे ऐसा करने के ललए शीघ्रतम अिसर देगा । (2) िह व्यक्तत, क्जसके विरुद्ि ननर्बन्िन आदेश क्रकया गया है, उस तारीि से, क्जसकी क्रक उपिारा (1) में ननददबष्ट ननर्बन्िन आदेश के आिार तथा अन्य विलशक्ष्टयाँ उसको संसूधचत की जाती हैं, पंरह ददन के भीतर, उस आदेश के विरुद्ि राज्य सरकार को अभ्यािेदन कर सकेगा ।
7. सलाहकार पररषद् का गठि
(1) राज्य सरकार इस अध्याय के प्रयोजन के ललए एक सलाहकार पररषद् का गठन करेगी । (2) सलाहकार पररषद् में ऐसे तीन व्यक्तत होगे जो उच्च न्यायालय के न्यायािीश हैं, या रह चुके हैं या उस रूप में ननयुतत क्रकये जाने के ललए अदहत हैं और ऐसे व्यक्तत राज्य सरकार द्िारा ननयुतत क्रकये जायेगे: परन्तु सलाहकार पररषद् का कम से कम एक सदस्य ऐसा व्यक्तत होगा जो उच्च न्यायालय का न् यायािीश है या रह चुका है । (3) राज्य सरकार सलाहकार पररषद् के सदस्यों में से एक ऐसे सदस्य को, जो उच्च न्यायालय का न्यायािीश है या रह चुका है, सलाहकार पररषद् का अध्यि ननयुतत करेगी ।
8. सलाहकार पररषद को निदेश
िारा 6 की उपिारा (2) में ननददबष्ट अभ्यािेदन के प्राप्त होने के पश्चात या उस दशा में जर्क्रक कोई अभ्यािेदन प्राप्त न हुआ हो, उसके ललये ननयत क्रकये गये समय का अिसान हो जाने के पश्चात् राज्य सरकार उस व्यक्तत पर, क्जसके सम्र्न्ि में आदेश क्रकया गया है, आदेश की तामील हो जाने के तीस ददन के भीतर, िे आिार, क्जन पर क्रक आदेश क्रकया गया है, तथा सम्र्क्न्ित व् यक्तत द्िारा क्रकया गया अभ् यािेदन, यदद कोई हो, क्रकसी भी ऐसी अन्य सुसंगत सामग्री सदहत, जैसी क्रक राज् य सरकार आिश्यक सामझ िारा 7 के अिीन गदठत सलाहकार पररषद् के समि रिेगी ।
9. सलाहकार पररषद की प्रकक्रया
(1) सलाहकार पररषद् अपने समि रिी गई सामग्री पर विचार करने के पश्चात् और राज्य सरकार से या सम्र्क्न्ित व्यक्तत से ऐसी रीनत और जानकारी क्जसे िह आिश्यक समझे, मांगने के पश्चात् और यदद क्रकसी विलशष्ट मामले में िह ऐसा करना आिश्यक समझती हो, या यदद सम्र्क्न्ित व्यक्तत यह चाहता हो क्रक उंसकी सुनिाई की जाय, तो स्ियं उसे सुनने के पश्चात् अपनी ररपोटब ननर्बन्िन आदेश की तारीि से साठ ददन के भीतर राज्य सरकार को भेजेगी । (2) सलाहकार पररषद् की ररपोटब के एक पृथक् भाग में सलाहकार पररषद् की इस सम्र्न्ि में राय विननददबष्ट को जायेगी क्रक तया सम्र्क्न्ित व्यक्तत के विरुद्ि ननिबचन आदेश क्रकये जाने के ललए पयाबप्त कारण हैं या नहीं अथिा तया ननर्बन्िन आदेश को उपांतररत क्रकया जाना आिश्यक है । (3) जर् सलाहकार पररषद् का गठन करने िाले सदस्यों के र्ीच मतभेद हो, तो ऐसे सदस्यों की र्हुसंख्या की राय को प्रररषद् की राय समझा जायेगा । (4) राज्य सरकार तथा सलाहकार पररषद् के र्ीच पत्र-व्यिहार में अन्तविबष्ट समस्त विलशक्ष्टयाँ तथा सलाहकार पररषद् द्िारा की गई ररपोटब, ररपोटब के उस भाग के लसिाय क्जसमें क्रक सलाहकार पररषद की राय विननददबष्ट है, गोपनीय होंगी तथा तत्समय प्रिृर्त् क्रकसी विधि में अन्तविबष्ट क्रकसी र्ात के होते हुए भी, कोई भी न्यायालय क्रकसी लोक सेिक से यह अपेिा करने का हकदार नहीं होगा क्रक िह पूिोतत दस्तािेजों में से कोई दस्तािेज उसके समि पेश करे । (5) इस िारा में की कोई भी र्ात क्रकसी ऐसे व्यक्तत को, क्जसके विरुद्ि ननर्बन्िन आदेश क्रकया गया है, सलाहकार पररषद् को क्रकये गये क्रकसी ननदेश से सम्र्क्न्ित क्रकसी मामले में क्रकसी विधि व्यिसायी द्िारा उपसंजात होने के ललए हकदार नहीं र्नायेगी ।
10. व्यम्ततयों के दलों तथा समूहों का नततर-बर्तर ककया जािा
जर् कभी क्जला मक्जस्रेट, को यह प्रतीत हो क्रक क्जले में व्यक्ततयों के क्रकसी दल या समूह के आने-जाने या पड़ाि से ितरा या संता संत्रास काररत हो रहा है या ऐसा आना-जाना या पड़ाि ितरा या संत्रास काररत करने के ललए प्रकक्ल्पत है या ऐसा युक्ततयुतत संदेह है क्रक ऐसे दल या समूह या उसके सदस्यों द्िारा विधि विरुद्ि पररकल्पना की जा रही है, तो क्जला मक्जस्रेट, ऐसे व्यक्ततयों को, जो ऐसे दल या समूह के नेता या मुखिया प्रतीत होते हों, सम्र्ोधित क्रकये गये तथा डोंडी वपटिाकर या अन्यथा जैसा क्रक क्जला मक्जस्रेट उधचत समझे, प्रकालशत क्रकये गये आदेश द्िारा, ऐसे दल या समूह के सदस्यों को ननदेश दे सकेगा क्रक, - (क) िे ऐसी रीनत में आचरण करें जो दहंसा तथा संत्रास का ननिारण करने के ललए आिश्यक हो, या (ि) िे नततर-बर्तर हो जायें तथा उनमें से प्रत्येक सदस्य क्जले या उसके क्रकसी भाग या िेत्र तथा उसके समीपस्थ क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके क्रकसी भाग के र्ाहर ऐसे समय के भीतर चला जाय जो क्जला मक्जस्रेट विननददबष्ट करें, और यथाक्स्थनत उतत क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा ऐसे समीपस्थ क्जलों या उनके भाग में प्रिेश न करे या उस स्थान को न लौटे जहाँ से चले जाने के ललए उनमें से प्रत्येक को ननदेश ददया गया था ।
11. अपराि करिे के सलए आमादा व्यम्ततयों का हटाया जािा
जर् कभी क्जला मक्जस्रेट को यह प्रतीत हो क्रक - - (क) क्रकसी व्यक्तत के आने-जाने या कायों से मानि शरीर या सम्पवर्त् को संत्रास, ितरा या अपहाननकाररत हो रही है, या ऐसा आना-जाना या कायब ऐसा संत्रास, ितरा या अपहाननकाररत करने के ललए प्रकक्ल्पत है; या (ि) यह विश्िास करने के ललए युक्ततयुतत कारण हैं क्रक ऐसा व्यक्तत क्रकसी ऐसे अपराि के, क्जसमें र्ल या दहंसा अन्तिबललत है, या भारतीय दण्ड संदहता, 1860 (1860 का सं. 45) के अध्याय 12, 16 या 17 या उसकी िारा 506 या 509 के अिीन दण्डनीय क्रकसी अपराि के करने में या ऐसे क्रकसी अपराि के दुष्प्रेरण में संलग्न होने को आमादा है और जर् क्जला मक्जस्रेट की राय में, ऐसे व्यक्तत के विरुद्ि सािीगण अपने शरीर या समपवर्त् की सुरिा के र्ारे में उसकी ओर से आशंका होने के कारण, िुले आम साक्ष्य देने हेतु आगे आने के ललए रजामंद नहीं है; या (ग) क्रकसी आप्रिासी के लगातार ननिास से क्रकसी महामारी का प्रादुर्भाबि होना संभाव्य है; तो क्जला मक्जस्रेट उस पर सम्यक् रूपेण तामील क्रकये गये ललखित आदेश द्िारा डोडी वपटिाकर या अन्यथा, जैसा क्रक क्जला मक्जस्रेट उधचत समझे, ऐसे व्यक्तत या आप्रिासी को ननदेश दे सकेगा क्रक - - (क) िह ऐसी रीनत में आचरण करे जो दहंसा या संत्रास या ऐसे रोग के प्रादुर्भाबि या प्रसार का ननिारण करने के ललए आिश्यक प्रतीत हो; या (ि) िह क्जले या उसके क्रकसी भाग या ऐसे िेत्र तथा उसके समीपस्थ क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके क्रकसी भाग के र्ाहर ऐसे मागब से तथा ऐसे समय के भीतर जैसा क्रक क्जला मक्जस्रेट विननददबष्ट करे, चला जाय और यथाक्स्थनत उतत क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा ऐसे समीपस्थ क्जलों या उनके भाग में, जहाँ से क्रक हट जाने का उसे ननदेश ददया गया था, प्रिेश न करें या न लौटें ।
12. कनतपय अपरािों के सलए दोषससद्ि ठहराये गये व्यम्ततयों का हटाया जािा
यदद कोई व्यक्तत, (क) (एक) भारतीय दण्ड संदहता, 1860 (1860 का सं. 45) के अध्याय 12, 16 या 17 के या उसकी िारा 506 या 509 के अिीन क्रकसी अपराि का; या (दो) लसविल अधिकार संरिण अधिननयम, 1955 (1955 का सं. 22) के अिीन क्रकसी अपराि का; या (ि) स्त्री तथा लड़की अनैनतक व्यापार दमन अधिननयम, 1956 (1956 सं. 104) के अिीन क्रकसी अपराि का दो र्ार; या (ग) मध्यप्रदेश राज्य में लागू हुए रूप में सािबजननक द्युत अधिननयम, 1867 (1867 का सं. 3) की िारा 3 या 4 के अिीन क्रकसी अपराि का तीन िषब की कालािधि के भीतर तीन र्ार; लसद्िदोष ठहराया गया है तो क्जला मक्जस्रेट यदद उसके पास यह विश्िास करने का कारण हो क्रक ऐसे व्यक्तत के सम्र्न्ि में सम्भािना है क्रक िह उस अपराि क्जसके सम्र्न्ि में िह लसद्िदोष ठहराया गया था, समरूप कोई अपराि करने में स्ियं को पुनःसंलग्न करेगा, ऐसे व्यक्तत को यह ननदेश दे सकेगा क्रक िह क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र या उसके समीपस्थ क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके भाग के र्ाहर, ऐसे मागब से तथा ऐसे समय के भीतर, जैसा क्रक क्जला मक्जस्रेट आदेश दे, चला जाय और यथाक्स्थनत उस क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा ऐसे समीपस्थ क्जलों या उनके भाग में, जहाँ से क्रक हट जाने का उसे ननदेश ददया गया था, प्रिेश न करे या न लौटे । स्पष्टीकरण - - इस िारा के प्रयोजन के ललए, अलभव्यक्तत ''उस अपराि के, क्जसके ललए जो व्यक्तत लसद्िदोष ठहराया गया था, समरूप अपराि'' से अलभप्रेत है - - (एक) िण्ड (क) में िखणबत अपराि के ललए लसद्िदोष ठहराये गये व्यक्तत के मामले में, उस िण्ड में िखणबत भारतीय दण्ड संदहता, 1860 (1860 का सं. 45) के अध्यायों या िाराओं में से क्रकसी के भी अन्तगबत आने िाले अपराि या उस िण्ड के उपिण्ड (2) में िखणबत अधिननयम के उपर्न्िों के अन्तगबत आने िाला अपराि; और (दो) िण्ड (ि) तथा (ग) में िखणबत अपराि के ललए लसद्िदोष ठहराये गये व्यक्तत के मामले में उतत िण्डों में िमश: िखणबत अधिननयमों के उपर्न्िों के अन्तगबत आने िाले अपराि ।
13. िारा 11, 12 या 13 के अिीि आदेशों के प्रवतबि की कालावधि
यथाक्स्थनत क्रकसी क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा उसके समीपस्थ क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके क्रकसी भागों में प्रिेश न करने के सम्र्न्ि में िारा 11, 12 या 13 के अिीन ददया गया ननदेश ऐसी कालािधि के ललए होगा जो क्रक उसमें विननददबष्ट की जाय और क्रकसी भी दशा में उस तारीि से, क्जसको क्रक िह क्रकया था, एक िषब से अधिक की कालािधि के ललए नहीं होगा । (2) पूिोतत अनुज्ञा क्रकसी भी समय यथाक्स्थनत राज्य सरकार या क्जला मक्जस्रेट द्िारा प्रनतसंहत की जा सकेगी । (3) उपिारा (1) के अिीन क्रकसी व्यक्तत को यथाक्स्थनत उस क्जले या उसके ऐसे भाग या िै िेत्र तथा क्रकसी समीपस्थ क्जले या क्जलों या उसके/उनके भाग में, क्जससे हट जाने के ललए उसे ननदेश ददया गया था, प्रिेश करने या लौटने की अनुज्ञा देते समय उतत अनुज्ञा देने िाला प्राधिकारी उससे यह अपेिा कर सकेगा क्रक िह उस पर अधिरोवपत की गई शतों के सम्यकू अनुपालन के ललए प्रनतभूत सदहत या रदहत र्ंि-पत्र ननष्पाददत करे । (4) कोई भी व्यक्तत जो उपिारा (1) के अिीन मंजूर की गई अनुज्ञा के अनुसरण में यथाक्स्थनत उस क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा क्रकसी समीपस्थ क्जले या क्जलों या उसके/उनके भाग में; जहां से हट जाने के ललये उसे ननदेश ददया गया था, प्रिेश करता है या लौटता है, उतत अनुज्ञा में अधिरोवपत की गई शतो का अनुपालन करेगा, और उस अस्थायी कालािधि की, क्जसके ललए क्रक प्रिेश करने या लौटने की अनुज्ञा उसे दी गई थी, समाक्प्त पर या ऐसी अनुज्ञा का पूिबतर प्रनतसंहरण हो जाने पर यथाक्स्थनत ऐसे क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा क्रकसी समीपस्थ क्जला या क्जलों या उसके / उनके भाग के र्ाहर चला जायेगा, और िारा 11, 12 या 13 के अिीन ददये गये मूल आदेश में विननददबष्ट कालािधि की अपयबिेलसत अिलशष्ट अिधि में, निीन अनुज्ञा के बर्ना, उसमें प्रिेश नहीं करेगा या िहाँ नहीं लौटेगा । (5) यदद ऐसा व्यक्तत अधिरोवपत की गई शतो में से क्रकसी शतब का अनुपालन नहीं करता है या तदनुसार हटता नहीं है या इस प्रकार हट जाने के पश्चात् उस क्जले या उसके क्रकसी भाग या ऐसे िेत्र तथा क्रकसी समीपस्थ क्जले या क्जलों या उसके/उनके भाग में, निीन अनुज्ञा के बर्ना प्रिेश करता है या लौटता है, तो क्रकसी अन्य कायबिाही पर, जो क्रक इस अधिननयम के अिीन उसके विरुद्ि की जा सकती हो प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना क्जला मक्जस्रेट उसे धगरफ्तार करिा सकेगा और पुललस अलभरिा में उसे ऐसे िेत्र के र्ाहर ऐसे स्थान को, क्जसे क्रक क्जला मक्जस्रेट प्रत्येक मामले में विननददबष्ट करे, हटिा सकेगा ।
14. िारा 11, 12 या 13 के अिीि आदेश पाररत ककये जािे के पूवब सुिवाई की जाए
(1) क्रकसी व्यक्तत के विरुद्ि िारा 11, 12 या 13 के अिीन कोई आदेश पाररत क्रकया जाने के पूिब, क्जला मक्जस्रेट उस व्यक्तत को उसके विरुद्ि ताक्त्िक अलभकथनों के सामान्य स्िरूप की ललखित जानकारी देगा और उसे उनके र्ारे में स्पष्टीकरण देने का युक्ततयुतत अिसर देगा । (2) यदद ऐसा व्यक्तत उसके द्िारा पेश क्रकये गये क्रकसी सािी की परीिा के ललए आिेदन करे तो क्जला मक्जस्रेट, जर् तक क्रक अलभललखित क्रकये जाने िाले कारणों से, उसकी यह राय न हो क्रक ऐसा आिेदन तंग करने या विलम्र् करने के प्रयोजन से ददया गया है, ऐसे आिेदन को मंजूर करेगा और ऐसे साक्षियों की परीिा करेगा । (3) ऐसे व्यक्तत द्िारा प्रस्तुत क्रकया गया कोई भी ललखित कथन मामले के अलभलेि के साथ फाइल क्रकया जाएगा और ऐसा व्यक्तत अपना स्पष्टीकरण देने तथा अपने द्िारा पेश क्रकये गये साक्षियों की परीिा के प्रयोजन से क्रकसी विधि व्यिसायी द्िारा क्जला मक्जस्रेट के समि उपसंजात होने का हकदार होगा । (4) उपिारा (1) के अिीन कायबिाही करने िाला क्जला मक्जस्रेट क्रकसी ऐसे व्यक्तत की, क्जसके विरुद्ि िारा 11, 12 या 13 के अिीन क्रकसी आदेश का क्रकया जाना प्रस्तावित है, हाक्जरी सुननक्श्चत करने के प्रयोजन के ललए, ऐसे व्यक्तत से अपेिा कर सकेगा क्रक िह उसके समि उपसंजात हो और जांच के दौरान ऐसी हाक्जरी के ललए प्रनतभू सदहत या रदहत प्रनतभूनत र्ंिपत्र ननष्पाददत करे । (5) यदद िह व्यक्तत अपेक्षित क्रकये गये अनुसार प्रनतभूनत र्ंिपत्र ननष्पाददत न करे या जांच के दौरान क्जला मक्जस्रेट के समि उपसंजात न हो, तो क्जला मक्जस्रेट के ललए यह विधिपूणब होगा क्रक िह जांच में एकपिीय कायबिाही करे और तदुपरर ऐसा आदेश जो उस व्यक्तत के विरुद्ि पाररत क्रकया जाना प्रस्तावित क्रकया गया था, पाररत क्रकया जा सकेगा ।
15. अपील
(1) िारा 11, 12 या 13 के अिीन क्रकये गये क्रकसी आदेश से व्यधथत कोई भी व्यक्तत, ऐसे आदेश की तारीि से तीन ददन के भीतर, राज्य सरकार को अपील कर सकेगा । (2) इस िारा के अिीन अपील उस आदेश के, क्जसके क्रक विरुद्ि अपील की गई है, सम्र्न्ि में आपवर्त् के आिार पर संिेप में देते हुए ज्ञापन के रूप में की जाएगी और उसके साथ उसकी प्रमाखणत प्रनतललवप संलग्न की जायेगी । (3) ऐसी अपील के प्राप्त होने पर, राज्य सरकार, अपीलाथी को या तो व्यक्ततश: या क्रकसी विधि व्यिसायी के द्िारा सुने जाने का युक्ततयुतत अिसर देने तथा ऐसी और जाच यदद कोई हो, जैसी क्रक िह आिश्यक समझे, करने के पश्चात् उस आदेश की क्जसके क्रक विरुद्ि अपील की गई है, पुक्ष्ट कर सकेगी या उसमें फेरफार कर सकेगी या उसे वििक्ण्डत कर सकेगी; परन्तु, िह आदेश क्जसके विरुद्ि अपील की गई है, जर् तक क्रक राज्य सरकार अन्यथा ननदेश न दे, अपील का ननपटारा होने तक प्रितबन में रहेगा । (4) इस िारा के अिीन अपील के ललये उपर्क्न्ित तीस ददन की कालािधि की संगणना करने में उस आदेश की, क्जसके क्रक विरुद्ि अपील की गयी है, प्रमाखणत प्रनत ददये जाने के ललये ललया गया छोड ददया जायेगा ।
16. कनतपय मामलों में पाररत आदेश की अंनतमता
िारा 11, 12 या 13 के अिीन या राज् य सरकार द्िारा िारा 16 के अिीन पाररत क्रकया गया कोई आदेश क्रकसी न् यायालय में ननम् नललखित आिारों पर ही प्रश् नगत क्रकया जाएगा, अन् यथा नहीं – (एक) यह क्रक क्जला मक्जस् रेट ने िारा 15 की उपिारा (1) में दी गयी प्रक्रिया का अनुसरण नहीं क्रकया था या (दो) यह क्रक क्जला मक्जस् रेट के समि ऐसी कोई सामग्री नहीं थी क्जस पर िह आदेश आिाररत कर सकता था या (तीन) यह क्रक क्जला मक्जस् रटे की यह राय नहीं थी क्रक सािीगण उस व् यक्तत के विरूद्ि क्जसके के संर्ंि में िारा 12 के अिीन आदेश पाररत क्रकया गया था, िुलेआम साक्ष् य देने हेतु आगे आने के ललए रजामंद नहीं थे ।
17. व्यम्तत द्वारा म्जला आदद ि छोड़िे पर तथा हटाये जािे के पश्चात् उसके द्वारा उसमें प्रवेश करिे पर प्रकक्रया
यदद कोई व्यक्तत,क्जसे क्रकसी क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा उसके समीपस्थ क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके क्रकसी भाग से हट जाने का ननदेश िारा 11, 12 या 13 के अिीन जारी क्रकया जा चुका हो - - (एक) ननदेलशत क्रकये गये अनुसार नहीं हट जाता है; या (दो) इस प्रकार हट जाने पर, िारा 19 में यथा उपर्क्न्ित ललखित अनुज्ञा के लसिाय, यथामक्स्थनत क्जले या उसके भाग या उसके समीपस्थ क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके क्रकसी भाग में, आदेश में कालािधि के भीतर प्रिेश करता है; तो क्जला मक्जस्रेट उसे धगरफ्तार करिा सकेगा और पुललस अलभरिा में उसे ऐसे िेत्र के र्ाहर ऐसे स्थान को, क्जसे क्जला मक्जस्रेट प्रत्येक मामले में विननददबष्ट करे, हटिा सकेगा ।
18. उस म्जले आदद में म्जससे हट जािे के सलए ककसी व्यम्तत का निदेश ददया गया था, प्रवेश करिे या लौटिे की अिुज्ञा
(1) राज्य सरकार या क्जला मक्जस्रेट क्रकसी व्यक्तत को, क्जस, सम्र्न्ि में िारा 11, 12 या 13 के अिीन कोई आदेश ददया गया हो, उस क्जले या उसके भाग या ऐसे िेत्र तथा क्रकसी समीपस्थ क्जले या क्जलों या उसके/उनके भाग में, जहाँ से क्रक हट जाने के ललए उसे ननदश ददया गया था ऐसी अस्थायी कालािधि के ललए तथा ऐसी शतों के अध्यिीन रहते हुए प्रिेश करने या लौटने, के ललए ललखित अनुज्ञा दे सकेगा जैसी की ऐसी अनुज्ञा में विननददबष्ट की जायें । (5) ऐसे जुमाबने का िह भाग, जो क्रकसी ननिासी अथिा सयुतत या अविभतत कुटुम्र् द्िारा देय होने के रूप में ननयत क्रकया गया हो - - (क) उस रीनत में, जो क्रक क्रकसी न्यायालय द्िारा अधिरोवपत क्रकये गये जुमाबनों की िसूली के ललए दण्ड प्रक्रिया संदहता, 1973 (1974 का स. 2) द्िारा उपर्क्न्ित की गई है, इस प्रकार िसूल क्रकया जा सकेगा मानो क्रक ऐसा भाग क्रकसी न्यायालय द्िारा अधिंरोवपत क्रकया गया जुमाबना हो: परन्तु राज्य सरकार, दण्ड प्रक्रिया संदहता, 1973 (1974 का सं. 2) की िारा 421 की उपिारा (2) में ननददबष्ट ननयमों के स्थान पर, उस रीनत का क्जसमें क्रक उतत संदहता की उतत िारा (1) के िण्ड (क) के अिीन िारण्टों का ननष्पादन क्रकया जाना हो, विननयमन करते हुए तथा क्रकन्हीं ऐसे दािों के, जो जुमाबने का भुगतान करने के ललए दायी व्यक्तत से लभन्न क्रकसी व्यक्तत द्िारा ऐसी सम्पवर्त्, के सम्र्न्ि में क्रकये गये हों जो क्रक िारण्ट के ननष्पादन में कुकब की गई हो, संक्षिप्त अििारण के ललए ननयम इस अधिननयम के अिीन र्ना सके, (ि) भू-राजस्ि की र्काया के तौर पर िसूल क्रकया जा सकेगा । (6) उपिारा (1) के अिीन सामूदहक जुमाबना अधिरोवपत करने िाला आदेश राज्य सरकार द्िारा क्रकसी भी समय प्रनतसंहत या उपांतररत क्रकया जा सकेगा ।
19. Power of State Government
(1) राज्य सरकार या राज्य सरकार द्िारा इस सम्र्न्ि में विशेष रूप से सशतत क्रकया गया कोई अधिकारी िारा 11, 12 या 13 के अिीन क्जला मक्जस्रेट द्िारा क्जले में प्रयोततव्य शक्ततयों का प्रयोग िैसी ही पररक्स्थनतयों में तथा िैसी ही रीनत में इस उपांतरण के साथ कर सकेगा क्रक राज्य सरकार या विशेष रूप से सशतत क्रकये गये अधिकारी के ललए यह विधिपूणब होगा क्रक िह यथाक्स्थनत ऐसे दल या समूह के सदस्यों या व्यक्ततयों या अप्रिालसयों या लसद्िदोष ठहराये गये व्यक्ततयो को क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके / उनके भाग से, चाहे िे उसके/ उनके समीपस्थ हो या न हों, हट जाने के ललए और क्रकसी क्जले या क्जलों या उसके/उनके भाग में, चाहे िे उसके/उनके समीपस्थ हो या न हों, प्रिेश न करने या न लौटने के ललए ननदेश दें । (2) िारा 14, 15, 17, 18 तथा 19 के उपर्न्ि और िारा 16 के उपर्न्ि, उस दशा में जर्क्रक आदेश राज्य सरकार द्िारा विशेष रूप से सशतत क्रकये गये अधिकारी द्िारा उपिारा (1) के अिीन पाररत क्रकया गया हो, इस िारा के अिीन क्रकन्हीं शक्ततयों के प्रयोग को यथािश्यक पररितबन सदहत इस प्रकार लागू होंगे जैसे क्रक िे िारा 11, 12 या 13 के अिीन क्रकन्हीं शक्ततयों के प्रयोग को लागू होते हैं । (3) जहाँ आदेश राज्य सरकार द्िारा उपिारा (1) के अिीन पाररत क्रकया गया हो िहाँ राज्य सरकार या तो स्िप्रेरणा से या व्यधथत, व्यक्तत के आिेदन पर, स्ियं के द्िारा पाररत क्रकये गये क्रकसी भी आदेश का पुनविबलोकन कर सकेगी और उसके सम्र्न्ि में ऐसा आदेश पाररत कर सकेगी जैसा क्रक िह उधचत समझे: परन्तु क्रकसी भी आदेश में तर् तक फेरफार नहीं क्रकया जाएगा या उसे तर् तक उल्टा नहीं जायगा जर् तक क्रक सम्र्क्न्ित व्यक्तत को आदेश के समथबन में उपसंजात होने तथा सुने जाने के ललए सूचना न दी गई हो ।
20. Penalty for contravention of directions under section 11, 12, 13 or 20
यदद कोई व्यक्तत िारा 11, 12, 13 या 20 के अिीन जारी क्रकये गये क्रकसी ननदेश का विरोि करेगा या उसकी अिज्ञा करेगा या उसका अनुितबन नहीं करेगा या क्रकसी ऐसे ननदेश के विरोि या उसकी अिज्ञा का दुष्प्रेरण करेगा तो िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, क्रकन्तु जो, लेिर्द्ि क्रकये जाने िाले कारणों के लसिाय चार मास से कम नहीं होगी, दण्डनीय होगा और जुमाबने से भी दण्डनीय होगा ।
21. Penalty for entering without permission in the area from which a person is directed to remove himself, or for remaining after the expiry of temporary permission
िारा 18 में उपर्क्न्ित की गई पररक्स्थनतयों तथा रीनत में क्रकसी व्यक्तत को धगरफ्तार करने और हटाने की शक्तत पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना, कोई व्यक्तत, जो -- (क) िारा 11, 12, 13 या 20 के अिीन उसको जारी क्रकये गये ननदेश के उल्लंघन में उस क्जले या उसके भाग, या ऐसे िेत्र तथा क्रकसी अन्य क्जले या क्जलों या उसके उनके भाग में, क्जससे हट जाने के ललये उसे ननदेश ददया गया था, अनुज्ञा के बर्ना प्रिेश करेगा या लौटेगा; (ि) िारा 19 के अिीन मजूर की गई अनुज्ञा से, क्रकसी ऐसे पूिोतत िेत्र या क्जले या उसके भाग में प्रिेश करेगा या लौटेगा क्रकन्तु उसके उपर्न्िों के प्रनतकूल उस अस्थायी कालािधि की, क्जसके ललये क्रक उसे प्रिेश करने या लौटने की अनुज्ञा दी गई थी, समाक्प्त पर ऐसे िेत्र से र्ाहर नहीं हटेगा या ऐसी अनुज्ञा का पूिबतर प्रनतसंहरण हो जाने पर या अस्थायी कालािधि की समाक्प्त पर या अनुज्ञा का प्रनतसंहरण हो जाने पर हट जाने के पश्चात्, निीन अनुज्ञा के बर्ना तत्पश्चात् प्रिेश करेगा या लौटेगा: िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी क्रकन्तु जो, लेिर्द्ि क्रकये जाने िाले कारणोंो के लसिाय, छह मास से कम की नहीं होगी, दण्डनीय होगा और जुमाबने से भी दण्डनीय होगा ।
22. Presumption in prosecutions for contravention of directions under section 11, 12, 13 or 20
तत्समय प्रिृर्त् क्रकसी विधि में अन्तविबष्ट क्रकसी र्ात के होते हुए भी, िारा 11, 12, 13 या 20 के अिीन जारी क्रकये गये ननदेश के उल्लंघन सम्र्न्िी क्रकसी अपराि के अलभयोजन में, आदेश की अधि-प्रमाखणत प्रनत पेश क्रकये जाने पर, जर् तक क्रक प्रनतकूल साबर्त न कर ददया जाये तथा क्जसे साबर्त करने का भार अलभयुतत पर होगा, यह उपिारणा की जायेगी क्रक -- (क) आदेश, यथाक्स्थनत क्जला मक्जस्रेट या िारा 25 के अिीन राज्य सरकार द्िारा सशतत क्रकये गये अपर क्जला मक्जस्रेट या उपिण्ड मक्जस्रेट या राज्य सरकार या िारा 20 के अिीन राज्य सरकार द्िारा विशेष रूप से सशतत क्रकये गये क्रकसी अधिकारी द्िारा क्रकया गया था; (ि) यथाक्स्थनत क्जला मक्जस्रेट या िारा 25 के अिीन राज्य सरकार द्िारा सशतत क्रकये गए अपर क्जला मक्जस्रेट या उपिण्ड मक्जस्रेट या राज्य सरकार या िारा 20 के अिीन राज्य सरकार द्िारा विशेष रूप से सशतत क्रकये गये क्रकसी अधिकारी का यह समािान हो गया था क्रक िे आिार क्जन पर या िह प्रयोजन क्जसके ललए िह क्रकया गया था, विद्यमान था तथा उस आदेश का क्रकया जाना आिश्यक था; और (ग) आदेश अन्यथा विधिमान्य था और इस अधिननयम के उपर्न्िों के अनुरूप था ।
23. Forfeiture of bond executed by a person permitted to enter or return to the area from which he was directed to remove himself
यदद िारा 19 की उपिारा (1) के अिीन अनुज्ञात कोई व्यक्तत, उतत उपिारा के अिीन या उतत िारा की उपिारा (3) के अिीन उसके द्िारा ननष्पाददत क्रकये गये र्न्ि-पत्र में अधिरोवपत की गई क्रकसी शतब का अनुपात नहीं करता है, तो उसके र्न्ि-पत्र का समपहरण कर ललया जाएगा और उसके द्िारा आर्द्ि कोई भी व्यक्तत तत्सम्र्न्िी शाक्स्त का भुगतान करेगा या न्यायालय के समािान योग्य कारण र्तलाएगा क्रक ऐसी शाक्स्त का भुगतान तयों नहीं क्रकया जाना चादहए ।
24. Delegation of powers and duties of District Magistrates
दण्ड प्रक्रिया संदहता, 1973 (1974 का स. 2) में क्रकसी र्ात के होते हुए भी, राज्य सरकार, आदेश द्िारा, यह ननदेश दे सकेगी क्रक इस अधिननयम के अिीन क्जला मक्जस्रेट को प्रदर्त् क्रकसी शक्तत का या उस पर अधिरोवपत क्रकये गये क्रकसी कर्त्बव्य का प्रयोग या पालन ऐसे अपर क्जला मक्जस्रेट या उपिण्ड मक्जस्रेट द्िारा तथा ऐसे िेत्रों के ललए, जो क्रक आदेश में विननददबष्ट क्रकये जायें, क्रकया जाएगा ।
25. Source of information not to be disclosed
इस अधिननयम की क्रकसी भी र्ात के सम्र्न्ि में यह नहीं समझा जायेगा क्रक िह यथाक्स्थनत राज्य सरकार या क्रकसी ऐसे अधिकारी क्जसे उसके द्िारा िारा 20 के अिीन विशेष रूप से सशतत क्रकया गया हो, या क्जला मक्जस्रेट या िारा 25 के अिीन सशतत क्रकये गये अपर क्जला मक्जस्रेट या उपिण्ड मक्जस्रेट से यह अपेिा करती है क्रक िह उस व्यक्तत को, क्जसके विरुद्ि इस अधिननयम की िारा 11, 12, 13 या 20 के अिीन आदेश क्रकया गया है या क्रकसी न्यायालय को अपनी जानकारी का स्त्रोत या कोई तथ्य प्रकट करे क्जसकी क्रक संसूचना से, यथाव्यक्तत राज्य सरकार या ऐसा अधिकारी क्जसे िारा 20 के अिीन सशतत क्रकया गया है, या क्जला मक्जस्रेट या िारा 25 के अिीन सशतत क्रकये गये अपर क्जला मक्जस्रेट या उपिण्ड मक्जस्रेट की राय में, क्रकसी इवर्त्ला देने िाले की पहचान या नाम प्रकट होता हो ।
26. Penalty for unlawful possession of corrosive substance etc.
कोई भी व्यक्तत, जो कोई संिारक (कारोलसि) पदाथब या रि ऐसी पररक्स्थनतयों में अपने शरीर पर रि कर ले जायेगा या जानते हुए उसे अपने कब्जे या ननयंत्रण में रिेगा क्जनसे ऐसा युक्ततयुतत संदेह उत्पन्न होता हो क्रक िह क्रकसी विधिपूणब उद्देश्य के ललये उसे अपने शरीर पर रि कर नहीं ले जा रहा है या उसे विधिपूणब उद्देश्य से अपने कब्जे या ननयंत्रण में नहीं रिे हुए है, उस दशा में जर्क्रक यह दलशबत न कर सकता हो क्रक िह उसे क्रकसी विधिपूणब उद्देश्य से अपने शरीर पर रि कर ले जा रहा था या अपने कब्जे या ननयंत्रण में रिे हुए था कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, दण्डनीय होगा और जुमाबने से भी दण्डनीय होगा ।
27. Imposition of collective fines on inhabitants of area
(1) (क) यदद राज्य सरकार को यह प्रतीत हो क्रक क्रकसी िेत्र के ननिासी या ननिालसयों का कोई िगब या उपिगब ऐसे अपरािों के क्रकये जाने से सम्र्क्न्ित है या ऐसे अपरािों के क्रकये जाने को दुष्प्रेररत कर रहा है क्जनकी पररणनत मृत्यु या घोर उपहीत या सम्पवर्त् की हानन या उसके नुकसान में या उद्दीपन या क्रफरौती के ललए व्यिहरण में होती है अथिा होने की सम्भािना है, या ऐसे अपरािों के क्रकये जाने से सम्र्क्न्ित व्यक्ततयों को संश्रय दे रहा है, या अपराधियों का पता लगाने या पकड़िाने में अपनी शक्तत भर पूरी सहायता नहीं दे रहा है या ऐसे अपरािों के क्रकये जाने से सम्र्क्न्ित, ताक्त्िक साक्ष्य दर्ा रहा है, तो राज्य सरकार, अधिसूचना द्िारा उस िेत्र के ननिालसयों या ननिालसयों के िगब या उपिगब पर सामूदहक जुमाबना अधिरोवपत कर सकेगी । (ि) िण्ड (क) के अिीन सामूदहक जुमाबना अधिरोवपत करने िाला आदेश कम से कम एक ऐसे समाचार-पत्र में, क्जसका सम्र्क्न्ित िेत्र में पररचालन हो और ऐसी अन्य रीनत में, क्जसे राज्य सरकार उस आदेश को सम्र्क्न्ित िेत्र के ननिालसयों की जानकारी में लाने के ललए सिाबधिक उपयुतत समझे, भी प्रकालशत क्रकया जायेगा । (2) राज्य सरकार या कोई ऐसा अधिकारी, जो राज्य सरकार द्िारा सािारण या विशेष आदेश द्िारा, इस ननलमर्त् सशतत क्रकया गया हो, क्रकसी भी ऐसे ननिासी को या ऐसे ननिालसयों के क्रकसी भी िगब 'या उपिगब को ऐसे जुमाबने या उसके क्रकसी भाग का भुगतान करने के दानयत्ि से छूट दे सकेगा । (3) क्जला मक्जस्रेट, ऐसी जांच करने के पश्चात् जैसी क्रक िह आिश्यक समझे, ऐसे जुमाबने को उन ननिालसयों के र्ीच प्रभाक्जत करेगा जो जुमाबने का भुगतान करने के ललए सामूदहक रूप से दायी हो और ऐसा प्रभाजन ऐसे ननिालसयों के अपने- अपने सािनों के सम्र्न्ि में क्जला मक्जस्रेट के ननणबय के अनुसार क्रकया जायेगा । (4) प्रभाजन करते समय, क्जला मक्जस्रेट िह भाग ननयत कर सकेगा क्जसका भुगतान क्रकसी
28. सशववरों, कवायदों (ड्रिल) परेडों आदद का नियंत्रि
(1) यदद राज्य सरकार का यह समािान हो जाता है क्रक लोक सुरिा या लोक व्यिस्था र्नाये रिने के दहत में ऐसा करना आिश्यक है, तो िह सािारण या विशेष आदेश द्िारा, क्रकसी िेत्र में सैननक प्रकार के ऐसे लशविरों का लगाया जाना या क्रकसी ऐसे अभ्यास, संचलन, व्यिक्स्थत चालन (इिॉल्युशन) या किायद का कराया जाना प्रनतवषद्ि या ननर्बक्न्ित कर सकेगी जो आदेश में विननददबष्ट क्रकये गये हो | (2) यह सुननक्श्चत करने की दृक्ष्ट से क्रक क्रकसी भी स्थान पर सैननक प्रकार का कोई अप्राधिकृत अभ्यास संचालन व्यिक्स्थत चालन या किायद नहीं की जाती है, राज्य सरकार सािारण या विशेष आदेश द्िारा क्रकसी ऐसे िगब के व्यक्ततयों या संगठनों द्िारा, जो उस आदेश में विननददबष्ट क्रकये गये हों, क्रकसी लशविर के लगाये जाने, परेड, सक्म्मलन, सभा क्रकये जाने या जुलूस ननकाले जाने या उसमें भाग ललये जाने को प्रनतवषद्ि या ननर्बक्न्ित कर सकेगी या उसी पर शतें अधिरोवपत कर सकेगी । (3) इस िारा के अिीन क्रकये गये क्रकसी आदेश का कोई भी उल्लंघन कारािास से, जो तीन िषब तक का हो सकेगा या जुमाबने से, या दोनों मे दण्डनीय होगा ।
29. वददबयों (यूनिफामब) का नियंत्रि
(1) यदद राज्य सरकार का यह समािान हो जाता है क्रक क्रकसी ऐसी पोशाक या पररिान की िस्तु (आदटबकल ऑफ एपारेल) या सम्प्रतीक से, जो संघ के प्राधिकारी सशतत र्ल के सदस्य या क्रकसी पुललस र्ल के या तत्समय प्रिृर्त् क्रकसी विधि के अिीन गदठत क्रकसी र्ल के सदस्य द्िारा पहने जाने या प्रदलशबत क्रकये जाने के ललये अपेक्षित क्रकसी िदी या िदी के भाग या संप्रतीक से लमलता जुलता है, सािबजननक रूप से पहने जाने या प्रदलशबत क्रकये जाने से लोक िेम, व्यिस्था र्नाये रिने या शाक्न्त या प्रशाक्न्त के र्नाये रिने पर प्रनतकूल प्रभाि पड़ने की सम्भािना है राज्य सरकार, सािारण या विशेष आदेश द्िारा क्रकसी भी ऐसी पोशाक या पररिान की िस्तु या सम्प्रतीक को प्रनतवषद्ि या ननर्बक्न्ित कर सकेगी । (2) इस िारा के प्रयोजनों के ललए, क्रकसी पोशाक, पररिान की िस्तु या संप्रतीक के सम्र्न्ि में यह समझा जायेगा क्रक िह सािबजननक रूप से पहनी गई है या जनता में प्रदलशबत की गई है यदद िह इस प्रकार पहनी या प्रदलशबत की जाती है क्जससे क्रक िह क्रकसी व्यक्तत को क्रकसी ऐसे स्थान में ददिाई दे क्जसमें जनता की पहुंच हो । (3) यदद कोई व्यक्तत इस िारा के अिीन क्रकये गये क्रकसी आदेश का उल्लंघन करेगा तो िह कारािास से क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, या जुमाबने से या दोनों से दण्डनीय होगा ।
30. पथ्या (पाथ वे) सड़क आदद के उपयोग को प्रनतवषद्ि या निर्बम्न्ित करिे की शम्तत
(1) राज्य सरकार, लोक व्यिस्था र्नाये रिने के ललये या जनसािारण के दहत में, आदेश द्िारा, - - (क) क्रकसी सड़क, पथ्या (पाथ िे) या जल मागब के उपयोग को; (ि) क्रकसी भूलम पर से क्रकसी व्यक्तत, या पशु या यान के आने-जाने को; तीन मास से अनधिक की ऐसी कालािधि तक के ललये जो क्रक आदेश में विननददबष्ट की जाय, प्रनतवषद्ि या ननर्बक्न्ित कर सकेगी । (2) यदद कोई व्यक्तत उपिारा (1) के अिीन क्रकये गये क्रकसी आदेश का उल्लंघन करेगा, तो र्ह कारािास से क्जसकी अिधि तीन िषब तक हो सकेगी, या जुमाबने से, या दोनों से दण्डनीय होगा ।
31. संरक्षक्षत स्थाि
(1) यदद राज्य सरकार जनसािारण के दहत में क्रकसी स्थान या क्रकसी िगब के स्थानों के सम्र्न्ि में यह आिश्यक या समीचीन समझती है क्रक अप्राधिकृत व्यक्ततयों के प्रिेश रोकने के ललए विशेष पूिाबििाननयां र्रती जानी चादहए, तो राज्य सरकार, आदेश द्िारा उस स्थान को या यथाक्स्थनत उस िगब के प्रत्येक स्थान को संरक्षित स्थान घोवषत कर सकेगी, और तदुपरर, उस समय तक जर् तक क्रक िह आदेश प्रिृर्त् रहता है, यथाक्स्थनत िह स्थान या उस िगब का प्रत्येक स्थान इस अधिननयम के प्रयोजनों के ललये संरक्षित स्थान होगा । (2) कोई भो व्यक्तत, राज्य सरकार की या क्जला मक्जस्रेट की या ऐसे अन्य अधिकारी की, जो राज्य सरकार द्िारा इस ननलमर्त् प्राधिकृत क्रकया जाय, अनुज्ञा के बर्ना क्रकसी भी संरक्षित स्थान में प्रिेश नहीं करेगा या उस पर या उसमें रहेगा या उस पर से नहीं जायेगा या उसके सामीप्य में नहीं घूमेगा । (3) जहाँ उपन्यास (2) के अनुसरण में क्रकसी व्यक्तत को क्रकसी संरक्षित स्थान में प्रिेश करने, उस पर या उसमें रहने या उस पर से जाने की अनुज्ञा दी जाती है, िहाँ िह व्यक्तत, ऐसी अनुज्ञा के अिीन कायब करते समय, अपने आचरण को विननयलमत करने के ललए ऐसे ननदेशों का अनुपालन करेगा जो उस अधिकारी द्िारा ददये जायें, क्जसने क्रक अनुज्ञा दी है । (4) यदद कोई व्यक्तत इस िारा के क्रकसी उपर्न्ि के उल्लंघन में क्रकसी संरक्षित स्थान में, प्रिेश करेगा या रहेगा, तो ऐसी क्रकन्हीं भी अन्य कायबिाही पर, जो उसके विरुद्ि की जा सकती हों, प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना, उसे क्रकसी पुललस अधिकारी द्िारा या राज्य सरकार द्िारा इस प्राधिकृत क्रकये गये क्रकसी अन्य व्यक्तत द्िारा िहाँ से हटाया जा सकेगा । (5) यदद कोई व्यक्तत इस िारा के उपर्न्िों में से क्रकसी उपर्न्ि का उल्लंघन करेगा, तो िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, या जुमाबने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
32. संरक्षक्षत क्षेत्र
(1) यदद राज्य सरकार, जनसािारण के दहत में यह आिश्यक या समीचीन समझती है क्रक क्रकसी िेत्र में व्यक्ततयों के प्रिेश को विननयलमत क्रकया जाए, तो राज्य सरकार, इस अधिननयम के क्रकन्हीं भी अन्य उपर्न्िों पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना, आदेश द्िारी, ऐसे िेत्र को संरक्षित िेत्र घोवषत कर सकेगी, और तदुपरर उस समय तक जर् क्रक िह आदेश प्रिृर्त् रहता है, ऐसा िेत्र इस अधिननयम के प्रयोजनों के ललए संरक्षित िेत्र होगा । (2) ऐसी तारीि को तथा ऐसी तारीि के पश्चात् जो क्रक उपिारा (1) के अिीन क्रकये गए आदेश में विननददबष्ट की जाय तथा क्रकन्ही ऐसी छूटों के अध्यिीन रहते हुए क्जनके ललये उतत आदेश द्िारा उपर्ंि क्रकया जाय, कोई भी व्यक्तत, जो उतत तारीि के ठीक पूिब, उतत आदेश द्िारा संरक्षित िेत्र के रूप में घोवषत क्रकये गये िेत्र का ननिासी नहीं था, उतत आदेश में विननददबष्ट क्रकये गये प्राधिकारी या व्यक्तत द्िारा ग्यो गये ललखित अनुज्ञा-पत्र के ननर्बन्िनों के अनुसार ही उस िेत्र में प्रिेश करेगा या उसमें रहेगा अन्यथा नहीं, (3) यदद कोई व्यक्तत इस िारा के उपर्न्िों के उल्लंघन में क्रकसी संरक्षित िेत्र में प्रिेश करेगा या रहेगा तो ऐसी क्रकन्हीं भी अन्य कायबिादहयों पर, जो क्रक उसके विरुद्ि की जा सकती हों, प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना, उस संरक्षित िेत्र में कर्त्बव्यारूढ़ क्रकसी भी पुललस अधिकारी द्िारा या उसके ननदेशों के अिीन या राज्य सरकार द्िारा इस ननलमर्त् प्राधिकृत क्रकये गये क्रकसी भी अन्य व्यक्तत द्िारा िहाँ से हटाया जा सकेगा। (4) यदद कोई व्यक्तत इस िारा के उपर्न्िों में से क्रकसी भी उपर्न्ि के उल्लंघन में क्रकसी संरक्षित स्थान में प्रिेश करेगा या रहेगा, तो िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, या जुमाबने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
33. गाडब के साथ र्ल प्रयोग करिा या उससे र्चकर निकलिा
कोई भी व्यक्तत, जो क्रकसी संरक्षित स्थान या संरक्षित िेत्र में, - - (क) ऐसे स्थान या िेत्र का संरिण करने या ऐसे स्थान या िेत्र में प्रिेश को रोकने या ननयंबत्रत करने के प्रयोजन से तैनात क्रकये गये क्रकसी व्यक्तत पर आपराधिक र्ल प्रयोग करके या, करने की िमकी देकर; या (ि) क्रकसी ऐसे व्यक्तत से अपने प्रिेश या प्रयनतत प्रिेश को नछपाने के ललये पूिाबििाननयाँ र्रतते हुए, प्रिेश करेगा या प्रिेश करने का प्रयत्न करेगा; िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, या जुमाबने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
34. कनतपय स्थािों तथा क्षेत्रों के सलए आदेश
(1) इस अधिननयम के क्रकसी अन्य उपिन पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना, राज्य सरकार - - (क) क्रकसी ऐसे स्थान या िेत्र के र्ारे में, जो उनके द्िारा संरक्षित स्थान या संरक्षित िेत्र घोवषत क्रकया गया है; या (ि) क्रकसी ऐसे अन्य स्थान या िेत्र के र्ारे में, क्जसके क्रक सम्र्न्ि में उसे यह आिश्यक प्रतीत होता हो विध्िंसक कायबिादहयों को रोकने या दर्ाने के ललए या समुदाय के जीिन के ललए आिश्यक प्रदायों तथा सेिाओं को र्नाये रिने के ललए विशेष पूिाबििाननयाँ र्रती जाये, ऐसे स्थान या िेत्र में व्यक्ततयों के प्रिेश को या ऐसे स्थान या िेत्र या उसके सामीप्य में उनके आचरण को ननयंबत्रत या विननयलमत करने के ललये आदेश कर सकेगी । (2) पूिबगामी उपर्न्िों की व्यापकता पर प्रनतकूल प्रभाि डाले बर्ना, क्रकसी स्थान या िेत्र के सम्र्न्ि में उपिारा (1) के अिीन क्रकये गये आदेशों में ननम्नललखित र्ातों के ललए उपर्न्ि हो सकेंगे- (क) ऐसे स्थान या िेत्र में व्यक्ततयों के प्रिेश को ननधचत करने के ललये और क्रकसी ऐसे व्यक्तत को, जो आदेशों के उल्लंघन में उस स्थान या िेत्र में हों या जो इस अधिननयम के उपर्न्िों के क्रकसी उल्लंघन के ललये लसद्िदोष ठहराया जा चुका हो, िहाँ से हटाने के ललये; (ि) यह अपेिा करने के ललये क्रक ऐसे स्थान या िेत्र में क्रकसी भी व्यक्तत या व्यक्ततयों के िगब की उपक्स्थनत विदहत प्राधिकारी को अधिसूधचत की जाये, और क्रकसी ऐसे व्यक्तत से, जो क्रकसी ऐसे अपराि के ललये लसद्िदोष ठहराया गया हो, जैसा क्रक इस िारा के िण्ड (क) में उक्ल्लखित है, यह अपेिा करने के ललये क्रक िह ऐसे स्थान या िेत्र में रहते समय अपने आने-जाने की ररपोटब दे और क्रकसी ऐसी अन्य शतब का अनुपालन करे जो क्रक विदहत . प्राधिकारी द्िारा उस पर अधिरोवपत की गई हो; (ग) ऐसे स्थान या िेत्र के क्रकसी व्यक्तत या व्यक्ततयों के िगब से यह अपेिा करने के ललये क्रक िह पहचान के ललये ऐसी दस्तािेजी साक्ष्य अपने साथ रिें जो क्रक विदहत की जाय; और क्रकसी व्यक्तत या व्यक्ततयों के िगब को कोई विननददबष्ट िस्तु अपने कब्जे या ननयंत्रण में रिने से प्रनतवषद्ि करने के ललये । (3) क्रकसी संरक्षित स्थान या संरक्षित िेत्र के सम्र्न्ि में इस िारा के अिीन क्रकये गये क्रकसी आदेश द्िारा ऐके स्थान या िेत्र को इस अधिननयम के ऐसे समस्त उपर्न्िों से या उनमें से क्रकन्हीं भी ऐसे उपर्न्िों से, क्जनका क्रक यथाक्स्थनत क्रकसी संरक्षित स्थान या संरक्षित िेत्र को या उसके सम्र्न्ि में लागू होना अलभव्यतत हो, छूट दी जा सकेगी या यह ननददबष्ट क्रकया जा सकेगा क्रक उतत समस्त उपर्न्ि या उनमें से कोई भी उपर्न्ि ऐसे उपान्तरणों के अिीन रहते हुए लागू होंगे जो आदेश में ननददबष्ट क्रकये जायें । (4) क्रकसी ऐसे स्थान या िेत्र के सम्र्न्ि में जो संरक्षित स्थान या संरक्षित िेत्र न हो, इस िारा के अिीन क्रकये गये आदेश द्िारा यह ननददबष्ट क्रकया जा सकेगा क्रक इस अधिननयम के समस्त उपर्न्ि या उनमें से कोई उपर्न्ि, क्जनका यथाक्स्थनत क्रकसी संरक्षित स्थान या संरक्षित िेत्र को या उसके सम्र्न्ि में लागू होना अलभव्यतत हो, उस स्थान या िेत्र को, या उसके सम्र्न्ि में,क्जसके क्रक र्ारे में आदेश क्रकया गया हो या तो उपान्तरण के बर्ना या ऐसे उपान्तरण के साथ लागू होगे जो आदेश में विननददबष्ट क्रकया जाये । (5) यदद कोई व्यक्तत इस िारा के अिीन क्रकये गये क्रकसी आदेश का उल्लंघन करेगा, तो िह कारािास से, क्जसकी अिधि तीन िषब तक की हो सकेगी, या जुमाबने से, या दोनों से, दण्डनीय होगा ।
35. Power to make detention orders
(1) The State Government may, if satisfied that it is necessary so to do with a view to preventing any person from acting in any manner prejudicial to the maintenance of public order, make an order directing that such person be detained. Explanation.—For the purposes of this sub-section, 'acting in any manner prejudicial to the maintenance of public order' means for supporting any of the activities which affect adversely or are likely to affect adversely the maintenance of public order. (i) offence punishable under Chapter 16 of the Indian Penal Code, 1860 (45 of 1860); (ii) offence punishable under Section 506 or 509 of the said Code; and (iii) offence punishable under the Civil Rights Protection Act, 1955 (22 of 1955), and abetment of such offences. (2) On being satisfied as provided in sub-section (1), any of the following officers may also exercise the powers conferred by the said sub-section— (a) District Magistrate; (b) Additional District Magistrate, who has been specially empowered in this behalf by the State Government. (3) When an order is made under this section by an officer mentioned in sub-section (2), he shall forthwith report the fact to the State Government together with the grounds on which the order has been made and such other particulars as, in his opinion, have a bearing on the matter, and no such order shall remain in force for more than fourteen days after the making thereof, unless in the meantime it has been approved by the State Government: Provided that where the grounds of detention are communicated by the authority making the order after five days but within ten days from the date of detention under Section 41, this sub-section shall apply with the modification as if for the words 'fourteen days' the words 'fifteen days' have been substituted.
36. Execution of detention orders
A detention order may be executed at any place in India in the manner provided for the execution of warrants of arrest under the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974).
37. Power to regulate place and conditions of detention
Every person in respect of whom a detention order has been made shall be liable— (a) to be detained in such place and under such conditions (including conditions as to maintenance, discipline and punishment for breaches of discipline) as the State Government may, by general or special order, specify; and (b) to be removed from one place of detention in the State to another place of detention in the State by order of the State Government.
38. Detention orders not to be invalid or inoperative on certain grounds
No detention order shall be invalid or inoperative merely by reason— (a) that the person to be detained thereunder is outside the limits of the territorial jurisdiction of the Government or officer making the order; or (b) that the place of detention of such person is outside the said limits.
39. Powers in relation to absconding persons
If the State Government or an officer specified in sub-section (1) or (2) of Section 36, as the case may be, has reason to believe that a person in respect of whom a detention order has been made has absconded or is concealing himself so that the order cannot be executed, the State Government or such officer may— (a) make a report in writing of the fact to a Judicial Magistrate of the first class having jurisdiction in the place where the said person ordinarily resides; and thereupon the provisions of the Code of Criminal Procedure, 1973 (2 of 1974) of that section shall apply as if the order directed to detain him were a warrant issued by the Magistrate; (b) by order notified in the Gazette, direct the said person to appear before such officer, at such place and within such period as may be specified in the order; and if the said person fails to comply with such order, he shall, unless he proves that it was not possible for him to comply therewith and that he had given notice of the reason for non-compliance and his address to the officer mentioned in the order within the period specified in the order, be punishable with imprisonment which may extend to three years, or with fine, or with both.
40. Grounds of order of detention to be disclosed to person affected by the order
(1) When a person is detained in pursuance of a detention order, the authority making the order shall, as soon as may be, but ordinarily not later than five days and in exceptional circumstances and for reasons to be recorded in writing, not later than ten days from the date of detention, communicate to him the grounds on which the order has been made and shall afford him the earliest opportunity of making a representation against the order to the State Government. (2) Nothing in sub-section (1) shall require the authority to disclose facts which it considers to be against the public interest to disclose.
41. Constitution of Advisory Boards
(1) The State Government shall, whenever necessary, constitute one or more Advisory Boards for the purposes of this Act. (2) Every such Board shall be constituted in accordance with the recommendations of the Chief Justice of the Madhya Pradesh High Court. (3) Every such Board shall consist of a Chairman and two or more other members, and the Chairman shall be a serving Judge of the Madhya Pradesh High Court and the members shall be serving or retired Judges of any High Court.
42. Reference to Advisory Boards
Save as otherwise expressly provided in this Act, in every case where a detention order has been made under this Act, the State Government shall, within three weeks from the date of detention of a person under the order, place before the Advisory Board constituted by it under Section 42 the grounds on which the order has been made and the representation, if any, made by the person affected by the order, and in case where the order has been made by an officer specified in sub-section (2) of Section 36, also the report made by such officer under sub-section (3) of that section.
43. Procedure of Advisory Boards
(1) The Advisory Board shall, after considering the material placed before it and, after calling for such further information as it may deem necessary from the State Government or from any person called for the purpose through the State Government or from the person concerned, and if in any particular case it considers it essential so to do or if the person concerned desires to be heard, after hearing him in person, submit its report to the State Government within seven weeks from the date of detention of the person concerned. (2) The report of the Advisory Board shall specify in a separate part thereof the opinion of the Advisory Board as to whether or not there are sufficient cause for the detention of the person concerned. (3) When there is a difference of opinion among the members forming the Advisory Board, the opinion of the majority of such members shall be deemed to be the opinion of the Board. (4) Nothing in this section shall entitle the person against whom an order of detention has been made to appear by any legal practitioner in any matter connected with the reference to the Advisory Board, and the proceedings of the Advisory Board and its report, except that part of the report in which the opinion of the Board is specified, shall be confidential.
44. Action upon the report of the Advisory Board
(1) In any case where the Advisory Board has reported that there is in its opinion sufficient cause for the detention of a person, the State Government may confirm the detention order and continue the detention of the person concerned for such period as it thinks fit. (2) In any case where the Advisory Board has reported that there is in its opinion no sufficient cause for the detention of the person concerned, the State Government shall revoke the detention order and cause the person to be released forthwith.
45. Maximum period of detention
The maximum period for which any person may be detained in pursuance of any detention order which has been confirmed under Section 45 shall be six months from the date of detention: Provided that nothing contained in this section shall affect the power of the State Government to revoke or modify the detention order at any earlier time.
46. Revocation of detention orders
Without prejudice to the provisions of Section 21 of the General Clauses Act, 1897, a detention order may, at any time, be revoked or modified by the State Government, notwithstanding that the order has been made by an officer mentioned in sub-section (2) of Section 36.
47. Temporary release of persons detained
(1) The State Government may, at any time, direct that any person detained in pursuance of a detention order may be released for any specified period either without conditions or upon such conditions specified in the direction as that person accepts, and may, at any time, cancel his release. (2) In directing the release of any person under sub-section (1), the State Government may require him to enter into a bond with or without sureties for the due observance of the conditions specified in the direction. (3) Any person released under sub-section (1) shall surrender himself at the time and place and to the authority specified in the order directing his release or canceling his release, as the case may be. (4) If any person fails without sufficient cause to surrender himself in the manner specified in sub-section (3), he shall be punishable with imprisonment for a term which may extend to three years, or with fine, or with both. (5) If any person released under sub-section (1) fails to fulfill any of the conditions imposed upon him under the said section or in the bond executed by him, the bond shall be declared to be forfeited and any person bound thereby shall be liable to pay the penalty thereof.
48. Delegation of powers and duties of State Government
The State Government may, by order, direct that any power or duty which has been conferred or imposed upon the State Government by this Act, excluding the power to impose collective fine under Section 28 and the power to make rules under Section 50, shall, subject to such conditions, if any, as may be specified in the direction, be exercised or discharged also by any officer or authority subordinate to it, not being an officer lower in rank than a District Magistrate.
49. Rules
(1) The State Government may make rules for carrying out the purposes of this Act after previous publication. (2) All rules made under this Act shall be laid on the table of the Legislative Assembly as soon as may be after they are made.
50. Penalty for attempting to commit offence
Whoever abets any offence punishable under this Act, or attempts to commit any such offence and in such attempt does any act towards the commission of the offence, shall be punished with the punishment provided for that offence.
51. Penalty for harbouring offenders
Whoever, knowing or having reason to believe that any person has committed an offence under this Act, harbours or conceals such person or gives any aid or assistance to him, shall be punished with the punishment provided for that offence. Explanation.—For the purposes of this sub-section, 'harbour' includes the supplying of a person with shelter, food, drink, money, clothes, arms, ammunition or means of conveyance, or the assisting of a person in any way to evade apprehension, whether of the same kind as those enumerated in this section or not.
52. Protection
(1) No suit, prosecution or other legal proceeding shall lie against any person for anything which is in good faith done or intended to be done in pursuance of this Act or any rules made or orders issued thereunder. (2) Save as otherwise expressly provided under this Act, no suit or other legal proceedings shall lie against the Government for any damage caused or likely to be caused by anything which is in good faith done or intended to be done in pursuance of this Act or any rules made or orders issued thereunder.
53. Act not to abrogate other laws
The provisions of this Act shall be in addition to, and not in derogation of, any other Act, ordinance or regulation for the time being in force.
54. Power of search by any police officer
Any police officer or any person authorised in this behalf by the State Government may search any person entering or seeking to enter or being on or in or leaving any protected place or protected area, as the case may be, and any vehicle, vessel, animal or thing brought into or in or being taken out of such place or area by such person, and may, for the purpose of search, detain such person, vehicle, vessel, animal or thing: Provided that the search of any woman shall be made by a woman only and with strict regard to decency.
55. Repeal
The Madhya Pradesh Public Security Act, 1965 (No. 17 of 1965) is hereby repealed.
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