Bare Act
The Jharkhand State Assembly (Pay, Allowances and Pension) Act, 2001
1. संक्षिप्त नाम विस्तार एवं प्रारम्भ
- (i) यह अधिनियम झारखण्ड विधान-मण्डल (सदस्यों का वेतन, भत्ता और पेंशन) अधिनियम, 2001 कहा जा सकेगा ।
- (ii) इसका विस्तार सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य में होगा ।
- (iii) यह तुरन्त प्रवृत्त होगा ।
2. परिभाषाएँ
इस अधिनियम में जब तक कि विषय या सन्दर्भ के विरुद्ध कोई बात न हो :- (क) "मण्डल/सभा से अभिप्रेत है झारखण्ड विधान-मण्डल/सभा । (ख) "मुख्य सचेतक", "उप मुख्य सचेतक" और "सचेतक" से अभिप्रेत है सत्तारूढ़ दल, जो सरकार गठित करे, द्वारा मुख्य सचेतक, उप मुख्य सचेतक एवं सचेतक के रूप में नियुक्त कोई सदस्य और मान्यता प्राप्त मुख्य विपक्षी दल द्वारा मान्यता प्राप्त मुख्य सचेतक और सचेतक । (ग) "संसदीय सचिव" से अभिप्रेत है राज्यपाल द्वारा संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त कोई सदस्य । (घ) विधानसभा की समिति से अभिप्रेत है विधानसभा द्वारा अथवा अध्यक्ष द्वारा उनके सदस्यों से बनी समिति । (ङ) "विधानसभा का अधिवेशन" से अभिप्रेत है, विधानसभा का अधिवेशन जो राज्यपाल द्वारा बुलाया जाय । (च) "सदस्य" से अभिप्रेत है अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मंत्री, उप मंत्री या वेतन भोगी संसदीय सचिव, विपक्ष के नेता से अन्यथा विधानसभा का कोई सदस्य । (छ) "सत्र" से अभिप्रेत है राज्यपाल द्वारा आहूत विधानसभा को प्रथम बैठक से प्रारम्भ होने वाली और विधानसभा के बैठक को समाप्ति के दिन से अनिश्चितकाल के लिए समाप्त होने वाली सम्पूर्ण अवधि । (ज) "सामान्य निवास स्थान" से अभिप्रेत :- (क) झारखण्ड विधान-मण्डल के निर्वाचित सदस्य के लिए वह स्थान, जो उनके द्वारा नाम निर्देशन पत्र में उल्लिखित स्थायी पता अंकित हो । (ख) झारखण्ड विधान-मण्डल के मनोनीत सदस्य के लिए यह स्थान जहां की मतदाता सूची में उसका नाम हो ।
3. सदस्यों का वेतन
प्रत्येक सदस्य 3000/-(तीन हजार) रुपये प्रति माह की दर से वेतन, जो उसे उस दिन से प्राप्त होगा, जिस दिन वह सम्यक् रूप से निर्वाचित घोषित किया जाए, अथवा विधानसभा/मण्डल में स्थान भरने के लिए राज्यपाल द्वारा मनोनीत सदस्य की दशा में उस तिथि से प्राप्त होगा, जिस तिथि को उसे मनोनीत किया जाए, अथवा यदि ऐसी घोषणा या जो मनोनयन रिक्त होने की तिथि से पूर्व किया गया हो, तो रिक्त होने की तिथि से पाने का हकदार होगा । परन्तु वेतन की अदायगी तब तक नहीं की जायेगी जब तक कि कोई सदस्य शपथ-ग्रहण न कर ले या भारतीय संविधान के अनुच्छेद-188 में निर्दिष्ट प्रतिज्ञान पर हस्ताक्षर न कर दें :- किन्तु यह कि आम चुनाव के बाद गठित नई विधान-मण्डल के किसी सदस्य की दशा में वेतन का भुगतान केवल उस तारीख से किया जायेगा, जिस तारीख को सभा की प्रथम बैठक नियत की गई है । परन्तु यह भी कि प्रत्येक सदस्य को भुगतेय वेतन अनुपस्थिति करने के लिए ऐसी कटौतियों का दायो होगा जो इस निमित्त राज्य सरकार द्वारा बनाये गये नियम में उपबंधित किया जाय । परन्तु यह भी कि जहां कोई व्यक्ति केन्द्र सरकार या किसी राज्य सरकार अथवा केन्द्र सरकार या किसी राज्य सरकार द्वारा स्वाधिकृत या नियंत्रित या किसी अन्य स्थानीय प्राधिकार या अन्य प्राधिकार के अधीन या किसी व्यक्ति से अपने वेतन का हकदार हो और ऐसे सरकार निगम, स्थानीय प्राधिकार या अन्य प्राधिकार या किसी व्यक्ति से वेतन के रूप में कोई राशि प्राप्त करता हो, तो । (क) यदि वेतन की राशि, जिसका वह ऐसे विधि या अन्यथा के अधीन हकदार है, उस राशि के समान या उससे अधिक हो, जिसके वह इस धारा के अधीन हकदार है, तो ऐसा व्यक्ति किसी वेतन का हकदार नहीं होगा । (ख) यदि वेतन की राशि, जिसका वह ऐसे विधि या अन्यथा के अधीन हकदार है, उस राशि से न्यून हो जिसका वह इस धारा के अधीन हकदार है, तो ऐसा व्यक्ति इस धारा के अधीन वेतन की उस राशि का हकदार होगा, जो वेतन की उस राशि से कम है जिसका वह इस धारा के अधीन अन्यथा हकदार है ।
4. सवारी भत्ता
प्रत्येक सदस्य को तीन सौ रुपये प्रतिमाह की दर से सवारी भत्ता दिया जायेगा, जिस तारीख को वह शपथ ग्रहण करे, या धारा-3 में निर्दिष्ट प्रतिज्ञान पर हस्ताक्षर करे ।
5. क्षेत्रीय भत्ता
प्रत्येक सदस्य के रूप में शपथ या प्रतिज्ञान करने की तिथि से प्रतिमाह 4,000/- (चार हजार) रुपये क्षेत्रीय भत्ता पाने का हकदार होगा ।
6. मोटरगाड़ी क्रय हेतु ऋण की सुविधा
झारखण्ड विधान-मण्डल के किसी सदस्य को मांग पर मोटरगाड़ी क्रय हेतु गाड़ी के मूल्य के समतुल्य राशि अथवा अधिकतम पांच लाख रुपये, जो भी कम हो, राज्य सरकार द्वारा अवधारित नियमावली में निहित शर्तों के अधीन ऋण के रूप स्वीकृत की जायेगी जो सीधे गाड़ी के कम्पनी/डीलर को भुगतेय होगा । भुगतेय ऋण राशि पर 5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय भुगतान होगा ।
7. पोस्टल, स्टेशनरी और कार्यालय व्यय की सुविधा
विधानसभा के प्रत्येक सदस्य को, सदस्य के रूप में शपथ या प्रतिज्ञान करने की तिथि से संसदीय कार्यों के सम्पादन के क्रम में पोस्टल, स्टेशनरी और कार्यालय व्यय वहन करने के लिए 2,000/- (दो हजार) प्रतिमाह रुपये भुगतेय होगा ।
8. सदस्यों का दैनिक एवं यात्रा भत्ता
उन नियमों के अधीन रहते हुए जो राज्य सरकार द्वारा इसके लिए बनाये जायें :-
- (i) राज्य के अन्तर्गत निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए प्रत्येक सदस्य हर निवास दिन या उसके किसी अंश के लिए प्रतिदिन 350/- (तीन सौ पचास) रुपये की दर से दैनिक भत्ता पाने का हकदार होगा :- (क) यथास्थिति, विधानसभा के अधिवेशन में उपस्थित होने के लिए । स्पष्टीकरण - इस निवास दिन में विधानसभा का अधिवेशन प्रारम्भ होने के पूर्व तथा समाप्त होने के बाद का अधिक से अधिक एक दिन के निवास की अवधि भी शामिल है, परन्तु इसके लिए सदस्य को प्रमाणित करना होगा कि वह उन दिनों उस स्थान पर उपस्थित था जहां ऐसे अधिवेशन हुए हो । (ख) विधानसभा की समिति की बैठक में सम्मिलित होने के प्रयोजनार्थ । स्पष्टीकरण - किसी तिथि की बैठक को समाप्ति पर सभा स्थल पर यदि कोई सदस्य आए, किन्तु सदन की बैठक में भाग न ले सके तो उनका उस दिन सभा-स्थल पर ठहरना सदन की बैठक में भाग लेने के लिए निवास नहीं माना जायेगा, जब तक कि अध्यक्ष द्वारा अन्यथा न दिया जाय ।
- (ii) (क) प्रत्येक सदस्य आम चुनाव, मध्यावधि चुनाव, उपचुनाव अथवा मनोनयन की दिशा में, विधानसभा के अधिवेशन अथवा विधानसभा के अन्य अधिवेशन में पहली बार उपस्थित होने के निमित्त रेल यात्रा की दशा में प्रथम श्रेणी के किराए के ड्योढ़ा भाड़ा तथा निजी कार से यात्रा की दशा में प्राप्त किलोमीटर पांच रुपए का दर से मील भत्ता एवं बस यात्रा की दशा में दुगुना बस भाड़ा पाने का हकदार होगा । (ख) प्रत्येक सदस्य विधानसभा का अधिवेशन या विधानसभा की समिति अथवा सदस्य के रूप में अपने कर्तव्यों से सम्बन्धित किसी अन्य कारोबार में, भाग लेने के निमित्त अपने सामान्य निवास स्थान से उस जगह जहां विधानसभा की समिति की बैठक या अन्य कारोबार किया जाने वाला हो, उनके द्वारा की गई प्रत्येक यात्रा और ऐसे स्थान से अपने सामान्य निवास स्थान की वापसी यात्रा के लिए दैनिक भत्ता के अतिरिक्त कोई यात्रा भत्ता पाने का हकदार न होगा, परन्तु, यह कि, यदि कोई सदस्य उपधारा
- (ii) (ख) के प्रयोजनार्थ यात्रा करे, तो यह केवल निम्न का हकदार होगा :- (क) रेल द्वारा की गई हरेक यात्रा के लिए प्रथम श्रेणी के किराए की आधी रकम की दर से आनुषंगिक खर्च (खर्चे), (ख) राज्य पथ परिवहन सेवा की बसों द्वारा की गई हरेक यात्रा के लिए निर्धारित बस भाड़े के समतुल्य अतिरिक्त राशि का आनुषंगिक खर्च, (ग) निजी कार से की गई यात्रा के लिए नियमानुसार निर्धारित दर से, परन्तु, और कि, ऐसे सदस्यों को जिनके पास निजी कार नहीं है, उन्हें रेल द्वारा प्रथम श्रेणी का इकलौता रेल भाड़ा देय होगा, परन्तु यह भी, कि जहां कोई सदस्य धारा-9 के अधीन निःशुल्क यात्रा करता हो तो वह केवल निम्नलिखित का हकदार होगा :- (क) प्रत्येक रेल यात्रा के लिए प्रथम श्रेणी के किराये की आधी दर से आनुषंगिक भाड़ा, (ख) राज्य पथ परिवहन सेवा की बस द्वारा की गई प्रत्येक यात्रा के लिए प्रथम श्रेणी के राजपत्रित पदाधिकारियों को अनुमन्य दर से आनुषंगिक भाड़ा।
- (iii) प्रत्येक सदस्य को राज्य के बाहर अध्ययन यात्रा के लिए 500/ (पांच सौ) रुपये दैनिक भत्ता अनुमन्य होगा। स्पष्टीकरण -
- (i) राज्य के अन्दर अपने एक वर्ष के कार्यकाल में अधिकतम 7 दिनों का दो बार स्थल अध्ययन-यात्रा मान्य होगा और अन्तराल 5 (पांच) माह से कम का नहीं होगा।
- (ii) राज्य के बाहर स्थल अध्ययन वर्ष में अधिकतम 15 दिनों की अवधि के लिए दो बार अनुमन्य होगा, परन्तु स्थल अध्ययन का अन्तराल 4 माह से कम का नहीं होगा।
9. रेल या पथ परिवहन द्वारा निःशुल्क परिवहन
- (i) ऐसी शर्तों के अधीन जो राज्य सरकार नियमों द्वारा निर्धारित करे, अपने कर्तव्यों के सम्बंध में यात्रा करने वाला प्रत्येक सदस्य और उसके साथ यात्रा करने वाला सहायत्री, यदि कोई हो, को रेलवे कूपन उपबन्ध कराये जायेंगे : जैसा कि नीचे निर्दिष्ट किया गया है - (क) झारखण्ड राज्य के भीतर किसी स्थान या स्थानों पर सभी यात्राओं के लिए। (ख) झारखण्ड राज्य के बाहर, किन्तु भारत के भीतर किसी स्थान या स्थानों की ऐसी अध्ययन यात्राओं के लिए प्रति वर्ष 1,50,000 (एक लाख, पचास हजार) किलोमीटर या उसके मूल्य के लिए रेलवे कूपन दिया जायेगा। स्पष्टीकरण - वर्ष से अभिप्रेत है 1 जून से आरम्भ होने वाली और 31 मई को समाप्त होने वाली कालावधि।
- (ii) प्रत्येक सदस्य और उसके साथ यात्रा करने वाले सहायत्री, यदि कोई हो, तो अहस्तान्तरणीय पास उपलब्ध कराया जायेगा, जिससे वे ग्रामीण क्षेत्रों के सिवाय निगम के किसी मार्ग पर चलने वाली झारखण्ड राज्य पथ परिवहन निगम की किसी बस यात्रा से यात्रा करने के हकदार होंगे।
- (iii) प्रत्येक सदस्य अपने साथ अपनी यात्रा के दौरान झारखण्ड राज्य के भीतर या बाहर किसी सहायत्री को अपने साथ ले आने का हकदार होगा।
- (iv) कंडिका 9
- (i) (ख) के अन्तर्गत वैकल्पिक रूप से विहित राशि सीमा के समतुल्य राशि के अधीन प्रत्येक सदस्य हवाई जहाज का टिकट क्रय कर भारत के भीतर यात्रा करने का हकदार होगा।
10. कम्प्यूटर का प्रावधान
प्रत्येक सदस्य को निःशुल्क कम्प्यूटर की सुविधा देय होगी जिसका मूल्य अधिकतम 75,000/ रुपये की सीमा के अन्तर्गत होगा एवं सदस्यता समाप्त होने पर उन्हें कम्प्यूटर विधान-मण्डल को वापस कर देना होगा।
11. निजी सहायक का प्रावधान
प्रत्येक सदस्य को सदस्य रहने की अवधि पर्यन्त अधिकतम 3,500/- (तीन हजार, पांच सौ) रुपये समेकित वेतन पर एक निजी सहायक की सुविधा अनुमन्य होगी। निजी सहायक को टंकन एवं कम्प्यूटर प्रशिक्षण का ज्ञान आवश्यक होगा।
12. चिकित्सा भत्ता
झारखण्ड विधान-मण्डल के प्रत्येक सदस्य को दो हजार रुपये प्रतिमाह की दर से चिकित्सा भत्ता का भुगतान देय होगा।
13. दूरभाष का प्रावधान
प्रत्येक सदस्य को उसके रांची स्थित आवास में दूरभाष उपलब्ध कराया जायेगा, जैसा कि राज्य सरकार नियमों द्वारा अवधारित करे। प्रत्येक सदस्य को वर्ष में अधिकतम 50,000 स्थानीय कॉल की मुफ्त सुविधा अनुमन्य होगी।
14. सवारी भत्ता और अन्य भत्ते
यदि कोई हो, स्टाफ कार; दूरभाष सम्बन्धी सुविधायें आदि ऐसी शर्तों के अधीन और ऐसी दरों पर उपबन्ध करायी जायेंगी, जैसा कि राज्य सरकार समय-समय पर नियमों द्वारा अवधारित करे।
15. नियम बनाने की शक्ति
- (i) राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उपबन्धों को कार्यान्वित करने के प्रयोजनार्थ नियम बना सकेगी।
- (ii) विशिष्टतः और पूर्ववर्ती शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना राज्य सरकार निम्नलिखित के अवधारण हेतु नियम बना सकेगी - (क) ऐसी पद्धति जिसके द्वारा वेतन एवं भत्ते की निकासी की जायेगी तथा जिस रीति से और जिस रूप में ऐसे वेतन एवं भत्ते सम्बन्धी विपत्र तैयार किये जायेंगे, प्रतिहस्ताक्षरित किये जायेंगे और भुनाये जायेंगे, (ख) लगातार अनुपस्थिति और कटौती की सीमा, जो ऐसी अनुपस्थिति के लिए सदस्यों के वेतन से की जायेगी, (ग) वह कालावधि जिसके दौरान और जिन शर्तों के अधीन दैनिक और यात्रा भत्ते की निकासी की जायेगी तथा वह दर जिस पर यात्रा भत्ते की निकासी की जायेगी। (घ) जिन रियायती दरों पर सदस्यों द्वारा मकान भाड़ा वहन किया जायेगा। (ङ) जिन शर्तों के अधीन और जिस रीति से रेल यात्रा अथवा राज्य पथ परिवहन सेवा के लिए सदस्यों को कूपन उपलब्ध कराये जायेंगे। (च) सदस्यों एवं उनके परिवार को चिकित्सा सुविधाओं एवं अन्य रियायतों को मंजूर करना। (छ) प्रत्येक सदस्य के सरकारी आवास पर दूरभाष स्थापित करना और उस पर उपगत व्यय आदि। (ज) राज्य के भीतर एवं बाहर अपनी यात्रा के दौरान किसी सहायत्री को अपने साथ ले जाने के लिए सदस्यों को दी जाने वाली सुविधाओं को मंजूर करना।
- (iii) इस धारा के अधीन बनाया गया प्रत्येक नियम इसके बनाये जाने के बाद यथाशक्य शीघ्र सत्र के दौरान राज्य विधान-सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा, जिसकी कुल अवधि 14 दिनों की हो, जो एक सत्र में अथवा दो क्रमागत सत्रों में समाविष्ट हो, और यदि सत्र की समाप्ति के पूर्व जिसमें इसे प्रस्तुत किया गया था, या इसके ठीक बाद वाले सत्र में, सदन नियम में उपातरण करने के लिए सहमत हो, अथवा सदन सहमत हो कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो ततपश्चात् इस नियम का प्रभाव यथास्थिति केवल इसे उपांतरित रूप में होगा, या इसका प्रभाव ही नहीं होगा। फिर भी ऐसे उपांतरण या बातिलीकरण उस नियम के अधीन पूर्व में की गयी किसी बात की विधि-मान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा।
16. इस अधिनियम के अधीन दिये गये वेतन या भत्ते की प्राप्ति से पेंशन का अधिकार प्रभावित नहीं होगा
इस अधिनियम की कोई बात किसी वेतन या भत्ते, जिसका वह इस अधिनियम के अधीन हकदार हो, पाने से निवारित नहीं करेगी।
17. विधान-सभा के सदस्यों का पेंशन
- (i) वैसे प्रत्येक व्यक्ति को जिसने यथास्थिति - (क) झारखण्ड विधान-सभा के सदस्य के रूप में, या (ख) वैसा कोई व्यक्ति जो झारखण्ड विधान-मण्डल के सदस्य के रूप में निर्वाचित/मनोनीत हुआ हो, शपथ ग्रहण करने के बाद तीन हजार रुपये प्रतिमाह आजीवन पेंशन पाने का हकदार होगा और वह प्रत्येक वर्ष के पूरा होने पर तीन सौ रुपये अतिरिक्त पेंशन पावेगा, परन्तु, यह भी, कि विधान-मण्डल के किसी सदस्य की सदस्यता की अवधि उसके यथास्थिति निर्वाचित या मनोनीत घोषित होने से लेकर विधान-मण्डल के भंग होने तक, परन्तु, राष्ट्रपति द्वारा भंग किये जाने या मध्यावधि चुनाव होने, या सदस्यता से त्यागपत्र देने, या सदस्य की मृत्यु होने की छोड़कर, की अवधि यदि चार वर्ष छह माह हो तो वह अवधि पेंशन देने के प्रयोजनार्थ पांच वर्षों की पूरी अवधि के रूप में मानी जायेगी, परन्तु यह और भी, कि प्रत्येक ऐसे व्यक्ति को, जिसने विधान-मण्डल के सदस्य के रूप में (चाहे निरन्तर हो या नहीं) पांच वर्ष की अवधि से कम अवधि के लिए कार्य किया हो, अपने जीवन पर्यन्त एक वर्ष की अवधि के लिए तीन सौ रुपये प्रतिमाह तथा बाद के प्रत्येक वर्ष के लिए पचास रुपये अतिरिक्त राशि प्रतिमाह की दर से पेंशन पाने का हकदार होगा।
- (ii) जहां कोई व्यक्ति उपधारा
- (i) के अधीन पेंशन पाने का हकदार हो, वह व्यक्ति- (क) यदि राष्ट्रपति या उप-राष्ट्रपति के पद पर निर्वाचित किया जाता हो, अथवा किसी राज्य का राज्यपाल या संघ राज्य क्षेत्र का प्रशासक नियुक्त किया जाता हो, या (ख) संसद के किसी सदन का सदस्य बन जाता हो, अथवा किसी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र की विधान-सभा या किसी राज्य की विधान परिषद् का सदस्य बन जाता हो, या (ग) केन्द्र सरकार या किसी राज्य सरकार अथवा केन्द्र सरकार या किसी राज्य सरकार के किसी स्थानीय प्राधिकार के स्वामित्व वाले या नियंत्रणाधीन निगम के अधीन सचेतन नियोजित हो अथवा ऐसी सरकार, निगम या स्थानीय प्राधिकार से कोई पारिश्रमिक पाने का अन्य हकदार हो, तो ऐसा व्यक्ति उपधारा
- (i) के अधीन उस अवधि के दौरान, जिसके वह ऐसा पद धारण किये रहता हो, या ऐसा सदस्य बना रहता हो, या इस प्रकार नियोजित रहता हो, या ऐसे पारिश्रमिक पाने का हकदार बना रहता है, ऐसी पेंशन पाने का हकदार नहीं होगा। परन्तु, जहां ऐसे व्यक्ति को ऐसा पद धारण करने के लिए या ऐसा सदस्य होने के लिए या इस प्रकार नियोजित रहने के लिए वेतन अनुज्ञेय हो, या जहां ऐसे व्यक्ति को खंड
- (iii) में निर्दिष्ट पारिश्रमिक अनुज्ञेय हो, के लिए दोनों मामले में वह व्यक्ति उपधारा
- (i) के अधीन उसे देय पेंशन में से घटाकर उस उपधारा के अधीन पेंशन के रूप में विशेषेण पाने का हकदार होगा।
- (iii) (क) जहां ऐसी विधि के अधीन, या अन्यथा पेंशन की ऐसी रकम जिसे वह पाने का हकदार हो, वहां उपधारा
- (i) के अधीन उस रकम के बराबर या उससे अधिक हो, किसको पाने का वह हकदार हो, तो ऐसा व्यक्ति उपधारा
- (i) के अधीन कोई पेंशन पाने का हकदार नहीं होगा, और (ख) जहां पेंशन की ऐसी रकम जिसे वह ऐसी विधि के अधीन, या अन्यथा पाने का हकदार हो, उस रकम से कम हो जिसे वह उपधारा
- (i) के अधीन पाने का हकदार हो तो ऐसा व्यक्ति उस उपधारा
- (i) के अधीन पेंशन की केवल ऐसी रकम पाने का हकदार होगा जो पेंशन की उस रकम से कम हो, जिसे वह उस उपधारा के अधीन अन्यथा पाने का हकदार हो; परन्तु इसे अधिनियम के अधीन वर्तमान या भविष्य में राजनीतिक उपहत (पोलिटिकल सफरर) पेंशन प्राप्त करने के कारण पूर्व विधायकों को अनुमन्य पेंशन से कोई कटौती नहीं की जायेगी।
- (iv) उपधारा
- (i) के प्रयोजनार्थ वर्षों की गणना करते समय झारखण्ड मंत्री का वेतन एवं भत्ता अधिनियम, 2001 में यथा परिभाषित मंत्री के रूप में या झारखण्ड विधान-मण्डल (पदाधिकारियों का वेतन एवं भत्ता) अधिनियम, 2001 में यथा उल्लिखित किसी पदाधिकारी और झारखण्ड विधान-मण्डल (विपक्ष के नेता का वेतन एवं भत्ता) अधिनियम, 2001 में यथा परिभाषित विपक्ष के नेता और वर्तमान सरकार के अन्तर्गत संसदीय सचिव के रूप में जिस अवधि में किसी व्यक्ति ने सेवा की हो, उस अवधि की भी गणना की जायेगी।
- (v) वैसे प्रत्येक व्यक्ति को उपधारा
- (i) के अधीन, पेंशन पाने का हकदार हो, की मृत्यु के पश्चात् उसकी पत्नी/पति को आजीवन पारिवारिक पेंशन नीचे अंकित दर पर दिया जायेगा :- पेंशन की राशि का पचहत्तर प्रतिशत पारिवारिक पेंशन देय होगा, परन्तु यह भी, कि उपधारा
- (ii) एवं
- (iii) के उपबंध व शर्तें मृत व्यक्ति की पत्नी/पति पर भी लागू होंगे, परन्तु, यह भी कि यदि पारिवारिक पेंशन पाने वाला व्यक्ति अगर शादी कर ले, तो ऐसी दशा में पारिवारिक पेंशन पाने का हकदार नहीं होगा।
- (vi) वैसे प्रत्येक व्यक्ति को जो उपधारा
- (i) के अधीन पेंशन पाने का हकदार हो, राज्य के भीतर प्रति वर्ष 20,000 (बीस हजार) किलोमीटर प्रथम श्रेणी में रेलवे कूपन पर यात्रा कर सकेगा और राज्य के बाहर प्रति वर्ष 15,000 (पन्द्रह हजार) किलोमीटर रेल द्वारा प्रथम श्रेणी की यात्रा कूपन पर कर सकेगा।
18. पूर्व विधायकों की चिकित्सा सुविधा
धारा-17 में उल्लिखित ऐसी पेंशनभोगी पूर्व विधायक आजीवन निःशुल्क चिकित्सा, परिचर्या, दवाओं की आपूर्ति, अस्पतालों में भर्ती होने की सुविधा पाने का हकदार उस सीमा तक होगा, जैसा कि राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर बनाए गए नियमों द्वारा अवधारित किया जाय।
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