section 11
अनुपालन का प्रवर्त्तन कराने के उपाय
The Bihar Fiscal Responsibility and Budget Management Act, 2006 HindiFinance200618 sections
Statutory text
- (1) वित्त विभाग के प्रभारी मंत्री (इसमें इसके पश्चात् वित्त मंत्री के रूप में निर्दिष्ट) बजट प्राक्कलन से संबंधित प्राप्तियों एवं व्यय के रुझान का प्रत्येक तिमाही पर पुनर्विलोकन करेंगे तथा ऐसे पुनर्विलोकन के परिणाम को विधानमंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखेंगे।
- (2) जब कभी राजकोषीय कार्ययोजना विवरण अथवा इस अधिनियम के अधीन बनाये गये नियमों में उल्लिखित वार्षिक लक्ष्यों की तुलना में राजस्व में कमी हो, अथवा व्यय में आधिक्य हो तब राज्य सरकार राजस्व बढ़ाने और/अथवा व्यय कम करने के लिए समुचित उपाय करेगी, जिसमें राज्य की समेकित निधि से भुगतान के लिये माँगी जाने वाली और अधिकृत राशि को कम करना भी शामिल है; परंतु इस उपधारा का कोई भी प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 202 के खंड
- (3) के अधीन राज्य की समेकित निधि पर प्रभूत व्यय तथा कोई अन्य व्यय, जो किसी ऐसे करार या अनुबंध के अधीन किया जाना हो, जिसे स्थगित या कम नहीं किया जा सकता हो, पर लागू नहीं होगा।
- (3) (क) इस अधिनियम के अधीन यथा उपबंधित के सिवाय, इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार पर डाली गई बाध्यताओं को पूरा करने में कोई विचलन विधान मंडल के अनुमोदन के बिना अनुज्ञेय नहीं होगा। (ख) जहाँ अप्रत्याशित परिस्थितियों के चलते इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार पर डाली गई बाध्यताओं को पूरा करने में कोई विचलन किया जाता हो तो वित्त मंत्री निम्नलिखित को स्पष्ट करते हुए विधान मंडल के दोनों सदनों में अभिकथन करेंगे :-
- (i) इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार की बाध्यताओं को पूरा करने में कोई विचलन,
- (ii) क्या ऐसा विचलन पर्याप्त है और वास्तविक या संभावी बजट संबंधी परिणामों से संबंधित है, और
- (iii) राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित; उपचारी उपाय।
- (4) वित्तीय वर्ष के दौरान प्रस्तावित कोई उपाय जिसके चलते राजस्व घाटा बढ़ता हो, चाहे वह व्यय में वृद्धि या राजस्व की हानि के कारण हुई हो, तो उसके साथ उपचारी उपाय का विवरण भी दिया जायेगा, जिसमें ऐसी वृद्धि या हानि को निष्प्रभावित करने के उपाय का प्रस्ताव हो, और ऐसा विवरण विधान मंडल के दोनों सदनों के समक्ष रखा जायेगा।
- (5) राज्य सरकार इस अधिनियम के उपबंधों के अनुपालन की समय-समय पर पुनर्विलोकन करने के लिए एक एजेन्सी का गठन कर सकेगी तथा ऐसी पुनर्विलोकनों को राज्य विधान मंडल के सदनों के पटल पर रखेगी।
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