Bare Act
The Jharkhand Rural Infrastructure and Socio-Economic Development Act, 2005
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारंभ
- (1) यह अधिनियम झारखण्ड ग्रामीण आधारभूत संरचना एवं सामाजिक-आर्थिक विकास अधिनियम, 2005 के नाम से जाना जाएगा ।
- (2) यह सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य में प्रभावी रहेगा ।
- (3) यह राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने की तिथि से प्रभावी माना जाएगा ।
2. परिभाषाएं
इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित न हो- (क) किसी एक वित्तीय वर्ष के लिए "खनिज धारित भूमि के वार्षिक मूल्य" का अभिप्राय ऐसे वित्तीय वर्ष से सद्य:गत दो वित्तीय वर्षों के दौरान ऐसी खनिज धारित भूमि से उत्पादित खनिज
4. कर का भुगतान एवं वसूली
- (1) किसी खनिज धारित भूमि के संबंध में धारा-3 की उप-धारा-(2) के अन्तर्गत भुगतेय कर का भुगतान ऐसी भूमि के धारक द्वारा राज्य सरकार की अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट (एतदोपरान्त अधिसूचित प्राधिकारी के रूप में वर्णित) प्राधिकारी, जो सहायक खनन पदाधिकारी से अन्यून न हो, ऐसी रीति, ऐसे अन्तराल तथा ऐसी तिथि अथवा तिथियाँ जैसा कि विहित हो, पर किया जाएगा। परन्तु यह कि यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक खनिज के लिए खनिज धारित भूमि धारित करता है, तब इस अधिनियम के अन्तर्गत गठित नियमावली में वर्णित प्रक्रिया के अनुसार कर का भुगतान उसके द्वारा किया जाएगा।
- (2) खनिज धारित भूमि के प्रत्येक धारक के द्वारा कर के भुगतान में किसी अवधि हेतु विनिर्दिष्ट तिथि में हुई चूक की स्थिति में उप-धारा-(1) के अन्तर्गत दण्ड स्वरूप ऐसी दण्ड राशि उक्त अवधि के लिए देय होगी, जो उक्त भुगतेय कर की तीन गुणा से अधिक न हो। परन्तु यह कि अधिसूचित प्राधिकारी के द्वारा ऐसी दण्ड राशि लगाते समय खनिज धारित भूमि के धारक को सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान किया जाएगा।
- (3) उप-धारा-(1) के अन्तर्गत भुगतेय कर का आकलन अधिसूचित प्राधिकारी के द्वारा यथा विहित किया जाएगा।
- (4) उप-धारा-(3) के अन्तर्गत आकलित कर की वसूली अथवा आकलन उपरांत अधिक भुगतान किए गए कर की राशि की वापसी यथा विहित की जाएगी।
- (5) उप-धारा-(3) के अन्तर्गत आकलित कर एवं दण्ड, यदि कोई आरोपित एवं भुगतान नहीं किया गया है, की वसूली अधिसूचित प्राधिकारी द्वारा भू-राजस्व बकाया के रूप में की जाएगी।
5. अपील
- (1) यदि कोई व्यक्ति अधिसूचित प्राधिकारी द्वारा पारित आकलन आदेश से असंतुष्ट हो तो वह आदेश प्राप्ति के तीस दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील दायर कर सकेगा एवं अपीलीय प्राधिकारी, उस पर जैसा उचित समझे, आदेश पारित कर सकेगा। परन्तु यह कि अपीलीय प्राधिकारी निर्धारित अवधि के पश्चात् भी अपील को सुनवाई हेतु स्वीकृत कर सकेगा, यदि वह संतुष्ट है कि अपीलकर्ता के पास निर्धारित अवधि के भीतर अपील नहीं दायर किए जाने का समुचित कारण उपलब्ध है। परन्तु यह भी कि अपीलीय प्राधिकारी के द्वारा ऐसी किसी अपील की सुनवाई नहीं की जाएगी जब तक उक्त प्राधिकारी संतुष्ट न हो कि अपीलकर्ता के द्वारा धारा-4 उप-धारा-(1) के अन्तर्गत निर्धारित कर की राशि का 40 प्रतिशत अथवा वैसी कर की राशि जिसे अपीलकर्ता स्वीकार करते हों, में से जो भी अधिक हो, का भुगतान कर दिया गया हो।
- (2) अपीलीय आदेश के अन्तर्गत अधिसूचित प्राधिकारी द्वारा पारित कोई भी आदेश अंतिम होगा।
6. अधिसूचित प्राधिकारी की सहायता हेतु व्यक्तियों की नियुक्ति
- (1) राज्य सरकार अधिसूचित प्राधिकारी की सहायता के लिए किसी व्यक्ति की नियुक्ति कर सकेगी।
- (2) अधिसूचित प्राधिकारी के किसी अधिकार, कर्तव्य एवं कृत्य को उप-धारा-(1) के अन्तर्गत नियुक्त किसी व्यक्ति को यथाविहित प्रक्रिया एवं शर्तों के अधीन प्रत्यायोजित किया जा सकेगा।
7. ग्रामीण आधारभूत संरचना एवं सामाजिक-आर्थिक विकास कोष
- (1) “झारखण्ड ग्रामीण आधारभूत संरचना एवं सामाजिक आर्थिक विकास कोष” नामक कोष की स्थापना की जाएगी, जिसका संचालन यथाविहित प्रक्रिया से किया जाएगा।
- (2) यह कोष- (क) कर की समस्त प्राप्तियों; (ख) राज्य सरकार के द्वारा अनुदान की कोई राशि; और (ग) अन्य जिस किसी स्रोत से प्राप्त होने वाली कोई अन्य राशि से मिलकर निर्मित होगा।
8. कोष का उपयोग
इस कोष का उपयोग राज्य सरकार द्वारा आधारभूत संरचना के विकास एवं संवर्धन, उत्पादन कार्यक्रमों को कार्यान्वित करने, ग्रामीण विशेषकर पिछड़े एवं खनन क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता एवं नियोजन को बढ़ावा देने हेतु किया जाएगा, जिसके लिए राज्य सरकार द्वारा उपयुक्त आधारभूत संरचना विकास कार्यक्रम तैयार करने हेतु समुचित कदम उठाए जाएँगे।
9. अधिसूचित प्राधिकारी एवं अन्य व्यक्तियों का लोक सेवक होना
अधिसूचित प्राधिकारी तथा धारा-6 की उप-धारा-(1) के अन्तर्गत नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति, जो इस अधिनियम के अन्तर्गत अधिसूचित प्राधिकारी की शक्तियों एवं कृत्यों के निर्वहन हेतु प्राधिकृत हो, को भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा-21 के अन्तर्गत लोक सेवक समझा जाएगा ।
10. सद्भावपूर्वक किए गए कृत्य हेतु संरक्षण
इस अधिनियम अथवा अधिनियम अन्तर्गत गठित नियमों या आदेशों के सद्भावपूर्वक किए गए कृत्य अथवा अनुपालन के क्रम में किए जाने वाले कृत्यों के संबंध में राज्य सरकार अथवा अधिसूचित प्राधिकारी अथवा धारा-6 की उप-धारा-(1) के अन्तर्गत नियुक्त व्यक्ति अथवा अपीलीय प्राधिकारी के विरुद्ध कोई वाद, अभियोजन अथवा कानूनी कार्यवाही संचालित नहीं की जाएगी ।
11. नियम बनाने की शक्ति
- (1) राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के उद्देश्य को लागू करने के लिए नियम बना सकेगी ।
- (2) विशेष रूप से पूर्ववर्ती शक्तियों की व्यापकता पर बिना विपरीत प्रभाव डाले, ऐसे नियमों में सभी अथवा निम्नांकित विषयों के लिए प्रावधान होंगे- (क) धारा-2 के अन्तर्गत कंडिका (क) के मामले में खनिज धारित भूमि का वार्षिक मूल्य निर्धारण । (ख) धारा-2 की कंडिका (ख) के अन्तर्गत अपीलीय प्राधिकारी की नियुक्ति एवं तत्संबंधी प्रक्रिया । (ग) धारा-3 की उप-धारा-(2) के परंतुक के अन्तर्गत खनिज धारित भूमि, जिससे खनिज का उत्पादन नहीं किया जा रहा हो, के कर का निर्धारण । (घ) धारा-3 की उप-धारा-(3) के अन्तर्गत समिति की नियुक्ति । (ङ) धारा-4 की उप-धारा-(1) के उद्देश्य से विवरणी एवं अन्य प्रासंगिक आवश्यक सूचनाओं को समर्पित करना । (च) धारा-4 की उप-धारा-(1) के परंतुक के अन्तर्गत एक से अधिक खनिज वाली खनिज धारित भूमि के शुल्क का भुगतान । (छ) धारा-4 की उप-धारा-(3) के अन्तर्गत अधिसूचित प्राधिकारी के द्वारा कर का निर्धारण । (ज) धारा-6 की उप-धारा-(2) के अन्तर्गत अधिसूचित प्राधिकारी की शक्तियों, कर्तव्यों एवं कृत्यों का प्रत्यायोजन; एवं (झ) इस अधिनियम के अन्तर्गत यथाविहित अन्य ऐसे सभी मामले, जो आवश्यक हों ।
- (3) इस धारा के अन्तर्गत नियम बनाते समय राज्य सरकार नियमों का उल्लंघन करने की स्थिति में 25,000/- (पच्चीस हजार) रुपये तक जुर्माना एवं जहाँ उल्लंघन लगातार जारी हो, प्रति दिन 1,000/- (एक हज़ार) रुपए तक का अतिरिक्त जुर्माना, जब तक ऐसा उल्लंघन जारी रहता हो, दण्ड स्वरूप देय होगा ।
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