Bare Act
The Jharkhand Home Guard Act, 2005
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार एवं प्रारम्भ
- (1) यह अधिनियम झारखण्ड गृह रक्षक अधिनियम, 2005 कहा जा सकेगा ।
- (2) इसका विस्तार सम्पूर्ण झारखण्ड राज्य में होगा ।
- (3) अधिसूचना द्वारा राज्य सरकार, समय-समय यह निर्दिष्ट कर सकेगी कि इस अधिनियम के सम्पूर्ण या कोई प्रावधान क्षेत्र विशेष ने एवं किसी तिथि विशेष से, जैसा कि अधिसूचना में उल्लिखित हो, लागू होंगे तथा इसी प्रकार उस अधिसूचना को रद या इसमें संशोधन किया जा सकेगा ।
2. परिभाषाएँ
इस अधिनियम में, जबतक कि विषय या संदर्भ में अन्यथा अपेक्षित नहीं हो, (क) "गृह रक्षक" से अभिप्रेत है, जैसा व्यक्ति जो इस अधिनियम के अन्तर्गत नामांकित किया गया है । (ख) "विहित" से अभिप्रेत है इस अधिनियम के अधीन निर्मित नियमावली में यथा विहित ।
3. गृह रक्षकों का विधान
- (1) अधिनियम की धारा-1 के उपधारा(3) के अधीन अधिसूचित प्रत्येक क्षेत्र के लिए राज्य सरकार जैसा विहित हो उस प्रकार से गृह रक्षकों का गठन कर सकेगी जो ऐसे कार्यों का निष्पादन कर सकेगा जो लोगों की सुरक्षा एवं जान-माल के संरक्षण हेतु झारखण्ड राज्य के किसी भी क्षेत्र में इस अधिनियम के प्रावधान और इसके अन्तर्गत निर्मित नियमावली के अन्तर्गत सौंपा गया हो ।
- (2) इस अधिनियम के उद्देश्य हेतु, झारखण्ड राज्य का गृह रक्षक एक एकल फोर्स समझा जाएगा और इसके सदस्य औपचारिक रूप से नामांकित होंगे तथा इसमें अधिकारियों एवं व्यक्तियों की संख्या, उनकी अर्हताएँ और प्रशिक्षण एवं सेवा शर्तें वही होगी जैसा कि विहित किया जायेगा ।
- (3) गृह रक्षक का नामांकन होने पर, प्रथम अनुसूची में निर्धारित प्रपत्र में घोषणा करनी होगी और वे द्वितीय अनुसूची में निर्धारित प्रपत्र में विहित पदाधिकारी के हस्ताक्षर और मुहर लगा नामांकन प्रमाण-पत्र प्राप्त करेंगे । इसके फलस्वरूप प्रमाण-पत्र धारक में गृह रक्षक को प्राप्त शक्तियाँ और सुविधाएँ निहित होगी ।
4. गृह रक्षकों को कर्तव्य पर बुलाना
उपायुक्त के क्षेत्राधिकार का कोई क्षेत्र जहाँ यह अधिनियम प्रवृत है, उपायुक्त किसी भी गृह रक्षक को विहित प्रक्रिया के आदेश द्वारा इस अधिनियम के प्रावधानों एवं इसके अधीन निर्मित नियमावली के संगत कर्तव्यों के निर्वहन हेतु कर्तव्य पर बुला सकेंगे ।
5. पुलिस पदाधिकारियों द्वारा नियंत्रण
धारा-4 के अधीन पुलिस बल के सहयोग हेतु जब एक गृह रक्षक कर्तव्य पर बुलाया जायेगा तो इस तरीके एवं उस हद तक पुलिस पदाधिकारी के नियंत्रण में होगा जैसा विहित किया जायेगा ।
6. गृह रक्षकों को प्राप्त शक्तियाँ एवं संरक्षण
- (1) इस अधिनियम एवं इसके अधीन निर्मित नियमावली के प्रावधानों के आलोक में जब एक गृह रक्षक धारा-4 के अधीन पुलिस फोर्स के सहायतार्थ कर्तव्य पर बुलाया जायेगा, उसे वही शक्तियाँ, सुविधाएँ एवं संरक्षण हासिल होंगे जो उस समय लागू किसी भी अधिनियम के अधीन नियुक्त पुलिस पदाधिकारी के होंगे ।
- (2) गृह रक्षक के रूप में कर्तव्य निर्वहन हेतु उसके द्वारा किये गये किसी कार्य या, इस रूप में तात्पर्यित किसी कार्य के विरुद्ध कोई भी अभियोजन नहीं चलाया जा सकेगा, जब तक कि जिला दंडाधिकारी, जिसके क्षेत्राधिकार में होमगार्ड गठित हो की पूर्वअनुमति प्राप्त न कर ली गई हो ।
7. गृह रक्षकों पर नियंत्रण
किसी भी क्षेत्र के लिए गठित गृह रक्षक पर सामान्य पर्यवेक्षण, निदेशन एवं नियंत्रण की शक्ति उपायुक्त में निहित होगी और उन्हीं के द्वारा जिला समादेष्टा, गृह रक्षावाहिनी के सहयोग से लागू की जा सकेगी, जिसकी अधिकारिता उस क्षेत्र में हो जहाँ गृह रक्षक गठित है । जिला समादेष्टा उक्त उत्तरदायित्व का निर्वहन किसी विशेष कर्तव्य निर्वहन हेतु विहित पदाधिकारी के पर्यवेक्षण में एवं राज्य के महासमादेष्टा, गृह रक्षा वाहिनी के सामान्य पर्यवेक्षण में करेंगे ।
8. सेवावधि एवं सेवामुक्ति
- (1) इस निमित निर्मित नियमावली की शर्तों के अधीन एक गृह रक्षक को चार वर्षों तक के लिए (प्रशिक्षण में बिताई गयी अवधि सहित) राज्य सरकार को सेवा देनी होगी तथा उन्हें किसी भी समय कर्तव्य पर बुलाया जा सकेगा, किन्तु उनकी उम्र 54 वर्ष से अधिक की नहीं होगी ।
- (2) उपधारा-1 में विनिर्दिष्ट अवधि के समाप्त होने पर प्रत्येक गृह रक्षक, गृह रक्षा वाहिनी से सेवा मुक्ति के योग्य हो जायेगा, परन्तु ऐसा व्यक्ति इस तरह योग्य होने के पूर्व ऐसे पदाधिकारी द्वारा एवं ऐसी शर्तों के अधीन जैसा विहित किया जाय सेवामुक्त किये जा सकेंगे ।
- (3) उपधारा-2 के अधीन अपनी सेवामुक्ति के दस दिनों के अन्दर, गृह रक्षक को प्रदत्त नामांकन प्रमाण-पत्र प्रत्यर्पित करना होगा ।
9. शास्त्रियाँ
- (1) एक गृह रक्षक के- (क) जब वह धारा-4 के अधीन कर्तव्य पर बुलाने पर स्वयं हाजिर न हो, या (ख) बिना उपयुक्त कारण के कर्तव्य के दौरान किसी भी नियम संगत आदेश या कर्तव्य निर्वहन हेतु उसको दिये गये निदेश के इंकार करने पर या गृह रक्षक संगठन के सदस्य के रूप में कार्य निष्पादन में असफल रहने पर, या (ग) कर्तव्य से अनुपस्थित रहने पर, या (घ) कायरता के दोषी होने पर या उसकी अभिरक्षा के किसी व्यक्ति की अवैध शारीरिक हिंसा करने पर, (ङ) धारा-3 के उपधारा
- (3) के अधीन प्रदत्त नामांकन संबंधी प्रमाण-पत्र को दस दिनों के अन्दर समर्पित करने में असफल रहने के दोष सिद्ध किए जाने पर उसे कैद की सजा जिसकी अवधि तीन माह तक बढ़ाई जा सकेगी या जुर्माना जिसे पाँच सौ रुपये तक बढ़ाया जा सकेगा अथवा दोनों सजा एक ही साथ दी जा सकेगी ।
- (2) उपधारा
- (1) के अंतर्गत दंडनीय अपराध संज्ञेय होगा ।
10. वर्दी
गृह रक्षक ऐसा वर्दी पहनेगा जैसा कि विहित किया जायेगा ।
11. लोक सेवक के रूप में गृह रक्षक
गृह रक्षक जो इस अधिनियम के अधीन कार्यों का निर्वहन कर रहा हो, भारतीय दण्ड संहिता (1860 का 45वाँ) की धारा-21 के अर्थ में एक लोक सेवक समझा जाएगा ।
12. नियमावली बनाने की शक्ति
- (1) राज्य सरकार पूर्व प्रकाशित शर्तों के अध्यधीन इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने हेतु नियमावली बना सकेगी ।
- (2) खास तौर पर और पूर्वोक्त शक्तियों की सामान्यता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना ऐसी नियमावली में निम्नांकित विषयों में से सभी या किसी का उपबंध या विनियमन किया जा सकेगा, यथा- (क) इस अधिनियम द्वारा अपेक्षित विहित किए जाने वाले सभी मामले । (ख) गृह रक्षकों के संगठन, नियुक्ति अर्हताएँ, सेवा शर्तें, कर्तव्य, अनुशासन, शस्त्र सज्ज, कपड़ों एवं वर्दी तथा सेवा हेतु उन्हें बुलाने या प्रशिक्षण में भेजने संबंधी रीति, और (ग) धारा-6 के अधीन प्रयोज्य किसी शक्ति का गृह रक्षक द्वारा प्रयोग में लाना ।
13. स्थायी आदेश
तथापि समादेष्ट गृह रक्षा वाहिनी गृह रक्षक बल के दैनंदिन प्रशासन संबंधी विषयों पर स्थायी आदेश निर्गत कर सकेगा ।
14. व्यावृत्ति
बिहार होमगार्ड अधिनियम, 1947 के द्वारा या इसके अधीन प्रदत्त शक्तियों के तहत की गई कार्रवाई, बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा-84 के आलोक में मान्य समझे जायेंगे, मानो उक्त अधिनियम उस तिथि को प्रवृत्त था जिस तिथि को ऐसी कार्रवाई की गई थी ।
प्रथम अनुसूची. प्रथम अनुसूची [देखें, धारा-3 का उपधारा(3)] मैं,...........................................पुत्र............................................ ......................................................................का निवासी हूँ, शपथपूर्वक स्वीकार करता हूँ कि मैं नामांकन की तिथि से बारह माह की अवधि तक, जिसमें प्रशिक्षण में बितायी गयी अवधि सम्मिलित है (जिसे राज्य सरकार के निर्णयानुसार बढ़ाया जा सकता है), सच्ची निष्ठा के साथ गृह रक्षक के सदस्य के रूप में सेवा करूँगा । मै पुनः शपथपूर्वक कहता हूँ कि इसके अतिरिक्त अगले तीन वर्षों की अवधि तक कर्तव्य पर बुलाये जाने पर कभी भी एवं कहीं भी गृह रक्षक के सदस्य के रूप में सेवा करूँगा । मै अपनी सारी कुशलता एवं ज्ञान के साथ गृह रक्षक सदस्य के रूप में अपने कर्तव्य का निर्वहन करूँगा । हस्ताक्षर पता..................................
द्वितीय अनुसूची. द्वितीय अनुसूची [देखें, धारा-3 (3)] नामांकन प्रमाण-पत्र हेतु प्रपत्र नाम....................................................पुत्र............................................ गृह पता................................................................................................... को झारखण्ड गृह रक्षक अधिनियम, 2005 की धारा-3
- (3) के अधीन गृह रक्षक के सदस्य के रूप में नामांकित किया जाता है । जब विधि के अनुसार कर्तव्य पर हो, उन्हें वही शक्तियाँ, सुविधाएँ एवं संरक्षण हासिल होंगे, जो उस समय लागू किसी भी अधिनियम के अधीन नियुक्त पुलिस पदाधिकारी के होंगे । नामांकन की तिथि................................... स्थान............................... दिनांक...............................
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