section 6
पदों के सृजन तथा कर्मचारी वृन्द की नियुक्तियों एवं सेवाओं की समाप्ति का प्रतिषेध
The Chhattisgarh Ashaskiya Shikshan Sanstha (Anudan ka Praday) Adhiniyam, 1978तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में या उसके अधीन बनाये गये किन्हीं नियमों, विनियमों, उपविधियों, परिनियमों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,– (क) नियत तारीख को तथा से,– (एक) किसी अध्यापक या अन्य कर्मचारी के किसी पद का सृजन तथा किसी अध्यापक या अन्य कर्मचारी की भर्ती इस संबंध में विहित की गई प्रक्रिया का अनुसरण किये बिना नहीं की जायगी / नहीं किया जायेगा; (दो) अध्यापक तथा कर्मचारी ऐसी अर्हत्ताओं तथा ऐसे अनुभव वाले होंगे जैसा कि विहित किया जाय; और (तीन) "किसी भी अध्यापक या अन्य कर्मचारी को ऐसे आदेश द्वारा ही पदच्युत किया जायेगा या सेवा से हटाया जायेगा या उसकी सेवाएं समाप्त की जायेगी जो ऐसी प्रक्रिया का, जो विहित की जाय, अनुसरण करने के पश्चात पारित किया गया हो, अन्यथा नहीं।" परन्तु कोई अध्यापक या अन्य कर्मचारी उसके पदच्युत किये जाने, उसके सेवा से हटाये जाने या उसकी सेवाएं समाप्त किये जाने के विरुद्ध अपील, उसे ऐसा आदेश प्राप्त होने की तारीख से तीस दिन के भीतर, किसी ऐसे अपील प्राधिकारी को कर सकेगा जिसे राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे और ऐसा प्राधिकारी को, जैसी कि वह उचित समझे, विहित रीति में करने के पश्चात उक्त आदेश को या तो अपास्त कर सकेगा या उसकी पुष्टि कर सकेगा या उसे उपान्तरित कर सकेगा तथा अपील के निपटारे के लंबित रहने तक, अपील प्राधिकारी उस आदेश के परिवर्तन को ऐसे आधारों पर, जैसे कि वह उचित समझे, रोक भी सकेगा; (चार) किसी भी अध्यापक या अन्य कर्मचारी को, सक्षम प्राधिकारी के पूर्व अनुमोदन के बिना, नब्बे दिन से अधिक दिन तक निलम्बित नहीं रखा जायेगा: परन्तु सक्षम प्राधिकारी अपना अनुमोदन ऐसी जांच करने के पश्चात ही तथा ऐसे समय के भीतर देगा जैसा कि विहित किया जाय; (ख) सक्षम प्राधिकारी, किसी संस्था के किसी ऐसे अध्यापक या कर्मचारी द्वारा, जिसे कि संस्था के प्रबंधक वर्ग ने 17 नवम्बर, 1977 को या उसके पश्चात किसी भी समय, पदच्युत कर दिया हो या सेवा से हटा दिया हो, या जिसकी सेवाएं संस्था के प्रबंधकवर्ग ने 17 नवम्बर, 1977 को या उसके पश्चात किसी भी समय समाप्त कर दी हो, आवेदन नियत तारीख से तीस दिन के भीतर किया जाने पर, संस्था के प्रबंधकवर्ग को तथा उन व्यक्तियों को, जिन पर ऐसी पदच्युति, हटाये जाने या सेवा समाप्त किये जाने का प्रभाव पड़ा हो, सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात तथा ऐसी जांच, जैसी कि वह उचित समझे, करने के पश्चात यथास्थिति उस पदच्युति, हटाये जाने या सेवा समाप्ति को शून्य घोषित कर सकेगा तथा संस्था के प्रबंधकवर्ग को यह निर्देश दे सकेगा कि वह ऐसे अध्यापक या कर्मचारी को सेवा में बहाल करे; (ग) सक्षम प्राधिकारी अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों की उन नियुक्तियों के, जो कि 17 नवम्बर, 1977 से प्रारंभ होने वाली तथा इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख को समाप्त होने वाली कालावधि के दौरान की गई हो, समस्त प्रकरणों का पुनर्विलोकन करेगा और, यदि वह संस्था के प्रबंधकवर्ग तथा संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात, यह निष्कर्ष निकालता है कि वे नियुक्तियां इस अधिनियम की प्रत्याशा में की गई थी, तो वह ऐसी नियुक्तियों को लिखित आदेश द्वारा उसमें कथित किये जाने वाले कारणों से अनुमोदित कर सकेगा।
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