Bare Act
The Chhattisgarh Ashaskiya Shikshan Sanstha (Anudan ka Praday) Adhiniyam, 1978
1. संक्षिप्त नाम, विस्तार, प्रारंभ तथा लागू होना
- (1) इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम मध्यप्रदेश अशासकीय शिक्षण संस्था (अनुदान का प्रदाय) अधिनियम, 1978 है।
- (2) इसका विस्तार संपूर्ण मध्यप्रदेश राज्य पर है।
- (3) यह ऐसी तारीख को प्रवृत्त होगा जिसे राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, नियत करे।
- (4) इस अधिनियम में अन्यथा उपबंधित के सिवाय, यह धारा 2 के खण्ड (ङ) के अधीन आने वाली समस्त संस्थाओं को लागू होगा।
- (5) कोई ایسی संस्था, जिसको यह अधिनियम उपधारा
- (4) के अधीन लागू होता है, इस अधिनियम में उपबंधित की गई बातों के संबंध में, इस अधिनियम के उपबंधों द्वारा शासित होगी भले ही किसी संविदा या दस्तावेज में या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति में कोई प्रतिकूल बात अन्तर्विष्ट क्यों न हो।
2. परिभाषायें
इस अधिनियम में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,- (क) "नियत तारीख" से अभिप्रेत है धारा 1 की उपधारा
- (3) के अधीन अधिसूचना द्वारा नियत की गई तारीख; (ख) "सक्षम प्राधिकार" से अभिप्रेत है कोई ऐसा अधिकारी जिसे राज्य सरकार ने अधिसूचना द्वारा इस हेतु से नियुक्त किया हो कि वह इसे अधिनियम के अधीन सक्षम प्राधिकार के कृत्यों का निर्वहन करें; (ग) "शिक्षा अधिकारी" से अभिप्रेत है जिला शिक्षा अधिकारी या राज्य सरकार का कोई अन्य ऐसा अधिकारी या संस्था में सेवारत कोई ऐसा अध्यापक, जो प्राचार्य या प्रधान अध्यापक की पद श्रेणी से अनिन्न पद श्रेणी का न हो, चाहे वह किसी भी नाम से जाना जाता हो, जिसे राज्य सरकार द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिये उस हैसियत में नियुक्त किया हो; (घ) "कर्मचारी" से अभिप्रेत है संस्था का अध्यापक से भिन्न कोई ऐसा कर्मचारी संस्था के वेतन पत्रक में जिसका नाम उस हैसियत में नियोजित हुए रूप में किसी पद के सम्मुख दर्शाया गया हो किन्तु उसके ( कर्मचारी के) अन्तर्गत कोई ऐसा कर्मचारी नहीं आता है जिसकी कि नियुक्ति धारा 6 के खण्ड (ग) के अधीन अनुमोदित की गई हो; (ङ) "संस्था" से अभिप्रेत है ऐसा कोई अशासकीय स्कूल या उच्च शिक्षा संबंधी ऐसी कोई अशासकीय शिक्षण संस्था जिसे यथास्थिति राज्य सरकार से या मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा अनुदान आयोग से अनुरक्षण अनुदान तत्समय प्राप्त होता हो और जिसकी स्थापना, प्रशासन तथा प्रबंध मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 ( क्रमांक 44 सन् 1973) के अधीन रजिस्ट्रीकृत की गई या रजिस्ट्रीकृत की गई समझी गई किसी सोसाइटी द्वारा किया जाता हो, किन्तु उसके ( संस्था के) अन्तर्गत कोई ऐसी संस्था नहीं आती है जिसकी स्थापना, प्रशासन तथा प्रबंध :- (एक) केन्द्रीय सरकार द्वारा; या (दो) राज्य सरकार द्वारा; या (तीन) किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा; या (चार) केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा प्रबंधित, नियंत्रित, अनुमोदित या प्रायोजित (स्पान्सर्ड) किसी ऐसे अभिकरण द्वारा, जिसे राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, विनिर्दिष्ट करे; या (पांच) मध्यप्रदेश नान-ट्रेडिंग कार्पोरेशन एक्ट, 1962 ( क्रमांक 20 सन् 1962) के अधीन बनाये गये तथा रजिस्ट्रीकृत किये गये या उस अधिनियम के अधीन रजिस्ट्रीकृत किये गये समझे गये किसी अव्यापारिक निगम द्वारा, किया जाता हो; (च) "अनुदान" से अभिप्रेत है ऐसा अनुदान जो संस्था को राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर प्रदत्त किया जाना नियत किया जाए; (छ) किसी संस्था के संबंध में "प्रबंधक वर्ग" से अभिप्रेत है मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 ( क्रमांक 44, सन् 1973) के अर्थ के अन्तर्गत उस संस्था की शासी निकाय तथा अभिव्यक्ति "संस्था का प्रबंधक वर्ग" का अर्थ तदनुसार लगाया जाएगा; (ज) "स्कूल" से अभिप्रेत है अशासकीय प्राथमिक, मिडिल या माध्यमिक स्कूल; (झ) 'अध्यापक' से अभिप्रेत है किसी संस्था का कोई ऐसा अध्यापक जो यथास्थिति, मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मण्डल या किसी विश्वविद्यालय या आयोग द्वारा किसी संस्था को या किसी नवीन विषय या किसी उच्चतर कक्षा को या विद्यमान कक्षा में की किसी नवीन सेक्शन को मान्यता प्रदान किये जाने/संबद्ध किये जाने की शर्तों की पूर्ति करने के लिये नियोजित गया हो तथा संस्था के वेतन पत्रक में जिसका नाम उस हैसियत में नियोजित हुये रूप में किसी पद के सम्मुख दर्शाया गया हो, किन्तु उसके अंतर्गत कोई ऐसा अध्यापक नहीं आता है, जिसकी कि नियुक्ति धारा 6 के खण्ड (ग) के अधीन अनुमोदित की गई हो; (ञ) "वेतन" से अभिप्रेत है, किसी अध्यापक या कर्मचारी को ऐसी दर से देय वेतन तथा अन्य भत्ते जो कि संस्था द्वारा अधिसूचित किये जाएं; (ट) उन शब्दों तथा अभिव्यक्तियों के, जो इस अधिनियम में प्रयोग में लाई गई है किन्तु परिभाषित नहीं की गई है और यथास्थिति मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 ( क्रमांक 44, सन् 1973), मध्यप्रदेश अशासकीय स्कूल विनियमन अधिनियम, 1975 ( क्रमांक 33, सन् 1975) या मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा अनुदान आयोग अधिनियम, 1973 ( क्रमांक 21, सन् 1973) में परिभाषित की गई है, जैसा कि संदर्भ अपेक्षित करें, वही अर्थ होंगे जो कि उन्हें संबंधित उक्त अधिनियमों में दिये गये हैं.
3. वेतन का समय के भीतर तथा अप्राधिकृत कटौती किये बिना संदाय
- (1) किसी तत्प्रतिकूल संविदा के होते हुए भी, नियत दिन से किसी संस्था के किसी अध्यापक या अन्य कर्मचारी का किसी मास या उसके भाग से संबंधित वेतन, उसे उस मास के या उसके भाग के ठीक आगामी दिन का या ऐसे पूर्वतर दिन का, जिसे कि राज्य सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, विनिर्दिष्ट करे, अवसान होने के पूर्व संदत्त किया जायेगा: परन्तु इस धारा की कोई भी बात धारा 6 के खण्ड (ग) में विनिर्दिष्ट किये गये किसी अध्यापक या किसी कर्मचारी को तब तक लागू नहीं होगी जब तक कि उस नियुक्ति को अनुमोदित करते हुए कोई आदेश उसके अधीन पारित न कर दिया जाये:
- (2) वेतन का संदाय इस अधिनियम या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन प्राधिकृत की गई कटौतियों को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार की कटौतियों किये बिना किया जायेगा।
4. निरीक्षण आदि करने की शक्ति
शिक्षा अधिकारी किसी भी समय, इस अधिनियम के प्रयोजन के लिये, किसी भी संस्था का निरीक्षण कर सकेगा या करवा सकेगा या उसके अध्यापकों या कर्मचारियों को वेतन के संदाय के बारे में, या ऐसे आनुषंगिक विषयों की बाबत, जिन्हें वह उचित समझे, ऐसी जानकारी, विवरणियां तथा ऐसे अभिलेख ( जिनके अंतर्गत रजिस्टर, लेखा पुस्तकें तथा वाउचर आते हैं), जिन्हें कि वह उचित समझे, प्रबंधक वर्ग से मंगा सकेगा या उसके प्रबंधक वर्ग को वित्तीय औचित्य के ऐसे अभिनियमों के, जिन्हें वह उचित समझे, अनुपालन विषयक कोई निर्देश दे सकेगा।
5. अध्यापकों आदि के वेतन के संदाय के लिये संस्थागत निधि का गठन तथा उसमें निक्षिप्त की जाने वाली रकमें
- (1) किसी राष्ट्रीय बैंक में एक पृथक खाता खोला जायेगा जिसका कि संस्था के लिये एक पृथक निधि ( जो इसमें इसके पश्चात संस्थागत निधि के नाम से निर्दिष्ट है) के रूप गठन इस निमित्त बनाए गए नियमों के अनुसार किया जाएगा.
- (2) अनुदान, राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर नियत किये गये अनुसार संस्था को ब्लाक ग्रांट के रूप में देय होगा. यह अनुदान संस्था द्वारा पूर्व के अनुदान के उपयोग प्रमाण-पत्र के साथ विस्तृत संपरीक्षित लेखा तथा वार्षिक लेखा विवरण दे देने के पश्चात संस्था को प्रदत्त किया जाएगा.
- (3) प्रबंधक वर्ग, प्रत्येक मास के अंतिम दिन तक फीस की वह कुल रकम, जो संस्था के विद्यार्थियों से वसूल की गई हो, संस्थागत निधि में जमा करेगा.
- (4) उपधारा
- (3) के अधीन निक्षिप्त की गई फीस के अतिरिक्त, प्रबंधक वर्ग संस्था के अध्यापकों तथा कर्मचारियों के पूर्ववर्ती मास के वेतन के संदाय हेतु इतनी और राशियां, जितनी की उस रकम के, जो उपधारा
- (2) के अधीन जमा की गई कुल रकम, तथा उपधारा
- (3) के अधीन जमा की गई रकम को मिला कर आती हो, एक-बारहवांश से उस रकम के, जो कि संस्था के अध्यापकों तथा कर्मचारियों को प्रतिवर्ष देय होने वाले कुल वेतन तथा उन अध्यापकों एवं कर्मचारियों के भविष्य निधि खातों में संस्था द्वारा प्रतिवर्ष किये जाने वाले अभिदाय को मिलाकर आती हो, एक-बारहवांश के समतुल्य बनाने के लिये अपेक्षित हो, प्रत्येक मास की 10 तारीख तक संस्थागत निधि में जमा करेगा.
- (5) संस्थागत निधि में जमा किया गया कोई भी धन निम्नलिखित प्रयोजनों को छोड़कर किन्हीं भी अन्य प्रयोजनों के लिये उपयोजित नहीं किया जाएगा अर्थात:– (क) नियत तारीख के पश्चात की किसी भी कालावधि के लिये शोध्य होने वाले वेतनों का संदाय; (ख) अध्यापकों तथा कर्मचारियों के भविष्य निधि खातों में संस्था द्वारा किये जाने वाला अभिदाय, यदि कोई हो, जमा करना.
6. पदों के सृजन तथा कर्मचारी वृन्द की नियुक्तियों एवं सेवाओं की समाप्ति का प्रतिषेध
तत्समय प्रवृत्त किसी विधि में या उसके अधीन बनाये गये किन्हीं नियमों, विनियमों, उपविधियों, परिनियमों में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी,– (क) नियत तारीख को तथा से,– (एक) किसी अध्यापक या अन्य कर्मचारी के किसी पद का सृजन तथा किसी अध्यापक या अन्य कर्मचारी की भर्ती इस संबंध में विहित की गई प्रक्रिया का अनुसरण किये बिना नहीं की जायगी / नहीं किया जायेगा; (दो) अध्यापक तथा कर्मचारी ऐसी अर्हत्ताओं तथा ऐसे अनुभव वाले होंगे जैसा कि विहित किया जाय; और (तीन) "किसी भी अध्यापक या अन्य कर्मचारी को ऐसे आदेश द्वारा ही पदच्युत किया जायेगा या सेवा से हटाया जायेगा या उसकी सेवाएं समाप्त की जायेगी जो ऐसी प्रक्रिया का, जो विहित की जाय, अनुसरण करने के पश्चात पारित किया गया हो, अन्यथा नहीं।" परन्तु कोई अध्यापक या अन्य कर्मचारी उसके पदच्युत किये जाने, उसके सेवा से हटाये जाने या उसकी सेवाएं समाप्त किये जाने के विरुद्ध अपील, उसे ऐसा आदेश प्राप्त होने की तारीख से तीस दिन के भीतर, किसी ऐसे अपील प्राधिकारी को कर सकेगा जिसे राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट करे और ऐसा प्राधिकारी को, जैसी कि वह उचित समझे, विहित रीति में करने के पश्चात उक्त आदेश को या तो अपास्त कर सकेगा या उसकी पुष्टि कर सकेगा या उसे उपान्तरित कर सकेगा तथा अपील के निपटारे के लंबित रहने तक, अपील प्राधिकारी उस आदेश के परिवर्तन को ऐसे आधारों पर, जैसे कि वह उचित समझे, रोक भी सकेगा; (चार) किसी भी अध्यापक या अन्य कर्मचारी को, सक्षम प्राधिकारी के पूर्व अनुमोदन के बिना, नब्बे दिन से अधिक दिन तक निलम्बित नहीं रखा जायेगा: परन्तु सक्षम प्राधिकारी अपना अनुमोदन ऐसी जांच करने के पश्चात ही तथा ऐसे समय के भीतर देगा जैसा कि विहित किया जाय; (ख) सक्षम प्राधिकारी, किसी संस्था के किसी ऐसे अध्यापक या कर्मचारी द्वारा, जिसे कि संस्था के प्रबंधक वर्ग ने 17 नवम्बर, 1977 को या उसके पश्चात किसी भी समय, पदच्युत कर दिया हो या सेवा से हटा दिया हो, या जिसकी सेवाएं संस्था के प्रबंधकवर्ग ने 17 नवम्बर, 1977 को या उसके पश्चात किसी भी समय समाप्त कर दी हो, आवेदन नियत तारीख से तीस दिन के भीतर किया जाने पर, संस्था के प्रबंधकवर्ग को तथा उन व्यक्तियों को, जिन पर ऐसी पदच्युति, हटाये जाने या सेवा समाप्त किये जाने का प्रभाव पड़ा हो, सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात तथा ऐसी जांच, जैसी कि वह उचित समझे, करने के पश्चात यथास्थिति उस पदच्युति, हटाये जाने या सेवा समाप्ति को शून्य घोषित कर सकेगा तथा संस्था के प्रबंधकवर्ग को यह निर्देश दे सकेगा कि वह ऐसे अध्यापक या कर्मचारी को सेवा में बहाल करे; (ग) सक्षम प्राधिकारी अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों की उन नियुक्तियों के, जो कि 17 नवम्बर, 1977 से प्रारंभ होने वाली तथा इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तारीख को समाप्त होने वाली कालावधि के दौरान की गई हो, समस्त प्रकरणों का पुनर्विलोकन करेगा और, यदि वह संस्था के प्रबंधकवर्ग तथा संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात, यह निष्कर्ष निकालता है कि वे नियुक्तियां इस अधिनियम की प्रत्याशा में की गई थी, तो वह ऐसी नियुक्तियों को लिखित आदेश द्वारा उसमें कथित किये जाने वाले कारणों से अनुमोदित कर सकेगा।
7. सद्भावपूर्वक किये गये कार्यों का संरक्षण
राज्य सरकार, शिक्षा अधिकारी, सक्षम प्राधिकारी या उसके द्वारा सम्यक रूप से प्राधिकृत किये गये किसी अन्य व्यक्ति के विरुद्ध किसी भी ऐसी बात के संबंध में जो कि इस अधिनियम या उसके अधीन बनाये गये किसी नियम या किये गये किसी आदेश या दिये गये किसी निदेश के अनुसरण में सद्भावपूर्वक की गई हो या जिसका उस तरह सद्भावपूर्वक किया जाना आशियत रहा हो, कोई वाद, अभियोजन या अन्य विधिक कार्यवाही नहीं होगी।
8. किसी संस्था को इस अधिनियम के उपबंध से छूट देने की शक्ति
इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकार, साधारण या विशेष आदेश द्वारा तथा ऐसी शर्तों, यदि कोई हो, के साथ जिन्हें कि अधिरोपित करना वह उचित समझे, किन्हीं संस्थाओं या संस्थाओं के किसी वर्ग को इस अधिनियम के समस्त उपबंधों या उनमें से किसी भी उपबंध से छूट दे सकेगी।
9. कतिपय राशियों का भू-राजस्व की बकाया के तौर पर वसूल किया जाना
कोई भी ऐसी राशि, जिसका कि धारा 5 की उपधारा ( 3) के अधीन किसी संस्था के प्रबंधकवर्ग द्वारा संस्थागत निधि में जमा किया जाना अपेक्षित है, उस दशा में जबकि वह उस कालावधि के, जो कि उन उपधाराओं में विनिर्दिष्ट है, भीतर उक्त निधि में जमा न की गई हो, ऐसी संस्था के प्रबंधकवर्ग से उसी रीति में वसूल की जायेगी जिस रीति में कि भू-राजस्व का बकाया वसूल किया जाता है।
10. नियम बनाने की शक्ति
- (1) राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रयोजनों को कार्यान्वित करने के लिये नियम बना सकेगी।
- (2) विशिष्टतया तथा पूर्वगामी शक्तियों की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियमों में निम्नलिखित समस्त विषयों के लिये या उनमें से किसी भी विषय के लिये उपबंध हो सकेंगे, अर्थात:– (क) धारा 5 की उपधारा ( 1) के अधीन संस्थागत निधि का गठन; (ख) विलोपित...... (ग) धारा 6 के खण्ड ( क) के उपखण्ड ( एक) के अधीन की वह प्रक्रिया जिसका अनुसरण अध्यापकों या अन्य कर्मचारियों को भर्ती करने में किया जायगा; (घ) अध्यापकों तथा कर्मचारियों की अर्हताएं तथा अनुभव जो धारा 6 के खण्ड ( क) के उपखण्ड ( दो) के अधीन अपेक्षित हैं; (ङ) ( एक) धारा 6 के खण्ड ( क) के उपखण्ड ( तीन) के अधीन कोई आदेश पारित करने के हेतु अनुसरित की जाने वाली प्रक्रिया; ( दो) धारा ( 6) के खण्ड ( क) के उपखण्ड ( तीन) के परन्तुक के अधीन जांच करने की रीति; ( तीन) वह व्यक्ति जिसके द्वारा और यह रीति जिसमें संस्थागत निधि द्वारा धारा 6 की उपधारा ( 7) के अधीन प्रचालित की जायेगी; (च) वह रीति जिसमें धारा 6 के खण्ड ( क) के उपखण्ड ( चार) के परन्तुक के अधीन जांच की जायगी तथा वह समय जिसके भीतर ऐसी जांच उक्त परन्तुक के अधीन की जायेगी.
- (3) इस धारा के अधीन बनाये गये समस्त नियम विधान सभा के पटल पर रखे जायेंगे।
11. कठिनाई दूर करने की शक्ति
यदि इस अधिनियम के उपबंधों को प्रभावशाली करने में कठिनाई उद्भूत हो, तो राज्य सरकार ऐसे आदेश द्वारा, जो कि इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत न हो, उस कठिनाई को दूर कर सकेगी: परन्तु कोई भी ऐसा आदेश इस अधिनियम के प्रारंभ होने से दो वर्ष की कालावधि का अवसान हो जाने के पश्चात नहीं दिया जावेगा.
12. मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1973 ( क्रमांक 44 सन् 1973) के उपान्तरण
मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 ( क्रमांक 44 सन् 1973) उन संस्थाओं को, जिनको कि यह अधिनियम लागू होता है, लागू होने के संबंध में ऐसे उपान्तरणों के अध्यधीन होगा जो कि इससे उपाबद्ध अनुसूची में विनिर्दिष्ट है.
I. अनुसूची
( धारा 12 देखिये) मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 के उपान्तरण. (1) सातवां अध्याय- जांच तथा अन्विषण में, धारा 32 के पूर्व, निम्नलिखित धारा अन्तःस्थापित की गई समझी जाय, अर्थात्:- "31- क. इस अध्याय में "रजिस्ट्रार" से अभिप्रेत होगा मध्यप्रदेश अशासकीय शिक्षण संस्था ( अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतनों का संदाय) अधिनियम, 1978 की धारा 2 के खंड ( ग) के अर्थ के अंतर्गत शिक्षा अधिकारी." (2) धारा 33 की उपधारा ( 1) के खण्ड ( क) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया गया समझा जायगा, अर्थात्:- "( क) उन कर्तव्यों का, जो कि इस अधिनियम के द्वारा या अधीन या सोसाइटी के विनियमों या उपविधियों के द्वारा या अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के द्वारा या अधीन या ऐसे किसी विधिपूर्ण आदेश द्वारा, जो कि राज्य सरकार या रजिस्ट्रार द्वारा पारित किया गया हो, उस पर अधिरोपित किये गये हैं, पालन करने में बार-बार व्यतिक्रम करता है, या उनका पालन करने में उपेक्षा करता है या ऐसे कर्तव्यों का पालन करने के लिये रजामन्द नहीं है; या." (3) धारा 37 की उपधारा ( 2) में निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा गया समझा जाय, अर्थात्:- "परन्तु कोई भी न्यायालय धारा 38 की उपधारा ( 1), जैसी कि वह मध्यप्रदेश अशासकीय शिक्षण संस्था ( अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतनों का संदाय) अधिनियम, 1978 की धारा 12 द्वारा प्रतिस्थापित की गई है, के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान ऐसे अधिकारी द्वारा, जिसे कि राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस संबंध में विनिर्दिष्ट करे, किये गये परिवाद पर ही करेगा अन्यथा नहीं।" (4) धारा 38 की उपधारा ( 1) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा स्थापित की गई समझी जायगी, अर्थात्:- ( 1) यदि अध्यक्ष, सचिव या ऐसा कोई अन्य व्यक्ति, जो सोसाइटी के शासी निकाय के संकल्प द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत किया गया हो,– ( क) धारा 27 के उपबंधों का अनुपालन न करें; या ( ख) मध्यप्रदेश अशासकीय शिक्षण संस्था ( अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतनों का संदाय) अधिनियम, 1978 की धारा 4 के अधीन दिये गये किसी निदेश का या धारा 3 या धारा 5 या धारा 6 के उपबंधों का पालन न करे, तो वह दोषसिद्धि पर,– ( एक) जुर्माने से, जो पाँच सौ रुपये तक का हो सकेगा, तथा चालू रहने वाले भंग की दशा में अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम भंग के पश्चात्, प्रत्येक ऐसे दिन के लिये जिसके कि दौरान भंग चालू रहे, पचास रुपये तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा; ( दो) विलोपित......
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अनुसूची
( धारा 12 देखिये) मध्यप्रदेश सोसाइटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1973 के उपान्तरण.
- (1) सातवां अध्याय- जांच तथा अन्विषण में, धारा 32 के पूर्व, निम्नलिखित धारा अन्तःस्थापित की गई समझी जाय, अर्थात्:- "31- क. इस अध्याय में "रजिस्ट्रार" से अभिप्रेत होगा मध्यप्रदेश अशासकीय शिक्षण संस्था ( अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतनों का संदाय) अधिनियम, 1978 की धारा 2 के खंड ( ग) के अर्थ के अंतर्गत शिक्षा अधिकारी."
- (2) धारा 33 की उपधारा ( 1) के खण्ड ( क) के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया गया समझा जायगा, अर्थात्:- "( क) उन कर्तव्यों का, जो कि इस अधिनियम के द्वारा या अधीन या सोसाइटी के विनियमों या उपविधियों के द्वारा या अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य अधिनियमिति के द्वारा या अधीन या ऐसे किसी विधिपूर्ण आदेश द्वारा, जो कि राज्य सरकार या रजिस्ट्रार द्वारा पारित किया गया हो, उस पर अधिरोपित किये गये हैं, पालन करने में बार-बार व्यतिक्रम करता है, या उनका पालन करने में उपेक्षा करता है या ऐसे कर्तव्यों का पालन करने के लिये रजामन्द नहीं है; या."
- (3) धारा 37 की उपधारा ( 2) में निम्नलिखित परन्तुक जोड़ा गया समझा जाय, अर्थात्:- "परन्तु कोई भी न्यायालय धारा 38 की उपधारा ( 1), जैसी कि वह मध्यप्रदेश अशासकीय शिक्षण संस्था ( अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतनों का संदाय) अधिनियम, 1978 की धारा 12 द्वारा प्रतिस्थापित की गई है, के अधीन दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान ऐसे अधिकारी द्वारा, जिसे कि राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, इस संबंध में विनिर्दिष्ट करे, किये गये परिवाद पर ही करेगा अन्यथा नहीं।"
- (4) धारा 38 की उपधारा ( 1) के स्थान पर निम्नलिखित उपधारा स्थापित की गई समझी जायगी, अर्थात्:- ( 1) यदि अध्यक्ष, सचिव या ऐसा कोई अन्य व्यक्ति, जो सोसाइटी के शासी निकाय के संकल्प द्वारा इस संबंध में प्राधिकृत किया गया हो,– ( क) धारा 27 के उपबंधों का अनुपालन न करें; या ( ख) मध्यप्रदेश अशासकीय शिक्षण संस्था ( अध्यापकों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतनों का संदाय) अधिनियम, 1978 की धारा 4 के अधीन दिये गये किसी निदेश का या धारा 3 या धारा 5 या धारा 6 के उपबंधों का पालन न करे, तो वह दोषसिद्धि पर,– ( एक) जुर्माने से, जो पाँच सौ रुपये तक का हो सकेगा, तथा चालू रहने वाले भंग की दशा में अतिरिक्त जुर्माने से, जो प्रथम भंग के पश्चात्, प्रत्येक ऐसे दिन के लिये जिसके कि दौरान भंग चालू रहे, पचास रुपये तक का हो सकेगा, दंडनीय होगा; ( दो) विलोपित......