section 4
कब्जे का वापस दिलाया जाना
The Madhya Pradesh Nagariya Kshetron Ke Bhoomihin Vyakti (Pattadhriti Adhikaron Ka Pradan Kiya Jana) Adhiniyam, 1984General19846 sections
Statutory text
- (1) यदि किसी ऐसे भूमिहीन व्यक्ति को, जिसको धारा 3 के अधीन किसी भूमि में पट्टाधृति अधिकार प्रोद्भूत होते हैं, उस भूमि या किसी भाग से, विधि के सम्यक् अनुक्रम में बेकब्जा न करके अन्यथा बेकब्जा कर दिया जाता है तो प्राधिकृत अधिकारी , बेकब्जा किये जाने की तारीख से छह मास के भीतर उक्त भूमिहीन व्यक्ति द्वारा उसके आवेदन किए जाने पर ऐसा कब्जा वापस दिलाएगा।
- (2) यदि [31 दिसम्बर , 2007] [31 मई, 1998] को प्रश्नगत भूमि के अधिभोग के बारे में कोई विवाद उत्पन्न होता है तो वह भूमिहीन व्यक्ति, जो दावा करता है कि उक्त तारीख को वह भूमि उसके अधिभोग में भी, वह विवाद विनिश्चय के लिए प्राधिकृत अधिकारी को विनिर्दिष्ट कर सकेगा। प्राधिकृत अधिकारी का उस पर विनिश्चय अंतिम होगा : परन्तु उपधारा
- (2) के अधीन कोई आदेश, विवाद के पक्षकारों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर दिए बिना पारित नहीं किया जाएगा। 4-क. परीक्षण कलेक्टर किसी भी समय स्वप्रेरणा से या किया हितबद्ध पक्षकार द्वारा किए गए आवेदन पर प्राधिकृत अधिकारी द्वारा पारित किए गए किसी आदेश की वैधता या औचित्य के संबंध में या उसके समक्ष लंबित किसी कार्यवाही की नियमितता के संबंध में अपना समाधान करने के प्रयोजन के लिए किसी भी ऐसे मामले का, जो ऐसे अधिकारी द्वारा निपटाया गया हो, या उसके समक्ष लंबित हो, अभिलेख मंगा सकेगा और उसकी परीक्षा कर सकेगा और उसके संबंध में ऐसा आदेश पारित कर सकेगा, जैसा कि वह ठीक समझे : परन्तु - (एक) कोई भी ऐसा आवेदन ग्रहण नहीं किया जाएगा, यदि वह आदेश की तारीख से तीस दिन के भीतर पेश न किया गया हो; (दो) कोई भी आवेदन पुनरीक्षण में फेरफार नहीं किया जाएगा या उलटा नहीं जाएगा, जब तक कि हितबद्ध पक्षकार पर सूचना की तामील न कर दी गई हो और उसे सुनवाई का अवसर न दे दिया गया हो।
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